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कमाई बढ़ाने के लिए नई राह पर निकली Zomato, अब ये काम भी करेगी कंपनी
Zomato को अंदाजा है कि आने वाला समय और मुश्किल हो सकता है. कंपनी को मुनाफे के मोर्चे पर काफी समझौता करना पड़ सकता है. इसलिए उसने नए बिजनेस में हाथ आजमाने का फैसला लिया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
जोमैटो (Zomato) और स्विगी (Swiggy) जैसी फूड डिलीवरी कंपनियां आर्थिक मोर्चे पर परेशानी का सामना कर रही हैं. इन कंपनियों का बिजनेस उम्मीद के अनुरूप प्रॉफिट नहीं ला रहा है. यही वजह है कि हाल ही में स्विगी ने हर ऑर्डर पर 2 रुपए प्लेटफॉर्म फीस (Platform Fee) लगाने का ऐलान किया है. हालांकि, 2 रुपए एक्स्ट्रा वसूलने की शुरुआत फिलहाल बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहरों से हुई है, लेकिन जल्द ही इसे पूरे देश में लागू कर दिया जाएगा. अब जोमैटो ने अपना मुनाफा बढ़ाने के लिए एक अलग रणनीति बनाई है.
ONDC भी है चुनौती
जोमैटो ने किसी तरह की एक्स्ट्रा फीस ग्राहकों पर थोपने का फैसला नहीं लिया है, बल्कि कंपनी अब बिजनेस टू बिजनेस (B2B) लॉजिस्टिक सर्विस में कदम रखने जा रही है. कंपनी की ये कवायद अपना रिवेन्यु बढ़ाने के लिए है. बता दें कि फूड डिलीवरी कंपनियों के लिए ओपन नेटवर्क फोर डिजिटल कामर्स या ओएनडीसी (ONDC) भी एक बड़े खतरे के तौर पर सामने आ रहा है. इस पर रेस्टोरेंट वाले सीधे अपना सामान बेच रहे हैं. उन्हें Swiggy और Zomato जैसे थर्ड पार्टी ऐप की जरूरत ही नहीं है. इस वजह से ग्राहकों को भी सस्ता खाना मिल रहा है.
इनके लिए करेगी डिलीवरी
Zomato को अंदाजा है कि आने वाला समय और मुश्किल हो सकता है. कंपनी को मुनाफे के मोर्चे पर काफी समझौता करना पड़ सकता है. इसलिए उसने नए बिजनेस में हाथ आजमाने का फैसला लिया है. जोमैटो ने अपने रिवेन्यु ग्रोथ के लिए B2B लॉजिस्टिक सर्विस शुरू करने की योजना बनाई है. इसमें फूड डिलीवरी, फार्मा प्रोडक्ट और कंज्यूमर गुड्स आदि शामिल हैं. मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि जोमैटो ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए डिलीवरी सेवा शुरू करने जा रही है. कंपनी ने इसके लिए छोटे फूड और ग्रॉसरी एग्रीगेटर, ऑनलाइन फार्मा और कंजूमर ब्रैंड से बातचीत शुरू कर दी है.
शुरू किया पायलट प्रोजेक्ट
एक रिपोर्ट में बताया गया है कि जोमैटो ने इसका पायलट प्रोजेक्ट भी शुरू कर दिया है और रोजाना 1000 से ज्यादा डिलीवरी की जा रही हैं. यदि प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो फिर कंपनी इसे देशभर में लागू कर सकती है. वैसे, जोमैटो की स्थिति स्विगी के मुकाबले कुछ बेहतर है. ब्रोकरेज फर्म जेफरीज की पिछले साल आई एक रिपोर्ट में बताया गया था कि स्विगी तेजी से अपने राइवल जोमैटो से पिछड़ रही है. वित्त वर्ष 2022 में स्विगी का घाटा दोगुना से अधिक बढ़कर 3,628.90 करोड़ रुपए रहा था. कंपनी को यह घाटा ग्रॉस रिवेन्यु को बढ़ाने की कोशिशों के कारण हुआ था.
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