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₹10,000 से कम मूल्य में जारी हो सकेंगे जीरो-कूपन बॉन्ड, सेबी ने नियमों में किया गया संशोधन

सेबी का यह फैसला छोटे निवेशकों के लिए बॉन्ड बाजार के दरवाजे खोलने वाला है. जीरो-कूपन बॉन्ड को कम मूल्य में जारी करने की अनुमति से अब सीमित पूंजी वाले निवेशक भी इस सुरक्षित निवेश विकल्प तक पहुंच बना सकेंगे.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 6 months ago

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने छोटे निवेशकों को बॉन्ड बाजार से जोड़ने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है. नियामक ने जीरो-कूपन बॉन्ड को कम डिनॉमिनेशन में जारी करने की अनुमति दे दी है. इस फैसले के बाद अब निवेशक कम राशि में भी ऐसे बॉन्ड में निवेश कर सकेंगे, जो पहले केवल बड़े निवेशकों तक सीमित थे.

निजी प्लेसमेंट के नियमों में राहत

सेबी के नए दिशा-निर्देशों के तहत जारीकर्ता अब निजी नियोजन (Private Placement) के जरिये जारी की जाने वाली अपरिवर्तनीय ऋण प्रतिभूतियों (NCDs) और अपरिवर्तनीय परिवर्तनीय नहीं होने वाले तरजीही शेयरों (NCRPS) की फेस वैल्यू घटा सकेंगे. इससे बाजार में अधिक लचीलापन आएगा और निवेश के नए विकल्प खुलेंगे.

पहले क्यों बाहर थे जीरो-कूपन बॉन्ड?

इससे पहले सेबी ने एक सर्कुलर में यह अनुमति दी थी कि ऐसी प्रतिभूतियों की फेस वैल्यू ₹10,000 तक घटाई जा सकती है, बशर्ते वे फिक्स्ड मैच्योरिटी वाले हों और उन पर समय-समय पर ब्याज या लाभांश दिया जाता हो. हालांकि, इसी शर्त के कारण जीरो-कूपन बॉन्ड इस दायरे से बाहर रह गए थे, क्योंकि इनमें कोई नियमित ब्याज भुगतान नहीं होता.

बाजार की प्रतिक्रिया पर सेबी का रुख

बाजार प्रतिभागियों की प्रतिक्रिया के बाद सेबी ने अपने रुख पर पुनर्विचार किया. नियामक ने माना कि जीरो-कूपन बॉन्ड आमतौर पर डिस्काउंट पर जारी किए जाते हैं और मैच्योरिटी पर फेस वैल्यू पर रिडीम होते हैं. इनका रिटर्न समय-समय के कूपन के बजाय कीमत में बढ़ोतरी के जरिए मिलता है.

निवेशकों के लिए क्यों अहम हैं जीरो-कूपन बॉन्ड?

सेबी के अनुसार, जीरो-कूपन बॉन्ड चक्रवृद्धि रिटर्न प्रदान करते हैं और पोर्टफोलियो में विविधता लाने के लिए तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं. लंबी अवधि के निवेशक, खासकर वे जो तय समय पर सुनिश्चित रिटर्न चाहते हैं, इन बॉन्ड्स को पसंद कर रहे हैं.

विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार में गहराई बढ़ेगी और छोटे निवेशकों की भागीदारी मजबूत होगी. साथ ही, कंपनियों को भी पूंजी जुटाने के लिए एक अतिरिक्त और किफायती विकल्प मिलेगा.

 


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