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कमजोर विज्ञापन और बढ़ी कंटेंट लागत से Zee Entertainment को झटका, Q3 मुनाफा 5.5% घटा

कुल मिलाकर Zee Entertainment के नतीजे बताते हैं कि फिलहाल मीडिया इंडस्ट्री दोहरी मार झेल रही है. एक तरफ कमजोर विज्ञापन बाजार और दूसरी तरफ बढ़ती कंटेंट लागत.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 8 months ago

Zee Entertainment Enterprises को वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में मुनाफे के मोर्चे पर झटका लगा है. कंपनी का शुद्ध लाभ साल-दर-साल आधार पर 5.5% घटकर 155 करोड़ रुपये रह गया है. जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह 164 करोड़ रुपये था. कमजोर विज्ञापन मांग और बढ़ती प्रोग्रामिंग लागत ने कंपनी के मार्जिन पर दबाव बनाया है.

विज्ञापन आय में 9% की गिरावट

कंपनी ने बताया है कि उसकी कुल आय का करीब 40% हिस्सा विज्ञापन से आता है. दिसंबर तिमाही में विज्ञापन राजस्व 9% घटकर 851 करोड़ रुपये रह गया है. जो एक साल पहले की तुलना में कम है. बड़ी एफएमसीजी और उपभोक्ता कंपनियों द्वारा मार्केटिंग खर्च में सतर्कता बरते जाने से ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर पर लगातार दबाव बना हुआ है.

कंटेंट और डिस्ट्रीब्यूशन लागत बढ़ी

Zee समेत अन्य मीडिया कंपनियों को प्रीमियम फिल्म राइट्स. कंटेंट निर्माण और डिस्ट्रीब्यूशन लागत में लगातार बढ़ोतरी का सामना करना पड़ रहा है. इन बढ़े हुए खर्चों ने ऑपरेटिंग प्रॉफिटेबिलिटी को और कमजोर किया है.

सब्सक्रिप्शन आय से मिली आंशिक राहत

विज्ञापन आय में गिरावट के बीच सब्सक्रिप्शन से होने वाली कमाई ने कंपनी को कुछ राहत दी है. तिमाही के दौरान सब्सक्रिप्शन राजस्व 7% बढ़कर 1,050 करोड़ रुपये हो गया है. यह दर्शाता है कि चुनौतीपूर्ण माहौल के बावजूद पेड व्यूअरशिप में स्थिर वृद्धि बनी हुई है.

वैकल्पिक राजस्व स्रोतों पर फोकस

विज्ञापन बिक्री कमजोर रहने के कारण ब्रॉडकास्टर्स अब सब्सक्रिप्शन और फिल्म से जुड़े कारोबार पर अधिक निर्भर हो रहे हैं. Zee भी अपने राजस्व संतुलन को डिजिटल प्लेटफॉर्म और सब्सक्रिप्शन मॉडल की ओर शिफ्ट करने की रणनीति पर काम कर रही है.

शेयर बाजार में Zee का प्रदर्शन

खराब नतीजों के बावजूद शेयर बाजार में Zee Entertainment का शेयर गुरुवार को 4.33% की तेजी के साथ 85.10 रुपये पर बंद हुआ. Zee के तिमाही नतीजे इस बात को रेखांकित करते हैं कि भारतीय टीवी और मीडिया कंपनियां एक ओर लंबे समय से जारी विज्ञापन सुस्ती से जूझ रही हैं. वहीं दूसरी ओर ऊंची कंटेंट लागत उनके लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है. ऐसे में कंपनियां अपने बिजनेस मॉडल को नए सिरे से संतुलित करने की कोशिश कर रही हैं.


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