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World Earth Day: Vedanta ने FY23 से अब तक 2.8 करोड़ टन कार्बन उत्सर्जन किया कम

Vedanta ने 2.61 अरब यूनिट (BU) नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग किया है, जिसमें वेस्ट हीट रिकवरी (WHR) भी शामिल है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

विश्व पृथ्वी दिवस (World Earth Day) पर वेदांता लिमिटेड (Vedanta Limited) ने बताया कि उन्होंने वित्त वर्ष 2023 से अब तक 2.8 करोड़ टन कार्बन उत्सर्जन को कम किया है. यह उतना ही है जितना एक साल में 1 अरब पेड़ कार्बन डाइऑक्साइड को सोख लेते हैं. वेदांता ने 2.61 अरब यूनिट (BU) नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग किया है, जिसमें वेस्ट हीट रिकवरी (WHR) भी शामिल है.

कंपनी के पास भारत का सबसे बड़ा एनर्जी ट्रांजिशन मेटल्स (जैसे एल्युमिनियम, जिंक, चांदी, तांबा) का पोर्टफोलियो है. ये धातुएं स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रिक गाड़ियाँ, और ऊर्जा भंडारण (एनर्जी स्टोरेज) के लिए बहुत जरूरी हैं. इसलिए वेदांता, भारत की हरी (ग्रीन) विकास यात्रा में एक अहम भूमिका निभा रही है.

दुनिया में अब विंड, सोलर, और जियोथर्मल ऊर्जा को तेज़ी से अपनाया जा रहा है, ताकि धरती का तापमान 2°C से नीचे रखा जा सके. इसके लिए 3 अरब टन से भी ज्यादा धातुओं की ज़रूरत होगी. जैसे: एल्युमिनियम, जिंक, चांदी, तांबा, निकल, कोबाल्ट, स्टील, आयरन आदि. (यह जानकारी वर्ल्ड बैंक ग्रुप की रिपोर्ट “Minerals for Climate Action” से ली गई है.)

सोलर एनर्जी हो या विंड एनर्जी या फिर एनर्जी स्टोरेज – हर ग्रीन टैक्नोलॉजी में तांबा (कॉपपर), एल्युमिनियम, जिंक, चांदी और दूसरी धातुओं की ज़रूरत होती है. वेदांता इन जरूरी धातुओं और खनिजों का उत्पादन करके इस बदलाव को आगे बढ़ा रही है. वेदांता का आधार दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, यानी भारत में है, जो अब 'आत्मनिर्भर भारत' की राह पर आगे बढ़ रहा है और कम कार्बन विकास पर ध्यान दे रहा है. आने वाला दशक भारत के लिए बहुत बड़ा बदलाव लाएगा. भारत, हरित उत्पादों (ग्रीन प्रोडक्ट्स) और सेवाओं का एक बड़ा बाज़ार बनेगा और रिन्यूएबल बैटरियों और ग्रीन हाइड्रोजन में दुनिया का नेता भी बन सकता है. वेदांता के पास लो-कार्बन ग्रीन प्रोडक्ट्स का एक बढ़ता हुआ पोर्टफोलियो है, जिसमें एल्युमिनियम (Restora और Restora Ultra), जिंक (EcoZen), और डिस्प्ले ग्लास (Super Green SaiSei) शामिल हैं, जिनका कार्बन फुटप्रिंट दुनिया में सबसे कम है.

वेदांता लिमिटेड की नॉन-एग्जिक्युटिव डायरेक्टर और हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड की चेयरपर्सन प्रिया अग्रवाल हेब्बार ने कहा कि "वर्ल्ड अर्थ डे हमें याद दिलाता है कि हम धरती पर क्या असर डाल रहे हैं. वेदांता में हम ‘सस्टेनेबिलिटी’ (टिकाऊ विकास) को सिर्फ एक चेकबॉक्स नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी मानते हैं. चाहे वो दुनिया की सबसे ग्रीन धातुएं बनाना हो, रिन्यूएबल एनर्जी को बढ़ाना हो, या अपने लोगों को Vedanta Academy for Sustainability के ज़रिए ‘क्लाइमेट चैंपियन’ बनाना हो — हर कदम हमारे धरती के लिए दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दिखाता है. मुझे गर्व है कि ये सभी कदम वेदांता 2.0 की उस बड़ी यात्रा का हिस्सा हैं, जो हमें एक हरित और मजबूत भविष्य की ओर ले जा रही है.”

वेदांता में सस्टेनेबिलिटी (टिकाऊपन) को उनके कामकाज का अहम हिस्सा माना जाता है. वित्त वर्ष 2024 (FY24) में कंपनी ने एमिशन मेटल इंटेंसिटी (धातुओं के उत्पादन में होने वाले प्रदूषण) में 6.84% की कमी दर्ज की है. यह उनके चार मुख्य नेट-ज़ीरो लक्ष्यों पर लगातार काम करने का नतीजा है:

• नवीकरणीय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी) का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करना.
• अपने कामकाज को ऊर्जा की सबसे ज्यादा बचत करने वाले तरीकों से चलाना.
• कार्बन-लाइट और गैर-कोयले/पेट्रोलियम आधारित विकल्पों को अपनाकर पूरी सप्लाई चेन को बेहतर बनाना.
• प्राकृतिक उपायों से कार्बन को वातावरण से हटाना, जैसे पेड़ लगाना या मिट्टी में कार्बन जमा करना.

इन सभी कदमों से वेदांता एक हरित और टिकाऊ भविष्य की ओर बढ़ रही है.

वेदांता की सस्टेनेबिलिटी से जुड़ी मुख्य उपलब्धियां:

• FY20 से अब तक वेदांता की नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) का उपयोग 14 गुना बढ़ा है.
• 2030 तक 2.5 गीगावॉट (GW) नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य. इसमें से 1.03 GW के लिए पहले ही बिजली आपूर्ति समझौते (PDA) हो चुके हैं.
• उत्तराखंड की चांदी रिफाइनरी पूरी तरह से 100% नवीकरणीय ऊर्जा पर चल रही है.
• देश के सबसे बड़े लिथियम-आयन फोर्कलिफ्ट बेड़े में से एक वेदांता के पास है.
• भारत में पहली बार अंडरग्राउंड माइनिंग में बैटरी से चलने वाले वाहन शुरू किए.
• 2021 से अब तक वेदांता ने 28 लाख से ज़्यादा पेड़ लगाए हैं (विश्व आर्थिक मंच के 1 ट्रिलियन पेड़ अभियान के तहत).
• वेदांता की 5 कंपनियां जल-सकारात्मक (Water-Positive) हैं (हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड, केयर्न ऑयल एंड गैस, FACOR माइंस, ब्लैक माउंटेन माइंस - दक्षिण अफ्रीका).
• 84.7 अरब लीटर गंदे पानी को रिसाइकल कर दोबारा इस्तेमाल किया गया. 
• भारत की पहली तेल और गैस कंपनी जो संयुक्त राष्ट्र के मिथेन उत्सर्जन नियंत्रण कार्यक्रम (OGMP 2.0) में शामिल हुई.
• वेदांता की सहायक कंपनी हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड को लगातार दूसरी बार दुनिया की सबसे टिकाऊ मेटल और माइनिंग कंपनी माना गया (S&P ग्लोबल 2024).
• FY25 में संचालन में 44,000 टन बायोमास का इस्तेमाल किया गया.

इन सभी कार्यों को नई और उन्नत तकनीकों के सहारे अंजाम दिया गया है, जो ऊर्जा बचाने, कार्बन उत्सर्जन घटाने, पानी बचाने, कचरा रिसाइकल करने और प्रकृति की रक्षा पर केंद्रित हैं.

अब वेदांता एक कदम और आगे बढ़कर सस्टेनेबिलिटी को अपने कामकाज का अहम हिस्सा बना रही है. इसके लिए कंपनी ने "वेदांता एकेडमी फॉर सस्टेनेबिलिटी (VEDAS)" की शुरुआत की है. इस एकेडमी के ज़रिए 1 लाख से ज्यादा कर्मचारी अपनी स्किल्स और जानकारी बढ़ा रहे हैं — ऑनलाइन कोर्स, वर्कशॉप, और लीडरशिप से जुड़ी गतिविधियों के माध्यम से. लोगों को व्यक्तिगत रूप से पर्यावरण के लिए कदम उठाने के लिए प्रेरित करने के लिए, वेदांता ने एक ईवी पॉलिसी भी शुरू की है, जिसमें कर्मचारियों को इलेक्ट्रिक वाहन (EV) खरीदने के लिए प्रोत्साहन (इंसेंटिव) दिया जाता है.
 


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