होम / बिजनेस / हमारे शेयर बाजार को किसकी लगी नज़र, क्या और बड़ी हो सकती है गिरावट?
हमारे शेयर बाजार को किसकी लगी नज़र, क्या और बड़ी हो सकती है गिरावट?
शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली है. कारोबार की शुरुआत से ही सेंसेक्स और निफ्टी दोनों पूरी तरह लाल हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
शेयर बाजार (Stock Market) के लिए इस सप्ताह की शुरुआत काफी खराब रही है. सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान पर कारोबार कर रहे हैं. सेंसेक्स जहां 2400 अंकों की भारी गिरावट के साथ खुला. वहीं, निफ्टी में भी 500 अंकों से अधिक की नरमी देखी गई. इससे पहले शुक्रवार को भी मार्केट में गिरावट आई थी. लिहाजा, यह सवाल लाजमी हो जाता है कि आखिर हमारे शेयर बाजार को किसकी नजर लगी है और क्या यह हाल आगे भी जारी रह सकता है?
इस वजह से डर का माहौल
इस समय ईरान-इजरायल को लेकर पूरी दुनिया में डर का माहौल है. डर इस बात का है कि यदि दोनों के बीच युद्ध छिड़ा तो फिर ये केवल दो देशों तक ही सीमित नहीं रहेगा. अमेरिका सहित कई देश इसका हिस्सा बनेंगे , जिससे पूरी दुनिया प्रभावित होगी . इसी आशंका और डर से ग्लोबल मार्केट में कमजोरी छाई हुई है, जिससे भारतीय बाजार भी प्रभावित हुआ है. इसके साथ ही अमेरिका में मंदी की आशंका से भी दुनियाभर के शेयर बाजार हिले हुए हैं.
यूएस में मंदी की आशंका
दुनिया की सबसे मजबूत मानी जाने वाली अमेरिकी अर्थव्यवस्था बुरे दौर से गुजर रही है. शुक्रवार को बाजार बंद होने के बाद अमेरिका में महत्वपूर्ण आंकड़े जारी किए गए, जिसके बाद से देश में फिर मंदी की आशंका पैदा हो गई है. आंकड़े बताते हैं कि रोजगार के अवसर तेजी से घट रहे हैं और बेरोजगारी दर बढ़कर 4.3 फीसदी हो गई है. अमेरिका में जुलाई में जॉब ग्रोथ में गिरावट दर्ज हुई है, जबकि बेरोजगारी तीन साल के उच्च शिखर पर पहुंच गई है. पिछले हफ्ते भी अमेरिकी बाजारों में बड़ी गिरावट देखने को मिली थी.
अभी लग सकते हैं गोते
जानकारों का मानना है कि मंदी की आशंका और मिडिल ईस्ट के माहौल के चलते अमेरिकी बाजार अभी और गोते लगा सकता है. ऐसे में भारत सहित दुनिया के दूसरे बाजारों पर भी इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है. उनका यह भी कहना है कि अगर मिडिल ईस्ट में हालात जल्द सामान्य नहीं होते हैं, तो फिर दुनियाभर के बाजारों में आई गिरावट और भी बड़ी हो सकती है. अमेरिका ने मध्य पूर्व और भूमध्य सागर में बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम से लैस क्रूजर, डिस्ट्रॉयर और फाइटर स्क्वाड्रन भेजकर अपने इरादे स्पष्ट कर दिए हैं. यदि ईरान ने इजरायल पर हमला बोला, तो अमेरिका ईरान पर जवाबी कार्रवाई कर सकता है. इसका मतलब है कि हालात का और बिगड़ जाना.
इस तरह बंट जाएगी दुनिया
ईरान और इजरायल में युद्ध का मतलब होगा दुनिया का दो हिस्सों में बंट जाना. इराक, सीरिया, लेबनान, तुर्किए, कतर, जॉर्डन आदि मुस्लिम देश ईरान का साथ दे सकते हैं. जबकि अमेरिका-ब्रिटेन और उनके सहयोगी देश इजरायल के पक्ष में खड़े हैं. इस युद्ध में रूस की भी एंट्री हो सकती है. रूस पहले से ही ईरान का सैन्य सहयोगी रहा है. यूक्रेन युद्ध के चलते अमेरिका सहित अन्य यूरोपीय एवं पश्चिमी देशों से रूस की ठनी हुई है. इसलिए उसके ईरान के पाले में जाने की संभावना काफी ज्यादा है. यह भी संभव है कि रूस अपने मित्र देश चीन और उत्तर कोरिया को भी ईरान के पक्ष में लामबंद कर ले. वैसे, पाकिस्तान और सऊदी अरब ईरान को पसंद नहीं करते, लेकिन इनके बारे में कुछ साफ-साफ नहीं कहा जा सकता. भारत हमेशा की तरह इस मामले में तटस्थ भूमिका निभा सकता है.
और बुरे हो जाएंगे हालात
रूस-यूक्रेन युद्ध क समय भी दुनियाभर के बाजार प्रभावित हुए थे. ईरान-इजरायल संकट उससे भी बड़ा है. इन देशों के बीच युद्ध का मतलब होगा एक और विश्व युद्ध. ऐसे में लंबे समय तक बाजारों में मंदी छाई रह सकती है. गौरतलब है कि हमास सुप्रीमो इस्माइल हानिया की हत्या का बदला लेने के लिए ईरान इजरायल पर बड़ा हमला करने की तैयारी कर रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें, तो ईरान ने लेबनान के चरमपंथी संगठन हिज्बुल्ला और हूती विद्रोहियों के साथ मिलकर इजरायल पर मिसाइल, रॉकेट और विस्फोटक ड्रोन से हमला बोलने की योजना बनाई है.
टैग्स