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भारत के 5 ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी के लक्ष्य के लिए क्यों जरूरी हैं इन्वेस्टर्स समिट?
वास्तव में, पिछले कुछ सालों में उत्तर प्रदेश में व्यापक तौर पर बदलाव हुए हैं. अब वो अपनी बीमारू प्रदेश वाली छवि को पीछे छोड़ चुका है.
तरन्नुम मंजुल 3 years ago
लखनऊ में 10 फरवरी को ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के अपने संबोधन में, देश के प्रधानमंत्री और वाराणसी के सांसद नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश को बेहद अलग अंदाज में पेश किया. भदोही के कालीन से लेकर बनारसी सिल्क की बात करते हुए पीएम ने कहा कि राज्य में एमएसएमई का बहुत मजबूत नेटवर्क है, जहां उद्योग परंपरा और आधुनिकता से जुड़े हुए हैं. उन्होंने समकालीन भारत की सफलता की कहानी का हवाला दिया. उन्होंने कहा, 'आज, भारत में 60 प्रतिशत से अधिक मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग अकेले उत्तर प्रदेश में होती है. इतना ही नहीं, मोबाइल कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग में भी यूपी सबसे आगे है'.
मिला लक्ष्य से ज्यादा निवेश
वास्तव में, पिछले कुछ सालों में उत्तर प्रदेश में व्यापक तौर पर बदलाव हुए हैं. अब वो अपनी बीमारू प्रदेश वाली छवि को पीछे छोड़ चुका है. हाल ही में हुई यूपी ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट में प्रदेश ने 35 लाख करोड़ रुपए के निवेश को आकर्षित किया, जो 10 लाख करोड़ के शुरुआती लक्ष्य से कहीं अधिक है. यह दर्शाता है कि यूपी किस तरह निवेशकों की पसंद के तौर पर सामने आया है. इन्वेस्टर्स समिट में मुकेश अंबानी, आदित्य बिड़ला से लेकर एन चंद्रशेखरन तक, उद्योग जगत की प्रमुख हस्तियों ने राज्य की विशाल क्षमता को शानदार शब्दों में बयां किया. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ओडीओपी के नाम से मशहूर 'वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट' जैसी सफलता की कहानियां साझा कीं.
इस बार ये रहा नया
विभिन्न राज्यों द्वारा आयोजित इन्वेस्टर्स समिट निश्चित रूप से नई नहीं हैं, उत्तर प्रदेश के संदर्भ में भी नहीं. पिछली समाजवादी पार्टी सरकार ने तीन इन्वेस्टर्स समिट आयोजित की थीं - आगरा, दिल्ली और मुंबई में. यूपी में आखिरी इन्वेस्टर्स समिट 2018 में हुई थी. हालांकि, इस बार जो नया था, वो था यूपी के इस आयोजन में अभूतपूर्व दिलचस्पी और बैठक से पहले राज्य सरकार द्वारा किया गया जमीनी काम. उदाहरण के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आयोजन से पहले मुंबई में दिग्गज भारतीय उद्योगपतियों जैसे कि आनंद महिंद्रा, मुकेश अंबानी आदि से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की. राज्य सरकार ने विभिन्न भारतीय शहरों और विदेशों में भी समिट की तैयारी से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए. सिंगापुर, डेनमार्क, यूके इटली, यूएई, ऑस्ट्रेलिया, जापान ने समिट में यूपी सरकार के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए. इस समिट में 40 देशों के 1000 से अधिक विदेशी प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और 15 अन्य केंद्रीय मंत्रियों ने इस समिट को संबोधित किया.
यूपी ने सेट की टोन
यूपी इन्वेस्टर्स मीट की सफलता ने अन्य प्रदेशों में होने वाली समिट के लिए एक टोन सेट कर दी है. पंजाब इन्वेस्टर्स मीट इस महीने के अंत में निर्धारित है, जबकि आंध्र इन्वेस्टर्स मीट और तेलंगाना इन्वेस्टर्स मीट मार्च में होगी. हाल ही में हुईं इन्वेस्टर्स समिट की बात करें, तो कर्नाटक को नवंबर, 2022 में लगभग 10 लाख करोड़ रुपए का निवेश मिला, जबकि राजस्थान को अक्टूबर, 2022 में लगभग 10.44 लाख करोड़ और पश्चिम बंगाल को अप्रैल, 2022 में 3.42 लाख करोड़ रुपए का निवेश मिला था.
राज्यों की बड़ी भूमिका
भारत तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है और इसकी तेजी बरकरार रखने के लिए राज्यों को भी राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में योगदान देकर बड़ी भूमिका निभानी है. जानकार "चैंपियन राज्यों" की आवश्यकता पर जोर देते हैं, जो अपनी आर्थिक क्षमता से देश की अर्थव्यवस्था में प्रमुख रूप से भागीदारी निभा सकें. ध्यान देने वाली बात ये है कि आज विभिन्न राज्य तेजी से अपने लिए $1 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था जैसे महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित कर रहे हैं. उदाहरण के लिए, यूपी के कई अधिकारियों का मानना है कि उत्तर प्रदेश के प्रति निवेशकों का आकर्षण उन्हें $1 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेगा.
संपूर्ण देश को फायदा
भारत 2047 तक एक विकसित अर्थव्यवस्था और अगले कुछ वर्षों में 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की आकांक्षा रखता है. राजनीति से इतर केवल व्यवसाय और अर्थव्यवस्था पर केंद्रित होकर देखें तो जब राज्य ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में सुधार लाने और बेहतर इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन बनने के लिए एक-दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा करते हैं, तो जीवन और आजीविका दोनों बेहतर हो जाते हैं और इसका फायदा संपूर्ण देश को मिलता है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2021-22 के लिए, कर्नाटक, महाराष्ट्र और दिल्ली FDI हासिल करने वालों में टॉप पर रहे. CMIE के हालिया आंकड़ों के अनुसार, गुजरात और राजस्थान भारत के टॉप इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन हैं. अपनी सफल इन्वेस्टर्स मीट के बाद, यूपी निश्चित रूप से इस रैंकिंग में बेहतर पोजीशन हासिल करना चाहेगा.
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