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Repo Rate को अपरिवर्तित क्यों रखना चाहते हैं रियल एस्टेट डेवलपर्स, जानिए इसकी वजह?

आज यानी 4 दिसंबर से लेकर 6 दिसंबर 2024 तक RBI की Monetary Policy meeting की बैठक होगी. बैठक में Repo Rate पर कोई बड़ा फैसला लिया जा सकता है.

रितु राणा 1 year ago

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) बुधवार यानी 4 दिसंबर 2024 को अपनी मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy meeting-MPC) बैठक कर रहा है. यह बैठक 6 दिसंबर 2024 तक जारी रहेगी. ऐसे में यह अनुमान है कि कमिटी रेपो रेट (Repo Rate) को 6.5 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखेगी. यह लगातार 11वीं मौद्रिक नीति समिति होगी, जहां रेपो रेट अपरिवर्तित रहेगा. उम्मीेद की जा रही है कि इस बार की बैठक में रेपो रेट को लेकर कोई बड़ा फैसला आ सकता है. रेपो रेट कम या ज्यादा होने का असर आम आदमी की जेब पर भी पड़ता है, क्योंकि रेपो रेट घटने पर लोन सस्ते़ हो जाते हैं और रेपो रेट बढ़ने पर लोन महंगे हो जाते हैं. उधर, रियल एस्टेट (Real Estate) डेवलपर्स भी रेपो रेट को अपरिवर्तित रखना पसंद करते हैं, क्योंकि इससे सेक्टर को कई लाभ मिलते हैं. तो आइए जानते हैं आखिर ऐसे क्या कारण हैं, जिनकी वजह से रियल एस्टेट डेवलपर्स रेपो रेट को अपरिवर्तित रखना चाहते हैं?

रियल एस्टेट डेवलपर्स इन कारणों से अपरिवर्तित रखना चाहते हैं रेपो रेट

रियल एस्टेट डेवलपर्स के अनुसार अपरिवर्तित दरें घर खरीदारों के बी'च आवास की मांग को बनाए रखने में मदद करेंगी, क्योंकि ऋण ब्याज दरें (Loan Interest Rate) स्थिर रहेंगी. कम उधार लागत खरीदारों को प्रॉपर्टी में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करती है, विशेष रूप से मध्यम आय वाले आवास में जो कि मूल्य प्रभावी हैं. डेवलपर्स के लिए, अपरिवर्तित रेपो रेट निरंतर मांग, तेजी से प्रॉपर्टी की बिक्री और कम इन्वेंट्री बिल्ड-अप को दर्शाती है, जो नकदी प्रवाह को बनाए रखने और समय पर परियोजनाओं को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण साबित होती है. हालांकि ब्याज दरों में कटौती से डेवलपर के लिए उधार लेने की लागत कम हो सकती है, लेकिन स्थिर रेपो दरें सुनिश्चितता प्रदान करती हैं, खरीदार का विश्वास बढ़ाती हैं और समग्र रियल एस्टेट क्षेत्र को डेवलपर्स, घर खरीदारों और निवेशकों के लिए अनुकूल बनाती हैं.

खरीदारों और डेवलपर्स दोनों के बीच विश्वास बढ़ोगा

गौड़ ग्रुप के सीएमडी और क्रेडाई एनसीआर के प्रेसीडेंट मनोज गौड़ का कहना है कि आरबीआई अगर रेपो दर पर यथास्थिति बनाए रखता है, तो ये रियल एस्टेट सेक्टर के लिए उत्साहवर्धक होगा. यह बाजार के लिए स्थिरता का संकेत देगा और खरीदारों और डेवलपर्स दोनों के बीच विश्वास को बढ़ाएगा. आरबीआई आने वाले समय में दरों में कमी का संकेत दे रहा है, जिससे होम बायर्स को राहत मिल सकती है. हालांकि, किफायती आवास क्षेत्र अभी भी चिंता का विषय है और हमें उम्मीद है कि आरबीआई इस क्षेत्र में अधिक ध्यान देगा.

अधिक लोग अपने सपनों का घर खरीदने के लिए होंगे प्रोत्साहित

नियोलिव के फाउंडर एंड सीईओ मोहित मल्होत्रा ने कहा है कि आरबीआई द्वारा रेपो दर को बनाए रखने का निर्णय आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने और मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए एक रणनीतिक दृष्टिकोण होगा. हालांकि, फरवरी में दर में कटौती की बढ़ती संभावना विकास क्षेत्र के लिए आशाजनक है. कम ब्याज दरें मिड सेगमेंट परियोजनाओं के लिए वित्तपोषण को अधिक किफायती बना देंगी, जिससे अधिक लोग अपने सपनों का घर खरीदने के लिए प्रोत्साहित होंगे और विकास को बढ़ावा मिलेगा. डेवलपर्स के लिए, यह परियोजना समयसीमा में तेजी लाने, पोर्टफोलियो का विस्तार करने और निवेशकों और मध्य खंड के ग्राहकों दोनों के लिए अधिक मूल्य बनाने का एक रोमांचक अवसर प्रस्तुत करता है, जिससे रियल एस्टेट उद्योग को नई गति के साथ आगे बढ़ाया जा सके. 

दरों में स्थिरता लग्जरी हाउसिंग सेगमेंट के लिए फायदेमंद 

बीपीटीपी के सीएफओ मनिक मलिक ने कहा है कि हमें उम्मीद है कि आरबीआई एक बार फिर मौजूदा रेपो दरों को बनाए रखेगा. इस सुसंगत दृष्टिकोण से डेवलपर्स और घर खरीदारों दोनों के बीच विश्वास बढ़ने की उम्मीद होगी, जो रियल एस्टेट उद्योग के लिए एक सकारात्मक कदम होगा. दरों में स्थिरता विशेष रूप से लग्जरी हाउसिंग सेगमेंट के लिए फायदेमंद है, जो घर खरीदारों को अपनी निवेश योजनाओं के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करती है. एक स्थिर वित्तीय वातावरण डेवलपर्स को अत्याधुनिक तकनीक और आधुनिक सुविधाओं वाली उच्च-गुणवत्ता वाली परियोजनाएं देने पर ध्यान केंद्रित करने में सक्षम बनाता है, जिससे बाजार की अपील और बढ़ जाती है. इसके अतिरिक्त, स्थिर ब्याज दरें अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) से बढ़े हुए निवेश को आकर्षित करने की संभावना है, जो इस क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है. यह पूर्वानुमान घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों दोनों के बीच विश्वास और आत्मविश्वास को बढ़ाता है, जिससे रियल एस्टेट बाजार में निरंतर दीर्घकालिक विकास का मार्ग प्रशस्त होता है. 

रेपो दर में कटौती से आर्थिक विकास को मिलेगा बढ़ावा

एलिटप्रो इंफ्रा के डायरेक्टर रजत मेहता कहते हैं कि रेपो दर में कटौती से आर्थिक विकास को बढ़ावा मिल सकता है, मौजूदा दर को बनाए रखना ऋण ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव को रोककर हाउसिंग की मांग में स्थिरता सुनिश्चित करता है. यह दृष्टिकोण संभावित खरीदारों को अतिरिक्त वित्तीय बोझ के जोखिम को कम करके लाभान्वित करता है, जिससे रियल एस्टेट क्षेत्र एक अधिक सुरक्षित निवेश विकल्प बन जाता है. अपरिवर्तित रेपो दर उधार लेने की लागत को स्थिर रखने में मदद करती है, जिससे रेजीडेंशियल और  कमर्शियल दोनों प्रकार की प्रॉपर्टी में निवेश को बढ़ावा मिलता है. यह स्थिरता नई परियोजना लॉन्च के लिए अनुकूल वातावरण बनाती है, जिससे रियल एस्टेट बाजार में गतिविधि और विकास को बढ़ावा मिलता है. इसके अलावा, यह निर्णय पहली बार घर खरीदने वालों को काफी लाभ पहुंचाता है, जिससे उन्हें ठोस वित्तीय योजना और सूचित निर्णय लेने के लिए आवश्यक आत्मविश्वास और पूर्वानुमान मिलता है. 

नए खरीदारों को निवेश करने के लिए मिलेगा प्रोत्साहन

एयू रियल एस्टेट के डायरेक्टर आशीष अग्रवाल ने कहा है किआरबीआई अपनी मौद्रिक नीति की घोषणा करने की तैयारी कर रहा है, हम एक रणनीतिक दृष्टिकोण की उम्मीद करते हैं जो आर्थिक सुधार और स्थिरता को संतुलित करता है. रेपो रेट को अपरिवर्तित रखने से संभावित घर खरीदारों के लिए वहनीयता सुनिश्चित होगी, जिससे हाउसिंग मार्केट में गति बनी रहेगी. उपभोक्ता मांग के कारण लग्जरी हाउसिंग को बढ़ावा मिल रहा है, इस कदम से व्यापक आर्थिक संकेतकों को समर्थन मिलेगा और नए खरीदारों को निवेश करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा. जैसे-जैसे भारत की अर्थव्यवस्था बढ़ेगी, रियल एस्टेट क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जिससे मौजूदा रेपो दर नीति मांग को बढ़ावा देने और देश के विकास में योगदान देने में महत्वपूर्ण होगी.

होम बायर्स पर नहीं पड़ेगा ईएमआई का दबाव

एचसीबीएस डेवलपमेंट के ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर सौरभ सहारन ने कहा है कि पिछले दो सालों में रियल एस्टेट सेक्टर में जो तेजी आई है, उसका एक बड़ा कारण आरबीआई की नीतियां रही हैं. खासकर रेपो रेट में एक साल से ज्यादा समय से कोई बदलाव नहीं हुआ है, जिससे बाजार में स्थिरता बनी रही. अब हम उम्मीद करते हैं कि इस बार आरबीआई रेपो रेट में कुछ कटौती कर सकता है. अगर आरबीआई दरों में कटौती करता है, तो इससे होम लोन की ब्याज दरें भी कम होंगी और होम बायर्स के लिए ईएमआई पर दबाव नहीं पड़ेगा. इससे रियल एस्टेट सेक्टर में और भी तेजी आएगी.


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