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आखिर क्यों बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, SBI रिपोर्ट में सामने आई बड़ी वजह

देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 4 रुपये प्रति लीटर तक का इजाफा किया गया है. इससे ट्रांसपोर्टेशन लागत बढ़ने और रोजमर्रा के सामान महंगे होने की आशंका जताई जा रही है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago

देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है. पांच दिनों में दूसरी बार ईंधन महंगा होने से महंगाई और घरेलू बजट पर असर की आशंका बढ़ गई है. हालांकि, SBI की ताजा रिपोर्ट बताती है कि यह फैसला सिर्फ कीमत बढ़ाने का नहीं, बल्कि तेल कंपनियों को भारी घाटे से बचाने की मजबूरी भी था. रिपोर्ट के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगे कच्चे तेल और स्थिर खुदरा कीमतों के कारण तेल कंपनियां रोजाना करीब 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान झेल रही थीं.

पांच दिन में दूसरी बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम

देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 4 रुपये प्रति लीटर तक का इजाफा किया गया है. इससे ट्रांसपोर्टेशन लागत बढ़ने और रोजमर्रा के सामान महंगे होने की आशंका जताई जा रही है. आम उपभोक्ताओं पर इसका सीधा असर पड़ेगा, क्योंकि ईंधन की कीमतें लगभग हर सेक्टर की लागत से जुड़ी होती हैं.

SBI रिपोर्ट में सामने आई असली वजह

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की ‘इकोरैप’ रिपोर्ट के मुताबिक तेल कंपनियों को लंबे समय से भारी वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ रहा था. अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई थीं, जबकि घरेलू खुदरा कीमतों में लंबे समय तक बदलाव नहीं किया गया.

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस वजह से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को हर दिन करीब 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा था. सालाना आधार पर यह घाटा करीब 3.6 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है. ऐसे में कीमतों में बढ़ोतरी कंपनियों के नुकसान को कुछ हद तक कम करने के लिए जरूरी मानी गई.

महंगाई पर पड़ेगा असर

रिपोर्ट के मुताबिक पेट्रोल-डीजल महंगा होने से मई और जून 2026 में खुदरा महंगाई दर यानी CPI में 0.15 से 0.20 फीसदी तक का उछाल आ सकता है. इसी के चलते वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 4.7 फीसदी कर दिया गया है.

हालांकि रिपोर्ट यह भी कहती है कि शुरुआती दौर में लोग ईंधन की खपत कम करते हैं, लेकिन कुछ समय बाद मांग दोबारा सामान्य स्तर पर लौट आती है. यानी लंबे समय में बिक्री पर बहुत बड़ा असर देखने को नहीं मिलता.

3 रुपये की बढ़ोतरी से कितनी राहत?

SBI के मुताबिक हालिया कीमत बढ़ोतरी से तेल कंपनियों को करीब 52,700 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राहत मिल सकती है. हालांकि यह राशि उनके अनुमानित कुल नुकसान का केवल 15 फीसदी हिस्सा ही कवर कर पाएगी, यानी मौजूदा बढ़ोतरी से कंपनियों पर दबाव कुछ कम जरूर होगा, लेकिन पूरी तरह खत्म नहीं होगा.

टैक्स घटाने पर सरकार को होगा भारी नुकसान

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अगर सरकार जनता को राहत देने के लिए एक्साइज ड्यूटी में बड़ी कटौती करती है, तो इसका सीधा असर सरकारी खजाने पर पड़ेगा. फिलहाल पेट्रोल पर 11.9 फीसदी और डीजल पर 7.8 फीसदी एक्साइज ड्यूटी लगती है. अगर इसे पूरी तरह खत्म कर दिया जाए, तो सरकार को करीब 1.9 लाख करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो सकता है. इससे राजकोषीय घाटा GDP के 0.5 फीसदी तक बढ़ने का खतरा पैदा हो सकता है.

राज्यों की कमाई पर भी पड़ेगा असर

केंद्र सरकार की टैक्स नीति का असर राज्यों की कमाई पर भी पड़ता है. SBI के अनुमान के अनुसार, अगर केंद्र एक्साइज ड्यूटी शून्य कर देता है, तो राज्यों को करीब 80,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है. हालांकि बढ़ी हुई ईंधन कीमतों से राज्यों को वैट के जरिए अतिरिक्त आय भी मिलेगी. इसके बावजूद राज्यों का कुल शुद्ध नुकसान करीब 50,000 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है.

आम आदमी के लिए क्या मायने?

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है. हालांकि सरकार और तेल कंपनियों के सामने चुनौती यह है कि एक तरफ उपभोक्ताओं को राहत दी जाए और दूसरी तरफ कंपनियों तथा सरकारी वित्तीय संतुलन को भी बनाए रखा जाए.
 


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