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चीनी के दाम में उछाल के पीछे कौन? सरकार ने एथनॉल पर उठे सवालों को किया खारिज
सरकार ने कहा- चीनी की कीमतों में तेजी की वजह कम घरेलू उत्पादन, त्योहारी मांग, वैश्विक आपूर्ति में कमी और जमाखोरी; एथनॉल के लिए चीनी का डायवर्जन घटकर 9% हुआ.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 hours ago
केंद्र सरकार ने चीनी की हालिया बढ़ती कीमतों के लिए चीनी को एथनॉल उत्पादन की ओर डायवर्ट किए जाने को जिम्मेदार ठहराने वाली दलीलों को खारिज कर दिया है. सरकार के मुताबिक, कीमतों में वृद्धि के पीछे घरेलू उत्पादन में कमी, त्योहारी सीजन से पहले बढ़ी मांग, वैश्विक स्तर पर सीमित आपूर्ति और कुछ कारोबारियों द्वारा जमाखोरी जैसे कारण हैं.
उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों पर नियंत्रण के लिए कई कदम उठाए गए हैं. इनमें कारोबारियों पर स्टॉक लिमिट लगाना और कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति देना शामिल है. मंत्रालय ने कहा, "चीनी की कीमतों में हालिया वृद्धि को एथनॉल उत्पादन के लिए चीनी के डायवर्जन से जोड़ना सही नहीं है."
एथनॉल के लिए चीनी का डायवर्जन घटा
सरकार के अनुसार, एथनॉल उत्पादन के लिए डायवर्ट की जाने वाली चीनी की हिस्सेदारी 2022-23 में करीब 12% थी, जो 2025-26 सीजन में घटकर लगभग 9% रह गई है. सरकार ने बताया कि भारत में एथनॉल उत्पादन का करीब तीन-चौथाई हिस्सा अब अनाज, खासकर मक्का, से आता है.
त्योहारी सीजन से पहले चीनी के दाम बढ़े
20 अगस्त को खुदरा चीनी की कीमत बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई, जो एक महीने पहले 48.18 रुपये प्रति किलोग्राम थी. मंत्रालय ने कीमतों में इस बढ़ोतरी के लिए अनुमान से कम घरेलू उत्पादन, त्योहारी सीजन से पहले बढ़ी मांग, मौसम और फसल रोगों से हुआ नुकसान, वैश्विक आपूर्ति में कमी तथा कुछ उद्योग प्रतिभागियों द्वारा सट्टेबाजी और जमाखोरी को जिम्मेदार बताया.
सरकार ने 30 नवंबर तक देशभर में चीनी कारोबारियों के लिए 400 टन की स्टॉक लिमिट लागू की है. वहीं, 1 सितंबर से थोक उपभोक्ताओं को अपनी खपत के 15 दिनों से अधिक का चीनी स्टॉक रखने की अनुमति नहीं होगी.
केंद्र ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात को भी मंजूरी दी है. इसके अलावा, चीनी मिलों के पास मौजूद स्टॉक की भौतिक जांच के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के अधिकारियों की संयुक्त टीमें गठित की गई हैं, ताकि जमाखोरी और कृत्रिम कमी की संभावना का पता लगाया जा सके.
चीनी उत्पादन अनुमान से कम
मंत्रालय के अनुसार, मौजूदा सीजन में चीनी उत्पादन का अनुमान घटकर करीब 30.6 मिलियन टन रह गया है. इससे पहले गन्ना उत्पादक राज्यों ने करीब 34.3 मिलियन टन उत्पादन का अनुमान जताया था.
उत्पादन में कमी के लिए गन्ने की फसल में रेड रॉट और टॉप बोरर रोग तथा अत्यधिक बारिश के कारण जलभराव को जिम्मेदार बताया गया है. हालांकि, सरकार का कहना है कि कम उत्पादन के बावजूद घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त चीनी स्टॉक उपलब्ध है और अक्टूबर में अगला पेराई सीजन शुरू होने तक आपूर्ति में कोई बड़ी समस्या नहीं होगी.
सरकार ने राज्य सरकारों और चीनी मिलों को 15 अक्टूबर से पेराई शुरू करने की सलाह दी है. इससे त्योहारी सीजन के दौरान बाजार में आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद है. सरकार के मुताबिक, अक्टूबर में चीनी उत्पादन 10 लाख टन से अधिक रह सकता है, जबकि आमतौर पर इस महीने उत्पादन करीब 3-4 लाख टन रहता है.
वैश्विक बाजार में भी दबाव
घरेलू कीमतों में तेजी ऐसे समय आई है जब वैश्विक चीनी बाजार में भी आपूर्ति की स्थिति तंग है. सरकार ने 2026-27 में वैश्विक चीनी बाजार में करीब 3.3 मिलियन टन की कमी का अनुमान लगाया है. अंतरराष्ट्रीय चीनी कीमतें 30 जून के 474 डॉलर प्रति टन से बढ़कर 20 अगस्त को 552 डॉलर प्रति टन हो गईं. यानी इस दौरान कीमतों में 16% से अधिक की वृद्धि हुई है. मंत्रालय के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय कीमतों में इस तेजी ने घरेलू बाजार पर भी दबाव बढ़ाया है.
सरकार ने एथनॉल नीति का किया बचाव
सरकार ने एथनॉल कार्यक्रम का बचाव करते हुए कहा कि इसने चीनी उद्योग में संरचनात्मक अधिशेष को संभालने, मिलों की वित्तीय स्थिति सुधारने और गन्ना किसानों को भुगतान में मदद की है. भारत में सामान्य तौर पर हर साल 32-34 मिलियन टन चीनी का उत्पादन होता है, जबकि घरेलू खपत करीब 28-29 मिलियन टन है. अतिरिक्त उत्पादन से चीनी का बड़ा स्टॉक जमा हो सकता है, जिससे मिलों की कार्यशील पूंजी फंसती है और किसानों को भुगतान में देरी हो सकती है.
मंत्रालय ने कहा कि 20 अगस्त तक 2025-26 सीजन के गन्ना बकाये का 97% भुगतान किया जा चुका है. सरकार के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में चीनी उद्योग की वित्तीय स्थिति में सुधार हुआ है और सरकारी सहायता पर उसकी निर्भरता कम हुई है. 2014 से 2021 के बीच इस क्षेत्र को करीब 14,600 करोड़ रुपये की सब्सिडी मिली थी, जबकि 2021-22 के बाद ऐसी कोई नई सब्सिडी घोषित नहीं की गई है.
सरकार ने कहा कि हालिया कदमों का उद्देश्य घरेलू बाजार में पर्याप्त चीनी उपलब्धता बनाए रखना और त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने के बीच कीमतों पर आगे का दबाव सीमित करना है.
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