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मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बजट 2025 से क्या हैं उम्मीदें? जानिए एक्सपर्ट्स की राय

आगामी बजट सत्र 2025 के लिए मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर ने अपनी अपेक्षाएं और सुझाव साझा किए हैं. इनमें विनिर्माण, ऊर्जा, बुनियादी ढांचे, और छोटे और मध्यम उद्यमों (MSMEs) पर विशेष ध्यान देने की मांग की गई है.

रितु राणा 1 year ago

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आने वाले 1 फरवरी, 2025 को देश का आम बजट (Union Budget) पेश करेंगी. इससे पहले अलग-अलग सेक्टर्स सरकार के बजट से तमाम उम्मीदें लगाए बैठे हैं. इसी के साथ भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को भी आगामी बजट 2025 से कई उम्मीदें हैं. इस सेक्टर को देश की आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान करने की क्षमता है, और इन्हें सरकार से समर्थन और प्रोत्साहन की आवश्यकता है ताकि यह सेक्टर अपनी पूरी क्षमता का उपयोग कर सके. तो आइए जानते हैं आगामी बजट को लेकर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के एक्सपर्ट्स का क्या कहना है और उकी सरकार से क्या उम्मीदें हैं? 

अनुसंधान एवं विकास (R&D) के लिए वित्तीय प्रोत्साहन

प्लस एडवांस्ड टेक्नोलॉजीज के प्रबंध निदेशक समित जैन का कहना है कि पिछले वर्ष में, सरकार ने स्वच्छ प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने, स्टार्टअप का समर्थन करने और एमएसएमई को सक्षम करने में सराहनीय प्रगति की है. हालांकि, इन प्रयासों की क्षमता को सही मायने में अनलॉक करने के लिए, कुछ महत्वपूर्ण चुनौतियों का समाधान करना जरूरी है. एमएसएमई को उच्च उत्पादन का सामना करना पड़ रहा है लागत, अपर्याप्त बुनियादी ढाँचा और जटिल नियामक ढाँचे जो उनके विकास में बाधक हैं, व्यापार करने में आसानी को बेहतर बनाने के लिए, विशेष रूप से प्रदूषण नियंत्रण के लिए, औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली के बुनियादी ढांचे को उन्नत करने और श्रम कानूनों को सरल बनाने पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है यह सुनिश्चित करने के लिए सुव्यवस्थित किया गया है कि संगठन आवश्यकताओं को कुशलतापूर्वक पूरा कर सकें. इसके अलावा, भारत में अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने के लिए एक परिवर्तनकारी दृष्टिकोण की आवश्यकता है. सरकार को उद्योगों को विशेष रूप से शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से वित्त पोषण या अनुदान देने के बजाय सीधे धन या अनुदान की पेशकश पर विचार करना चाहिए. इसके अलावा ऊर्जा वृत्ताकारता (energy circularity) पर ध्यान देने की जरूरत है.  सरकार को उन उद्योगों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों को प्रोत्साहित करना चाहिए जो पानी के पुन: उपयोग के लिए वर्तमान में प्रचारित की जा रही पहल के समान प्रभावी ऊर्जा पुन: उपयोग मॉडल का प्रदर्शन कर सकते हैं.

उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) योजना का विस्तार

एमआईसी इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (MICEL) की सीईओ रक्षित माथुर का कहना है कि केंद्रीय बजट 2025  सरकार को रेलवे, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स और एलईडी डिस्प्ले व लाइटिंग जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने के लिए अधिक धनराशि आवंटित करनी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को छोटे और मध्यम उद्यमों (SMEs) को समर्थन देने और अनुपालन ढांचे को सरल बनाने पर ध्यान देना चाहिए. उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) योजना के लिए अधिक धनराशि आवंटित करना, प्रमुख कच्चे माल पर आयात शुल्क में कमी और कौशल विकास कार्यक्रमों में निवेश जैसी नीतियां भारत को इन उद्योगों के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी.

MSMEs के लिए समान जीएसटी लागू 
ACE-एक्शन कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट लिमिटेड के प्रेसिडेंट व्योम अग्रवाल ने कहा है कि जैसे ही हम केंद्रीय बजट 2025 की ओर बढ़ रहे हैं, हमें उम्मीद है कि यह पिछले बजटों द्वारा निर्धारित गति को बनाए रखेगा, जिसमें बुनियादी ढांचे और विनिर्माण वृद्धि में तेजी लाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. इसके लिए आसान ऋण उपलब्धता और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए समान जीएसटी लागू करना आवश्यक होगा, जो रोजगार और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. सरकार का रक्षा क्षेत्र में निरंतर निवेश, विशेष रूप से ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत, आत्मनिर्भरता को और मजबूत करेगा. इसके अलावा, हरित हाइड्रोजन (ग्रीन हाइड्रोजन) को बढ़ावा देने के लिए अधिक धनराशि और वित्तीय प्रोत्साहन भारत को स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की ओर अग्रसर करेंगे. हम निष्पक्ष व्यापार नीतियों पर भी अधिक केंद्रित दृष्टिकोण की उम्मीद करते हैं, जिसमें घरेलू उद्योगों की रक्षा के लिए मजबूत एंटी-डंपिंग उपाय शामिल होंगे. ये कदम भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाएंगे और 'विकसित भारत' विजन को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति करेंगे, जिससे दीर्घकालिक आर्थिक समृद्धि को बढ़ावा मिलेगा.

घरेलू उद्योगों को समर्थन देने पर जोर देना चाहिए
 परितोष लाधानी, ज्वाइंट मैनेजिंग डायरेक्टर, एसएलएमजी बेवरेजेज ने कहा, "बजट 2025 में आर्थिक विकास और वित्तीय संतुलन के बीच सही तालमेल बनाना जरूरी है. ‘मेक इन इंडिया’, ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और PLI जैसी योजनाओं को और मजबूत करने की जरूरत है, खासकर मैन्युफैक्चरिंग, फूड और हॉस्पिटैलिटी जैसे क्षेत्रों में. इससे देश की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार मिलेगी और ऊर्जा खपत भी बढ़ेगी. सरकार को टैक्स सिस्टम को आसान बनाने, जीएसटी में सुधार करने और घरेलू उद्योगों को समर्थन देने पर जोर देना चाहिए. ये कदम भारत के आर्थिक विकास को मजबूत बनाने में मदद करेंगे.


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