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पश्चिम एशिया तनाव से तेल बाजार में उबाल, 100 डॉलर पार कर सकती हैं कीमतें : ICICI
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में घटनाक्रम के आधार पर तेल बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के और तेज होने की स्थिति में कच्चे तेल की कीमतें 100 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर सकती हैं. यह आकलन ICICI Bank की हालिया रिपोर्ट में किया गया है. प्रमुख तेल उत्पादक क्षेत्रों में बढ़ती भू-राजनीतिक अस्थिरता ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं.
वैश्विक तेल बाजार में बढ़ी अनिश्चितता
रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम एशिया के कुछ हिस्सों में जारी संघर्ष ने वैश्विक तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है. इस क्षेत्र के कई देश दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल उत्पादक और निर्यातक हैं. यदि उत्पादन इकाइयों, परिवहन ढांचे या शिपिंग मार्गों में किसी प्रकार का व्यवधान आता है तो सप्लाई प्रभावित हो सकती है और कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है. बाजार के प्रतिभागी विशेष रूप से महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों से तेल की आवाजाही पर नजर बनाए हुए हैं.
कीमतों में पहले से दिख रही संवेदनशीलता
रिपोर्ट में कहा गया है कि बेंचमार्क कच्चे तेल की कीमतों में पहले ही भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के प्रति अधिक संवेदनशीलता देखी जा रही है. संभावित सप्लाई बाधाओं के डर से ट्रेडर्स ने कीमतों में जोखिम प्रीमियम जोड़ना शुरू कर दिया है.
यदि संघर्ष और फैलता है या सीधे प्रमुख तेल उत्पादक देशों को प्रभावित करता है तो कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर सकती हैं. यह स्तर आखिरी बार उस समय देखा गया था जब वैश्विक सप्लाई पर गंभीर दबाव बना था.
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संभावित असर
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी का व्यापक आर्थिक प्रभाव पड़ सकता है. पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्भर उद्योगों जैसे परिवहन, मैन्युफैक्चरिंग और बिजली उत्पादन की लागत बढ़ सकती है.
तेल आयात करने वाले देशों के लिए ऊंची कीमतें व्यापार घाटा बढ़ा सकती हैं और घरेलू महंगाई पर दबाव डाल सकती हैं. ऐसे परिदृश्य में केंद्रीय बैंकों के लिए मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है.
भंडार और उत्पादन नीतियों की भूमिका
रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि वैश्विक भंडार स्तर और प्रमुख तेल उत्पादक समूहों द्वारा उत्पादन में किए गए समायोजन भी कीमतों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार का उपयोग और उत्पादक देशों के गठबंधनों के फैसले सप्लाई में आने वाली कमी की आंशिक भरपाई कर सकते हैं, हालांकि यह संघर्ष की अवधि और तीव्रता पर निर्भर करेगा.
आगे क्या रहेगा रुख
रिपोर्ट के निष्कर्ष के अनुसार फिलहाल वैश्विक आपूर्ति स्थिर बनी हुई है, लेकिन कच्चे तेल की कीमतों की आगे की दिशा काफी हद तक पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति और बाजार की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में घटनाक्रम के आधार पर तेल बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है.
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