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क्या सफल रही भारत में जी 20 विदेश मंत्रियों की बैठक? जानिए क्या कह रहे हैं एक्सपर्ट ?
क्या सफल रही भारत में जी 20 विदेश मंत्रियों की बैठक? जानिए क्या कह रहे हैं एक्सपर्ट ?
इस बैठक में न तो कोई ग्रुप फोटो हुआ और न ही कोई ज्वाइंट स्टेटमेंट रिलीज किया गया. भारत के लिहाज से मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के बीच पहली बार ऐसा हुआ जब सभी सदस्य देश इस बैठक में पहुंचे.
ललित नारायण कांडपाल
3 years ago
देश की राजधानी दिल्ली में गुरुवार को जी-20 देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक आयोजित हुई. इस बैठक को लेकर गुरुवार को पूरे दिन गहमा गहमी बनी रही. रूस यूक्रेन युद्ध की मौजूदा परिस्थितियों में जहां भारत की राजधानी में गुरुवार को अमेरिका के विदेश मंत्री इस बैठक में पहुंचे तो वहीं रूस के विदेश मंत्री भी इस बैठक में मौजूद थे. विदेश मामलों के जानकार बता रहे हैं कि ऐसा कम ही होता है कि जब जी 20 के सभी सदस्य किसी बैठक में शामिल होते हों, अन्यथा इनके बीच के मतभेद हमेशा से ही जी 20 के मु्द्दों से बड़े बन जाते हैं. ऐसे में विदेश मामलों के जानकार ये कयास लगा रहे हैं कि क्या इस बैठक को सफल कहा जाए या असफल कहा जाए. तो आइए जानते हैं कि क्या कह रहे हैं एक्सपर्ट.
बैठक पर क्यों उठ रहा है सवाल
इसमें कोई दोराय नहीं है कि जी 20 मौजूदा समय में दुनिया का सबसे ताकतवर आर्थिक संगठन है. इसकी ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि दुनिया की 80 प्रतिशत से ज्यादा आर्थिक व्यवस्था इन्हीं देशों के इर्द गिर्द घूमती है. सिर्फ आर्थिक ताकत ही नहीं आबादी भी जी 20 की उसकी एक बड़ी ताकत के रूप में देखी जाती है. लेकिन इस बैठक पर सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि कल की बैठक में भले ही सभी सदस्य देशों ने भाग लिया हो लेकिन न तो कल की बैठक की में कोई ज्वॉइंट सटेटमेंट जारी किया गया और न ही ज्वॉइंट फोटोग्राफ जिसे फैमिली फोटो भी कहा जाता है वो लिया गया. ऐसे में इस बैठक को लेकर अलग-अलग एक्सपर्ट की अलग-अलग राय है.
अमेरिका-रूस के बीच हुई बैठक अहम
विदेशों मामलों के जानकार और भारत के रक्षा मंत्रालय के IDSA से जुड़े रहे संजीव श्रीवास्तव बताते हैं कि कई देशों में राजनयिक रह चुके मौजूदा समय में पूरी दुनिया में एक रणनीतिक अनिश्चितता बनी हुई है. यूक्रेन का युद्ध जारी है और प्रतिस्पर्धा जोरों पर है, एक ओर पुरानी संधियां टूट रही हैं तो जिसमें आईएनएफ जैसी संधियां शामिल हैं. हथियारों की होड़ बनी हुई है, और इसी को हमारे विदेश मंत्री ने अपने वक्तव्य में कहा था कि उसके पहले पीएम मोदी ने भी कहा था कि वर्तमान समय में महाशक्तियों के बीच में बड़े मतभेद हैं, जो यूएन हैं वो इन समस्याओं को सुलझाने में फेल साबित हुए हैं. ऐसे में भारत में हुई ये बैठक एक चैलेंजिंग टॉस्क है, जिसमें भारत काफी हद तक सफल रहा है अगर इसे पूरी सफलता न कहें तो भी. गुरुवार को एक चेयर्स स्टेटमेट जारी किया गया, 95 प्रतिशत सहमति थी, लेकिन यूक्रेन को लेकर मतभेद थे. इसी कारण ज्वॉइंट स्टेटमेंट नहीं आ पाया. भारत ने अपना पूरा प्रयास किया. उन्होंने कहा कि ऐसी चर्चा है कि अमेरिका और रूस के विदेश मंत्रियों में 10 मिनट तक बात हुई है, और ये इनफार्मल बातचीत थी, लेकिन फिर भी ये महत्वपूर्ण है. ये लोग अभी तक एक दूसरे से नहीं मिले हैं. लेकिन मैं कहूंगा कि ये भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. भारत की क्रेडिबिलिटी बढ़ी है, भारत तेजी से बढता बाजार है. भारत एक बड़ी सैनिक शक्ति भी है. कल की मीटिंग में जापान और साउथ कोरिया के विदेश मंत्री नहीं आ पाए. लेकिन जापान के विदेश मंत्री आज आ गए.
अब शायद ही आया करेगा ज्वॉइंट स्टेटमेंट
वहीं इस मीटिंग को लेकर विदेश मामलों के जानकार कमर आगा कहते हैं कि इस समय पूरा अंतराष्ट्रीय समुदाय तीन भागों मे बंटा हुआ नजर आ रहा है. रसिया चाइना अमेरिका और नैटो के मेंबर हैं. इसलिए मुझे नहीं लगता है कि अब कभी भी भविष्य में कोई ज्वॉइंट स्टेटमेंट आ पाएगा या कोई फोटो सेशन हो पाए. दिल्ली में भारत ने कोशिश तो की, रशिया और अमेरिका के विदेश मंत्रियों की बातचीत तो हुई तो लेकिन कोई मसला हल नहीं हो पाया. इसकी वजह से ज्वॉइंट डिक्लेरेशन हो पाना बहुत मुश्किल हो गया है. ये सिर्फ जी 20 की ही बात नहीं है बल्कि दूसरे फोरमों में भी हमें ऐसा ही देखने को मिल रहा है. कमर आगा कहते हैं कि भारत ने इस बैठक को सफल बनाने की पूरी कोशिश की है लेकिन देशों के बीच में मतभेद इतने हैं कि ये कहीं और भी होती तो इसका हाल यही होना था. फूड सिक्योरिटी, एनर्जी का मुद्दा था, इसके अतिरिक्त कई देशों ने आपस में बैठक की वो भी अच्छा था. मुझे लगता है कि जितना बेहतर इसे भारत ने कंडक्ट किया उतना शायद ही कोई और कर पाता.
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