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बंद होने की कगार पर पहुंची vodafone Idea, सरकार और कोर्ट से लगाई ये गुहार
कंपनी ने AGR बकाया माफ करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है और सरकार से तत्काल सहायता की मांग की है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
टेलीकॉम सेक्टर की प्रमुख कंपनी वोडाफोन आइडिया (VIL) पर एक बार फिर संकट के बादल मंडरा रहे हैं. दरअसल, कंपनी ने स्पष्ट शब्दों में केंद्र सरकार को चेताया है कि अगर उसे समय पर मदद नहीं मिली, तो वित्त वर्ष 2026 के बाद उसका कामकाज जारी रखना संभव नहीं होगा. इसका मतलब यह है कि कंपनी भारत में अपना संचालन बंद करने पर मजबूर हो सकती है. चलिए जानते हैं आखिर क्या है ये पूरा मामला?
सरकार से मांगी राहत
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार वोडाफोन आइडिया ने दूरसंचार विभाग (DoT) को पत्र लिखकर बताया है कि अगर Adjusted Gross Revenue (AGR) पर सरकार ने तत्काल मदद नहीं की, तो कंपनी को भारी वित्तीय संकट का सामना करना पड़ेगा. कंपनी के सीईओ अक्षय मूंदड़ा ने पत्र में लिखा कि बैंक फंडिंग तभी संभव है जब सरकार AGR के मुद्दे पर मदद करे. अन्यथा, वित्तीय संस्थाएं लोन नहीं देंगी और संचालन पूरी तरह ठप हो सकता है.
सुप्रीम कोर्ट में डाली याचिका
वोडाफोन आइडिया ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर लगभग 30,000 करोड़ रुपये के AGR बकाया को माफ करने की गुहार लगाई है. सुप्रीम कोर्ट की चीफ जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने कंपनी की याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है. वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कोर्ट से आग्रह किया कि इस मामले की तात्कालिक सुनवाई जरूरी है. अब इस याचिका पर सुनवाई 19 मई को हो सकती है.
NCLT की प्रक्रिया में जा सकती है कंपनी
कंपनी ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार की तरफ से समय पर कोई सहायता नहीं मिली, तो उसे NCLT (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल) की प्रक्रिया का सहारा लेना पड़ेगा. NCLT एक लंबी और जटिल प्रक्रिया है, जो कंपनियों के दिवालिया होने से जुड़े मामलों को देखती है. इस स्थिति में वोडाफोन आइडिया की स्पेक्ट्रम और नेटवर्क जैसी महत्वपूर्ण संपत्तियों का मूल्य भी गिर सकता है.
20 करोड़ यूजर्स पर संकट के बादल
अगर वोडाफोन आइडिया भारत में अपना संचालन बंद करती है, तो इसके करीब 20 करोड़ मोबाइल यूजर्स को दूसरी कंपनियों में शिफ्ट होना पड़ेगा. इससे न केवल उपभोक्ताओं की सेवाएं बाधित हो सकती हैं, बल्कि टेलीकॉम सेक्टर और देश की अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है. कंपनी का कहना है कि अगर सरकार समय पर हस्तक्षेप करती है तो न केवल आम जनता को राहत मिलेगी, बल्कि देश की डिजिटल संरचना भी सुरक्षित रहेगी.
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