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बेहद दिलचस्‍प है क्‍वीन विक्‍टोरिया से लेकर आधुनिक आभूषणों का परिवर्तन यात्रा

क्‍वीन विक्‍टोरियों के जमाने से लेकर आधुनिक समाज तक आभूषण डिजाइन के विकास की पड़ताल बताती है कि ये बेहद दिलचस्‍प है. इसमें दिखता है कि कैसे आभूषणों में बड़े बदलाव आए हैं. 

ललित नारायण कांडपाल 3 years ago

आभूषण पहनना महिलाओं को बेहद पसंद है, कई-कई पुरुषों को भी ये काफी पसंद होता है. लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि आखिर आभूषणों के विकास की प्रक्रिया क्‍या रही है. आज के जमाने में हमारे सामने मौजूद आभूषणों के बीच पहले किस तरह के आभूषणों से इसकी शुरुआत हुई थी. आज हम आपको यही बताने जा रहे हैं. आभूषणों की शुरुआत ताबीज और ताबीज के रूप में सुरक्षा के श्रंगार से होकर सोने और हीरे की यात्रा आज फास्टनरों या ब्रोच के रूप में हमारे सामने पर्सनल स्‍टेटस तक आ पहुंची है. इसके डिजाइन में बदलाव ने कई युगों का समय तय किया है.  

क्‍वीन विक्‍टोरिया के दौर से हुई इसकी शुरुआत 
विभिन्न आभूषण के डिजाइन की इस यात्रा में सबसे महत्‍वपूर्ण शुरुआत विक्टोरियन युग के माध्यम से शुरु होती है, जिसमें हमें भावुक प्रेम की बेहद लोकप्रियता देखने को मिलती है. प्रारंभिक विक्टोरियन का समय तब से माना जाता है जब प्रिंस अल्बर्ट ने रानी विक्टोरिया से विवाह किया था. इटली के मास्‍टर सुनारों द्वारा इन आभूषणों के डिजाइनों की क्राफ्टिंग भी उनके विस्तृत सोने के तार के काम के जरिए जानी जाती है जिसमें वो फिलीग्री और नाजुक धातुओं की तकनीक के लिए जाने जाते थे. इन्‍हीं की उस वक्‍त ज्‍यादा मांग भी थी जिसमें भावुक चित्रों को दिखाया गया हो. उस वक्‍त जिन आभूषणों के प्रकार देखने को मिलते हैं उसमें प्रेमी की गाँठ,  फूल, धनुष, दिल वर्धमान चंद्रमा और सर्प जैसे डिजाइन काफी लोकप्रिय थे. 19वीं सदी में दक्षिण अफ्रीका में हीरे की खानों की खोज के बाद इसमें नया दौर आया. 

औद्योगिक क्रांति ने बढ़ाई खरीद शक्ति 
उस वक्‍त हुर्इ औद्योगिक क्रांति ने इसके विकास में और अहम भूमिका निभाई. इस औद्योगिक क्रांति के कारण मध्यवर्गीय परिवारों की खरीद शक्ति में इजाफा हुआ जिसने हीरे के आभूषण पहनने और खरीदने के लिए लोगों को ज्‍यादा प्रेरित किया. इसके बाद इसकी यात्रा के अगले पढ़ाव में इटली जैसे शहरों ने आभूषण स्मृति चिन्ह पेश करना शुरू कर दिया. इनमें माइक्रो मोज़ाइक और शेल कैमियो जैसे डिजाइन शामिल थे. इसके बाद इसकी यात्रा में एक महत्‍वपूर्ण पहलू तब सामने आया जब आभूषणों के डिजाइन के लिए प्रकृति से प्रेरणा ली जाने लगी. इसमें तब के कलाकारों ने प्रकृति से प्रेरणा लेते हुए  फूल, पक्षी और मादा रूप में नई डिजाइन को तैयार करना शुरू कर दिया. इसके लिए उन्‍होंने नई सामग्री और तकनीकों को भी शामिल करना शुरू कर दिया जिसमें एनामेलिंग और हाथीदांत जैसी तकनीक शामिल थी. 

कुछ डिजाइन आज भी प्रेरित करते हैं
फ्रेंच आर्ट डेको तकनीक के दौर में आभूषणों में एक अलग बदलाव देखने को मिलता है. इस अवधि के दौरान वैश्विक संस्कृति के प्रभाव में आभूषण निर्माण में विलासिता, ग्लैमर और काफी तकनीकी प्रगति का मिश्रण देखने को मिलता है. इनमें शैलीबद्ध पुष्प रूपांकनों और नक्काशीदार कैबोचन्स भी देखने को मिलते हैं. इस दौर में अगर पत्‍थर की बात करें तो उसमें माणिक, नीलम, जेड, लापीस और गोमेद के जीवंत रंग, चमकदार हीरे के साथ एक विपरीत प्रभाव पैदा करते हैं. उनमें से कुछ ऐसे हैं जो आज भी प्रेरित करते हैं. 

कुछ डिजाइन जो आज भी प्रेरित करते हैं
विश्व युद्ध के समय के सुस्त कपड़ों की शैलियों का मुकाबला करने के लिए 1940 और 50 के दशक के रेट्रो आभूषण बड़े, रंगीन और बेहद जीवंत थे. यही नहीं 1960 के दशक का मध्य पारंपरिक आभूषणों की आधुनिक अवधि थी, रंग-बिरंगे रत्नों से जड़ी वैचारिक रूप से समृद्ध बनावट वाले पीले सोने के आभूषण जो हमेशा के लिए आदर्श बन गए. हालांकि, पिछले 40 वर्षों में महिलाओं के कार्यस्‍थल की ओर जाने के कारण इनमें बड़ा नाटकीय बदलाव देखने को मिला है. नवाचारों, मिश्रित धातुओं, विभिन्न स्टाइल के साथ आधुनिक आभूषण, बड़े हार और भारी झुमके के साथ मौजूदा चलन में बन गए हैं. भविष्य में और अधिक नवाचारों के साथ भी, आभूषण हमेशा के लिए श्रंगार का एक रूप बने रहेंगे.


 


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