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केंद्रीय बजट 2026–27: रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती, छोटे शहरों में विकास और निवेशकों का भरोसा बढ़ा

स्वामीह फंड-2, ₹12.2 लाख करोड़ के इंफ्रा निवेश और टियर-2/3 शहरों पर फोकस से देशभर में संतुलित और टिकाऊ शहरी विकास को नई दिशा मिलेगी.

रितु राणा 3 months ago

केंद्रीय बजट 2026–27 में रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को लेकर कई अहम घोषणाएं की गई हैं, जिन्हें उद्योग विशेषज्ञों ने सकारात्मक और दूरगामी बताया है. बजट ने आवासीय परियोजनाओं को गति देने, छोटे शहरों में शहरी विकास को बढ़ावा देने और निवेशकों का भरोसा मजबूत करने पर विशेष जोर दिया है.

स्वामीह फंड-2: रियल एस्टेट में विश्वास बहाल

क्रेडाई वेस्टर्न यूपी के अध्यक्ष दिनेश गुप्ता के अनुसार, “केंद्रीय बजट 2026–27 में 15,000 करोड़ रुपये के स्वामीह फंड-2 की घोषणा रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित होगी. अफोर्डेबल और मिड-इनकम हाउसिंग के लिए बने स्पेशल विंडो के पहले चरण से करीब 50,000 आवासीय इकाइयों का निर्माण पूरा हो चुका है और आने वाले समय में लगभग 40,000 और इकाइयों के पूरा होने की उम्मीद है. इससे लंबे समय से अटकी परियोजनाओं में घर खरीदारों का भरोसा काफी मजबूत होगा. नए स्वामीह फंड-2 का लक्ष्य अतिरिक्त 1 लाख आवासीय इकाइयों का निर्माण करना है, जिससे करीब 40,000 से 60,000 करोड़ रुपये मूल्य की अटकी इन्वेंट्री को गति मिलेगी और पूरे रियल एस्टेट इकोसिस्टम में तरलता बढ़ेगी.”

औद्योगिक हब्स के आसपास आवासीय विकास

Vision बिजनेस पार्क के फाउंडर अतुल विक्रम सिंह कहते हैं, “केंद्रीय बजट में सेमीकंडक्टर, पावर, इंफ्रास्ट्रक्चर और रेल जैसे प्रमुख उद्योगों पर दिया गया जोर यह स्पष्ट करता है कि आने वाले वर्षों में औद्योगिक क्लस्टर्स के आसपास आवासीय विकास की मांग तेजी से बढ़ेगी. इन इंडस्ट्रियल हब्स के विस्तार के साथ कार्यबल के लिए किफायती और सुव्यवस्थित आवास की आवश्यकता भी बढ़ेगी. ऐसे में रियल एस्टेट डेवलपर्स को औद्योगिक टाउनशिप्स के आसपास योजनाबद्ध, टिकाऊ और कनेक्टेड रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स विकसित करने पर ध्यान देना होगा, ताकि उद्योगों के साथ-साथ आवासीय इकोसिस्टम भी संतुलित रूप से विकसित हो सके.”

 

उभरते शहरों को संतुलित और समान विकास को बढ़ावा

अल्फा कॉर्प डेवलपमेंट लिमिटेड के सीएफओ एवं एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर संतोष अग्रवाल ने कहा, “केंद्रीय बजट 2026 ‘नए शहरी भारत’ की साफ तस्वीर पेश करता है. सरकार ने सार्वजनिक पूंजीगत खर्च को बढ़ाकर ₹12.2 लाख करोड़ किया है, जो केवल सड़कों या परियोजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि टियर-2 और टियर-3 शहरों के भविष्य को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है. उभरते शहरों के लिए हर साल ₹5,000 करोड़ का प्रावधान संतुलित और समान विकास को बढ़ावा देगा. रियल एस्टेट सेक्टर के लिए यह सिर्फ बेहतर कनेक्टिविटी नहीं, बल्कि बेहतर रहन-सहन और जीवन की गुणवत्ता को प्राथमिकता देने का संकेत है। इससे छोटे और मझोले शहर आर्थिक गतिविधियों के नए केंद्र बनेंगे. अब विकास केवल बड़े महानगरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे देश में फैला हुआ दिखाई देगा.”

इंफ्रास्ट्रक्चर और मल्टीप्लायर इफेक्ट

एलांते ग्रुप की एडिशनल वाईस प्रेसिडेंट हेनम खनेजा ने कहा, “बजट 2026–27 अवसंरचना क्षेत्र को ₹12.2 लाख करोड़ के प्रस्तावित पूंजीगत व्यय के माध्यम से मजबूत और विश्वास बढ़ाने वाला प्रोत्साहन देता है. पाँच लाख से अधिक आबादी वाले शहरों, टियर-2 और टियर-3 विकास केंद्रों और सिटी इकोनॉमिक रीजन पर ध्यान देकर संतुलित शहरी विकास को बढ़ावा मिलेगा. इन्फ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड और REITs/InvITs के माध्यम से परिसंपत्ति मुद्रीकरण जैसी पहलें निजी क्षेत्र की भागीदारी को मजबूत करेंगी और रियल एस्टेट पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ बनाएंगी. बजट में पाँच प्रमुख क्षेत्रीय स्वास्थ्य अवसंरचना परियोजनाओं का प्रस्ताव भी है, जिससे गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ेगी और रियल एस्टेट बाजार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा.”

प्रखर अग्रवाल, निदेशक, रामा ग्रुप के अनुसार  “वित्त मंत्री का टियर-1 और टियर-2 शहरों में विकास को प्राथमिकता देना रियल एस्टेट सेक्टर के लिए स्वागतयोग्य है. सड़कों, रेलवे और शहरी सुविधाओं जैसी बुनियादी ढांचा निवेश से उभरते शहरों में संगठित आवासीय और मिक्स्ड-यूज़ प्रोजेक्ट्स के लिए नए अवसर खुलेंगे.

 

रियल एस्टेट की ग्रोथ इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर

क्रीवा और कनोडिया ग्रुप के फाउंडर डॉ. गौतम कनोडिया कहते हैं, “बजट 2026 यह साफ करता है कि रियल एस्टेट की ग्रोथ इंफ्रास्ट्रक्चर के बाद आती है, पहले नहीं. ₹12.2 लाख करोड़ के लगातार सरकारी खर्च और नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर से मेट्रो और उभरते शहरों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी. इससे रियल एस्टेट के मौके सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहेंगे. मेट्रो शहरों में बाहरी इलाकों की अहमियत बढ़ेगी और सेंट्रल बिजनेस इलाकों का दबाव कम होगा. टियर-2 और टियर-3 शहरों में घरों की बिक्री बढ़ेगी और संगठित कमर्शियल डेवलपमेंट को फायदा मिलेगा. बेहतर फाइनेंसिंग और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर से डेवलपर्स लंबे समय वाले प्रोजेक्ट्स पर ध्यान देंगे. यह बजट देश में संतुलित और टिकाऊ शहरी विकास की नींव रखता है.”

मिगसन ग्रुप के एमडी यश मिगलानी ने कहा, “यूनियन बजट 2026 टियर-2 और टियर-3 शहरों के विकास को लेकर मजबूत कदम है. बेहतर कनेक्टिविटी, शहरी सुविधाएं और लॉजिस्टिक्स से ये बाजार संगठित कमर्शियल और मिक्स्ड-यूज़ प्रोजेक्ट्स के लिए अधिक मजबूत बनेंगे. इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड की शुरुआत से फंडिंग का जोखिम कम होगा और लंबे समय वाले प्रोजेक्ट्स में प्राइवेट निवेश को बढ़ावा मिलेगा.”

निजी निवेश और टियर-2/3 शहरों का महत्व

Model Economic Township Ltd. (Reliance MET City) के सीईओ श्रीवल्लभ गोयल  CEO के अनुसार, “केंद्रीय बजट 2026–27 आर्थिक विस्तार, रोजगार सृजन और देशव्यापी संपर्क को सुदृढ़ करने के लिए अवसंरचना-आधारित विकास के प्रति सरकार की स्पष्ट प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है. ₹12.2 लाख करोड़ के बढ़े हुए पूंजीगत व्यय आवंटन से विश्व-स्तरीय भौतिक और औद्योगिक अवसंरचना के निर्माण पर निर्णायक फोकस का संकेत मिलता है. यह निवेश केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवहन गलियारों, आधुनिक लॉजिस्टिक्स नेटवर्क, शहरी अवसंरचना और औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र में ठोस प्रगति के रूप में सामने आता है, विशेष रूप से उभरते टियर-2 और टियर-3 शहरों में. बजट में शहरी विकास पर दिया गया विशेष जोर इस गति को और मजबूती प्रदान करता है. शहरी आवास, गतिशीलता और शहर-स्तरीय सेवाओं पर बढ़ते फोकस के माध्यम से सरकार सतत, रहने योग्य और निवेश-अनुकूल शहरों की नींव रख रही है. रिलायंस मेट सिटी जैसे एकीकृत विकास इस दृष्टिकोण का उदाहरण हैं, जहाँ औद्योगिक अवसंरचना, शहरी नियोजन और कार्यबल पारिस्थितिकी तंत्र एक साथ मिलकर दीर्घकालिक आर्थिक गतिविधियों को समर्थन देते हैं. इस प्रकार का लक्षित शहरी और औद्योगिक विकास निजी निवेश को आकर्षित करने, सुगम शहरीकरण को सक्षम बनाने और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में भारत की विकास आकांक्षाओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.”

M3M India के प्रेजीडेंट रोबिन मंगला ने कहा  “केंद्रीय बजट 2026 रियल एस्टेट के लिए अवसंरचना-आधारित विकास को एक प्रमुख प्रेरक के रूप में रेखांकित करता है. पूंजीगत व्यय को बढ़ाकर ₹12.2 लाख करोड़ किया जाना शहरी विस्तार, कनेक्टिविटी और परियोजना क्रियान्वयन के लिए दीर्घकालिक स्पष्टता प्रदान करता है, जिससे आवासीय और वाणिज्यिक दोनों क्षेत्रों में मांग को मजबूती मिलती है. ये कदम समग्र रियल एस्टेट पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त करेंगे, परियोजना निष्पादन में विश्वास बढ़ाएंगे और प्रमुख बाजारों में सतत विकास को समर्थन देंगे, जो एम3एम की विश्वस्तरीय परियोजनाएं विकसित करने की प्रतिबद्धता और दीर्घकालिक निवेशक विश्वास को सुदृढ़ करने के दृष्टिकोण के अनुरूप है.”

NRI संपत्ति बिक्री लेनदेन को सरल बनाना संरचनात्मक सुधार

प्रॉपर्टीपिस्टल के फाउंडर और एमडी अशिष नारायण अग्रवाल ने कहा “केंद्रीय बजट 2026 रियल एस्टेट को एक प्रमुख निवेश स्तंभ के रूप में और मजबूत करता है. NRI संपत्ति बिक्री लेनदेन को सरल बनाना एक संरचनात्मक सुधार है, जो तरलता बढ़ाता है और सीमा-पार पूंजी प्रवाह को तेज करता है. टियर-2 और टियर-3 शहरों के लिए समर्पित ₹5,000 करोड़ के प्रोत्साहन के साथ, जो नए पेश किए गए रिस्क गारंटी फंड से समर्थित हैं, निष्पादन जोखिम में महत्वपूर्ण कमी आती है और निवेशकों का भरोसा बढ़ता है.

इंफ्रास्ट्रक्चर कैपिटल व्यय ₹12.2 लाख करोड़ तक बढ़ने के साथ, शहर-आर्थिक क्षेत्र मेट्रो शहरों से बाहर विस्तारित होने के लिए तैयार हैं, जिससे बेहतर कनेक्टिविटी, रोजगार और शहरी अवसंरचना के माध्यम से आवासीय मांग बढ़ेगी. रियल एस्टेट निवेशकों के लिए, यह बजट कहानी को सट्टा आधारित विकास से नीति-समर्थित, डेटा-आधारित रिटर्न की ओर मोड़ता है. उभरते शहर अब किफायती आवास, अवसंरचना की गति और दीर्घकालिक मूल्य वृद्धि का सम्मोहक मिश्रण पेश करते हैं, जिससे यह निवेश करने का सही समय है.”
 


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