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केंद्रीय बजट 2026–27: रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर में नई लहर, टियर‑2/3 शहरों पर जोर

विशेषज्ञों के अनुसार यह बजट टियर‑2 और टियर‑3 शहरों में सतत विकास और निवेश के अवसरों को बढ़ावा देगा और पूरे देश में रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को नई दिशा देगा.

रितु राणा 9 months ago

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पेश किए गए बजट 2026–27 में रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ की हैं. इस बजट में मुख्य रूप से सार्वजनिक पूंजीगत व्यय बढ़ाना, छोटे शहरों में विकास और रियल एस्टेट निवेश को प्रोत्साहित करना शामिल है.

बुनियादी ढांचे में बड़ा निवेश

वित्त मंत्री ने घोषणा की कि सार्वजनिक पूंजीगत व्यय (Capex) ₹12.2 लाख करोड़ तक बढ़ाया जाएगा, जो पिछले साल के ₹11.2 लाख करोड़ से अधिक है. यह निवेश सड़कों, रेलवे, जलमार्ग और अन्य मूलभूत संरचनाओं के विकास को तेजी से आगे बढ़ाएगा.

भूटानी इंफ्रा के सीईओ आशीष भूटानी कहते हैं, “केंद्रीय बजट 2026–27 भारत की रिटेल अर्थव्यवस्था में उपभोग आधारित विकास चक्र की मजबूत नींव रखता है. कर संबंधी बाधाओं को कम करने, एमएसएमई सेक्टर को समर्थन देने और लॉजिस्टिक्स व कनेक्टिविटी में निर्णायक निवेश के जरिए यह बजट सीधे तौर पर लोगों की क्रय शक्ति और अंतिम छोर तक पहुंच को सशक्त करता है.”

छोटे शहरों और टियर‑2/3 सेंटर्स पर जोर

बजट में स्पष्ट किया गया कि टियर‑2 और टियर‑3 शहरों को “ग्रोथ सेंटर्स” के रूप में विकसित किया जाएगा. इन शहरों में आवश्यक सुविधाओं और कनेक्टिविटी इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए नई परियोजनाओं की रूपरेखा बनाई जाएगी. ओरायन वन 32  के डायरेक्टर दुश्यंत सिंह ने कहा, “केंद्रीय बजट 2026 रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक सकारात्मक दिशा दिखाता है, जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित विकास और शहरी कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर सरकार का फोकस साफ नजर आता है. पूंजीगत खर्च में बढ़ोतरी और नीतिगत सहयोग से खासकर उभरते कॉरिडोर और टियर-2 शहरों में आवास की मांग बढ़ेगी.”

रियल एस्टेट सेक्टर के लिए REITs

बजट में रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (REITs) के माध्यम से सीपीएसई संपत्तियों को मॉनेटाइज करने का प्रस्ताव रखा गया है. सरकारी संपत्तियों को बाजार‑आधारित निवेश उत्पादों की तरह विकसित करने से रियल एस्टेट में नई पूंजी और निवेश आकर्षित होंगे.

विभोर त्यागी, एमडी, वीवीआईपी ग्रुप ने कहा, “केंद्रीय बजट 2026–27 रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के लिए एक सकारात्मक और भरोसा बढ़ाने वाला संकेत है. सीपीएसई की रियल एस्टेट संपत्तियों को REITs के जरिए तेजी से उपयोग में लाने से पारदर्शिता बढ़ेगी और संपत्तियों का बेहतर उपयोग होगा.”

निर्माण सामग्री और मशीनरी का स्थानीय उत्पादन

बजट में कंस्ट्रक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर उपकरणों की घरेलू विनिर्माण क्षमता बढ़ाने की योजनाएँ शामिल हैं. इससे बिल्डिंग और इंफ्रा क्षेत्र में मजबूत आपूर्ति श्रृंखला सुनिश्चित होगी.

भारत ठाकरान, CMD, GHD ग्रुप कहते हैं, “सरकार की ज्यादा कैपिटल खर्च करने की कमिटमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड की शुरुआत से लेंडर्स का भरोसा बढ़ेगा और पूरे देश में इंफ्रास्ट्रक्चर बनने का काम तेज़ी से होगा. बेहतर कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स एफिशिएंसी और एसेट मोनेटाइजेशन से सेकंड होम, हॉस्पिटैलिटी-बेस्ड हाउसिंग और लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट के लिए राज्य की अपील बढ़ेगी.”

कैपिटल खर्च और इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड से स्थिरता

वोमेकी ग्रुप के चेयरमैन और फाउंडर गौरव के सिंह कहते हैं, “कैपिटल खर्च में ₹12.2 लाख करोड़ की प्रस्तावित बढ़ोतरी, इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड के साथ मिलकर, पॉलिसी में स्थिरता और इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के लिए लंबे समय की कमिटमेंट का एक मजबूत संकेत देती है. डेवलपमेंट-स्टेज के जोखिमों को कम करके और क्रेडिट की उपलब्धता को मजबूत करके, ये उपाय प्रोजेक्ट के टाइमलाइन को तेज करेंगे और डेवलपर्स के लिए कुल मिलाकर फायदे को बेहतर बनाएंगे. दिल्ली-NCR में, जहां रियल एस्टेट की मांग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार से बहुत करीब से जुड़ी हुई है, बेहतर फ्रेट कॉरिडोर, REITs के ज़रिए एसेट मोनेटाइजेशन, और बेहतर कनेक्टिविटी से हाउसिंग, कमर्शियल ऑफिस और वेयरहाउसिंग में ग्रोथ होगी, जिससे इस क्षेत्र में निवेशकों का भरोसा और गहरा होगा.”

हाई-स्पीड कॉरिडोर और ग्लोबल निवेशकों के लिए अवसर

पायनियर अर्बन लैंड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट ऋषभ पेरीवाल  कहते हैं, “केंद्रीय बजट 2026-27 भारत के रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक बड़ा बदलाव लेकर आया है, जो सिर्फ़ विस्तार के बजाय स्ट्रक्चरल एफिशिएंसी को प्राथमिकता देकर एक हाई-स्पीड शहरी अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है. दिल्ली-वाराणसी रूट सहित सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा से भौगोलिक रुकावटें काफ़ी कम होंगी और नए ग्रोथ कॉरिडोर खुलेंगे. इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड और डेडिकेटेड CPSE REITs की शुरुआत से इकोसिस्टम में बहुत ज़रूरी फाइनेंशियल सिक्योरिटी और इंस्टीट्यूशनल लिक्विडिटी आएगी. इसके अलावा, एडवांस्ड इक्विपमेंट की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना एक संभावित गेम-चेंजर साबित हो सकता है, जिससे प्रोजेक्ट का समय कम होगा और ग्लोबल निर्भरता कम होगी. लक्ज़री रियल एस्टेट सेगमेंट के लिए, बेहतर कनेक्टिविटी और तेज़ी से काम होने से उभरते हुए माइक्रो-मार्केट HNIs, NRIs और ग्लोबल इन्वेस्टर्स के लिए पसंदीदा शहरी हब बन जाएंगे.”

बजट 2026: विकास के लिए सकारात्मक संकेत

युगेन इंफ्रा के मैनेजिंग डायरेक्टर शीशराम यादव ने कहा बजट 2026 भारत की भविष्य की विकास कहानी के लिए एक बड़ा सकारात्मक संकेत है. क्योंकि सार्वजनिक पूंजीगत व्यय 2014–15 में ₹2 लाख करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2026–27 में ₹12.2 लाख करोड़ तक पहुंचने का लक्ष्य सरकार की यह प्रतिबद्धता दर्शाता है कि इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को प्राथमिकता दी जा रही है. इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड: इस नए फंड की शुरुआत उत्साहवर्धक है. क्योंकि यह विकास और निर्माण चरणों में जोखिम से संबंधित लंबे समय से चली आ रही समस्याओं को कम करेगा. REITs के माध्यम से परिसंपत्तियों का मुद्रीकरण: CPSE रियल एस्टेट के लिए विशिष्ट REITs बेहतर पूंजी पुनर्चक्रण को सक्षम करेंगे. टियर-2 और टियर-3 शहरों पर ध्यान: टियर-2 और टियर-3 शहरों, मंदिर शहरों और सिटी इकोनॉमिक रीजन पर जोर शहरी विकास के लिए संतुलित दृष्टिकोण को दर्शाता है और गैर-मेट्रो शहरों में नई आर्थिक गतिविधियों को उत्पन्न करेगा. सतत और भविष्य-सबूत विकास: कुल मिलाकर, बजट 2026 टिकाऊ इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, शहरीकरण और PPP के लिए व्यावहारिक और भविष्य-सबूत नींव प्रदान करता है.

बजट का रियल एस्टेट और इंफ्रा पर प्रभाव 
- बड़े निवेश से स्मॉल सिटीज और ग्रामीण कनेक्टिविटी को बल मिलेगा.
- फ्रीट कॉरिडोर और जलमार्ग योजनाएँ लॉजिस्टिक लागत कम करेंगी और माल परिवहन तेज करेंगी.
- REITs के माध्यम से सरकारी संपत्तियों को पूंजी में बदलना आसान होगा, जिससे नया निवेश और विकास आएगा.

 


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