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स्टार्टअप इंडिया स्कीम के तहत सिंपलर टुडे एआई को 20 लाख की सीड फंडिंग
सिंपलर टुडे एआई का उद्देश्य आम नागरिकों को उच्च गुणवत्ता वाली कानूनी सेवाएं सुलभ और किफायती बनाना है. यह प्लेटफॉर्म शिकायत दर्ज करने से लेकर समाधान तक पूरी कानूनी प्रक्रिया को सरल बनाता है, ताकि लोगों को सिस्टम में अकेले जूझना न पड़े.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago
भारत की पहली एआई-आधारित कंज्यूमर लॉ फर्म सिंपलर टुडे एआई (Simpler Today AI) को स्टार्टअप इंडिया सीड फंड स्कीम के तहत आईआईटी मंडी आईहब (IIT Mandi iHub) और एचसीआई फाउंडेशन (HCI Foundation) से 20 लाख रुपये की फंडिंग मिली है. यह निवेश कंपनी के प्रोडक्ट सुधार, गहन शोध और भारत की न्याय व्यवस्था के लिए स्वदेशी लीगल इंटेलिजेंस क्षमताओं के विस्तार में मदद करेगा.
एआई के जरिए आसान और किफायती कानूनी सेवाएं
सिंपलर टुडे एआई का उद्देश्य आम नागरिकों को उच्च गुणवत्ता वाली कानूनी सेवाएं सुलभ और किफायती बनाना है. यह प्लेटफॉर्म शिकायत दर्ज करने से लेकर समाधान तक पूरी कानूनी प्रक्रिया को सरल बनाता है, ताकि लोगों को सिस्टम में अकेले जूझना न पड़े.
यह एआई-आधारित, बहुभाषी संवादात्मक इंटरफेस के माध्यम से नागरिकों को उनके कानूनी अधिकार समझने, घटनाओं की गंभीरता का आकलन करने, संरचित और कार्रवाई योग्य शिकायत तैयार करने तथा आगे की प्रक्रिया के लिए मार्गदर्शन प्रदान करता है.
30 से अधिक कानूनों और 100+ उपयोग मामलों को सपोर्ट
वर्तमान में यह प्लेटफॉर्म 30 से अधिक कानूनों और अधिनियमों, 100 से अधिक कानूनी उपयोग मामलों और विभिन्न राज्यों के प्रारूपों को सपोर्ट करता है. महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में 29 पुलिस स्टेशनों में इसकी तकनीक लागू की जा चुकी है, जहां यह 35 लाख से अधिक नागरिकों को प्रत्यक्ष रूप से सेवा दे रहा है. अब तक हजारों कानूनी इंटरैक्शन संभव हुए हैं और सैकड़ों संरचित शिकायतें तैयार की गई हैं, जिनकी कार्रवाई क्षमता पहले की तुलना में काफी अधिक रही है.
स्वदेशी एआई से न्याय व्यवस्था को मजबूती
यह प्लेटफॉर्म पूरी तरह स्वदेशी एआई सिस्टम पर आधारित है, जिसे कानून प्रवर्तन एजेंसियों और कानूनी संस्थानों के साथ मिलकर काम करने के लिए डिजाइन किया गया है. इसका उद्देश्य सूचना की गुणवत्ता में सुधार, प्रक्रियागत अस्पष्टता को कम करना और न्याय प्रणाली में संसाधनों के बेहतर उपयोग को सुनिश्चित करना है.
संस्थापकों की प्रतिक्रिया
सिंपलर टुडे एआई के सह-संस्थापक अमित शुक्ला ने कहा कि स्टार्टअप इंडिया स्कीम के तहत आईआईटी मंडी आईहब और एचसीआई फाउंडेशन से मिला समर्थन इस विश्वास की मजबूत पुष्टि है कि कानूनी पहुंच राष्ट्रीय सुरक्षा और समावेशी विकास की बुनियाद है. उन्होंने कहा कि भारत को ऐसे स्वदेशी एआई सिस्टम की जरूरत है जो उसके कानूनों, भाषाओं और संस्थागत ढांचे को गहराई से समझते हों. यह फंडिंग कंपनी के लीगल इंटेलिजेंस सिस्टम को मजबूत करने और हर नागरिक के लिए न्याय को सुलभ, किफायती और प्रभावी बनाने के मिशन को गति देगी.
अमित शुक्ला इससे पहले ईजीगव नामक एआई-आधारित गवर्नेंस प्लेटफॉर्म की स्थापना कर चुके हैं, जिसे बाद में रिलायंस जियो ने अधिग्रहित किया था और राष्ट्रीय स्तर पर सामाजिक सुरक्षा सेवाओं में लागू किया गया था.
भारत की न्याय व्यवस्था की बड़ी चुनौती
भारत की न्याय प्रणाली इस समय भारी संरचनात्मक दबाव का सामना कर रही है. देशभर की अदालतों में 5 करोड़ से अधिक मामले लंबित हैं. मौजूदा निपटान दर के अनुसार इन मामलों को खत्म करने में सैकड़ों वर्ष लग सकते हैं. कानूनी जागरूकता की कमी, शिकायत दर्ज करने में देरी और प्रक्रियागत अस्पष्टता के कारण मामलों का समाधान शुरुआती स्तर पर नहीं हो पाता, जिससे अदालतों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ता है.
आईआईटी मंडी आईहब का बयान
आईआईटी मंडी आईहब और एचसीआई फाउंडेशन के प्रवक्ता ने कहा कि सिंपलर टुडे एआई उस तरह का डीप-टेक और जनहित आधारित नवाचार है जिसकी भारत को आवश्यकता है. कानूनी पहुंच, स्वदेशी एआई और संस्थागत अपनाने पर इसका फोकस स्टार्टअप इंडिया सीड फंड स्कीम के उद्देश्यों के अनुरूप है. टीम में भारत की न्याय और शासन प्रणाली में बड़े और विस्तार योग्य प्रभाव पैदा करने की क्षमता है.
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के दौर में नई दिशा
एआई-आधारित प्लेटफॉर्म जैसे सिंपलर टुडे एआई न्याय प्रणाली के प्रवेश बिंदुओं पर जटिलताओं को कम कर सकते हैं. इससे नागरिकों को बेहतर परिणाम मिलेंगे और न्याय व्यवस्था पर दबाव भी घटेगा.
भारत जब डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को तेजी से अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, ऐसे में स्वदेशी लीगल एआई समाधान भविष्य में न्याय वितरण प्रणाली को बदलने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.
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