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MSME क्रेडिट अंतर कम करने के लिए UGro कैपिटल की नई पहल
एसबीआई के प्रबंध निदेशक रवि रंजन ने कहा कि GST, डिजिटल भुगतान और ब्योरो एकीकरण ने पिछले दशक में MSME औपचारिकीकरण को मजबूत किया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago
यूग्रो कैपिटल (UGro Capital's) ने नीति निर्माताओं, वित्तीय संस्थानों और फिनटेक अधिकारियों को एक मंच पर लाकर भारत के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए लंबित क्रेडिट अंतर को कम करने की पहल की. यह नया प्लेटफ़ॉर्म “India by MSME” के तहत आयोजित किया गया.
यूग्रो कैपिटल ने बताया कि यह पहल एक सतत संस्थागत मंच के रूप में तैयार की गई है. इसका उद्देश्य नीति-संबंधी स्पष्टता, विनियामक दिशा, पूंजी सहभागिता और तकनीक-आधारित अंडरराइटिंग फ्रेमवर्क को जोड़कर उभरते बाजारों में औपचारिक क्रेडिट की पहुंच बढ़ाना है.
मंच को संबोधित करते हुए महाराष्ट्र के कौशल, रोजगार, उद्यमिता और नवाचार मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने कहा कि MSMEs के लिए संरचित और सस्ती क्रेडिट पहुंच रोजगार सृजन और उद्यमिता आधारित विकास के लिए केंद्रीय है.
बैंकों और फिनटेक का सहयोग
एसबीआई के प्रबंध निदेशक रवि रंजन ने कहा कि GST, डिजिटल भुगतान और ब्योरो एकीकरण ने पिछले दशक में MSME औपचारिकीकरण को मजबूत किया है. लेकिन अगले चरण में बैंक, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां और फिनटेक प्लेटफॉर्म के बीच अनुशासित सहयोग की आवश्यकता है ताकि क्रेडिट पहुंच जिम्मेदारीपूर्वक बढ़ाई जा सके. एसिडबीआई के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक मनोज मित्तल ने जोर देकर कहा कि साझेदारी-आधारित क्रेडिट विस्तार मजबूत डेटा प्रबंधन और जोखिम प्रबंधन फ्रेमवर्क पर आधारित होना चाहिए.
MSME संपर्क रिपोर्ट
यूग्रो कैपिटल और Dun & Bradstreet के सहयोग से तैयार MSME संपर्क रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 86% MSMEs 20 करोड़ रुपये से कम टर्नओवर पर संचालित होती हैं. इन्हें सुरक्षित, लंबी अवधि के ऋण की ओर अधिक झुकाव है. रिपोर्ट में औसत ऋण आकार में वृद्धि और अनुशासित ऋण स्वीकृति का उल्लेख किया गया है.
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि माइक्रोफाइनेंस और गोल्ड लोन पर निर्भरता घट रही है, जबकि UPI अपनाने की दर बढ़ रही है और नकद पर निर्भरता कम हो रही है. यह औपचारिक और मुख्यधारा के क्रेडिट चैनलों की ओर एक संरचनात्मक बदलाव को दर्शाता है. डॉ. अरुण सिंह ने कहा कि ये निष्कर्ष MSME औपचारिकीकरण और विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर क्रेडिट व्यवहार को दर्शाते हैं.
यूग्रो कैपिटल के संस्थापक और प्रबंध निदेशक शचिंद्र नाथ ने कहा कि MSMEs भारत की GDP में लगभग 31% योगदान देते हैं और रोजगार सृजन में केंद्रीय हैं. लेकिन संरचनात्मक क्रेडिट अंतर अभी भी बड़ा है. उन्होंने बताया कि “India by MSME” प्लेटफॉर्म नीति निर्माताओं, विनियामकों, बैंकों, NBFCs, फिनटेक प्लेटफॉर्म और पूंजी प्रदाताओं को जोड़ने के लिए तैयार किया गया है ताकि भारत के उद्यमियों तक क्रेडिट जिम्मेदारीपूर्वक और संरचनात्मक रूप से पहुँच सके.
यूग्रो कैपिटल के देशभर में 300 से अधिक शाखाएं हैं और यह अपने Emerging Market और Embedded Finance प्लेटफ़ॉर्म के तहत 1.85 लाख से अधिक ग्राहकों को सेवा प्रदान करता है. कंपनी के प्रबंधित परिसंपत्तियों का अनुमान लगभग 15,500 करोड़ रुपये है. यह AI और मशीन लर्निंग आधारित GRO Score (3.0), सेक्टर-विशेष अंडरराइटिंग आर्किटेक्चर और साझेदारी-आधारित सह-ऋण प्रणाली का उपयोग करके अर्ध-शहरी और कम सेवा वाले बाजारों में अनुशासित क्रेडिट विस्तार को समर्थन देता है.
फोरम में सह-ऋण फ्रेमवर्क को मजबूत करने, बाजार-लिंक्ड फाइनेंसिंग बढ़ाने, डिजिटल अंडरराइटिंग प्रथाओं को मानकीकृत करने और लंबी अवधि की पूंजी सहभागिता को प्रोत्साहित करने पर चर्चा हुई. प्रतिभागियों ने इस बात पर जोर दिया कि भारत के MSME क्रेडिट अंतर को स्थायी रूप से पाटने के लिए समन्वित पारिस्थितिकी तंत्र की आवश्यकता है.
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