होम / बिजनेस / 2026 की ओर भारतीय आईटी सेक्टर, AI के विस्तार से खर्च, टैलेंट और डिलीवरी मॉडल में बड़ा बदलाव
2026 की ओर भारतीय आईटी सेक्टर, AI के विस्तार से खर्च, टैलेंट और डिलीवरी मॉडल में बड़ा बदलाव
भारतीय आईटी कंपनियां 2026 में सतर्क आशावाद के साथ प्रवेश कर गई हैं, क्योंकि एंटरप्राइज खर्च AI के बड़े पैमाने पर उपयोग, आउटकम-आधारित मॉडल और विशेषीकृत टैलेंट की ओर बढ़ रहा है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago
रोहित चिंतापल्ली
भारत का सूचना प्रौद्योगिकी सेवा क्षेत्र 2026 की ओर बढ़ गया है. जहां एक ओर एंटरप्राइज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रयोग से आगे बढ़कर इसके बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की ओर जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर लागत नियंत्रण, गवर्नेंस और टैलेंट की कमी से जुड़े जोखिम भी बढ़ रहे हैं.
आईटी सर्विस फर्मों, इंडस्ट्री बॉडीज और एनालिस्ट्स के अधिकारियों का कहना है कि एंटरप्राइज खर्च अब तेजी से AI, क्लाउड मॉडर्नाइजेशन और साइबर सिक्योरिटी की ओर शिफ्ट हो रहा है, जबकि ऑपरेटिंग मॉडल लेबर-आधारित डिलीवरी से हटकर प्लेटफॉर्म आधारित और आउटकम-ड्रिवन अप्रोच की ओर बढ़ रहे हैं.
खर्च में तेजी, प्राइसिंग मॉडल में बदलाव
Cognizant के वाइस प्रेसिडेंट और इंडिया कंट्री हेड अचल कटारिया के अनुसार 2026 में एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी खर्च में तेजी आने की उम्मीद है, जिसका प्रमुख कारण AI और क्लाउड को अपनाना होगा.
कटारिया ने कहा, “2026 में IT खर्च में तेजी आने की उम्मीद है, जो AI और क्लाउड अपनाने से प्रेरित होगी. बजट मुख्य रूप से AI प्रोडक्शन और क्लाउड-नेटिव सॉल्यूशंस पर केंद्रित होंगे. Gartner ने 2026 तक वैश्विक IT खर्च में मजबूत वृद्धि का अनुमान लगाया है.”
कटारिया ने कहा कि एंटरप्राइज पारंपरिक कमर्शियल मॉडल पर दोबारा विचार कर रहे हैं. उन्होंने कहा, “एंटरप्राइज सचेत रूप से T&M और फिक्स्ड-प्राइस मॉडल से हटकर कंजम्पशन-आधारित और आउटकम-ड्रिवन प्राइसिंग की ओर बढ़ रहे हैं.” उन्होंने जोड़ा कि CIO की प्राथमिकताओं में “सिक्योरिटी, लागत का अनुकूलन और सस्टेनेबल IT” शामिल हैं.
उन्होंने यह भी कहा कि डिलीवरी मॉडल बदल रहे हैं. कटारिया के अनुसार, “IT सेवाओं के ऑपरेटिंग मॉडल धीरे-धीरे लोगों पर आधारित डिलीवरी से इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म्स और सर्विसेज की ओर शिफ्ट हो रहे हैं.” उन्होंने कहा, “कॉन्ट्रैक्ट्स अब लंबे समय वाले आउटकम-आधारित मॉडल की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे अधिक स्टिकिनेस बनती है क्योंकि परिणाम डिलीवर किए जाते हैं.”
सर्विस डिलीवरी में संरचनात्मक बदलाव
Persistent Systems में अधिकारियों का कहना है कि AI यह तय कर रहा है कि टेक्नोलॉजी सर्विसेज को किस तरह से संरचित किया जाएगा.
Persistent Systems के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर –टेक्नोलॉजी, जयदीप ढोक ने कहा, “दो बड़े बदलाव हैं जो एंटरप्राइज खर्च और ऑपरेटिंग मॉडल को नया आकार दे रहे हैं. पहला है ‘सर्विस-एज-सॉफ्टवेयर’ पैरेडाइम के केंद्र में AI का आना.”
ढोक ने कहा, “टेक्नोलॉजी सर्विस इंडस्ट्री एक संरचनात्मक बदलाव के दौर से गुजर रही है, जहां AI-आधारित पहल इस मॉडल को फिर से परिभाषित कर रही हैं और सॉफ्टवेयर को ऑफरिंग का अभिन्न हिस्सा बना रही हैं.” उन्होंने कहा, “यह इंटीग्रेशन IT सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए रिकरिंग रेवेन्यू स्ट्रीम्स बना रहा है, क्योंकि AI-सक्षम प्लेटफॉर्म्स एंड-टू-एंड डिजिटल सॉल्यूशंस की नींव बनते जा रहे हैं.”
ढोक ने यह भी जोड़ा कि एंटरप्राइज अब इकोसिस्टम ऑर्केस्ट्रेशन पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं. उन्होंने कहा, “दूसरा बदलाव इंटीग्रेटेड AI इकोसिस्टम के जरिए वैल्यू को दोबारा कैलिब्रेट करने से जुड़ा है.” उन्होंने कहा, “एंटरप्राइज अब यूनिफाइड टेक्नोलॉजी स्टैक्स की ओर बढ़ रहे हैं, जो स्थापित प्लेटफॉर्म्स, स्टार्टअप इकोसिस्टम और प्रॉप्रायटरी इनोवेशन को एक साथ जोड़कर कोहिसिव AI-ड्रिवन ऑफरिंग तैयार करते हैं.”
ओवररीच और फ्रैगमेंटेशन से जोखिम
हालांकि मांग मजबूत बनी हुई है, लेकिन अधिकारियों ने चेतावनी दी कि अगर AI को सावधानी से मैनेज नहीं किया गया तो इससे जोखिम बढ़ सकते हैं. Cognizant के कटारिया ने कहा, “AI अपनाने को प्रभावित करने वाले प्रमुख जोखिमों में अवास्तविक ROI अपेक्षाएं, पर्याप्त डेटा रेडीनेस या MLOps के बिना प्रोडक्टिविटी या लागत बचत के बड़े वादे करना, जिससे असंतोष और लंबी सेल्स साइकल बनती है, जरूरत से ज्यादा आउटकम कमिटमेंट, टैलेंट डायल्यूशन, बढ़ती क्लाउड लागत, साइबर सिक्योरिटी खतरे और AI गवर्नेंस गैप शामिल हैं.” उन्होंने कहा, “संगठनों को इन चुनौतियों का सक्रिय रूप से समाधान करना होगा.”
Persistent के ढोक ने कहा कि अनुशासनहीन AI उपयोग लंबे समय में टेक्निकल डेट पैदा कर सकता है. उन्होंने कहा, “AI-जनरेटेड कोड और बेतहाशा AI प्रयोग से लेगेसी सिस्टम्स की एक नई लहर पैदा होने का खतरा है, जिन्हें मेंटेन करना महंगा, मैनेज करना जटिल और स्थायी रूप से स्केल करना मुश्किल होगा.”
उन्होंने आगे कहा, “स्पष्ट इम्प्लीमेंटेशन रणनीति के बिना संगठन बिखरे हुए टूल्स और बेकार प्लेटफॉर्म्स जमा कर सकते हैं, जो माइक्रोसर्विसेज और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसी पिछली टेक्नोलॉजी लहरों के कम उपयोग किए गए अवशेषों की तरह होंगे.”
खरीदार AI को स्केल कर रहे हैं, उम्मीदें बढ़ा रहे हैं
Happiest Minds में अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे AI प्रोडक्शन में जा रहा है, खरीदारों का व्यवहार बदल रहा है.
Happiest Minds में जनरेटिव AI बिजनेस सर्विसेज के CEO श्रीधर मंथा ने कहा, “2026 वह साल है जब एंटरप्राइज AI को आजमाने से आगे बढ़कर उसे बड़े पैमाने पर अपनाएंगे और इससे बजट और अपेक्षाएं दोनों बदल रही हैं.”
मंथा ने कहा, “हम रूटीन रन कॉस्ट से खर्च के शिफ्ट को साफ तौर पर देख रहे हैं, जो अब AI, ML, GenAI, AgenticAI इंफ्रास्ट्रक्चर, हाई-क्वालिटी डेटा प्लेटफॉर्म्स, क्लाउड ऑप्टिमाइजेशन और मजबूत सिक्योरिटी कंट्रोल्स की ओर जा रहा है.”
उन्होंने कहा कि खरीदार अब मापने योग्य असर चाहते हैं. उन्होंने कहा, “मांग बनी रहेगी, लेकिन खरीदार अब ज्यादा चयनशील होंगे और ऐसे पार्टनर्स की तलाश करेंगे जो असर साबित कर सकें और एंड-टू-एंड रिस्क मैनेज कर सकें.”
टैलेंट बना मुख्य केंद्र बिंदु
इंडस्ट्री लीडर्स का कहना है कि 2026 में टैलेंट स्ट्रैटेजी निर्णायक भूमिका निभाएगी, क्योंकि विशेष कौशल की मांग बढ़ रही है.
Nasscom की सीनियर वाइस प्रेसिडेंट संगीता गुप्ता ने कहा, “वैश्विक टेक्नोलॉजी वर्कफोर्स अब एक्जीक्यूशन स्केल से एक्सपर्टीज स्केल की ओर बढ़ रही है.” उन्होंने कहा, “आज एंटरप्राइज अपने टेक्नोलॉजी खर्च को दोबारा संतुलित कर रहे हैं, जहां मॉडर्नाइजेशन, इनोवेशन और लागत अनुशासन के बीच सावधानी से संतुलन बनाया जा रहा है.”
गुप्ता ने कहा कि भारतीय IT ऑपरेटिंग मॉडल तेजी से बदल रहे हैं. उन्होंने कहा, “भारतीय ऑपरेटिंग मॉडल अब लागत दक्षता से रणनीतिक स्वामित्व की ओर बढ़ रहे हैं,” और बताया कि ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स अब इनोवेशन हब में बदल रहे हैं.
हालांकि अपस्किलिंग जारी है, लेकिन गुप्ता ने कहा कि गहरी क्षमताएं सबसे ज्यादा मायने रखेंगी. उन्होंने कहा, “सिर्फ तकनीकी कौशल पर्याप्त नहीं होंगे.” उन्होंने कहा, “वास्तविक अंतर पैदा करने वाले फैक्टर होंगे डोमेन की गहराई, अनुकूलन क्षमता, समस्या सुलझाने की योग्यता और इंडस्ट्री फ्लुएंसी, जो AI-सशक्त माहौल में एंटरप्राइज वैल्यू बनाने में मदद करेंगे.”
अनिश्चितता के बीच सतर्क आशावाद
Gartner के वाइस प्रेसिडेंट एनालिस्ट डीडी मिश्रा के अनुसार मैक्रोइकॉनॉमिक अनिश्चितता सेक्टर के आउटलुक को प्रभावित करती रहेगी.
मिश्रा ने कहा, “वोलैटिलिटी, अनसर्टेनटी, कॉम्प्लेक्सिटी और एम्बिग्युटी यानी VUCA का माहौल 2026 में भी बना रहने की उम्मीद है और यह बहुत अलग नहीं होगा.” उन्होंने कहा, “हालांकि AI, साइबर सिक्योरिटी और डेटा मैनेजमेंट जैसे टेलविंड्स हैं, जो रेवेन्यू बढ़ाने में मदद कर सकते हैं.”
मिश्रा ने कहा कि एंड-यूजर खर्च पर दबाव के बावजूद डील एक्टिविटी मजबूत बनी हुई है. उन्होंने कहा, “2026 में भारतीय IT सेक्टर के लिए डील पाइपलाइन आमतौर पर सकारात्मक रहने की उम्मीद है,” हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि “वैश्विक मैक्रोइकॉनॉमिक अनिश्चितता एक ऐसा फैक्टर है जो उम्मीदों को बाधित कर सकता है.”
टैग्स