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रुपए की बिगड़ती 'सेहत' का सबसे अधिक असर कहां? समझें कैसे बन रहे हालात

पिछले कुछ सालों में रुपए की स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है. रुपए में कमजोरी का असर देश की अर्थव्यवस्था से लेकर आम आदमी की पॉकेट तक पड़ता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

डॉलर के मुकाबले रुपए में गिरावट का दौर जारी है. बुधवार को रुपए 18 पैसे कमजोर होकर अब तक के सबसे निचले स्तर 79.05 पर पहुंच गया. यानी अब एक डॉलर के लिए हमें 79.05 रुपए चुकाने होंगे. पिछले कुछ सालों में रुपए की स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है. रुपए में कमजोरी का असर देश की अर्थव्यवस्था से लेकर आम आदमी की पॉकेट तक पड़ता है. लिहाजा, संभव है कि आने वाले दिनों में महंगाई से त्रस्त जनता को, बढ़ते दाम का एक और डोज मिल जाए. 

अलग-अलग असर 
रुपए की कमजोरी इम्पोर्टर्स की लागत और मुनाफे की खाई को लगातार चौड़ा करती जा रही है. हर गिरावट उनकी लागत को बढ़ा देती है, ऐसे में उनके लिए काम करना मुश्किल हो गया है. दरअसल, आयात पर उन्हें डॉलर में अब ज्यादा भुगतान करना पड़ेगा. वहीं, दूसरी तरफ रुपए की आर्थिक सेहत कमजोर होने से निर्यातकों को ज़रूर फायदा होगा. क्योंकि उन्हें डॉलर के हिसाब से ज्यादा रुपए मिलेगा. 

लगातार बढ़ रही लागत
दिल्ली के बिज़नेसमैन अनंजय अग्रवाल रुपए के रसातल में पहुंचने से बेहद चिंतित और परेशान हैं. अग्रवाल का ज़्यादातर व्यवसाय इम्पोर्ट यानी आयात पर केंद्रित है. ऐसे में उनकी लागत लगातार बढ़ती जा रही है. उन्होंने कहा, ‘यह निश्चित तौर पर चिंता का विषय है, लेकिन चूंकि ये हमारे नियंत्रण से बाहर है, इसलिए हम कुछ नहीं कर सकते’.

पड़ती है दोहरी मार 
अनंजय अग्रवाल के मुताबिक, रुपए-डॉलर के मूल्य में बदलाव से ड्यूटी भी प्रभावित होती है. उदाहरण के तौर पर यदि रुपया डॉलर के मुकाबले 78 से 80 हो गया, तो हमें केवल 2 रुपए ही ज्यादा नहीं देने है, बल्कि ज्यादा ड्यूटी का भी भुगतान करना है. ऐसे में हमारी लागत काफी बढ़ जाती है और नुकसान उठाना पड़ता है. यही वजह है कि इम्पोर्ट का रेश्यो कम हो रहा है. 

ट्विन क्रश सिचुएशन
वहीं, प्रमुख फुटवेयर एक्सपोर्टर UV ओवरसीज के संजय डंग ने कहा, 'डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर हो रहा है और यूरो के मुकाबले इसमें मजबूती आई है. यह एक बेहद अजीब स्थिति है. अधिकांश कच्चे माल के आयात का भुगतान जहां डॉलर में होता है, वहीं शू इंडस्ट्री का निर्यात ज़्यादातर यूरो में’. उन्होंने आगे कहा कि यह एक तरह से ट्विन क्रश सिचुएशन है, जिससे EU एक्सपोर्ट करने वाले बुरी तरह प्रभावित होंगे.

आप पर क्या होगा असर? 
भारत बड़ी संख्या में अन्य देशों से सामान आयात करता है. ऐसे में रुपए की कमजोरी से आयात महंगा हो जाएगा. क्रूड ऑयल, इलेक्ट्रॉनिक सामान सहित वे सभी वस्तुएं महंगी हो जाएंगी, जो बाहर से देश में आती हैं. कच्चा तेल महंगा होने से पेट्रोल-डीजल के दाम फिर बढ़ सकते हैं, ऐसे में खाने-पीने की चीज़ें और दूसरे ज़रूरी सामान महंगे हो जाएंगे. वैसे भी महंगाई का डीजल से सीधा कनेक्शन है. मतलब महंगाई से राहत मिलना तो दूर आने वाले दिनों में हालात और खराब हो सकते हैं.

मुश्किल हुआ कारोबार करना

विरोला इंटरनेशनल के मालिक ईशान सचदेवा का कहना है कि मौजूदा समय में कारोबार करना पहले से ही बेहद मुश्किल है, ऐसे में रुपए में लगातार गिरावट हमारी मुश्किलों को और बढ़ा रही है.  उदाहरण के तौर पर, ऑर्डर के समय डॉलर के मुकाबले रुपए का मूल्य कुछ और था और डिलीवरी पर कुछ और हो गया, तो ऐसी स्थिति में हमारा मरना हो जाता है.   

सचदेवा चाहते हैं कि सरकार व्यापारियों पर ध्यान दे. उन्होंने आगे कहा, 'सरकारी नीतियों में आए दिन बदलाव होते रहते हैं. सरकार की तरफ से हमें जिस फायदे की बात कही जाती है, वो महज कागजों तक सीमित है. ऊपर से रुपए के मूल्य में गिरावट से हमारी लागत बढ़ रही है. शूज़ से जुड़े मटैरियल की कीमत आसमान छू रही है. ऐसे में हमारे लिए व्यापार करना कठिन हो गया है'.

इस तरह गिरता गया रुपया
इसके अलावा, रुपया कमजोर होने से विदेशों में घूमना, पढ़ाई आदि के लिए भी जेब ज्यादा ढीली करनी होगी. अब जरा रुपए के गिरने की कहानी को आंकड़ों की जुबानी समझ लेते हैं. 29, मई 2014 को रुपया 58.93 था, इसके बाद 29, मई 2015 को 63.73, 30 मई, 2016 को 66.97, 30 मई, 2017, 64.66, 4 अक्टूबर, 2018 को 73.79, 10 मई, 2022 को 77.50 और 10 जून, 2022 को 77.85, 29 जून, 2022 को 79.05 प्रति डॉलर आ गया है.


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