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बंद होने की कगार पर खड़ी इस एविएशन कंपनी को मिला 60 दिनों का वरदान, क्या बन पाएगी बात?
पिछले साल खुद इस कंपनी ने एनसीएलटी में दिवालिया याचिका को दायर किया था. कंपनी पर 6000 करोड़ रुपये से ज्यादा का बकाया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
एनसीएलटी में दिवालिया मामले का सामना कर रही एविएशन कंपनी गो एयर को ट्राइब्यूनल ने 60 दिन का और समय दे दिया है. कंपनी को इस संकट से निपटने के लिए अब तक 4 बार समय मिल चुका है. इससे पहले कंपनी को 4 अप्रैल तक का समय दिया गया था लेकिन अब इसमें 60 दिन का और इजाफा कर दिया है. ये स्थिति तब है जब कंपनी के सारे प्लेन अदालत के आदेश के बाद डी रजिस्टर हो चुके हैं.
खुद ही इन्सॉल्वेंसी के लिए किया था आवेदन
कंपनी की ओर से खुद ही पिछले साल 2 मई को इन्सॉल्वेंसी के लिए आवेदन किया गया था. उसके बाद से अब तक कई कंपनियां इस जमींदोज एयरलाइन की संकट मोचन बनकर सहायता के लिए आगे तो आई हैं लेकिन बात बन नहीं पाई. इसका नतीजा ये हुआ कि एक अदद संकटमोचन की तलाश कर रही इस कंपनी को अदालत से बार बार समय मिल रहा है. कंपनी को अब तक 4 बार एक्सटेंशन मिल चुका है.
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कंपनी के सारे प्लेन हो चुके हैं डी रजिस्टर
गो फर्स्ट को ऑपरेशन के लिए 14 विमानन कंपनियों ने विमान लीज पर दिए थे. लेकिन विवाद सुलझता ना देख विमान देने वाली 14 कंपनियों ने इसके लिए पिछले साल दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. जिन कंपनियों ने विमान लीज पर दिए थे उनमें एसएमबीसी एविएशन कैपिटल लिमिटेड, स्काई लीजिंग, जीवाई एविएशन लीज, एसीजी एयरक्राफ्ट लीजिंग, बीओसी एविएशन, और चाइना डेवलपमेंट बैंक फाइनेंशियल लीजिंग कंपनी शामिल थी.
गो फर्स्ट पर इतने करोड़ का है बकाया
गो फर्स्ट पर अपने लेंडर्स का 6,521 करोड़ रुपए बकाया है. गो फर्स्ट पर जो 6521 करोड़ रुपये बकाया है उसमें सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का सबसे ज्यादा 1,987 करोड़ रुपए का एक्सपोजर था, इसके बाद बैंक ऑफ बड़ौदा का 1,430 करोड़ रुपए, डॉयचे बैंक का 1,320 करोड़ रुपए और IDBI बैंक का 58 करोड़ रुपए बकाया था. गो फर्स्ट का कहना था कि इंजनों की सप्लाई न होने के कारण उसे अपना ऑपरेशन बंद करने पड़े हैं. इंजन बनाने वाली कंपनी प्रैट एंड व्हिटनी को इंजन की सप्लाई करनी थी. लेकिन उसने समय पर इंजन की सप्लाई नहीं की तो कंपनी को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा.
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