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कानपुर वालों को भी नहीं पता होगा, ये 10 लोकल बिजनेस 'कानपुरियों' को बना रहे हैं करोड़पति

कानपुर से जुड़े कई लोगों ने अपनी अलग सोच से ऐसे बिजनेस खड़े कर दिए, जिनकी सफलता पर पहले लोगों को शंका थी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

उत्तर प्रदेश का कानपुर कई वजहों से फेमस है. यह यूपी का सबसे बड़ा शहर होने के साथ-साथ देश का एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र भी है. कानपुर प्रमुख तौर पर रासायनिक, कपड़ा और चमड़ा उद्योग के लिए जाना जाता है. जैसे-जैसे शहर का विकास हुआ है, यहां रोजगार के अवसर बढ़े हैं साथ ही लोग नए-नए बिजनेस में हाथ आजमाकर अच्छी-खासी कमाई भी कर रहे हैं. यहां हम आपको ऐसे 10 लोकल बिजनेस के बारे में बताने जा रहे हैं, जो कानपुरियों को करोड़पति बना रहे हैं.   

चढ़ावे के फूलों को बनाया कारोबार  
दो दोस्तों द्वारा शुरू किया गया स्टार्टअप Helpusgreen अपने इनोवेशन के लिए पहचाना जाता है. हेल्पअसग्रीन शहर भर के मंदिरों और मस्जिदों में चढ़ाए गए फूलों को इकट्ठा करता है. फिर उन्हें अगरबत्ती, साबुन और ईको-पैकेजिंग जैसे उत्पाद बनाने के लिए रीसायकल किया जाता है. इसके बाद तैयार उत्पादों को बाजार में बेच दिया जाता है. यह स्टार्टअप आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को रोजगार देता है और साथ ही गंगा नदी को कीटनाशकों से युक्त फूलों से प्रदूषित होने से भी बचाता है. हेल्पअसग्रीन की स्थापना 2015 में अंकित अग्रवाल और करण रस्तोगी ने की थी. दोनों को शुरुआत में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा, क्योंकि उनके बिज़नेस मॉडल की सफलता पर लोगों को विश्वास नहीं था. लेकिन आज इस स्टार्टअप की हर तरफ सराहना हो रही है.

3D प्रिंटिंग बनी कमाई का जरिया
Myobjectify कानपुर का एक ऐसा स्टार्टअप है, जो अपनी 3D प्रिंटिंग तकनीक विकसित करता है और अन्य कंपनियों को सेवाएं प्रदान करता है. इस स्टार्टअप की स्थापना 2013 में आईआईटी कानपुर में एक छोटी 3D प्रिंटिंग मशीन के साथ की गई थी. अपनी एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग 3D मशीनों के साथ, Myobjectify मेटल और पॉलिमर दोनों सल्यूशन प्रदान कर सकता है. Myobjectify की फाउंडर अंकित साहू, अर्पित साहू और उमंग केडिया हैं. अंकित और अर्पित इस समय कंपनी के निदेशक हैं जबकि उमंग Myobjectify के CFO की भूमिका संभाल रहे हैं. इस स्टार्टअप ने अपनी एक अलग पहचान बनाई है और तीनों फाउंडर्स को आर्थिक रूप से मजबूत किया है.

लोगों की परेशानी दूर कर हो रही कमाई 
मिस्टररूम (MrRoom) भी कानपुर के सफल स्टार्टअप में शामिल है. यह एक ऐसा प्लेटफॉर्म है, जो रेंटल रूम यानी मनचाही जगह पर किराए के कमरे खोजना बेहद आसान बना देता है. मिस्टररूम अपने प्लेटफ़ॉर्म पर पंजीकृत विभिन्न प्रकार के वेरीफाइड हॉस्टल और PG की जानकारी प्रदान करता है. इतना ही नहीं, स्टार्टअप इसके लिए कोई ब्रोकरेज चार्ज भी नहीं लेता. साथ ही किरायेदारों को अपना मासिक किराया ऑनलाइन मैनेज करने की सुविधा भी प्रदान करता है. कानपुर के लोगों की लाइफ आसान करके इसके फाउंडर अली अब्बास मोटी कमाई करते हैं. अली ने 2018 में मिस्टररूम की नींव रखी थी. दरअसल, उन्हें कॉलेज के दिनों में किराये के लिए कमरा ढूंढने में कई समस्याओं का सामना करना पड़ा था, इसलिए उन्होंने दूसरों को इस परेशानी से बचाने के लिए मिस्टररूम की स्थापना की. बता दें कि मिस्टररूम देश के उन 25 स्टार्टअप्स में से एक था, जिन्हें iBHubs स्टार्टअप स्कूल एक्सेलेरेटर प्रोग्राम, 2019 के लिए चुना गया था।

कैंपस में आया आइडिया और चला बिजनेस
कैंपस हाट (Campus Haat) एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है, जो देश भर के कॉलेज कैंपस में साथियों, निवासियों, दुकानदारों और सेवा प्रदाताओं के साथ एक मजबूत इंटर-कनेक्शन बनाकर छात्रों की डेली लाइफ की समस्याओं को दूर करता है. इसकी स्थापना 2017 में गुड्डू कुमार ने की थी. वह इसके फाउंडर के साथ-साथ सीईओ भी हैं. गुड्डु आईआईटी-कानपुर ग्रेजुएट हैं और उन्होंने कैम्पसहाट की शुरुआत उन वस्तुओं के पुन: इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए की है जिन्हें ऑनलाइन बेचा जा सकता है, किराए पर लिया जा सकता है और खरीदा जा सकता है यह फिर नेक कार्यों के लिए डोनेट किया जा सकता है.

कंपनियों को पसंद आया आइडिया   
आईआईटी-बॉम्बे ग्रेजुएट अमितेश मिश्रा और उत्तर प्रदेश टेक्निकल यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट निखिल तिवारी ने फरवरी 2014 में सोशियोटा (Sociota) को लॉन्च किया था. यह मुख्य रूप से सोशल मीडिया मैनेजमेंट, मोनिटरिंग, एनालेटिक्स, एंगेजमेंट, सोशलाइजेशन आदि पर आधारित कंपनी है. यह दूसरी कंपनियों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को मैनेज करती है और विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लॉग इन और लॉग आउट करने वाले लोगों पर नज़र रखती है. ट्राइडेंट एनालिटिकल सॉल्यूशंस सोशियोटा की पैरेंट कंपनी है. यह एक ही प्लेटफॉर्म पर कई फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन और Google+ अकाउंट इस्तेमाल करने और उन्हें प्रबंधित करने की सुविधा देती है. 

घर के दरवाजे पर पहुंचा रहे सर्विस    
CarCooper पूरे उत्तर भारत में लीडिंग डोरस्टेप कार सर्विस प्रोवाइडर्स में शामिल है. कंपनी योग्य और अनुभवी मैकेनिकों द्वारा मैकेनिक सर्विस प्रदान करती है. इसके साथ ही कंपनी सभी प्रकार के वाहनों के लिए पेशेवर ड्राइवर की सुविधा भी उपलब्ध कराती है. पेशेवर ड्राइवरों को कुछ घंटों से लेकर कुछ दिनों के लिए काम पर रखा जा सकता है. प्रशांत सिंह और ऋषभ सिंह कारकूपर के को-फाउंडर हैं और कानपुर के लोगों को उनके दरवाजे तक कार सेवाएं प्रदान करते हैं.

इन दोनों ने भी बनाई अलग पहचान
आर्यन एसेंशियल ऑयल्स (Aryan Essential Oils) कानपुर की कंपनी है. यह भारत में थोक नेचुरल एसेंसियल ऑयल के सबसे बड़े उत्पादकों और निर्माताओं में से एक है. कंपनी द्वारा निर्मित उत्पाद उच्च गुणवत्ता वाले हैं और पश्चिमी देशों में इनकी अच्छी डिमांड है. इसकी स्थापना 2014 में अजय दीक्षित की थी. इसी तरह, वेलनेसमॉन्क (Wellnessmonk) ने भी कानपुर में अच्छा नाम बना लिया है. इसकी स्थापना 2017 में हुई थी. कंपनी को पहले 'फार्मासिओनेट' के नाम से जाना जाता था, लेकिन 2019 में नाम बदलकर 'वेलनेसमॉन्क' कर दिया गया. वेलनेसमॉन्क हेल्थकेयर, वैलनेस, पर्सनल केयर, मदर और बेब केयर के साथ-साथ उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला पेश करती है. इसके अलावा, किराने का सामान, पेय पदार्थ और स्नैक्स जैसे घरेलू उत्पाद भी कंपनी बेचती है. वेलनेसमॉन्क 100% टेक्नोलॉजी-ड्रिवन स्टार्टअप है और इसके पास अपने वर्चुअल प्राइवेट सर्वर हैं.

आज विदेशों में भी है मौजूदगी
आईडीएल टेक्नोलॉजीज कानपुर की एक सॉफ्टवेयर कंपनी है. इसकी शुरुआत वर्ष 2013 में हुई थी. आज, आईटी और कंसल्टिंग सेक्टर में कंपनी विदेशों में भी अपनी उपस्थिति दर्शा रही है. IDL टेक्नोलॉजीज वैश्विक कंपनियों के लिए प्रौद्योगिकी-सक्षम व्यावसायिक समाधानों को परिभाषित, डिजाइन और वितरित करती है. आईडीएल टेक्नोलॉजीज डिजिटल सिग्नेचर, वेबसाइट और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, एसईओ/एसएमओ, बल्क SMS आदि जैसी विभिन्न सेवाएं प्रदान करती हैं. आशीष कुमार सिंह इस कंपनी के फाउंडर हैं.

Drone बन गया कमाई का साधन
आरव अनमैन्ड सिस्टम्स (Aarav Unmanned Systems) या AUS एक स्टार्टअप है, जो अन्य उद्यमों के लिए प्रोफेशनल्स ड्रोन सल्यूशन डेवलप करता है. स्टार्टअप का मुख्य फोकस ड्रोन इंटेलिजेंस, हार्डवेयर ऑप्टिमाइजेशन और डिजाइन इनोवेशन है. इस स्टार्टअप की शुरुआत 2013 में आईआईटी कानपुर से 4 दोस्तों ने की थी. AUS के संस्थापक निखिल उपाध्ये, सुहास बंशीवाला, विपुल सिंह और यशवंत रेड्डी हैं. AUS को कुछ प्रतिष्ठित वेंचर्स जैसे GrowX, 500 स्टार्टअप, स्टार्टअपXseed आदि का समर्थन प्राप्त है. इसी तरह से फूडमॉन्क कानपुर का एक स्टार्टअप है, जो रेस्टोरेंट और फूड बिजनेस को हर चीज को प्रबंधित करने का आसान तरीका प्रदान करता है. अपने टूल्स के साथ, व्यवसाय आसानी से अपने एनालिटिक्स पर नज़र रख सकते हैं और साथ ही फूडमॉन्क के ई-मेनू, ऑनलाइन भुगतान आदि सुविधाओं द्वारा बेहतर ग्राहक अनुभव हासिल कर सकते हैं. फूडमॉन्क के संस्थापक अभिषेक आईआईटी कानपुर ग्रेजुएट हैं. 


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