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इन 3 सरकारी कंपनियों पर लगने जा रहा है ताला, आज आएगा अंतिम फैसला!
तीन सरकारी कंपनियों के भविष्य को लेकर आज एक महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
मोदी सरकार (Modi Government) तीन सरकारी कंपनियों पर ताला लगाने जा रही है. इस संबंध में आज (23 अक्टूबर) एक बैठक हो रही है, जिसमें अंतिम फैसला लिया जा सकता है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मेटल्स एंड मिनरल्स ट्रेडिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (MMTC), स्टेट ट्रेडिंग कॉरपोरेशन (STC) और प्रोजेक्ट एंड इक्विपमेंट कॉरपोरेशन (PEC) को बंद करने की तैयारी है. पिछले साल सितंबर में इन तीनों कंपनियों ने मध्यस्थ एजेंसी का अपना दर्जा गंवा दिया था.
नई एंटरप्राइज पॉलिसी
दरअसल, मोदी सरकार ने गैर-रणनीतिक क्षेत्रों में पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (PSUs) के लिए नई एंटरप्राइज पॉलिसी के तहत ऐसा कर सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार ने पब्लिक सेक्टर कंपनियों के लिए नई एंटरप्राइज पॉलिसी (New Enterprise Policy) बनाई है. जिसके तहत यदि नॉन-स्ट्रैटजिक सेक्टर में निजीकरण का विकल्प व्यावहारिक नहीं है, तो PSUs को बंद किया जाएगा. सरकार की इस नीति से सरकारी कर्मचारियों में घबराहट का माहौल है. बता दें कि सरकारी कंपनियों को निजी हाथों में सौंपना मोदी गवर्नमेंट की महत्वकांक्षी योजनाओं में शामिल है.
SEBI ने की थी कार्रवाई
मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि अगस्त 2023 में बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने MMTC का स्टॉकब्रोकर लाइसेंस खत्म कर दिया था. ऐसा नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेज (National Spot Exchange Ltd) के साथ अवैध पेयर्स कॉन्ट्रैक्ट्स के चलते किया गया था. SEBI का कहना था कि MMTC ने जरूरी रेगुलेटरी अप्रूवल के बिना पेयर्स कॉन्ट्रैक्ट्स किए थे. गौरतलब है कि MMTC कॉमर्स मिनिस्ट्री के तहत काम करती है और इसमें सरकार की 99.33 प्रतिशत हिस्सेदारी है.
क्या करती हैं कंपनियां?
किसी जमाने में एमएमटीसी हाई ग्रेड आयरन, मैगनीज, क्रोम अयस्क सहित दूसरे वैल्यूएबल मेटल्स के आयात-निर्यात के लिए मध्यस्थ एजेंसी के रूप में काम करती थी. कंपनी के पास देश की सबसे बड़ी नॉन-ऑयल इम्पोर्टर का दर्जा भी था, लेकिन बाद में इसकी स्थिति खराब होती चली गई. फाइनेंशियल ईयर 2022-23 में कंपनी का प्रॉफिट 1076.07 करोड़ रुपए था. इसी तरह, STC खाद्य तेल, दलहन, चीन-गेहूं आदि के आयात में अहम भूमिका निभाती रही है. जबकि PEC मशीनरी और रेलवे इक्विपमेंट्स के आयात-निर्यात के लिए मध्यस्थ एजेंसी की भूमिका में काम करती रही है.
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