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25,000 करोड़ रुपये के गुमनाम शेयरों का नहीं कोई दावेदार, जानिए कैसे कर सकते हैं दावा!

सिर्फ स्टॉक्स में करीब 25,000 करोड़ रुपये का ऐसा इनवेस्टमेंट है, जिसका कोई दावेदार नहीं है। करीब इतना ही पैसा म्यूचुअल फंड की स्कीमों में है। इससे ज्यादा पैसा बैंकों के पास डिपॉजिट के रूप में पड़ा है

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

भारत में फाइनेंशियल सेक्टर काफी तेज गति से आगे बढ़ा रहा है. लेकिन, इसके साथ एक नई प्रॉब्लम सामने आई है. वह है ऐसा इनवेस्टमेंट का जिसका कोई दावेदार नहीं है. ऐसे करोड़ों रुपये स्टॉक्स, म्यूचुअल फंड्स, प्रोविडेंट फंड आदि में पड़े हैं, जिनका कोई दावेदार नहीं है. यह रकम अब लगभग 25000 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर गई है. इतनी विशाल रकम के शेयर्स पर कोई भी दावा नहीं कर रहा है. यह वित्तीय सिस्टम के लिए समस्या बन चुका है.

25,000 करोड़ रुपये के शेयरों का कोई नहीं दावेदार

इनवेस्टर एजुकेशन एंड प्रोटेक्शन फंड (IEPF) के डेटा के मुताबिक, मार्च 2023 में कुल 25,000 करोड़ रुपये के शेयरों का कोई दावेदार नहीं था. एक्सपर्ट्स का कहना है कि इंडिया में इनवेस्टमेंट के दावेदार नहीं होने की कई वजह हैं. इसमें पहला है जागरूकता का अभाव. कई इनवेस्टर्स खासकर फाइनेंशियल मार्केट्स के नए इनवेस्टर्स के बीच इस बात को लेकर जागरूकता नहीं है कि कंपनियों और कस्टोडियंस के पास अपनी इंफॉर्मेशन को अपडेटेड रखना कितना जरूरी है.

इन वजहों से अभी तक फंसा पड़ा है पैसा 

एक सरकारी संस्था इनवेस्टर एजुकेशन एंड प्रोटेक्शन फंड (IEPF) के आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2023 तक देश में 25 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर्स गुमनाम पड़े हुए थे. इन्हें सही लोगों तक पहुंचाने के लिए एक प्रभावी सिस्टम बनाने की सख्त जरूरत है. इस गुमनाम निवेश के पीछे कई कारण हैं. कई निवेशक अपनी कॉन्टैक्ट जानकारी को अपडेट नहीं करते. इसके अलावा कई बार लोगों के पते भी बदल जाते हैं. बैंक अकाउंट बंद करे देना और नॉमिनी की जानकारी दिए बिना निवेशक की मृत्यु भी फंसे हुए निवेश के बड़े कारण हैं. इसके चलते उन्हें डिविडेंड का लाभ भी नहीं मिल पाता है. साथ ही कई निवेशकों के पास अभी भी फिजिकल शेयर हैं, जो कि अब अमान्य घोषित हो चुके हैं. इन्हें अभी तक डीमैट अकाउंट में ट्रांसफर नहीं करवाया गया है.

बैंक और EPFO जैसे संस्थान भी हैं परेशान 

ऐसा निवेश न सिर्फ आपको लाभ मिलने से वंचित करता है बल्कि वित्तीय सिस्टम के लिए भी परेशानी खड़ा करता है. IEPF के आंकड़ों के अनुसार, सिर्फ म्युचुअल फंड में ही लगभग 35 हजार करोड़ रुपयों पर कोई दावा नहीं कर रहा है. इंश्योरेंस सेक्टर की सबसे बड़ी कंपनी LIC के पास ही लगभग 21500 करोड़ रुपये अनक्लेमड पड़े हुए हैं. ठीक इसी तरह प्राइवेट कंपनियों के पास भी ऐसी बड़ी राशि है. EPFO से मिली जानकारी के अनुसार, उनके पास भी लगभग 48000 करोड़ रुपये बिना किसी दावे के पड़े हुए हैं. RBI के अनुसार, बैंकों के पास भी लगभग 62000 करोड़ रुपये मौजूद हैं.

कैसे मिल सकता है यह पैसा?

कुछ कंपनियां अनक्लेम्ड इनवेस्टमेंट या डिपॉजिट की समस्या के समाधान के लिए आगे आई हैं. ये कंपनियां अनक्लेम्ड इनवेस्टमेंट रिकवरी में स्पेशियलाइज्ड होती हैं. ये इंडिविजुअल और कंपनियों को अपनी सेवाएं देती हैं. इस सेवा में इनवेस्टमेंट आइडेंटिफिकेशन, डॉक्यूमेंट कलेक्शन और वेरिफिकेशन आदि शामिल होता है. ये कंपनियां उस कंपनी या रेगुलेटरी बॉडी से बातचीत करती हैं, जिनमें इनवेस्ट्स का पैसा पड़ा होता है. ये कंपनियां प्रदर्शन आधारित मॉडल पर काम करती हैं. ये रिकवर किए गए अमाउंट का एक हिस्सा फीस के रूप में लेती हैं.
 


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