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ऑफिस स्पेसेस के दायरे में होने जा रहा है बड़ा इजाफा, ये रही इसकी वजह
देश की मजबूत अर्थव्यवस्था का फायदा सिर्फ किसी एक तरह की इंडस्ट्री को ही नहीं मिलने जा रहा है बल्कि ऑफिस स्पेसेस मुहैया कराने वाली कंपनियों के लिए भी कारोबार बढ़ने जा रहा है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
कहा जाता है मजबूत अर्थव्यवस्था कई तरह के फायदे लेकर आती है. इससे सिर्फ उद्योगों की रीढ़ ही मजबूत नही होती बल्कि उनके लिए अवसर भी बढ़ते हैं. रियल स्टेट को लेकर काम करने वाली संस्था कोलियर्स का डाटा बताता है कि भारतीय शीर्ष 6 बाजारों में ऑफिस स्पेस मुहैया कराने के मामले में इस साल उनमें बड़ा इजाफा देखने को मिल सकता है. इस साल इन शहरों में 40 से 45 मिलियन वर्ग फुट की सकल लिजिंग का अनुमान जताया जा रहा है. कोलियर्स ने इससे पहले जो अनुमान जताया था ये उससे 10 से 15 प्रतिशत ज्यादा है.
आखिर क्या है इस बढ़ोतरी की वजह?
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कोलियर्स कंसल्टेंसी के अनुसार इस इजाफे के पीछे की जो सबसे बड़ी वजह है वो ये है कि देश में अलग-अलग इंडस्ट्री के लिए मांग में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. साथ ही इसके पीछे की एक वजह ये भी है कि वैश्विक स्तर पर आर्थिक पुर्वानुमान अप्रैल में जताए गए पुर्वानुमान से ज्यादा रहे हैं. इससे अमेरिका, यूरोप और ब्रिटेन में मामूली सुधार देखने को मिला है. रिपोर्ट कह रही है कि लगातार हो रहे इस सुधार ने बाहरी क्षेत्रीय मांग को पुनर्जीवित करने का काम किया है.
किन-किन शहरों से जुटाया गया डाटा
कोलियर्स की रिपोर्ट के अनुसार इस रिपोर्ट के लिए 6 शहरों से डाटा जुटाया गया है. जिन शहरों से डाटा जुटाया गया है उनमें दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, बैंग्लूरु, चेन्नई, पुणे, और हैदराबाद शामिल हैं. रिपोर्ट बताती है कि इस साल मार्च 31 तक इन शहरों में 10.1 मिलियन वर्ग फीट जमीन लीज पर दी गई थी जबकि अगली तिमाही में इसमें लगभग 40 प्रतिशत का इजाफा देखने को मिला है. अगली तिमाही में ये 14.6 मिलियन वर्ग फीट तक जा पहुंचा है. रिपोर्ट ये भी कहती है कि इसकी बढ़ोतरी की वजह बाजार के इमोशन में सुधार और घरेलू अर्थव्यवस्था में स्पष्ट उछाल देखने को मिल रहा है.
किस शहर में पैदा हुई कितनी डिमांड?
जिन छ शहरों से इसके लिए डाटा जुटाया गया है उनमें डिमांड में बदलाव देखें तो बेंग्लुरू में क्वार्टर वन में 3.2 प्रतिशत की डिमांड देखने को मिली जबकि क्वार्टर टू में ये .5 प्रतिशत बढ़कर 3.4 प्रतिशत तक जा पहुंची. इसी तरह से दिल्ली एनसीआर में पहली क्वार्टर में मांग 2.2 प्रतिशत थी जो दूसरे क्वार्टर में 3.1 प्रतिशत तक जा पहुंची. इसमें 41 प्रतिशत का बदलाव देखने को मिला. चेन्नई में पहली क्वार्टर में मांग 1.6 प्रतिशत थी जो दूसरे क्वार्टर में 3.3 प्रतिशत तक जा पहुंची, हैदराबाद में पहली क्वार्टर में मांग 1.3 प्रतिशत थी जो दूसरे क्वार्टर में 1.5 प्रतिशत तक जा पहुंची, मुंबई में पहली क्वार्टर में मांग 1.0 प्रतिशत थी जो दूसरे क्वार्टर में 1.6 प्रतिशत तक जा पहुंची, पुणे में पहली क्वार्टर में मांग 0.8 प्रतिशत थी जो दूसरे क्वार्टर में 1.8 प्रतिशत तक जा पहुंची और पूरे भारत में ये मांग पहली क्वार्टर में मांग 10.1 प्रतिशत थी जो दूसरे क्वार्टर में 14.6 प्रतिशत तक जा पहुंची.
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