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जलवायु समस्‍याओं से निपटने के लिए प्रकृति आधारित समाधान करने की जरूरत: अमिताभ कांत 

जलवायु अनुकूलन और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का सही से सामना करने के लिए लक्ष्‍य ये होना चाहिए कि सहयोगी गठबंधनों को बढ़ावा दिया जाए. 

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

पिछले लंबे समय से जलवायु परिवर्तन को लेकर कई ऐसी स्‍टडी सामने आई हैं जिन्‍होंने सभी को सोचने पर मजबूर किया है. इसी कड़ी में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का सफलता से सामना करने और उन समस्‍याओं के लिए प्रकृतिजनित समाधान तलाशने के मकसद से आगा खान एजेंसी फॉर हैबिटेट (एकेएएच) इंडिया की ओर से नई दिल्‍ली में क्लाइमेट एक्शन वर्कशॉप सीरीज का आयोजन किया गया. इस सीरीज में इस क्षेत्र के कई जानकार लोगों ने हिस्‍सा लिया. इस चर्चा में सिविल क्षेत्र में काम करने वाले लोगों से लेकर सरकार के स्‍तर तक पॉलिसी मेकिंग करने वाले कई एक्‍सपर्ट ने भाग लिया. 

एमओयू पर भी किए गए हस्‍ताक्षर 
इस मौके पर आगा खान एजेंसी फॉर हैबिटेट इंडिया और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स (एनआईयूए) ने जलवायु लचीलापन बनाने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए. इस साझेदारी के माध्यम से, दोनों संगठन अपनी साझा सोच  के साथ, जलवायु अनुकूलन, शहरी आवास प्रबंधन, आपदा जोखिम लचीलापन बनाने, प्रकृति-आधारित समाधान और जैव विविधता (बायोडायवर्सिटी) को बढ़ावा देने के लिए एक्‍शन-बेस्‍ड रिसर्च, चर्चा आयोजित करने और गठबंधन समूह बनाने पर ध्यान केंद्रित करेंगे. 

प्रकृति आधारित समाधान पर करना है काम 
इस मौके पर जी20 शेरपा, भारत सरकार (पूर्व सीईओ, नीति आयोग) अमिताभ कांत, ने कहा, देश के तटीय क्षेत्र जहां जलवायु परिवर्तन के गंभीर परिवर्तन सबसे पहले सामने आते हैं ऐसे तटीय शहर राष्ट्रीय आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में काम करते हैं, और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की मेजबानी करते है. उन्‍होंने कहा कि प्रकृति-आधारित समाधानों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, और हम इसे शहरी और तटीय क्षेत्रों के लिए भारत की लचीलापन और अनुकूलन रणनीति का हिस्सा बना रहे हैं.

लो कार्बन डेवलपमेंट और जलवायु परिवर्तन का सही से सामना करने वाले बुनियादी ढांचे को प्राथमिकता देते हुए आपदा-रोधी समुदायों की आवश्यकता है. प्रकृति-आधारित समाधानों ने निवेश पर बेहतर रिटर्न दिया है और इसे बढ़ाया जा सकता है. मुझे भरोसा है कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए सहयोग और आपसी ताल मेल महत्वपूर्ण है. हमें इनोवेटिव फाइनेंसिंग का उपयोग करना चाहिए, और हमें यह तय करना चाहिए कि सबसे बेहतर तरीकों तक पहुंच के साथ-साथ समुदायों की भी महत्वपूर्ण भूमिका हो. 

 क्‍या बोले संस्‍था के जीएम?  
आगा खान एजेंसी फॉर हैबिटेट के जनरल मैनेजर और (वर्ल्‍ड बैंक इंडिया के पूर्व डायरेक्टर) ओन्नो रूहल ने कहा कि, ‘भारत में अपनी इनोवेटिव और लागत प्रभावी जुगाड़ रणनीति का लाभ उठाकर क्लाइमेट एक्शन में चैंपियन बनने और कम संसाधनों का उपयोग करते हुए अधिक हासिल करने के लिए इंजीनियरिंग समाधान विकसित करने की क्षमता है.  दक्षिण और पश्चिम एशिया के लिए C40 शहरों की क्षेत्रीय निदेशक श्रुति नारायण ने एक मास्‍टरक्‍लास का नेतृत्‍व किया. 

क्‍या बोलीं संस्‍था की सीईओ? 
एक महत्वपूर्ण व व्यावहारिक वर्कशॉप के बाद, आगा खान एजेंसी फॉर हैबिटेट इंडिया की चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर, प्रेरणा लांगा ने कहा कि, ‘आगा खान एजेंसी फॉर हैबिटेट जलवायु संकट से निपटने की आवश्यकता को पहचानती है और जलवायु और शहरी लचीलेपन को बढ़ावा देने के लिए जरूरी कामों की वकालत करती है. ये वर्कशॉप सहयोग और इनोवेशन के जरिए सकारात्मक परिवर्तन लाने के हमारे साझा समर्पण को मजबूत करती हैं. अमिताभ कांत की व्यावहारिक टिप्पणियों से प्रेरित होकर, आगा खान एजेंसी फॉर हैबिटेट को चर्चाओं का नेतृत्व करने और समुदायों को ऐसे भविष्य की ओर ले जाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है, जिसमें जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का बेहतर तरीके से सामना किया जा सके. उन्‍होंने कहा कि क्लाइमेट एक्शन वर्कशॉप सीरीज का उद्घाटन सत्र 22 नवंबर, 2023 को मुंबई में हुआ, जिसे सीएसआर प्रतिनिधियों और सरकारी निकायों से सफलता और प्रशंसा मिली.
 


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