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Supply Chain में कास्ट कटिंग का दबाव वेस्ट वर्ल्ड पर ही नहीं बल्कि भारत पर भी है
कुछ कंपनियां जहां सप्लाई चेन को मैनेज नहीं कर पाई उन्हें बैंकरप्सी का सामना लेकिन जिन्होंने पहले इसे समझ लिया वो आगे बढ़ गई.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
बिजनेस वर्ल्ड के सप्लाई चेन इवेंट में इस इंडस्ट्री के कई मशहूर लोगों ने अपनी बात कही. इस मौके पर Mamaearth, के Senior Vice President Supply Chain अविनाश धागत The Good Glamm Group के Chief Supply Chain Officer, सम्राट सेहगल, India and SEA, Shipsy के Vice President, जया रोहरा, SAP India के Head of Spend Management अश्विनी नारंग मौजूद रहे.
सभी कॉस्ट कटिंग को लेकर काम कर रहे हैं
India and SEA, Shipsy के Vice President, जया रोहरा ने कहा कि मैं सोचती हूं कि ये एक बहुत अच्छा विषय है कि क्या सप्लाई चेन इंडस्ट्री तकनीक के साथ बदलाव के लिए तैयार है. अगर हम अपने देश के संदर्भ में इसकी बात करें तो आज हम कई चीजों में लीड कर रहे हैं. उनमें से एक सप्लाई चेन के ऑटोमेशन का मामला भी है. मुझे लगता है कि ये आज सिर्फ एक मिथ रह गया है कि वेस्टर्न वर्ल्ड ही केवल कॉस्ट को कम करने के लिए कोशिश कर रहा है, वो भी इनोवेशन के जरिए, मैं मानती हूं कि हम इंडियन इकोनॉमी में भी हम इसी तरह का कॉस्ट कम करने का दबाव महसूस कर रहे हैं. जया ने कहा कि इनोवेशन की शुरुआत विजन से होती है जिसमें कुछ लोगों ने कोविड से पहले इसे देखा. उन्होंने कहा कि कोविड के बाद ये सभी के लिए जरूरी हो गया है. अब वो भले ही लॉजिस्टिक हो, मैन्यूफैक्चारिंग हो या सर्विसिंग हो.
जो मैनेज नहीं कर पाए वो बैंकरप्स हो गए
The Good Glamm Group के Chief Supply Chain Officer, सम्राट सेहगल ने कहा कि इस सवाल को सुनने के साथ ही मेरे दिमाग में कुछ कंपनियों का नाम सामने आ रहा है उनमें जेसी पैनी, वर्जिन अटलांटिक, ये वो कंपनियां हैं जो कोविड के समय में बैंकरप्ट हो गई. कंपनी अलग-अलग इश्यू का सामना नहीं कर पाती हैं क्योंकि वो फंड को मैनेज नहीं कर पाती हैं. कुछ कंपनियां इसलिए बैंकरप्ट हो गई क्योंकि वो अपनी सप्लाई चेन को मैनेज नहीं कर पाई. कुछ कंपनियां ऐसी होती हैं जो सप्लाई चेन को कोर कंपीटेंस की तरह देख रही है. कुछ कंपनियां ऐसी होती हैं जो सप्लाई चेन के लिए लंबे समय से निवेश कर रही हैं. दूसरी तरह की कंपनियां वो होती हैं जो डिमांड को मैनेज करके कास्ट को रिडयूस करने की कोशिश करती हैं. तीसरी तरह की कंपनियां वो होती हैं जो इस बारे में किसी तरह का विचार नहीं करती हैं. इस बीच कई सीईओ ने इस बात को समझा कि बाजार में माल उनके ब्रैंड की वजह से नहीं बल्कि सप्लाई चेन की वजह से चल रहा है.
कुछ लोग होते हैं जो परेशानियों को भांप जाते हैं
Mamaearth, के Senior Vice President Supply Chain अविनाश धागत ने कहा कि सबसे अहम बात ये है कि सप्लाई चेन में बाधा दो तरह की वजहों से पड़ती है. पहली वो होती है जो बाहरी कारणों से बाधा पैदा होती है जैसे कोविड. दूसरी वजह ये है कि इन हाउस कारणों से पैदा होती है. बाधाएं किसी भी तरह की हो वो सप्लाई चेन से लेकर कंपनी पर परेशानियों को बढ़ा देता है. लेकिन मैं फिर भी मानता हूं कि कुछ बाधाएं ऐसी होती है जिन्हें हम पहले से रोक सकते हैं. आप साइक्लोन को नहीं रोक सकते या भांप सकते, आप कोविड को नहीं भांप सकते हैं. इस तरह के सेंस को भांपने की जो क्षमता होती है वो एक तरह से इनसे निपटने की योग्यता भी बनती है. उन्होंने कहा कि अगर आप किसी समस्या को भांप जाते हैं तो आप कैसे उसका समाधान कैसे कर पाएंगे.
इंवेंट्री सबसे बड़ी समस्या बनकर सामने आई है
SAP India के Head of Spend Management अश्विनी नारंग ने कहा कि सप्लाई चेन को लेकर हुई एक स्टडी बताती है कि 15 साल पहले हर 8 साल में सप्लाई चेन में डिस्रपसन होता था. मैकेंजी और एस एपी ने एक दूसरी स्टडी में पाया कि हर दो साल में सप्लाई चेन में परेशान आती है. लेकिन पिछले 6 महीने में बिना किसी स्टडी के हम ये कह सकत हैं कि हर 6 महीने में सप्लाई चेन बाधित हो रही है.
कल मैं अपनी ही कंपनी में बात कर रहा था वो कह रहे थे कि इंवेंट्री सबसे बडी समस्या बनकर सामने आ रहा है. अगर हम इस चर्चा को थोड़ा और डॉयवर्सिफाइ करें तो पता चलता है कि क्या आप अपने सप्लायर के सप्लायर को जानते हैं. 91 प्रतिशत सप्लायर अपने टियर वन सप्लायर को जानते हैं. सवाल ये भी पैदा होता है कि आप में कितने लोगों का स्पेंड ग्रीन चैनल से आता है.
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