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स्विच मोबिलिटी और सेल्सियस की साझेदारी, 10 वर्षों में लॉजिस्टिक्स सेक्टर को ग्रीन व्हीकल्स में बदलने का लक्ष्य
यह साझेदारी केवल व्यावसायिक नहीं, बल्कि भारत के सस्टेनेबल ट्रांसपोर्टेशन मिशन की दिशा में एक ठोस प्रयास है.
रितु राणा 8 months ago
भारत में हरित परिवहन को गति देने के लिए स्विच मोबिलिटी और सेल्सियस लॉजिस्टिक्स ने हाथ मिलाया है. दोनों कंपनियों ने देश की सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक कोल्ड चेन फ्लीट लॉन्च करने की घोषणा की है. इस साझेदारी के तहत 350 इलेक्ट्रिक रीफर ट्रक तैनात किए जाएंगे, जो देशभर के शहरों में नाशवंत वस्तुओं की अंतिम मील (लास्ट माइल) डिलीवरी सुनिश्चित करेंगे.
पहले चरण में कई शहरों में चार्जिंग नेटवर्क की शुरुआत
कंपनी के अनुसार, परियोजना के पहले चरण में प्रमुख शहरों में चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे. इसके बाद लखनऊ, चेन्नई, इंदौर और अहमदाबाद में दूसरे चरण का विस्तार होगा. अंतिम चरण में देशभर के अन्य शहरों को भी इस पहल से जोड़ा जाएगा, जिससे एक एकीकृत ग्रीन कोल्ड चेन नेटवर्क तैयार होगा.
ग्रीन मोबिलिटी और कार्बन क्रेडिट्स पर फोकस
सेल्सियस लॉजिस्टिक्स के फाउंडर और सीईओ स्वरूप बोस ने बताया कि यह पहल ग्रीन मोबिलिटी मिशन का हिस्सा है. कंपनी एक ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित कर रही है, जहां ग्राहक कार्बन क्रेडिट्स का लाभ उठा सकेंगे. इसके माध्यम से व्यवसायिक संस्थान अपनी ESG नीतियों (Environmental, Social, Governance) को और मजबूत कर सकेंगे. कंपनी का लक्ष्य है कि अगले 5 से 10 वर्षों में लॉजिस्टिक्स सेक्टर को बड़े पैमाने पर ग्रीन व्हीकल्स में परिवर्तित किया जाए.
'मेक इन इंडिया’ के तहत उत्तर प्रदेश में नया संयंत्र
स्विच मोबिलिटी के सीईओ गणेश मणि ने कहा स्विच मोबिलिटी की उपस्थिति वर्तमान में 57 देशों में है. कंपनी विश्वस्तरीय इलेक्ट्रिक वाहनों और वैकल्पिक ऊर्जा प्रौद्योगिकियों के विकास पर काम कर रही है. अब तक 1,500 से अधिक इलेक्ट्रिक वाहन सड़कों पर चल रहे हैं, जिन्होंने 200 मिलियन किलोमीटर से ज्यादा की ईवी मोबिलिटी हासिल की है.
गणेश मणि ने बताया कि उसके सभी इलेक्ट्रिक वाहन भारत में ही बनाए जा रहे हैं. कंपनी जल्द ही लखनऊ में नया मैन्युफैक्चरिंग प्लांट शुरू करने जा रही है. फिलहाल कंपनी के 17 वैश्विक संयंत्रों में से 11 भारत में स्थित हैं. कंपनी का कहना है कि यह कदम ‘मेक इन इंडिया’ पहल को मजबूत करेगा और देश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के लिए स्थानीय विनिर्माण क्षमता. बढ़ाएगा.
लास्ट माइल कोल्ड डिलीवरी की चुनौती होगी आसान
स्वरूप बोस ने बताया कि भारत में अभी भी नाशवंत वस्तुओं की लास्ट माइल डिलीवरी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है. कोविड-19 काल में भी यह समस्या प्रमुख रूप से सामने आई थी. दरअसल, अभी छोटे और बड़े शहरों में कोल्ड डिलीवरी इंफ्रास्ट्रक्चर अभी अपर्याप्त है. नई फ्लीट के जरिए कंपनी टियर-1 से लेकर टियर-3 शहरों तक अपनी उपस्थिति मजबूत करेगी, जिससे देश में एक विश्वसनीय कोल्ड सप्लाई चेन ईकोसिस्टम विकसित किया जा सकेगा.
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