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डिजिटल पेमेंट के लिए नया सुरक्षा फ्रेमवर्क अप्रैल 2026 से होगा लागू, विशेषज्ञों ने बताया भविष्य के लिए निर्णायक कदम
दो-फैक्टर प्रमाणीकरण और डायनामिक वैलिडेशन जैसी आधुनिक सुरक्षा प्रणालियाँ न केवल धोखाधड़ी को रोकने में मदद करेंगी, बल्कि भारत को सुरक्षित डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व प्रदान करने की दिशा में ले जाएंगी.
रितु राणा 8 months ago
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश में डिजिटल भुगतान सुरक्षा को नई ऊंचाई देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होने वाले इस नए ढांचे के तहत अब हर घरेलू डिजिटल लेनदेन में दो-कारक प्रमाणीकरण (2FA) अनिवार्य कर दिया गया है. यह दिशा-निर्देश 25 सितंबर को अधिसूचित किए गए थे, जिनका उद्देश्य उपभोक्ता संरक्षण को मजबूत करना और लेनदेन को धोखाधड़ी से बचाना है. RBI के इस फैसले को लेकर उद्योग जगत में उत्साह है, और इसे डिजिटल अर्थव्यवस्था को सुरक्षित करने की दिशा में एक बदलावकारी पहल माना जा रहा है.
क्या है नया नियम?
नए ढांचे के अनुसार, हर लेनदेन में कम से कम दो प्रमाणीकरण फैक्टर जरूरी होंगे :
1. जो उपयोगकर्ता जानता है (जैसे पासवर्ड या पिन),
2. जो उसके पास है (जैसे OTP या कार्ड),
3. या जो वह खुद है (जैसे फिंगरप्रिंट या फेस रिकग्निशन).
इनमें से कम से कम एक फैक्टर डायनामिक होना चाहिए यानी हर ट्रांजैक्शन के लिए नया और रियल-टाइम वैलिडेटेड. इसके अलावा, बैंकों और पेमेंट कंपनियों को अब ट्रांजैक्शन के जोखिम स्तर के आधार पर अतिरिक्त सुरक्षा जांच की भी अनुमति दी गई है. सीमा-पार कार्ड-नॉट-प्रेजेंट (CNP) ट्रांजैक्शन के लिए यह नियम 1 अक्टूबर 2026 से लागू होगा, जिसमें कार्ड जारीकर्ताओं को जोखिम-आधारित प्रमाणीकरण प्रणाली अपनानी होगी.
सुरक्षा और सुविधा के बीच सही संतुलन
Phi Commerce के हेड ऑफ पेमेंट्स और को-फाउंडर राजेश लोन्धे ने कहा "डिजिटल भुगतान प्रमाणीकरण पर RBI का फ्रेमवर्क यह सुनिश्चित करेगा कि सुरक्षा भारत में डिजिटल भुगतान की तेज़ी से बढ़ती रफ्तार के साथ तालमेल बनाए रखे. एसएमएस आधारित OTP अभी भी प्रमुख भूमिका में है, लेकिन जैसे-जैसे UPI, कार्ड और वॉलेट ट्रांजैक्शन बढ़ते हैं, और अधिक जोखिम-आधारित उपायों की ज़रूरत है. यह नया नियम बायोमेट्रिक्स, डिवाइस टोकन और AI आधारित प्रमाणीकरण को अपनाने का रास्ता खोलेगा."
समय की जरूरत है यह बदलाव
Prophaze Technologies के सह-संस्थापक और COO लक्ष्मी दास ने कहा "RBI का यह कदम डिजिटल इकोनॉमी को सुरक्षित करने की दिशा में एक ज़रूरी और समयानुकूल पहल है. जैसे-जैसे भुगतान सहज हो रहे हैं, वैसे-वैसे जोखिम भी बढ़ते जा रहे हैं. यह बदलाव बैंकों और फिनटेक कंपनियों को AI-संचालित एप्लिकेशन सिक्योरिटी, API प्रोटेक्शन और रियल-टाइम थ्रेट एनालिटिक्स जैसी तकनीकों को अपनाने में मदद करेगा."
अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुरक्षा की ओर बढ़ता भारत
Acronis भारत और दक्षिण एशिया के जनरल मैनेजर राजेश छाबड़ा ने कहा "RBI ने डिजिटल भुगतान की सबसे अहम समस्या यानी प्रमाणीकरण की स्थिरता को सीधे संबोधित किया है. अब OTP से आगे बढ़कर बायोमेट्रिक्स, हार्डवेयर टोकन और संदर्भ आधारित चेक्स को बढ़ावा मिलेगा. यह भारत की भुगतान संरचना को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाएगा. जोखिम-आधारित प्रमाणीकरण से लेनदेन की प्रकृति, डिवाइस पैटर्न और उपयोगकर्ता व्यवहार का विश्लेषण संभव होगा, जिससे असली ग्राहकों को असुविधा न हो और फ्रॉड रोका जा सके."
MSMEs के लिए चुनौती, लेकिन अवसर भी
Getepay के संस्थापक प्रवीण शर्मा ने कहा "लगभग 69% MSMEs पहले ही डिजिटल वॉलेट या मोबाइल पेमेंट का इस्तेमाल कर रहे हैं. लेकिन मजबूत प्रमाणीकरण को अपनाना उनके लिए एक बड़ा बदलाव होगा, खासकर उन व्यापारियों के लिए जो तकनीकी रूप से कम सशक्त हैं. यह बदलाव जरूरी है क्योंकि यह ग्राहकों का भरोसा बढ़ाएगा, साइबर धोखाधड़ी से सुरक्षा देगा और व्यवसाय की निरंतरता सुनिश्चित करेगा. हम MSMEs को इस बदलाव के लिए तैयार कर रहे हैं और उन्हें डिजिटल विकास के नए अवसरों की ओर ले जा रहे हैं."
क्या बदलेगा आम उपयोगकर्ता के लिए?
OTP और PIN जैसे मौजूदा तरीकों के साथ अब धीरे-धीरे बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन, टोकनाइजेशन और AI आधारित सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा. अगर कोई लेनदेन बिना उचित प्रमाणीकरण के पूरा हो जाता है और उपभोक्ता को नुकसान होता है, तो पूरा दायित्व बैंक या पेमेंट प्रोवाइडर का होगा, और ग्राहक को पूर्ण मुआवजा मिलेगा. यह प्रणाली उपभोक्ता सुरक्षा, डेटा गोपनीयता और धोखाधड़ी की रोकथाम में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी.
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