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FY27 में निवेश चक्र को मिलेगी नई रफ्तार, सार्वजनिक कैपेक्स में उछाल से सुधार की उम्मीद: Icra

ICRA ने कहा कि FY27 के कैपेक्स लक्ष्य में हुई बढ़ोतरी का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा राज्यों को 50 वर्ष के ब्याज-मुक्त पूंजीगत सहायता आवंटन में वृद्धि से आया है, जिसे FY26 के 1.5 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2.0 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 7 months ago

ICRA की ताजा रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2027 (FY27) में भारत का निवेश चक्र फिर से गति पकड़ सकता है. एजेंसी का कहना है कि सार्वजनिक पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) में तेज वृद्धि और अमेरिका द्वारा टैरिफ में कमी से निर्यात प्रतिस्पर्धा बेहतर होगी, जिससे निवेश गतिविधियों को मजबूती मिलेगी.

सार्वजनिक कैपेक्स में दो अंकों की बढ़ोतरी

रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार ने FY27 के लिए पूंजीगत व्यय बजट को FY26 के संशोधित अनुमान की तुलना में 11.5 प्रतिशत बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये कर दिया है. वहीं, परिसंपत्ति निर्माण के लिए अनुदान और केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों के आंतरिक अतिरिक्त-बजटीय संसाधनों को मिलाकर कुल संयुक्त पूंजीगत व्यय 19.6 प्रतिशत बढ़कर 22 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है.

ICRA ने कहा कि FY27 के कैपेक्स लक्ष्य में हुई बढ़ोतरी का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा राज्यों को 50 वर्ष के ब्याज-मुक्त पूंजीगत सहायता आवंटन में वृद्धि से आया है, जिसे FY26 के 1.5 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2.0 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है. इससे परियोजनाओं के क्रियान्वयन की अधिक जिम्मेदारी राज्य सरकारों पर आएगी.

वैश्विक व्यापार माहौल में सुधार

एजेंसी ने कहा कि अमेरिका द्वारा टैरिफ दरों को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत किए जाने और यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते से भारतीय निर्यातकों को एशियाई प्रतिस्पर्धियों पर बढ़त मिल सकती है. टैरिफ को लेकर स्पष्टता बढ़ने से माल निर्यात को समर्थन मिलेगा और निजी क्षेत्र के पूंजीगत व्यय को प्रोत्साहन मिल सकता है, जो अब तक विभिन्न क्षेत्रों में असमान रहा है.

निवेश संकेतकों में मिश्रित रुझान

FY26 की तीसरी तिमाही (Q3) में उच्च-आवृत्ति संकेतकों की तस्वीर मिश्रित रही, हालांकि दूसरी तिमाही (Q2) की तुलना में सुधार दिखा. निवेश से जुड़े 11 में से 7 संकेतकों में साल-दर-साल बेहतर प्रदर्शन दर्ज किया गया. इनमें मशीनरी एवं उपकरणों और वाणिज्यिक वाहनों के नेतृत्व में पूंजीगत वस्तुओं का उत्पादन, सीमेंट उत्पादन, अवसंरचना ऋण, मध्यम और भारी वाणिज्यिक वाहनों का पंजीकरण, इंजीनियरिंग वस्तुओं का आयात, राज्यों का पूंजीगत व्यय एवं शुद्ध ऋण वितरण, तथा स्टाम्प शुल्क संग्रह शामिल रहे.

हालांकि, अवसंरचना एवं निर्माण वस्तुओं के उत्पादन की वृद्धि दर में नरमी आई. तैयार इस्पात की खपत, इंजीनियरिंग वस्तुओं का निर्यात और केंद्र का पूंजीगत व्यय Q3 में कमजोर रहे, जिसका एक कारण वित्त वर्ष की पहली छमाही में अग्रिम खर्च (फ्रंटलोडिंग) बताया गया.

FY26 में कैपेक्स लक्ष्य में कटौती

केंद्र सरकार ने FY26 के पूंजीगत व्यय लक्ष्य को 11.2 लाख करोड़ रुपये से घटाकर 11.0 लाख करोड़ रुपये कर दिया है. इससे Q4 FY26 में साल-दर-साल 16 प्रतिशत की गिरावट का संकेत मिलता है. ICRA के अनुसार, Q3 में 23.4 प्रतिशत की गिरावट के बाद यह कटौती अंतिम तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि पर दबाव डाल सकती है.

नई परियोजनाओं में तेजी, पूर्णता में सुस्ती

इसके बावजूद, नई परियोजना घोषणाएं मजबूत रहीं. Q3 FY26 में नई परियोजनाएं 11.2 लाख करोड़ रुपये के तीन-तिमाही उच्च स्तर पर पहुंच गईं, जो Q2 के 9.3 लाख करोड़ रुपये से अधिक और Q3 FY25 के 11.0 लाख करोड़ रुपये से थोड़ा ऊपर रहीं. निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी 9.6 लाख करोड़ रुपये रही, जो किसी भी तीसरी तिमाही के लिए अब तक का उच्चतम स्तर है, जबकि सरकारी क्षेत्र के प्रस्ताव 1.6 लाख करोड़ रुपये पर सीमित रहे.

हालांकि, परियोजनाओं की पूर्णता Q3 में घटकर 1.8 लाख करोड़ रुपये के चार-तिमाही निचले स्तर पर आ गई. FY26 के पहले नौ महीनों में औसत पूर्णता दर 2.1 लाख करोड़ रुपये रही, जो FY22 से FY24 की समान अवधि के 1.6–1.9 लाख करोड़ रुपये से अधिक है. FY26 में अब तक 6.4 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जो FY25 के 6.5 लाख करोड़ रुपये के लगभग बराबर है. ICRA को उम्मीद है कि पूरे FY26 में कुल पूर्णता 8.0–9.0 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है, हालांकि यह FY24 के 9.6 लाख करोड़ रुपये से कम रहेगी.

हाउसिंग सेक्टर में दबाव

आवास क्षेत्र में शीर्ष सात शहरों में Q3 FY26 के दौरान बिक्री क्षेत्रफल 5.4 प्रतिशत घटकर 153.9 मिलियन वर्ग फुट रह गया, जो पिछली तिमाही से 1 प्रतिशत कम है. ICRA का अनुमान है कि FY26 में कुल बिक्री 620–640 मिलियन वर्ग फुट के दायरे में 0–3 प्रतिशत तक घट सकती है. हालांकि FY27 में बिक्री 1–4 प्रतिशत बढ़कर 645–655 मिलियन वर्ग फुट तक पहुंच सकती है, क्योंकि मांग की गति स्थिर होने की संभावना है.

एजेंसी ने कहा कि प्रमुख इनपुट पर जीएसटी दरों में कटौती, आयकर में राहत और नीतिगत रेपो दर में कुल 125 बेसिस प्वाइंट की कमी से क्षेत्र को समर्थन मिल सकता है. साथ ही, FY27 के केंद्रीय बजट में प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी पर निरंतर फोकस किफायती आवास की मांग को बढ़ावा देगा.

FY27 के लिए सकारात्मक संकेत

कुल मिलाकर, ICRA का मानना है कि सार्वजनिक कैपेक्स में मजबूत वृद्धि और टैरिफ दबाव में कमी FY27 में निवेश गतिविधियों में व्यापक सुधार का संकेत देती है, भले ही निजी क्षेत्र का पूंजीगत व्यय अभी भी विभिन्न क्षेत्रों में असमान बना हुआ है.
 


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