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भारतीय अर्थव्यवस्था में मजबूती बरकरार, जीडीपी ग्रोथ 7% से अधिक रहने का अनुमान : RBI
आरबीआई का आकलन यह संकेत देता है कि घरेलू स्तर पर भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत आधार पर टिकी हुई है. वैश्विक चुनौतियों के बावजूद, घरेलू मांग, सुधारों और नीतिगत समर्थन के बल पर भारत की विकास यात्रा फिलहाल पटरी पर बनी हुई है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago
भारतीय अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष में मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है. जुलाई–सितंबर तिमाही में 8.2 प्रतिशत की तेज जीडीपी वृद्धि के बाद नवंबर में भी आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार बनी रही. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने दिसंबर के मासिक बुलेटिन में संकेत दिया है कि मौजूदा रुझान देश की आर्थिक मजबूती को दर्शाते हैं और आने वाले समय में भी विकास दर 7 प्रतिशत से ऊपर रहने की संभावना है.
नवंबर में भी कायम रही आर्थिक गतिविधियों की गति
आरबीआई के अनुसार, नियमित अंतराल पर जारी होने वाले प्रमुख आर्थिक संकेतक यह बताते हैं कि त्योहारों के बाद भी नवंबर महीने में समग्र आर्थिक गतिविधियों में निरंतरता रही. यद्यपि जीएसटी संग्रह में कुछ कमी दर्ज की गई, लेकिन यह मुख्य रूप से कर दरों में हुए संशोधन का परिणाम है. ई-वे बिल जनरेशन, पेट्रोलियम उत्पादों की खपत और डिजिटल भुगतान से जुड़े आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि अर्थव्यवस्था की रफ्तार अभी भी मजबूत बनी हुई है.
एमपीसी बैठक के बाद आया आकलन
यह टिप्पणी हाल ही में संपन्न मौद्रिक नीति समिति (MCP) की बैठक के ब्योरे सामने आने के बाद आई है. एमपीसी में आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा था कि तीसरी तिमाही में घरेलू आर्थिक गतिविधियां लचीली बनी रहीं, हालांकि कुछ संकेतकों से यह भी झलकता है कि दूसरी छमाही में वृद्धि की गति पहली छमाही की तुलना में कुछ धीमी हो सकती है.
जीडीपी ग्रोथ 7% से अधिक रहने की उम्मीद
गवर्नर मल्होत्रा के अनुसार, मौजूदा वित्त वर्ष में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7 प्रतिशत से ऊपर रह सकती है, जो पहले लगाए गए 6.5 प्रतिशत के अनुमान से अधिक है. उन्होंने यह भी कहा कि अगले वर्ष की पहली छमाही में घरेलू वृद्धि मजबूत बनी रहेगी, हालांकि यह 6.7 से 6.8 प्रतिशत के दायरे में रह सकती है.
रेपो दर में 125 आधार अंकों की कटौती
आरबीआई की छह सदस्यीय एमपीसी फरवरी से अब तक रेपो दर में कुल 125 आधार अंकों की कटौती कर चुकी है. इसके बाद रेपो दर 6.5 प्रतिशत से घटकर 5.25 प्रतिशत पर आ गई है. हालिया बैठक में 25 आधार अंकों की कटौती के साथ नीतिगत रुख को तटस्थ रखा गया. केंद्रीय बैंक ने इसके पीछे नरम होती समग्र और मुख्य मुद्रास्फीति को प्रमुख कारण बताया है, जिससे आगे भी दरों में कटौती की गुंजाइश बनी हुई है.
सुधारों पर फोकस से बढ़ेगी आर्थिक क्षमता
आरबीआई ने अपनी मासिक रिपोर्ट में कहा कि मजबूत व्यापक आर्थिक बुनियादी ढांचा और आर्थिक सुधारों पर निरंतर ध्यान देने से भारतीय अर्थव्यवस्था को अपनी पूरी क्षमता के साथ आगे बढ़ने में मदद मिलेगी.
केंद्रीय बैंक ने यह भी उल्लेख किया कि 2025 में वैश्विक व्यापार नीतियों में बड़े बदलाव देखने को मिले हैं. शुल्क और व्यापार शर्तों को लेकर देशों के बीच पुनः बातचीत का असर वैश्विक व्यापार और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर पड़ रहा है.
आरबीआई के मुताबिक, वैश्विक वृद्धि को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है. शेयर बाजारों में भले ही बड़ी टेक कंपनियों को लेकर उत्साह बना हुआ हो, लेकिन ऊंचे मूल्यांकन के कारण जोखिम भी बढ़े हैं. इसका असर उभरते बाजारों में निवेश की गति पर भी दिखाई दे रहा है.
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