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भारतीय बैंकिंग सेक्टर को मिलेगा नया बूस्ट, जापान की SMBC खोलेगी भारत में फुल सब्सिडियरी, बढ़ेंगे रोजगार
RBI का यह फैसला भारतीय बैंकिंग सेक्टर के लिए एक बड़ा और दूरगामी कदम माना जा रहा है. इससे न सिर्फ विदेशी निवेश को बढ़ावा मिलेगा बल्कि प्रतिस्पर्धा, सेवाओं की गुणवत्ता और रोजगार के अवसरों में भी उल्लेखनीय इजाफा होगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago
भारतीय बैंकिंग सेक्टर आने वाले समय में और ज्यादा मजबूत होने जा रहा है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने जापान की दिग्गज बैंक Sumitomo Mitsui Banking Corporation (SMBC) को भारत में पूरी तरह से स्वामित्व वाली सब्सिडियरी (Wholly Owned Subsidiary - WOS) खोलने की शुरुआती मंजूरी दे दी है. इस फैसले से न सिर्फ बैंकिंग सेक्टर को मजबूती मिलेगी बल्कि देश में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.
RBI ने क्यों लिया यह फैसला
RBI ने बताया कि यह मंजूरी 2025 के WOS गाइडलाइंस के तहत दी गई है, जिसके अंतर्गत विदेशी बैंकों को भारत में अपनी 100 प्रतिशत स्वामित्व वाली कंपनी खोलने की अनुमति दी जाती है. फिलहाल SMBC भारत में ब्रांच मॉडल के जरिए काम कर रहा है और इसकी नई दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और बेंगलुरु में चार शाखाएं हैं. अब इन्हीं शाखाओं को WOS में बदलने की दिशा में यह कदम उठाया गया है.
कब मिलेगा बैंकिंग लाइसेंस
RBI ने साफ किया है कि बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट 1949 की धारा 22(1) के तहत SMBC को WOS के रूप में काम शुरू करने का फाइनल लाइसेंस तब दिया जाएगा, जब वह RBI द्वारा तय की गई सभी शर्तों को पूरा कर लेगा. लाइसेंस मिलने के बाद SMBC को भारत में अपने संचालन को लेकर ज्यादा स्वतंत्रता और लचीलापन मिलेगा.
भारत को क्या होंगे इस फैसले से फायदे
इस फैसले से भारत में जापान से निवेश और पूंजी प्रवाह में तेजी आने की उम्मीद है. भारत-जापान के बीच व्यापार करने वाली कंपनियों को बेहतर फाइनेंस, लोन और ट्रेजरी सेवाएं मिलेंगी. इसके साथ ही विदेशी बैंक के लोकल सब्सिडियरी बनने से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, जिससे बैंकिंग सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार होगा.
नई शाखाएं खुलने से बैंकिंग और उससे जुड़े सेक्टर में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. साथ ही WOS मॉडल के तहत विदेशी बैंक भारतीय नियमों के प्रति ज्यादा जवाबदेह होंगे, जिससे पूरा बैंकिंग सिस्टम और ज्यादा सुरक्षित बनेगा.
जापानी कंपनियों को भी मिलेगा बड़ा फायदा
SMBC की भारत में मजबूत मौजूदगी से जापानी कंपनियों के भारत में चल रहे और आने वाले प्रोजेक्ट्स को फंडिंग आसानी से मिल सकेगी. इससे मेक इन इंडिया और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सेक्टर्स को भी सपोर्ट मिलेगा.
क्या होती है Wholly Owned Subsidiary (WOS)
Wholly Owned Subsidiary यानी ऐसी कंपनी या बैंक जिसकी 100 प्रतिशत हिस्सेदारी उसकी मूल कंपनी के पास होती है. यह भारत में एक अलग कानूनी इकाई के रूप में काम करती है और देश के सभी स्थानीय कानूनों और नियमों का पालन करती है. इस मॉडल से कंपनी को कारोबार बढ़ाने, नई शाखाएं खोलने और फैसले लेने की ज्यादा आजादी मिलती है, जबकि जोखिम सीमित रहता है.
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