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सरकार ने FY27 की सकल उधारी घटाई, बॉन्ड बिक्री का लक्ष्य 7.86 लाख करोड़ रुपये
सरकार अक्टूबर-मार्च के दौरान 7.86 लाख करोड़ रुपये के बॉन्ड जारी करेगी. सरकार ने बॉन्ड जारी करने का रुख लंबी अवधि वाली प्रतिभूतियों की ओर बढ़ाया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
भारत ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपनी सकल बाजार उधारी योजना को घटाकर करीब 15.995 लाख करोड़ रुपये कर दिया है. बजट में पहले इसके 17.20 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया गया था. सरकार वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में बॉन्ड बिक्री के जरिए 7.86 लाख करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है.
अक्टूबर-मार्च के लिए उधारी कार्यक्रम पहले बताए गए 7.96 लाख करोड़ रुपये से थोड़ा कम है. संशोधित योजना ऐसे समय में आई है जब सरकार बॉन्ड यील्ड पर दबाव को नियंत्रित करने और सरकारी प्रतिभूति बाजार में स्थिरता बनाए रखने की कोशिश कर रही है.
उधारी योजना में संशोधन
15.995 लाख करोड़ रुपये का नया आंकड़ा उस 16.09 लाख करोड़ रुपये से भी कम है, जिसकी घोषणा पहली समीक्षा के बाद की गई थी. सरकार अप्रैल-सितंबर के दौरान पहले ही 8.135 लाख करोड़ रुपये जुटा चुकी है. इस महीने की शुरुआत में हुई एक नीलामी में सरकार ने तय योजना से 6,500 करोड़ रुपये कम उधार लिया था.
सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में शुरुआत में सकल उधारी 17.20 लाख करोड़ रुपये तय की थी. इसके बाद बॉन्ड स्विच ऑपरेशन के जरिए उधारी की जरूरत कम हुई और यह आंकड़ा पहले 16.09 लाख करोड़ रुपये पर आया. अब इसे और घटाकर 15.995 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है.
वित्तीय घाटे को पूरा करने के लिए इस्तेमाल होने वाली शुद्ध बाजार उधारी 11.73 लाख करोड़ रुपये के बजटीय स्तर पर ही बनी हुई है.
लंबी अवधि की प्रतिभूतियों पर जोर
अक्टूबर से मार्च के दौरान सरकार 3, 5, 7, 10, 15, 30, 40 और 50 साल की अवधि वाली प्रतिभूतियां जारी करेगी. इनमें 10 साल की अवधि वाले बॉन्ड की उधारी में सबसे बड़ी हिस्सेदारी बनी रहेगी. हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और बाजार प्रतिभागियों के साथ चर्चा के बाद उधारी कार्यक्रम की संरचना को लंबी अवधि वाली प्रतिभूतियों की ओर स्थानांतरित किया गया है.
पांच साल की अवधि वाले बॉन्ड की हिस्सेदारी अप्रैल-सितंबर की 15.4 फीसदी से घटकर 12.1 फीसदी रह जाएगी. वहीं, 10 साल की प्रतिभूतियों की हिस्सेदारी 29 फीसदी से घटकर 26.3 फीसदी होगी.
इसके विपरीत, 15 साल और 30 साल की प्रतिभूतियों की संयुक्त हिस्सेदारी दूसरी छमाही की उधारी में 26.8 फीसदी रहेगी, जो पहली छमाही में 21.8 फीसदी थी. सरकार 40 साल और 50 साल की अवधि वाले बॉन्ड भी जारी करेगी.
बॉन्ड बाजार पर नजर
संशोधित उधारी योजना ऐसे समय में आई है जब भारत के सरकारी बॉन्ड बाजार में दबाव बना हुआ है और हाल के कारोबारी सत्रों में यील्ड बढ़ी है. कारोबारियों के अनुसार, कुछ सबसे अधिक कारोबार वाली अवधि के बॉन्ड की आपूर्ति कम होने से हालिया बिकवाली के बाद इन सेगमेंट में मांग को समर्थन मिल सकता है.
उधारी कैलेंडर ऐसे समय में जारी किया गया है जब भारत की बैंकिंग प्रणाली में नकदी की उपलब्धता ऊंचे स्तर पर है. RBI ने हाल में अतिरिक्त रुपये की नकदी को वित्तीय प्रणाली से सोखने के लिए खुले बाजार में बॉन्ड बिक्री और अन्य लिक्विडिटी मैनेजमेंट उपायों का इस्तेमाल किया है.
नवीनतम संशोधन के बाद सरकार वित्त वर्ष 2026-27 में डेटेड सिक्योरिटीज के जरिए करीब 16 लाख करोड़ रुपये उधार लेगी. वहीं, नियोजित शुद्ध बाजार उधारी को बजटीय स्तर पर बनाए रखते हुए वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में जारी किए जाने वाले कर्ज की अवधि की संरचना में बदलाव किया गया है.
भारत की FY27 उधारी योजना में कटौती
भारत ने वित्त वर्ष 2026-27 की सकल बाजार उधारी को 17.20 लाख करोड़ रुपये से घटाकर 15.995 लाख करोड़ रुपये कर दिया है. दूसरी छमाही यानी अक्टूबर-मार्च में सरकार 7.86 लाख करोड़ रुपये के बॉन्ड जारी करेगी. सरकार ने उधारी की अवधि को भी लंबी अवधि वाली प्रतिभूतियों की ओर बढ़ाया है.
अप्रैल-सितंबर में जुटाए 8.135 लाख करोड़ रुपये
सरकार अप्रैल-सितंबर के दौरान अब तक 8.135 लाख करोड़ रुपये जुटा चुकी है. इस महीने की शुरुआत में हुई नीलामी में तय योजना से 6,500 करोड़ रुपये कम उधारी की गई थी. बॉन्ड स्विच ऑपरेशन के बाद सकल उधारी का अनुमान पहले 16.09 लाख करोड़ रुपये किया गया था, जिसे अब और घटाया गया है.
15 और 30 साल के बॉन्ड की हिस्सेदारी बढ़ी
दूसरी छमाही में 15 साल और 30 साल की प्रतिभूतियों की संयुक्त हिस्सेदारी 26.8 फीसदी होगी, जबकि पहली छमाही में यह 21.8 फीसदी थी. वहीं, पांच साल के बॉन्ड की हिस्सेदारी 15.4 फीसदी से घटकर 12.1 फीसदी और 10 साल के बॉन्ड की हिस्सेदारी 29 फीसदी से घटकर 26.3 फीसदी होगी. सरकार 40 और 50 साल की अवधि वाले बॉन्ड भी जारी करेगी.
शुद्ध बाजार उधारी में बदलाव नहीं
सरकार की 11.73 लाख करोड़ रुपये की शुद्ध बाजार उधारी का लक्ष्य बरकरार है. इसमें बदलाव मुख्य रूप से सकल उधारी और दूसरी छमाही में जारी किए जाने वाले बॉन्ड की अवधि की संरचना में किया गया है.
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