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सरकार ने लागू किया नया गैस प्राथमिकता आदेश, PNG-CNG और फर्टिलाइजर सेक्टर को मिलेगा लाभ

पश्चिम एशिया तनाव के बीच जरूरी क्षेत्रों में प्राकृतिक गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र ने नई प्राथमिकता व्यवस्था लागू की.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 6 months ago

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और एलएनजी आपूर्ति में संभावित बाधाओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने देश के कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों को प्राकृतिक गैस की प्राथमिकता देने का फैसला किया है. इसके लिए सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत प्राकृतिक गैस आपूर्ति विनियमन आदेश 2026 जारी किया है. इस आदेश के माध्यम से सरकार पेट्रोलियम उत्पादों और गैस की आपूर्ति, वितरण और व्यापार को नियंत्रित कर सकेगी ताकि संसाधनों का संतुलित और उचित वितरण सुनिश्चित हो सके.

पश्चिम एशिया तनाव का असर

हाल के दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली LNG आपूर्ति प्रभावित होने लगी है. कुछ प्रमुख गैस आपूर्तिकर्ताओं ने फोर्स मेज्योर क्लॉज लागू किया है, जिसका अर्थ है कि अनियंत्रित परिस्थितियों में आपूर्तिकर्ता अपनी आपूर्ति संबंधी प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं कर सकते. इन परिस्थितियों को देखते हुए सरकार ने महत्वपूर्ण क्षेत्रों में गैस की उपलब्धता बनाए रखने के लिए नई प्राथमिकता व्यवस्था लागू की है.

चार क्षेत्रों को दी सर्वोच्च प्राथमिकता

सरकारी आदेश के अनुसार, निम्न चार प्रमुख क्षेत्रों को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी गई है और इन्हें पिछले छह महीनों की औसत खपत के आधार पर 100 प्रतिशत गैस आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी.

1. घरेलू पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG)
2. परिवहन के लिए इस्तेमाल होने वाली सीएनजी
3. एलपीजी उत्पादन से जुड़े संयंत्र
4. गैस पाइपलाइन संचालन के लिए जरूरी कंप्रेसर ईंधन और अन्य आवश्यक परिचालन जरूरतें

सरकार का कहना है कि इन क्षेत्रों में गैस की निरंतर आपूर्ति आम लोगों की जरूरतों और देश के बुनियादी ढांचे के लिए बेहद जरूरी है.

फर्टिलाइजर प्लांट्स को दूसरी प्राथमिकता

उर्वरक उद्योग को दूसरी प्राथमिकता श्रेणी में रखा गया है. आदेश के अनुसार उर्वरक संयंत्रों को पिछले छह महीनों की औसत खपत के आधार पर लगभग 70 प्रतिशत गैस आपूर्ति मिलेगी. हालांकि यह आपूर्ति उपलब्धता और संचालन की स्थिति के अनुसार तय की जाएगी. कृषि क्षेत्र और खाद उत्पादन के लिए उर्वरक का उत्पादन महत्वपूर्ण है, इसलिए सरकार ने इसे प्राथमिकता सूची में शामिल किया है ताकि खेती और खाद उत्पादन प्रभावित न हों.

तीसरी और चौथी प्राथमिकता श्रेणियां

तीसरी श्रेणी में चाय उद्योग, मैन्युफैक्चरिंग इकाइयां और राष्ट्रीय गैस ग्रिड से जुड़े अन्य औद्योगिक उपभोक्ता शामिल हैं. इन उपभोक्ताओं को पिछले छह महीनों के औसत उपभोग का लगभग 80 प्रतिशत गैस मिलेगा. चौथी श्रेणी में औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ता शामिल हैं, जिन्हें सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों के माध्यम से गैस मिलती है. इन्हें भी पिछले छह महीनों की औसत खपत का करीब 80 प्रतिशत गैस आवंटित किया जाएगा.

सरकार ने कहा कि प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कुछ औद्योगिक उपभोक्ताओं की आपूर्ति में अस्थायी कटौती की जा सकती है.

पेट्रोकेमिकल और बिजली संयंत्रों को हो सकती है कटौती

यदि प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की जरूरत पूरी करने के लिए अतिरिक्त गैस की आवश्यकता होगी तो पेट्रोकेमिकल इकाइयों, उच्च दबाव और उच्च तापमान पर गैस इस्तेमाल करने वाले उद्योग और बिजली उत्पादन संयंत्रों को गैस में आंशिक या पूर्ण कटौती का सामना करना पड़ सकता है.

इसके प्रमुख उदाहरणों में ओएनजीसी पेट्रो एडिशंस लिमिटेड, गेल के पाटा पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स और रिलायंस के ऑयल टू केमिकल्स व्यवसाय शामिल हैं.

रिफाइनरी कंपनियों की भूमिका

सरकारी आदेश में कहा गया है कि तेल रिफाइनिंग कंपनियां भी इस व्यवस्था के तहत आपूर्ति में कमी को अपने स्तर पर संभालेंगी. रिफाइनरियों को पिछले छह महीनों के औसत उपभोग के लगभग 65 प्रतिशत तक गैस सीमित की जा सकती है. यह कटौती संचालन की व्यवहारिकता के अनुसार होगी.

गैस आपूर्ति प्रबंधन की जिम्मेदारी गेल को

नई प्राथमिकता व्यवस्था के तहत गैस आपूर्ति का पुनर्विन्यास और डायवर्जन गेल इंडिया लिमिटेड द्वारा किया जाएगा. यह कार्य पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल के साथ समन्वय में होगा.

गेल को हर मोड़े गए गैस मात्रा की इनवॉइस कीमत पीपीएसी को भेजनी होगी, जिसके आधार पर पूल्ड गैस कीमत तय की जाएगी. प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को गैस देने वाली संस्थाओं को यह लिखित आश्वासन देना होगा कि वे तय कीमत स्वीकार करेंगी और फोर्स मेज्योर प्रावधानों को लेकर कोई कानूनी विवाद नहीं करेंगी.

सभी गैस कंपनियों को निर्देश

सरकार ने प्राकृतिक गैस के उत्पादन, आयात, विपणन, परिवहन और वितरण से जुड़ी सभी कंपनियों को इन निर्देशों का पालन करने को कहा है. इसमें ओएनजीसी, रिलायंस इंडस्ट्रीज, ऑयल इंडिया, वेदांता समेत सभी प्रमुख गैस उत्पादक शामिल हैं. कंपनियों को जरूरत के अनुसार गैस आपूर्ति शेड्यूल बदलने और निर्धारित क्षेत्रों में गैस मोड़ने के निर्देश दिए गए हैं.


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