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कॉरपोरेट जगत के राज उजागर करने वाली फर्म का अंत, हिंडनबर्ग ने किए कई बड़े खुलासे

हिंडनबर्ग रिसर्च के संस्थापक नैट एंडरसन ने फर्म को बंद करने का ऐलान किया. इसे लेकर एंडरसन ने कहा कि हिंडनबर्ग को बंद करने का निर्णय बहुत व्यक्तिगत निर्णय है.

रितु राणा 1 year ago

कॉरपोरेट जगत के छिपे हुए राजों को उजागर करने वाली प्रसिद्ध वित्तीय रिसर्च फर्म, हिंडनबर्ग रिसर्च, को लेकर एक अहम खबर सामने आई है. दरअसल, हिंडनबर्ग रिसर्च के संस्थापक नैट एंडरसन ने अपनी फर्म हिंडनबर्ग को बंद करने का ऐलान किया है, जिससे उनकी आगामी रिपोर्ट्स और खुलासों पर गंभीर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है. इस ऐलान के साथ ही, कॉरपोरेट जगत के छिपे राज और गड़बड़ियों को उजागर करने वाली जांच-पड़ताल का एक दौर खत्म हो गया है. हिंडनबर्ग ने पहले भी कई प्रमुख कंपनियों के खिलाफ वित्तीय धोखाधड़ी, शेयर हेराफेरी, और अनियमितताओं का पर्दाफाश किया है, जिनमें अदानी ग्रुप, निकोला, और लक्किन कॉफी जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं. इस ताले के पीछे क्या कारण हैं और इसके परिणाम क्या होंगे, यह देखना अब दिलचस्प होगा, तो आइए हम जानते हैं, हिंडनबर्ग द्वारा किए गए दस बड़े खुलासे क्या थे?

एंडरसन ने कही ये बात
एंडरसन ने फर्म को बंद करने के फैसले के बारे में कहा कि हिंडनबर्ग को बंद करने का निर्णय एक बहुत ही व्यक्तिगत निर्णय था. अपने नोट के जरिए उन्होंने स्पष्ट किया, "कोई एक खास बात नहीं है. कोई विशेष खतरा भी नहीं, कोई हेल्थ इश्यू नहीं और कोई बड़ा व्यक्तिगत मुद्दा नहीं.  रिसर्च फर्म हिंडनबर्ग ने काफी कम समय में कॉरपोरेट की दुनिया में अपने खुलासों से तहलका मचा दिया. ये खुलासे सत्य और तथ्य के कितने करीब हैं इस पर दुनिया की कई अदालतों में सुनवाई चल रही है. लेकिन इतना जरूर है कि हिंडनबर्ग की वक्र दृष्टि जिस पर भी पड़ी उसे तगड़ा नुकसान झेलना पड़ा. बता दें, हिंडनबर्ग इस मकसद के लिए forensic finance investigations का सहारा लेती है. कंपनी का कहना है कि वो जिस आधार पर रिपोर्ट बनाती है वो काफी मुश्किल होती है, इसलिए कंपनी ने फाइनेंस के 11 ब्रिलिएंट लोगों की नियुक्ति की है, नाथन एंडरसन की इस टीम में व्हिसलव्लोअर, पत्रकार, वकील और दूसरे एक्टिविस्ट शामिल हैं, लेकिन एंडरसन ने कभी इनकी पहचान जाहिर नहीं की.

1. अडानी पर लगाए कई गंभीर आरोप
हिंडनबर्ग ने जनवरी 2023 में अरबपति गौतम अडानी के नेतृत्व वाले अडानी समूह को निशाना बनाया. हिंडनबर्ग ने आरोप लगाया कि अडानी समूह ने 'कॉरपोरेट इतिहास की सबसे बड़ी धोखाधड़ी' की और 'नियमों को ताक पर रखकर में स्टॉक हेरफेरी और अ... और अकाउंटिंग धोखाधड़ी' की. हिंडनबर्ग ने आरोप लगाया कि ग्रुप ने स्टॉक की कीमतों को बढ़ाने और कर्ज को छिपाने के लिए ऑफशोर शेल कंपनियों के नेटवर्क का इस इस्तेमाल किया.  ये रिपोर्ट भारत और वैश्विक बाजारों दोनों के लिए एक धमाका थी.  इससे अडानी समूह के शेयर की कीमतों में भारी गिरावट आई, इससे कंपनी के मार्केट कैपिटलाइजेशन में 100 अरब डॉलर से ज्यादा का नुकसान हुआ. हालांकि घरेलू खरीदारों के दम पर अडानी ने दमदार वापसी की और अपने मार्केट कैप को ज्यादा दरकने से बचाये रखा. अडानी समूह ने आरोपों का जोरदार खंडन किया, और इन्हें निराधार और राजनीति से प्रेरित बताया. अडानी हिंडनबर्ग के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी कर रही है. 

2. सेबी चीफ माधबी पुरी बुच को बनाया निशाना

भारत के संदर्भ में हिंडनबर्ग का दूसरा बड़ा धमाका सेबी चीफ माधबी पुरी बुच को लेकर था. हिंडनबर्ग का आरोप था कि अडानी ग्रुप के विदेशी फंड में सेबी चीफ माधवी पुरी बुच और उनके पति की हिस्सेदारी है. रिपोर्ट में अडानी ग्रुप और सेबी के बीच मिल मिलीभगत का भी आरोप लगाया था. सेबी चीफ माधबी पुरी बुच और उनके पति धवल बुच ने इन आरोपों को खारिज किया है. बुच दंपति का कहना है कि उन्होंने कुछ भी नही उन्होंने कुछ भी नहीं छिपाया गया. आरोपों में कोई सच्चाई नहीं. भारत में हिंडनबर्ग के इस आरोप ने खूब सुर्खियां बटोरी थी. 

3. निकोला कॉर्पोरेशन 2020

साल  2020 में हिंडनबर्ग रिसर्च ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की जिसमें अमेरिकी इलेक्ट्रिक वाहन स्टार्टअप निकोला कॉर्पोरेशन पर अपने हाइड्रोजन-संचालित ट्रकों की क्षमताओं के बारे में झूठे दावे करने का आरोप लगाया गया. हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि निकोला ने निवेशकों और जनता को अपनी तकनीक विशेष रूप से अपने हाइड्रोजन ईंधन के बारे में गुमराह किया. इस खुलासे से अमेरिका में हंगामा मच गया और निकोला के संस्थापक और कार्यकारी अध्यक्ष ट्रेवर मिल्टन ने 10 दिन बाद कंपनी से इस्तीफा दे दिया. इस खुलासे के बाद कई अमेरिकी कंपनियां इस कंपनी की वित्तीय सेहत की जांच कर रही है. 

4. ट्विटर के पूर्व CEO जैक डोर्सी

हिंडनबर्ग ने मार्च 2023 में अमेरिकी कारोबारी और ट्विटर के पूर्व सीईओ जैक डोर्सी (Jack Dorsey) को निशाना बनाया.   हिंडनबर्ग ने अपनी रिपोर्ट नें डोर्सी की पेमेंट कंपनी ब्लॉक इंक (Block Inc) पर फ्रॉड करने, खाते में हेरफेर, सरकार की राहत का गलत इस्तेमाल करने का आरोप लगा है. इस खुलासे के बाद ब्लॉक इंक को बड़ा झटका लगा. कंपनी के शेयर 20 फीसदी तक गिर गए. कंपनी तो चंद घंटों में 80 हजार करोड़ का झटका लगा. हिंडनबर्ग के ये वो खुलासे थे जिन्होंने व्यापारिक साम्राज्य में हलचल मचा दी. 

5. ब्लैक बॉक (2022)
हिंडनबर्ग ने अमेरिकी कंपनी ब्लैक बॉक के खिलाफ रिपोर्ट जारी की थी जिसमें यह दावा किया गया था कि कंपनी अपने निवेशकों को गुमराह कर रही थी और अपने वित्तीय प्रदर्शन को बढ़ा-चढ़ा कर पेश कर रही थी

6. Lordstown Motors (2021)
हिंडनबर्ग ने Lordstown Motors के खिलाफ आरोप लगाए थे कि कंपनी ने अपनी "प्री-ऑर्डर" की संख्या को बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया था। इससे निवेशकों को गुमराह किया गया था. इसके बाद कंपनी को अपनी प्रोडक्शन योजना पर पुनः विचार करना पड़ा.

7. China’s Luckin Coffee (2020)
हिंडनबर्ग ने चीनी कंपनी Luckin Coffee के खिलाफ रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें यह दावा किया गया था कि कंपनी ने अपनी वित्तीय स्थिति को बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया था और वित्तीय धोखाधड़ी की थी. Luckin Coffee को अमेरिकी बाजार से बाहर कर दिया गया और कंपनी के खिलाफ जांच शुरू हुई।

8. Tesla (2020)
हिंडनबर्ग ने Tesla के खिलाफ भी कई रिपोर्ट्स प्रकाशित की थीं, जिसमें कंपनी के भीतर कुछ वित्तीय असमानताएँ और निवेशकों को गुमराह करने के आरोप लगाए गए थे. हालांकि यह रिपोर्ट पहले चर्चा में आई, लेकिन Tesla का प्रदर्शन लगातार बेहतर हुआ और कंपनी ने इससे आगे बढ़कर अपने कारोबार को मजबूत किया.

9. Phantom Securities (2021)
हिंडनबर्ग ने रिपोर्ट जारी की थी जिसमें यह दावा किया गया था कि कुछ कंपनियां कथित रूप से "फैंटम सिक्योरिटीज" का व्यापार कर रही थीं, अर्थात् उन्होंने शेयरों के लिए नकली दस्तावेज़ तैयार किए थे और इसे गलत तरीके से बेचने का प्रयास किया था.

10. इन कंपनियों पर भी आरोप

हिंडनबर्ग ने 2018 में Sears Holdings के खिलाफ रिपोर्ट जारी की थी जिसमें कहा गया था कि कंपनी के भीतर अनियमितताएं थीं और उसके बिजनेस मॉडल में कुछ गंभीर समस्याएँ थीं. वहीं, 2022 में  हिंडनबर्ग ने ऑस्ट्रेलियाई कंपनी OZ Minerals के खिलाफ रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें कहा गया था कि कंपनी की कुछ प्रमुख खनिज संपत्तियाँ दरअसल बेहद ओवर-हाइप्ड थीं और उनका सही मूल्यांकन नहीं किया गया था.

कंपनियों को हुआ ये नुकसान

हिंडनबर्ग रिसर्च के ये खुलासे वित्तीय जगत में बवाल मचाने वाले रहे हैं। इसके कारण इन कंपनियों को विभिन्न जांचों और कानूनी कारवाईयों का सामना करना पड़ा है. हिंडनबर्ग का उद्देश्य अक्सर कंपनियों की अंदरूनी गलतियों और धोखाधड़ी का पर्दाफाश करना होता है. इन खुलासों ने वित्तीय दुनिया और संस्थागत निवेशकों के बीच सनसनी मचाई है. हिंडनबर्ग के विश्लेषण से कई कंपनियों को अपनी आंतरिक प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने की दिशा में कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा है.

आलोचनाओं का भी करना पड़ा सामना
कॉरपोरेट धोखाधड़ी को उजागर करने और निवेशकों की सुरक्षा में मदद करने के लिए कुछ लोगों द्वारा हिंडनबर्ग रिसर्च की प्रशंसा की जाती है, पर कंपनी को तीखी आ आलोचना का भी सामना करना पड़ा है. आलोचक अक्सर तर्क देते हैं कि शॉर्ट सेलिंग के लिए हिंडनबर्ग का एप्रोच हितों का टकराव (Conflict of interest) पैदा करता... इसके लिए हिंडनबर्ग कई बार तथ्यों की अपने नजरिये से व्याख्या करती है.


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