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अर्थव्यवस्था ने मारी छलांग: GDP 7.4%, फॉरेक्स रिजर्व में भी इजाफा
वित्त वर्ष 2025 की चौथी तिमाही में GDP 7.4% पर पहुंची, विदेशी मुद्रा भंडार 6.99 अरब डॉलर बढ़कर 692.72 अरब डॉलर हो गया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बीता शुक्रवार एक बड़ी राहत और खुशखबरी लेकर आया. एक ओर जहां वित्त वर्ष 2025 की चौथी तिमाही में देश की GDP ग्रोथ चार तिमाहियों के उच्चतम स्तर 7.4% पर पहुंच गई, वहीं दूसरी ओर विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
GDP में मजबूती, विकास को मिला सहारा
सरकार द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 की अंतिम तिमाही में देश की GDP ग्रोथ 7.4% रही, जो बीते चार तिमाहियों में सबसे अधिक है. यह आंकड़ा भारत की आर्थिक स्थिरता और मजबूती का संकेत देता है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर अनिश्चितताएं बनी हुई हैं.
फॉरेक्स रिजर्व में 6.99 अरब डॉलर की छलांग
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 23 मई 2025 को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 6.99 अरब डॉलर बढ़कर 692.72 अरब डॉलर हो गया. इससे एक सप्ताह पहले, यानी 16 मई को समाप्त सप्ताह में यह भंडार 4.89 अरब डॉलर की गिरावट के साथ 685.73 अरब डॉलर पर आ गया था. हालांकि सितंबर 2024 में फॉरेक्स रिजर्व रिकॉर्ड स्तर 704.88 अरब डॉलर तक पहुंच गया था, लेकिन हालिया वृद्धि इसे फिर से उस स्तर के करीब ले जा रही है.
विदेशी मुद्रा आस्तियों और गोल्ड रिजर्व में बढ़ोतरी
RBI के मुताबिक, 23 मई को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा यानी विदेशी मुद्रा आस्तियां 5.16 अरब डॉलर की वृद्धि के साथ 586.17 अरब डॉलर तक पहुंच गईं. यह वृद्धि डॉलर के मुकाबले अन्य विदेशी मुद्राओं—जैसे यूरो, पाउंड और येन—की कीमतों में उतार-चढ़ाव के आधार पर होती है.
इसी अवधि में गोल्ड रिजर्व का मूल्य 2.37 अरब डॉलर बढ़कर 83.58 अरब डॉलर हो गया. साथ ही, विशेष आहरण अधिकार (SDR) में भी 8.1 करोड़ डॉलर की बढ़ोतरी हुई, जिससे यह 18.57 अरब डॉलर पर पहुंच गया. IMF के पास भारत का आरक्षित भंडार भी 3 करोड़ डॉलर बढ़कर 4.40 अरब डॉलर हो गया.
आर्थिक स्थिरता और निवेश के लिए सकारात्मक संकेत
विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की आर्थिक स्थिति और वैश्विक लेनदेन की क्षमता का महत्वपूर्ण संकेतक होता है. यह आयात भुगतान, कर्ज चुकाने और रुपए की स्थिरता बनाए रखने में मदद करता है. विशेषज्ञों के अनुसार, हालिया बढ़ोतरी से भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक स्तर पर और अधिक भरोसा मिलेगा और विदेशी निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा.
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