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स्टार्टअप की परिभाषा बदली, अब 200 करोड़ टर्नओवर वाली कंपनियां भी होंगी शामिल

टर्नओवर और उम्र की सीमा बढ़ने से स्टार्टअप्स को लंबे समय तक सरकारी समर्थन मिल सकेगा, जबकि डीप टेक और सहकारी संस्थाओं को शामिल करने से जमीनी स्तर पर उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago

सरकार ने भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम को और मजबूत करने के लिए स्टार्टअप की परिभाषा में बड़ा बदलाव किया है. नए नियमों के तहत अब 200 करोड़ रुपये तक का टर्नओवर करने वाली कंपनियां भी स्टार्टअप के तौर पर मान्यता पा सकेंगी. पहले यह सीमा 100 करोड़ रुपये तय थी. इसके साथ ही सरकार ने डीप टेक स्टार्टअप्स के लिए अलग श्रेणी बनाकर उन्हें अतिरिक्त राहत देने का भी फैसला किया है.

DPIIT ने जारी किया नोटिफिकेशन

उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) की ओर से जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, स्टार्टअप की पहचान से जुड़े मानदंडों में यह बदलाव किया गया है. सरकार का मानना है कि बीते वर्षों में स्टार्टअप्स के बिजनेस मॉडल और उनकी ग्रोथ साइकिल में बड़ा बदलाव आया है, जिसे ध्यान में रखते हुए नियमों को अपडेट करना जरूरी था.

डीप टेक स्टार्टअप्स को बड़ी राहत

नए नियमों के तहत डीप टेक स्टार्टअप्स के लिए अलग और ज्यादा उदार मानक तय किए गए हैं. अब किसी डीप टेक कंपनी को रजिस्ट्रेशन के 10 साल के बजाय 20 साल तक स्टार्टअप का दर्जा मिल सकेगा. इसके अलावा, इन कंपनियों के लिए टर्नओवर की अधिकतम सीमा बढ़ाकर 300 करोड़ रुपये कर दी गई है. सरकार का कहना है कि रिसर्च और डेवलपमेंट आधारित स्टार्टअप्स को तकनीक विकसित करने में लंबा समय और ज्यादा पूंजी की जरूरत होती है, जिसे देखते हुए यह फैसला लिया गया है.

सहकारी समितियों को भी मिलेगा स्टार्टअप का दर्जा

सरकार ने एक और अहम बदलाव करते हुए कुछ सहकारी समितियों को भी स्टार्टअप के तौर पर मान्यता देने का निर्णय लिया है. इसमें मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटीज एक्ट, 2002 के तहत पंजीकृत संस्थाएं और राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के कोऑपरेटिव कानूनों के तहत रजिस्टर्ड समितियां शामिल होंगी. इससे कृषि, ग्रामीण उद्योग और समुदाय आधारित व्यवसायों में नवाचार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.

नियम बदलने के पीछे क्या है वजह

सरकार के अनुसार, पिछले एक दशक में भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम तेजी से विकसित हुआ है. कई इनोवेशन-ड्रिवन कंपनियां टर्नओवर या उम्र की तय सीमा पार कर जाती हैं, जबकि वे अभी भी प्रोडक्ट डेवलपमेंट या टेस्टिंग के चरण में होती हैं. ऐसे में पुरानी परिभाषा उनके लिए बाधा बन रही थी.

स्टार्टअप्स को मिलेंगे ज्यादा फायदे

गौरतलब है कि अब तक करीब दो लाख कंपनियों को स्टार्टअप के तौर पर मान्यता मिल चुकी है. मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स को स्टार्टअप इंडिया पहल के तहत इनकम टैक्स में छूट, फंडिंग में सहूलियत और नियामकीय राहत जैसे कई फायदे मिलते हैं. नए नियमों से ज्यादा कंपनियां इस दायरे में आएंगी और देश के इनोवेशन इकोसिस्टम को नई गति मिलेगी.

 


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