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'क्रिप्टो होल्डिंग' में अमेरिका और ब्रिटेन आगे 2025 में 8% से अधिक वार्षिक वृद्धि दर्ज

GlobalData की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिमी देशों में सकारात्मक नीतियों और संस्थागत समर्थन ने क्रिप्टो अपनाने की दर को बढ़ावा दिया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

2025 में अमेरिका और ब्रिटेन क्रिप्टो अपनाने के मामले में वैश्विक स्तर पर सबसे तेज वृद्धि दर्ज कर रहे हैं. ग्लोबलडाटा की वार्षिक फाइनेंशियल सर्विसेज कंज्यूमर सर्वे के अनुसार, जहां अमेरिका में क्रिप्टो उत्पादों की होल्डिंग दर बढ़कर 23.5% हो गई है, वहीं ब्रिटेन में यह दर दोगुनी होकर 18% तक पहुंच गई है, जो पिछले वर्ष मात्र 10% थी. क्रिप्टो के बढ़ते प्रसार का कारण मुख्य रूप से इसकी मुख्यधारा में हो रही सक्रिय मार्केटिंग, संस्थागत भागीदारी और अनुकूल नियम-नीतियां हैं. हालांकि अमेरिका अब भी कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं से पीछे है, फिर भी यह वृद्धि उल्लेखनीय है.

क्रिप्टो भुगतान में स्टेबलकॉइन का उभरता रोल
ग्लोबलडाटा की नवीनतम रिपोर्ट "इनोवेशन इन स्टेबलकॉइन्स 2025" के अनुसार, फिक्स्ड-वैल्यू डिजिटल एसेट्स यानी स्टेबलकॉइन्स भविष्य में भुगतान प्रणाली को प्रभावित करेंगे. अभी केवल एक-तिहाई क्रिप्टो होल्डर ही वस्तुएं और सेवाएं खरीदने में क्रिप्टो का उपयोग कर रहे हैं, जबकि केवल 17% लोग इन्हें पीयर-टू-पीयर (P2P) ट्रांसफर के लिए इस्तेमाल करते हैं.

व्यापक अपनाने की सबसे बड़ी बाधा
स्टेबलकॉइन को अपनाने में सबसे बड़ी चुनौती इसकी पारंपरिक मुद्रा और मौजूदा भुगतान प्रणालियों के साथ सीमित इंटरऑपरेबिलिटी है. डिजिटल और फिएट मुद्राओं के बीच परिवर्तन की लागत (ऑन-रैम्पिंग और ऑफ-रैम्पिंग) पारंपरिक भुगतान तरीकों के मुकाबले अभी भी अधिक या समान है. जब तक उपयोगकर्ता DeFi से बाहर नहीं जाते, तब तक स्टेबलकॉइन्स छोटे ट्रांजैक्शन के लिए व्यवहारिक नहीं हैं.

संस्थागत स्तर पर बड़े फायदे
ग्लोबलडाटा की बैंकिंग और पेमेंट्स एनालिस्ट ब्लैंडिना सालाय के अनुसार, स्टेबलकॉइन का असली फायदा उनके स्केलेबिलिटी में है. "स्टेबलकॉइन सैंडविच" मॉडल के जरिए एक फिएट मुद्रा को स्टेबलकॉइन में और फिर दूसरी फिएट में बदला जा सकता है. यह पारंपरिक बैंकों के उच्च मुद्रा विनिमय शुल्क को दरकिनार कर देता है.

इसके अलावा, ब्लॉकचेन की मदद से फंड्स को बिना किसी सीमा और विलंब के ट्रांसफर किया जा सकता है. यह पारंपरिक 2–5 कार्यदिवसीय सेटलमेंट समय की तुलना में कैश फ्लो प्रबंधन को बेहतर बनाता है. रीयल-टाइम ट्रांसफर के ज़रिए रातों और सप्ताहांतों में भी फंड्स को अधिक लाभदायक निवेश अवसरों में लगाया जा सकता है.

स्थानीय मुद्राओं में चुनौती
हालांकि उभरते बाजारों में स्टेबलकॉइन्स की खुदरा मांग सबसे अधिक है, लेकिन कुछ स्थानीय मुद्राओं में स्टेबलकॉइन को ऑफ-रैम्प करना चुनौतीपूर्ण है. ऐसे में जल्द ही गैर-रिजर्व मुद्राओं का टोकनाइजेशन शुरू होने की संभावना है, जो वैश्विक स्टेबलकॉइन स्वीकृति का अगला चरण हो सकता है.

खुदरा क्षेत्र में क्रांति की संभावना
स्टेबलकॉइन दुनिया भर में लोगों को वित्तीय सेवाओं और अमेरिकी डॉलर तक लोकतांत्रिक पहुंच प्रदान करने का वादा करते हैं. अब बड़ी और छोटी बैंकें भी इस क्षेत्र में प्रवेश की तैयारी कर रही हैं, जिससे उन्हें ग्राहकों की संभावित हानि का डर है.

परंपरागत और विकेंद्रीकृत वित्त के बीच सेतु
सालाय का निष्कर्ष है कि स्टेबलकॉइन्स परंपरागत वित्त (TradFi) और विकेंद्रीकृत वित्त (DeFi) के बीच एक महत्वपूर्ण स्थिति में हैं. जबकि ब्लॉकचेन तकनीक वित्तीय सेवाओं के भविष्य में अभूतपूर्व लाभ लाने में सक्षम है, स्टेबलकॉइन्स अब क्रिप्टोकरेंसी की मूल विचारधारा से हटकर राज्य नियामकों और पारंपरिक वित्तीय संस्थानों की भागीदारी वाले क्षेत्र में प्रवेश कर चुके हैं.

बता दें, ग्लोबलडाटा की वार्षिक फाइनेंशियल सर्विसेज कंज्यूमर सर्वे 2025 में 42 देशों के कुल 63,414 प्रतिभागी शामिल थे. इनमें से 3,004 अमेरिका और 4,027 ब्रिटेन से थे.

 


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