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CSMIA में टर्मिनल 1 का होगा रीडेवलपमेंट, 2 करोड़ अतिरिक्त यात्रियों को मिलेंगी सेवाएं
टर्मिनल 1 का रीडेवलपमेंट एयरपोर्ट के संचालन में व्यवधान को कम करने के लिए चरणों में किया जाएगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (CSMIA) का संचालन करने वाला मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (MIAL) अब टर्मिनल 1 (T1) के पुनर्विकास की एक बड़ी योजना शुरू करने जा रहा है. यह प्रोजेक्ट यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाएगा और सस्टेनेबिलिटी और इनोवेशन के नए मानक स्थापित करेगा. नया टर्मिनल बन जाने के बाद, यह हर साल 2 करोड़ (20 मिलियन) यात्रियों को संभाल सकेगा, जो मौजूदा क्षमता से 42% ज्यादा है. यह मुंबई के तेज़ी से बढ़ते विकास को दर्शाता है.
मुंबई अंतरराष्ट्रीय विमानन केंद्र (aviation hub) के रूप में आगे बढ़ रहा है, और नया टर्मिनल डिजिटलीकरण (digitisation) और यात्रियों की सुविधा के लिए एक मिसाल बनेगा. टर्मिनल 1 का पुनर्विकास चरणों (phases) में किया जाएगा, ताकि हवाई अड्डे के संचालन पर कम से कम असर पड़े। पहले चरण में नवंबर 2025 से पुराने टर्मिनल को गिराने (demolition) का काम शुरू होगा, जिसके बाद नए टर्मिनल का निर्माण किया जाएगा. पूरी प्रक्रिया के दौरान, MIAL यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता देगा.
इस बीच, टर्मिनल 2 (T2) और नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, जो 2025 में चालू होने वाला है, वे मिलकर T1 के बंद होने से होने वाली कमी को पूरा करेंगे. इन दोनों हवाई अड्डों की मदद से यात्रियों और उड़ानों की बढ़ती जरूरतों को पूरा किया जाएगा, जिससे मुंबई शहर और मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) की मांगों को संभाला जा सकेगा.
अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड के निदेशक जीत आदानी ने इस विकास पर कहा कि "CSMIA की टीम हमारे सभी साझेदारों (stakeholders) के साथ मिलकर कड़ी मेहनत कर रही है ताकि यह बदलाव (transition) सुचारू रूप से हो और यात्रियों या दैनिक हवाई संचालन (daily operations) पर इसका कम से कम असर पड़े. यह पुनर्विकास सिर्फ क्षमता बढ़ाने के लिए नहीं है, बल्कि मुंबई को वैश्विक स्तर (global stage) पर मजबूत बनाने के लिए है. हमारी प्राथमिकता यात्रियों को वही बेहतरीन सेवा देना है, जिसकी वे हमसे उम्मीद करते हैं."
पर्यावरण के प्रति जागरूक हवाईअड्डा डिज़ाइन
जब 2028-29 तक नया टर्मिनल 1 (T1) पूरा हो जाएगा, तब यह सस्टेनेबल (टिकाऊ) इनोवेशन का एक बेहतरीन उदाहरण बनेगा और पर्यावरण के अनुकूल (eco-conscious) हवाई अड्डा डिज़ाइन के लिए एक वैश्विक मानक स्थापित करेगा. T1, CSMIA भारत का पहला ब्राउनफील्ड (पुराने ढांचे पर नए निर्माण वाला), बायोफिलिक (प्राकृतिक वातावरण से जुड़ा) और सस्टेनेबल (पर्यावरण के अनुकूल) हवाई अड्डा बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.
नए टर्मिनल 1 (T1) का डिज़ाइन यात्रियों की सुविधा और अनुभव को केंद्र में रखकर बनाया गया है, इसमें शामिल हैं:
1. पैसेंजर टर्मिनल बिल्डिंग (PTB) का नया रूप:
• पूरी तरह से नया टर्मिनल बिल्डिंग (PTB) बनाया जाएगा, जो घरेलू उड़ानों (domestic operations) के लिए तैयार होगा और भविष्य में अंतरराष्ट्रीय सेवाओं (international services) के साथ जोड़ा जा सकेगा.
• यह नया टर्मिनल हर साल 2 करोड़ (20 मिलियन) यात्रियों को संभालने की क्षमता रखेगा, जिससे भारत के तेज़ी से बढ़ते विमानन बाजार (aviation market) की जरूरतें पूरी हो सकेंगी.
2. आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर:
• नए टर्मिनल में उन्नत सुविधाएं दी जाएंगी, जैसे डिस्ट्रिक्ट कूलिंग सिस्टम (जिससे पूरे टर्मिनल में ठंडक बनी रहे), नई अत्याधुनिक इलेक्ट्रिकल सबस्टेशन और एक बेहतर बैगेज हैंडलिंग सिस्टम.
• इन नई तकनीकों से हवाई अड्डे के हर काम को पहले से अधिक तेज़, आसान और सुविधाजनक बनाया जाएगा.
3. नई पीढ़ी की कनेक्टिविटी:
• मल्टी-मोडल ट्रांजिट हब (MMTH) मुंबई के हवाई, रेल और सड़क मार्गों को जोड़ने वाला मुख्य केंद्र बनेगा.
• यात्री सीधे मेट्रो और भूमिगत बस स्टेशन (underground bus station) तक आसानी से पहुंच सकेंगे, जिससे यात्रा और भी सुविधाजनक हो जाएगी.
• यह नया टर्मिनल भारत में हवाई यात्रा का अनुभव पूरी तरह बदल देगा.
4. पर्यावरण के अनुकूल डिज़ाइन:
• प्राकृतिक सौंदर्य से प्रेरित बायोफिलिक डिज़ाइन बनाया जाएगा, जिसमें अंदर हरियाली, प्राकृतिक रोशनी और खुले स्थान होंगे, ताकि यात्रियों को एक शांत और तरोताज़ा माहौल मिले.
• इसकी आर्किटेक्चर (वास्तुकला) समुद्र की लहरों की तरल गति (fluid motion) से प्रेरित होगी, जिससे यह भविष्य का एक अनोखा और पर्यावरण-अनुकूल हवाई अड्डा बनेगा.
चरणबद्ध बदलाव और यात्रियों पर केंद्रित सुविधा
नवंबर 2025 में, टर्मिनल 1 का पुनर्विकास (transformation) योजनाबद्ध चरणों (phases) में शुरू होगा, ताकि कम से कम परेशानी हो. निर्माण के दौरान, टर्मिनल 2 (T2) अतिरिक्त यात्री यातायात (traffic) को संभालेगा. नई तकनीकों जैसे डिजी यातरा (DigiYatra), स्वयं बैगेज ड्रॉप (self-baggage drop) और ई-गेट्स (e-Gates) का उपयोग किया जाएगा, जिससे अधिक यात्री आने के बावजूद यात्रियों की आवाजाही सुचारू (smooth) बनी रहेगी.
पीक ट्रैवल पीरियड्स (व्यस्त यात्रा समय) के दौरान यात्रियों की मदद के लिए अधिक सेवा कर्मचारी (service staff) प्रमुख स्थानों (key locations) पर तैनात किए जाएंगे. इसके अलावा, एयरलाइंस और अन्य साझेदारों को पहले से सूचित किया जाएगा, ताकि उड़ानों का कार्यक्रम बिना किसी रुकावट के चलता रहे.
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