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भारत और EFTA के बीच TEPA डील लागू : विदेशी वस्तुएं होंगी सस्ती, लाखों रोजगार की उम्मीद

भारत और EFTA देशों के बीच TEPA समझौता न केवल आर्थिक दृष्टि से लाभकारी है, बल्कि यह सामाजिक और वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति को भी मजबूत करता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 8 months ago

भारत और यूरोप के चार देशों के समूह यूरोपीय मुक्त व्यापार संगठन (EFTA -European Free Trade Association) के बीच एक ऐतिहासिक व्यापारिक समझौता हुआ है, जिसे TEPA यानी Trade and Economic Partnership Agreement कहा जा रहा है. यह समझौता अब औपचारिक रूप से लागू हो गया है. इसके तहत भारत को बड़े पैमाने पर विदेशी निवेश मिलने की उम्मीद है, जिससे देश में आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी और लाखों रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे.

15 वर्षों में 100 अरब डॉलर का निवेश

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार TEPA के अंतर्गत भारत को अगले 15 वर्षों में कुल 100 अरब डॉलर का निवेश मिलने की संभावना है. यह निवेश दो चरणों में आएगा, पहले 10 सालों में 50 अरब डॉलर और फिर अगले 5 सालों में शेष 50 अरब डॉलर. सरकार को उम्मीद है कि इससे देश में लगभग 10 लाख नई नौकरियां पैदा होंगी. यह समझौता भारत की अर्थव्यवस्था को न केवल मज़बूती देगा, बल्कि युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर भी प्रदान करेगा.

निवेश न मिलने पर भारत को विशेष अधिकार

इस समझौते में भारत ने एक अहम शर्त भी जोड़ी है. यदि EFTA देश अपने निवेश के वादे को पूरा नहीं करते हैं, तो भारत को यह अधिकार प्राप्त होगा कि वह उन्हें दी गई कस्टम ड्यूटी की छूट को वापस ले सके या उसमें बदलाव कर सके. यह प्रावधान इस बात को सुनिश्चित करता है कि भारत केवल बाज़ार नहीं खोलेगा, बल्कि उसे बदले में ठोस लाभ भी प्राप्त होंगे.

कौन हैं EFTA देश?

EFTA एक स्वतंत्र यूरोपीय व्यापार संगठन है, जिसमें चार विकसित देश यानी स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिचटेंस्टीन शामिल हैं भारत और इन देशों के बीच यह समझौता 10 मार्च 2024 को साइन किया गया था, और अब इसे औपचारिक रूप से लागू कर दिया गया है. यह समझौता दोनों पक्षों के लिए व्यापार, निवेश और सहयोग के नए रास्ते खोलता है.

उपभोक्ताओं को मिलेंगे महंगे विदेशी प्रोडक्ट्स सस्ते में

TEPA का असर आम भारतीय उपभोक्ताओं पर भी दिखेगा. स्विट्जरलैंड की महंगी घड़ियां, प्रीमियम चॉकलेट्स, बिस्किट और कई किचन प्रोडक्ट्स अब भारतीय बाजार में पहले से सस्ते मिल सकेंगे. समझौते के तहत इन उत्पादों पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी को धीरे-धीरे समाप्त किया जाएगा. इससे इन महंगे विदेशी सामानों की कीमतों में गिरावट आएगी और आम लोग भी इन्हें खरीद सकेंगे.

घरेलू उद्योगों और किसानों के हितों की भी सुरक्षा

हालांकि, TEPA में यह सुनिश्चित किया गया है कि भारत के घरेलू उद्योग और किसान प्रभावित न हों. इसलिए दूध, सोया, कोयला और कुछ कृषि उत्पादों को इस समझौते से बाहर रखा गया है. इससे भारतीय किसानों और संबंधित उद्योगों को किसी भी तरह की आर्थिक क्षति से बचाया जा सकेगा.

सेवा क्षेत्र में भी खुलेंगे नए अवसर

यह समझौता केवल वस्तुओं के व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि सेवा क्षेत्र में भी भारत के लिए नए अवसर लेकर आया है. भारत ने EFTA को अकाउंटिंग, कंप्यूटर, हेल्थकेयर और डिस्ट्रीब्यूशन जैसे 105 सेवा क्षेत्रों में बाजार तक पहुंच की अनुमति दी है. बदले में EFTA देशों ने भी भारतीय पेशेवरों के लिए अपने सेवा क्षेत्र खोल दिए हैं. इससे विशेष रूप से IT और हेल्थ सेक्टर में काम करने वाले भारतीयों को विदेशों में नौकरी के अधिक अवसर मिलेंगे.

वैश्विक व्यापार में भारत की मजबूत स्थिति

TEPA न सिर्फ निवेश और व्यापार का माध्यम है, बल्कि यह भारत को वैश्विक व्यापार प्रणाली में और अधिक मजबूत और सक्रिय भागीदार बनाता है. इस समझौते से जहां देश में आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी, वहीं युवाओं को रोजगार, उपभोक्ताओं को सस्ते और बेहतर प्रोडक्ट्स तथा पेशेवरों को अंतरराष्ट्रीय अवसर भी मिलेंगे. यह समझौता भारत की वैश्विक छवि को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की क्षमता रखता है.


 


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