अमेरिका-ईरान तनाव से तेल बाजार में उबाल, ब्रेंट 79 डॉलर के पार, सप्लाई संकट की आशंका गहराई

कच्चे तेल में आई इस तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव है. अमेरिका ने एक सप्ताह के भीतर ईरान पर चौथी सैन्य कार्रवाई की.

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Monday, 13 July, 2026
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पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने एक बार फिर वैश्विक तेल बाजार में हलचल मचा दी है. अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव तेज होने के बाद सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में करीब 4% की जोरदार तेजी दर्ज की गई. ब्रेंट क्रूड 79 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 74 डॉलर के पार निकल गया. वहीं, पर्याप्त सप्लाई और कमजोर मांग की उम्मीद के चलते अमेरिकी प्राकृतिक गैस सात हफ्तों के निचले स्तर पर फिसल गई.

पश्चिम एशिया में एक बार फिर बढ़ते तनाव का असर वैश्विक कमोडिटी बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है. सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 4% की तेजी दर्ज की गई. ब्रेंट क्रूड 79 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 74 डॉलर प्रति बैरल के पार कारोबार करता दिखा.

अमेरिका-ईरान टकराव से सप्लाई पर बढ़ी चिंता

कच्चे तेल में आई इस तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव है. अमेरिका ने एक सप्ताह के भीतर ईरान पर चौथी सैन्य कार्रवाई की. यह हमला ईरान की ओर से साइप्रस के झंडे वाले एक कंटेनर जहाज पर किए गए हमले के जवाब में किया गया.

इसके बाद ईरान ने दावा किया कि उसने दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को अगली सूचना तक बंद कर दिया है. हालांकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस दावे को खारिज किया है, लेकिन निवेशकों को आशंका है कि यदि हालात और बिगड़े तो वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है. इसी चिंता ने तेल की कीमतों को ऊपर धकेल दिया.

शांति वार्ता की उम्मीदों को झटका

हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच अंतरिम शांति समझौते की खबरों के बाद कच्चे तेल में कुछ नरमी देखने को मिली थी. लेकिन ताजा सैन्य घटनाक्रम ने उस राहत को खत्म कर दिया. अब दोनों देशों के बीच बातचीत की संभावना भी कमजोर पड़ती नजर आ रही है. ईरान का कहना है कि आगे किसी भी वार्ता से पहले होर्मुज जलडमरूमध्य और तेल निर्यात से जुड़े मुद्दों पर ठोस प्रगति जरूरी होगी.

ब्रेंट और WTI दोनों में जोरदार उछाल

सोमवार सुबह ब्रेंट क्रूड करीब 3.93% की तेजी के साथ 79 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया. वहीं अमेरिकी WTI क्रूड भी करीब 3.98% चढ़कर 74.25 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है तो आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है.

सात हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंची प्राकृतिक गैस

एक ओर जहां कच्चे तेल में तेजी देखने को मिली, वहीं अमेरिकी प्राकृतिक गैस की कीमतें गिरकर सात सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गईं. प्राकृतिक गैस का भाव घटकर 2.90 डॉलर प्रति MMBtu रह गया है.

इस गिरावट की प्रमुख वजह अमेरिका में आने वाले दिनों में मौसम अपेक्षाकृत ठंडा रहने का अनुमान है, जिससे एयर कंडीशनिंग की मांग कम होने और गैस आधारित बिजली उत्पादन घटने की उम्मीद है. इसके अलावा फ्रीपोर्ट LNG ने 10 जुलाई से अगस्त के आखिर तक अपने प्लांट में रखरखाव (मेंटेनेंस) का काम शुरू किया है, जिससे अस्थायी रूप से गैस की खपत भी कम होगी.

अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 3 जुलाई तक देश में प्राकृतिक गैस का भंडार पिछले पांच वर्षों के औसत से 6.6% अधिक है. पर्याप्त सप्लाई और कमजोर मांग के अनुमान के कारण फिलहाल प्राकृतिक गैस की कीमतों पर दबाव बना हुआ है.
 


जनसमर्थ पोर्टल पर 43% लोन आवेदन रिजेक्ट, वित्त मंत्रालय ने बैंकों को दिए सख्त निर्देश

मंत्रालय का कहना है कि पोर्टल को बैंकिंग सिस्टम के साथ बेहतर तरीके से इंटीग्रेट करने और प्रोसेसिंग तेज करने से अधिक योग्य आवेदकों तक समय पर कर्ज पहुंचाया जा सकेगा.

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Monday, 13 July, 2026
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सरकारी योजनाओं के तहत आसान और तेज कर्ज उपलब्ध कराने के लिए बनाए गए जनसमर्थ पोर्टल पर बड़ी संख्या में लोन आवेदन खारिज होने के बाद वित्त मंत्रालय ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) को सख्त निर्देश दिए हैं. मंत्रालय ने बैंकों से कहा है कि वे जनसमर्थ पोर्टल को अपने लोन मैनेजमेंट सिस्टम से जल्द जोड़ें, आवेदन निपटाने की प्रक्रिया तेज करें और वित्त वर्ष 2026 में 43.2 फीसदी तक पहुंची रिजेक्शन दर को कम करने के लिए जरूरी सुधार लागू करें.

जनसमर्थ पोर्टल पर लोग अपनी पात्रता की जांच कर सकते हैं, ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं और कई सरकारी क्रेडिट-लिंक्ड योजनाओं के तहत डिजिटल मंजूरी भी प्राप्त कर सकते हैं. मंत्रालय और संबंधित विभाग इसी प्लेटफॉर्म के जरिए विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन और प्रदर्शन की निगरानी करते हैं.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वित्त मंत्रालय ने पाया कि बड़ी संख्या में आवेदन अधूरे दस्तावेज, गलत जानकारी और शुरुआती मंजूरी मिलने के बाद भी आवेदकों द्वारा प्रक्रिया बीच में छोड़ देने के कारण अंतिम मंजूरी तक नहीं पहुंच पाते. इसी वजह से बैंकों को अपनी डिजिटल लेंडिंग प्रक्रिया और आवेदन सत्यापन प्रणाली मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं.

कन्वर्जन रेट बढ़ाने पर जोर

मंत्रालय ने बैंकों से कहा है कि वे अपने बिजनेस रूल इंजन को नियमित रूप से अपडेट करें ताकि डिजिटल मंजूरी के बाद आवेदन बीच में छोड़ने (ड्रॉप-ऑफ) की घटनाएं कम हों. इसके अलावा सभी पंजीकृत शाखाओं को जनसमर्थ पोर्टल से जोड़ने, बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट्स (BCs) के जरिए ग्राहकों की मदद बढ़ाने, बैंक शाखाओं, वेबसाइट और मोबाइल ऐप पर पोर्टल का प्रचार करने तथा बैंक अधिकारियों को उपलब्ध सरकारी योजनाओं का प्रशिक्षण देने के भी निर्देश दिए गए हैं.

सूत्रों के मुताबिक, जनसमर्थ पोर्टल को बैंकों के लेंडिंग मैनेजमेंट सिस्टम से जोड़ने पर आवेदन से लेकर अंतिम भुगतान तक पूरी प्रक्रिया डिजिटल हो जाएगी, जिससे लोन मंजूरी का समय काफी कम हो सकता है.

तीन गुना बढ़ी मंजूरियां

वित्त वर्ष 2026 में जनसमर्थ पोर्टल के जरिए करीब 1.31 करोड़ (13.1 मिलियन) लोन आवेदनों को मंजूरी मिली, जबकि वित्त वर्ष 2025 में यह संख्या करीब 40 लाख थी. यानी एक साल में मंजूरियों की संख्या तीन गुना से ज्यादा बढ़ गई.

हालांकि, बैंक अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल मंजूरी मिलने के बावजूद कई आवेदन अंतिम चरण तक नहीं पहुंच पाते. इसकी प्रमुख वजह अधूरे दस्तावेज, गलत जानकारी और आवेदकों का बाद में लोन नहीं लेने का फैसला करना है.

जनसमर्थ का बढ़ा दायरा

फरवरी में सरकार ने जनसमर्थ पोर्टल का दायरा बढ़ाते हुए इसमें CGTMSE और ECLGS 5.0 जैसी योजनाओं को भी शामिल किया. इसके साथ ही MSME के लिए नया क्रेडिट असेसमेंट मॉडल और महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु, कर्नाटक तथा गुजरात की कई राज्य सरकारों की योजनाएं भी जोड़ी जा रही हैं.

फिलहाल जनसमर्थ पोर्टल पर 46 सरकारी क्रेडिट-लिंक्ड योजनाएं उपलब्ध हैं. इनमें प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, पीएम स्वनिधि, पीएमईजीपी, किसान क्रेडिट कार्ड, एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड, DAY-NRLM, स्टार्टअप लोन, रूफटॉप सोलर फाइनेंसिंग, फिशरीज किसान क्रेडिट कार्ड, होम लोन योजनाएं, SRMS, बुनकर मुद्रा योजना, ECLGS 5.0 और MSME माइक्रो क्रेडिट कार्ड जैसी योजनाएं शामिल हैं.

आवेदन की गुणवत्ता भी अहम

BLS E-Services के मुख्य परिचालन अधिकारी (COO) लोकनाथ पांडा के अनुसार, केवल लोन प्रोसेसिंग का समय कम करना पर्याप्त नहीं है. आवेदन की गुणवत्ता में सुधार भी उतना ही जरूरी है. उनका कहना है कि अधिकतर आवेदन पात्रता के अभाव में नहीं, बल्कि अधूरे दस्तावेज या गलत जानकारी के कारण खारिज होते हैं.

उन्होंने कहा कि यदि बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट्स आवेदकों को दस्तावेज तैयार करने, जानकारी सत्यापित कराने और सरकारी योजनाओं के बारे में सही मार्गदर्शन देने में मदद करें, तो रिजेक्शन दर में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में.

विशेषज्ञों के अनुसार मंत्रालय के निर्देश प्रभावी ढंग से लागू होने पर डिजिटल लेंडिंग को बड़ा बढ़ावा मिलेगा. उनके अनुसार, बैंकिंग सिस्टम से पूर्ण इंटीग्रेशन होने पर आवेदन तेजी से प्रोसेस होंगे और ग्रामीण क्षेत्रों में बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट्स की भूमिका भी और मजबूत होगी.


₹1,500 करोड़ की Polaris Smart Metering पर अडानी की नजर, IntelliSmart के बाद अब दूसरे बड़े अधिग्रहण की तैयारी

करीब ₹1,500 करोड़ की इस संभावित डील के लिए कंपनी दूसरे चरण की बोली प्रक्रिया में पहुंच चुकी है. अगर यह सौदा पूरा होता है तो देश में तेजी से बढ़ रहे स्मार्ट मीटर बाजार में अडानी ग्रुप की स्थिति और मजबूत हो जाएगी.

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Monday, 13 July, 2026
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स्मार्ट मीटरिंग कारोबार में अपनी बादशाहत मजबूत करने की दिशा में गौतम अडानी के नेतृत्व में अडानी ग्रुप (Adani Group) एक और बड़ा कदम उठा सकता है. IntelliSmart Infrastructure का ₹3,050 करोड़ में अधिग्रहण करने के कुछ ही हफ्तों बाद अब समूह की कंपनी Adani Energy Solutions की नजर Polaris Smart Metering पर है. करीब ₹1,500 करोड़ की इस संभावित डील के लिए कंपनी दूसरे चरण की बोली प्रक्रिया में पहुंच चुकी है. यदि यह सौदा पूरा होता है तो देश में तेजी से बढ़ रहे स्मार्ट मीटर बाजार में अडानी ग्रुप की स्थिति और मजबूत हो जाएगी.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Polaris Smart Metering की बिक्री प्रक्रिया चला रही I Squared Capital ने दूसरे चरण के लिए कुछ चुनिंदा कंपनियों को शॉर्टलिस्ट किया है. इनमें Adani Energy Solutions के अलावा APRAAVA Energy और प्राइवेट इक्विटी फंड Actis भी शामिल हैं. सूत्रों के अनुसार ड्यू डिलिजेंस की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और अगस्त की शुरुआत तक बाइंडिंग बिड्स मिलने की उम्मीद है. इस डील की संभावित वैल्यूएशन करीब ₹1,500 करोड़ आंकी जा रही है.

I Squared Capital करना चाहती है एग्जिट

Polaris Smart Metering घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक ग्राहकों के लिए स्मार्ट बिजली और गैस मीटर उपलब्ध कराती है. I Squared Capital ने फरवरी 2023 में अपने ISQ Growth Markets Infrastructure Fund के जरिए कंपनी में लगभग 100 मिलियन डॉलर का निवेश कर कंट्रोलिंग हिस्सेदारी खरीदी थी. अब फंड इस निवेश से बाहर निकलने की तैयारी कर रहा है.

हालांकि, Adani Energy Solutions और APRAAVA Energy ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार किया है, जबकि I Squared Capital और Actis की ओर से भेजे गए सवालों का कोई जवाब नहीं मिला.

यूपी और पश्चिम बंगाल में बड़े प्रोजेक्ट

Polaris Smart Metering को उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में बड़े पैमाने पर स्मार्ट मीटर लगाने के ठेके मिले हैं. कंपनी लखनऊ और अयोध्या क्लस्टर में 51 लाख स्मार्ट मीटर लगाने की परियोजना पर काम कर रही है. इसके अलावा पश्चिम बंगाल में भी उसे 22 लाख स्मार्ट मीटर लगाने का कॉन्ट्रैक्ट मिला हुआ है. मजबूत ऑर्डर बुक और तेजी से बढ़ते कारोबार की वजह से कंपनी निवेशकों के लिए आकर्षक बनी हुई है.

2027 तक 25 करोड़ स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य

केंद्र सरकार ने 2027 तक देशभर में 25 करोड़ प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य रखा है. इस योजना पर करीब ₹1.35 लाख करोड़ के निवेश का अनुमान है. CareEdge की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में अभी केवल 5-6% उपभोक्ताओं के पास स्मार्ट मीटर हैं, जबकि जापान में यह आंकड़ा 100%, अमेरिका में 73% और वैश्विक औसत 43% है. ऐसे में आने वाले वर्षों में इस सेक्टर में तेज विस्तार की उम्मीद है.

पहले ही कर चुका है बड़ा अधिग्रहण

Adani Energy Solutions ने हाल ही में IntelliSmart Infrastructure का ₹3,050 करोड़ में अधिग्रहण किया था. यह देश की शीर्ष तीन स्मार्ट मीटरिंग कंपनियों में शामिल है और उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, बिहार तथा असम में करीब 2.2 करोड़ स्मार्ट मीटर स्थापित कर चुकी है. Polaris Smart Metering का संभावित अधिग्रहण अडानी ग्रुप की इसी विस्तार रणनीति का अगला बड़ा कदम माना जा रहा है.
 


AI रणनीति से मिली रफ्तार, LTMindtree का पहली तिमाही मुनाफा 17% बढ़ा, राजस्व 18% उछला

कंपनी के मुताबिक, डॉलर के आधार पर तिमाही राजस्व 6.1 फीसदी बढ़कर 1.22 अरब डॉलर (1.22 बिलियन डॉलर) रहा. वहीं, स्थिर मुद्रा (Constant Currency) के आधार पर राजस्व वृद्धि 6.4 फीसदी दर्ज की गई.

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Monday, 13 July, 2026
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आईटी सेवा क्षेत्र की कंपनी LTMindtree ने वित्त वर्ष 2026-27 (Q1FY27) की पहली तिमाही में मजबूत वित्तीय नतीजे दर्ज किए हैं. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सेवाओं की बढ़ती मांग और विभिन्न कारोबार क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन के दम पर कंपनी का शुद्ध लाभ (Net Profit) सालाना आधार पर 17 फीसदी बढ़कर 1,468 करोड़ रुपये हो गया.

30 जून 2026 को समाप्त तिमाही में कंपनी का राजस्व भी 18 फीसदी बढ़कर 11,608 करोड़ रुपये पहुंच गया. कंपनी का कहना है कि उसकी AI-केंद्रित रणनीति अब बड़े ग्राहकों और नए सौदों के रूप में स्पष्ट परिणाम देने लगी है.

डॉलर के लिहाज से भी मजबूत रही ग्रोथ

कंपनी के मुताबिक, डॉलर के आधार पर तिमाही राजस्व 6.1 फीसदी बढ़कर 1.22 अरब डॉलर (1.22 बिलियन डॉलर) रहा. वहीं, स्थिर मुद्रा (Constant Currency) के आधार पर राजस्व वृद्धि 6.4 फीसदी दर्ज की गई.

LTMindtree के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और प्रबंध निदेशक (MD) वेणु लांबू ने कहा कि पहली तिमाही के नतीजे कंपनी की AI-केंद्रित रणनीति के सफल क्रियान्वयन और लाभदायक विकास यात्रा को दर्शाते हैं.

उन्होंने कहा, "हमारी AI रणनीति अब ग्राहकों के लिए ठोस परिणाम दे रही है. यह हमें मिलने वाले नए प्रोजेक्ट्स के आकार और गुणवत्ता में भी साफ दिखाई दे रहा है. कंपनी के पास मजबूत ऑर्डर बुक और विभिन्न उद्योग क्षेत्रों में स्वस्थ बिजनेस पाइपलाइन मौजूद है."

हर तिमाही AI कारोबार से 150 मिलियन डॉलर की कमाई

वेणु लांबू ने बताया कि क्रिएटिव, बिजनेस और इंडस्ट्रियल सेगमेंट में कंपनी की AI सेवाओं से हर तिमाही लगभग 15 करोड़ डॉलर (150 मिलियन डॉलर) का राजस्व प्राप्त हो रहा है. उनका कहना है कि आने वाले समय में AI आधारित सेवाएं कंपनी की वृद्धि का प्रमुख आधार बनेंगी.

परिचालन मार्जिन में भी हुआ सुधार

कंपनी की परिचालन लाभप्रदता (Operating Profitability) में भी सुधार देखने को मिला. ब्याज और कर (EBIT) से पहले का मार्जिन एक साल पहले की तुलना में 120 बेसिस प्वाइंट बढ़कर 15.5 फीसदी हो गया. यह संकेत देता है कि कंपनी केवल राजस्व ही नहीं बढ़ा रही, बल्कि लागत प्रबंधन के जरिए अपनी लाभप्रदता भी मजबूत कर रही है.

कंज्यूमर कारोबार सबसे तेज बढ़ा

कारोबारी क्षेत्रों की बात करें तो अधिकांश सेगमेंट में अच्छी वृद्धि दर्ज की गई.

1. कंज्यूमर (Consumer) वर्टिकल सबसे तेज बढ़ा और इसमें स्थिर मुद्रा के आधार पर 18.2 फीसदी की वृद्धि दर्ज हुई.
2. टेक्नोलॉजी (Technology) कारोबार में 10 फीसदी की बढ़ोतरी हुई.
3. प्रोडक्शन (Production) सेगमेंट में 5.3 फीसदी की वृद्धि रही.  हालांकि, फाइनेंशियल सर्विसेज (Financial Services) एकमात्र ऐसा क्षेत्र रहा, जहां स्थिर मुद्रा के आधार पर राजस्व में 2.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई.

कुल मिलाकर, पहली तिमाही के नतीजे बताते हैं कि AI सेवाओं पर कंपनी का बढ़ता फोकस कारोबार को नई गति दे रहा है और आने वाले समय में बड़े सौदों के जरिए विकास की संभावनाएं मजबूत बनी हुई हैं.
 


पिता की हत्या का बदला लेने की कसम, ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी

ईरान के सर्वोच्च नेता (Supreme Leader) आयतुल्ला मोजतबा खामेनेई ने अपने पिता और पूर्व सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई की हत्या का बदला लेने की कसम खाई है.

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Monday, 13 July, 2026
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ईरान के सर्वोच्च नेता (Supreme Leader) आयतुल्ला मोजतबा खामेनेई ने अपने पिता और पूर्व सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई की हत्या का बदला लेने की कसम खाई है. उन्होंने कहा कि उनके पिता की मौत का प्रतिशोध लेना पूरे देश की मांग है और दोषियों को इसकी कीमत चुकानी होगी. इस बयान के साथ ही ईरान और अमेरिका के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ने की आशंका गहरा गई है.

अंतिम संस्कार के बाद पहली बार सामने आया बयान

अपने पिता के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू होने के करीब एक सप्ताह बाद जारी किए गए पहले सार्वजनिक संदेश में मोजतबा खामेनेई ने कहा कि उनके पिता की हत्या के जिम्मेदार लोगों की पहचान कर ली गई है और उनके खिलाफ जवाबी कार्रवाई जरूर की जाएगी. उन्होंने कहा कि यह केवल एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरे ईरान का मामला है और देश इस घटना का बदला लेकर रहेगा.

अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच बढ़ी चिंता

मोजतबा खामेनेई का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी और ईरानी बलों के बीच हालिया हमलों के बाद दोनों देशों के बीच हुए युद्धविराम (सीजफायर) पर सवाल उठने लगे हैं. वॉशिंगटन और तेहरान के बीच चार महीने तक चले संघर्ष को समाप्त करने के उद्देश्य से यह समझौता किया गया था. ईरान का कहना है कि यह समझौता लंबे समय में देश की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण लाभ लेकर आएगा, लेकिन हालिया घटनाक्रम ने इसकी स्थिरता पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं.

ट्रंप बोले- युद्धविराम खत्म, लेकिन बातचीत जारी रहेगी

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हालिया घटनाओं के बाद कहा कि युद्धविराम अब समाप्त हो चुका है. हालांकि उन्होंने शुक्रवार को यह भी कहा कि दोनों देशों ने बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई है, जिससे कूटनीतिक समाधान की संभावना अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है.

सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए मोजतबा खामेनेई

हवाई हमले के बाद से मोजतबा खामेनेई सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं. अब तक उनकी कोई तस्वीर, वीडियो या ऑडियो रिकॉर्डिंग भी सामने नहीं आई है. उनकी गैरमौजूदगी को लेकर ईरान में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं.

कुछ ईरानी नागरिकों ने उनसे सार्वजनिक रूप से सामने आने की अपील की है. उनका कहना है कि यदि वह घायल भी हैं, तब भी देश को संबोधित कर लोगों की चिंताओं को दूर करना चाहिए.

रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के समर्थन से संभाली कमान

मोजतबा खामेनेई ने शक्तिशाली इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के समर्थन से ईरान के सर्वोच्च नेता का पद संभाला है. उनके पिता आयतुल्ला अली खामेनेई ने 37 वर्षों तक ईरान का नेतृत्व किया था. उनके निधन के बाद देशभर से बड़ी संख्या में लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे और उन्हें ईरान के सबसे पवित्र धार्मिक स्थल पर सुपुर्द-ए-खाक किया गया.

 


NSE की लिस्टिंग से पूरा होगा भारत के सूचीबद्ध एक्सचेंजों का 'त्रिकोण': जेफरीज

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के कैश मार्केट में NSE की हिस्सेदारी 93 फीसदी, इक्विटी ऑप्शंस में 75 फीसदी और इक्विटी फ्यूचर्स में 100 फीसदी है. यही वजह है कि भारतीय शेयर बाजार में इसका दबदबा लगातार बना हुआ है.

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Monday, 13 July, 2026
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देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की प्रस्तावित लिस्टिंग भारतीय पूंजी बाजार के लिए एक बड़ा बदलाव साबित हो सकती है. ब्रोकरेज फर्म जेफरीज (Jefferies) की इक्विटी रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, NSE के शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने के बाद भारत के तीनों प्रमुख एक्सचेंज, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE), बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX)लिस्टेड कंपनियां बन जाएंगे. इससे निवेशकों को राजस्व के लिहाज से देश के सबसे बड़े एक्सचेंज में निवेश का अवसर मिलेगा.

रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में भारत के एक्सचेंज उद्योग का कुल समेकित राजस्व 24,400 करोड़ रुपये रहा, जिसमें अकेले NSE की हिस्सेदारी करीब 70 फीसदी थी. कैश इक्विटी, इक्विटी डेरिवेटिव्स और क्लियरिंग जैसे प्रमुख कारोबारों में NSE की मजबूत पकड़ बनी हुई है और अधिकांश प्रमुख बाजार खंडों में उसकी हिस्सेदारी 90 फीसदी से अधिक है.

FY26 में NSE का राजस्व BSE और MCX से कई गुना अधिक

जेफरीज की रिपोर्ट के मुताबिक, FY26 में NSE का परिचालन राजस्व 16,600 करोड़ रुपये रहा. इसके मुकाबले BSE का परिचालन राजस्व 4,800 करोड़ रुपये और MCX का 2,300 करोड़ रुपये था. नियामकीय खर्चों को छोड़कर NSE का परिचालन EBITDA 11,100 करोड़ रुपये रहा, जबकि EBITDA मार्जिन 67 फीसदी दर्ज किया गया.

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के कैश मार्केट में NSE की हिस्सेदारी 93 फीसदी, इक्विटी ऑप्शंस में 75 फीसदी और इक्विटी फ्यूचर्स में 100 फीसदी है. यही वजह है कि भारतीय शेयर बाजार में इसका दबदबा लगातार बना हुआ है.

इक्विटी ऑप्शंस से आती है सबसे ज्यादा कमाई

NSE के ट्रांजैक्शन रेवेन्यू में सबसे बड़ा योगदान इक्विटी ऑप्शंस का है. रिपोर्ट के अनुसार, कुल ट्रांजैक्शन आय का 77 फीसदी हिस्सा इक्विटी ऑप्शंस से आता है. वहीं, कैश सेगमेंट का योगदान 10 फीसदी और इक्विटी फ्यूचर्स का योगदान 9 फीसदी है.

जेफरीज ने बताया कि FY20 से FY26 के बीच भारत के इक्विटी ऑप्शंस बाजार का औसत दैनिक प्रीमियम कारोबार (Average Daily Premium Turnover) 56 फीसदी की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़कर 77,200 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. हालांकि, अत्यधिक सट्टेबाजी पर अंकुश लगाने के लिए नियामकीय बदलावों के बाद FY26 में इंडेक्स ऑप्शंस के औसत दैनिक कारोबार की वृद्धि दर घटकर 8 फीसदी रह गई.

अमेरिका के मुकाबले अभी भी काफी छोटा है भारतीय ऑप्शंस बाजार

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में डेरिवेटिव बाजार के आकार को लेकर चिंताओं के बावजूद ऑप्शन प्रीमियम कारोबार के लिहाज से भारतीय बाजार अभी भी अमेरिका से काफी छोटा है. ऑप्शन प्रीमियम के आधार पर भारत का कारोबार अमेरिकी बाजार का केवल लगभग पांचवां हिस्सा है, हालांकि छोटे कॉन्ट्रैक्ट आकार के कारण भारत में ट्रेड होने वाले ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट्स की संख्या कहीं अधिक है.

कमोडिटी और टेक्नोलॉजी कारोबार पर भी बढ़ रहा फोकस

जेफरीज ने कहा कि NSE अब केवल इक्विटी और डेरिवेटिव्स तक सीमित नहीं है, बल्कि कमोडिटी कारोबार और टेक्नोलॉजी सेवाओं का भी विस्तार कर रहा है. एक्सचेंज के कुल राजस्व में डेटा और टेक्नोलॉजी सेवाओं की हिस्सेदारी करीब 13 फीसदी है. इसके अलावा, बिजली (Electricity) फ्यूचर्स सेगमेंट में भी NSE ने कारोबार के आधार पर लगभग 70 फीसदी बाजार हिस्सेदारी हासिल कर ली है.

मजबूत बैलेंस शीट से लिस्टिंग को मिलेगा सहारा

रिपोर्ट के मुताबिक, NSE की मजबूत बैलेंस शीट, कम पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) की आवश्यकता और निवेशकों को उच्च लाभांश (Dividend) देने का रिकॉर्ड उसकी वित्तीय स्थिति को और मजबूत बनाता है. जेफरीज का मानना है कि प्रस्तावित लिस्टिंग से पहले ये सभी कारक NSE को निवेशकों के लिए एक आकर्षक विकल्प बना सकते हैं.
 


आज कैसी रहेगी शेयर बाजार की चाल? शुक्रवार की जोरदार तेजी के बाद इन ट्रिगर्स पर रहेगी नजर

शुक्रवार को बीएसई सेंसेक्स 827.57 अंक उछलकर 77,569.39 और निफ्टी 244.10 अंक चढ़कर 24,206.90 पर बंद हुआ था.

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Monday, 13 July, 2026
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घरेलू शेयर बाजार ने शुक्रवार को लगातार दूसरे कारोारी सत्र में मजबूत बढ़त दर्ज की थी. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 827.57 अंक उछलकर 77,569.39 और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 244.10 अंक चढ़कर 24,206.90 पर बंद हुआ था. रिलायंस इंडस्ट्रीज, आईटी और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी से बाजार को मजबूती मिली थी. हालांकि, आज बाजार की शुरुआत उतार-चढ़ाव भरी रह सकती है. मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच निवेशकों की नजर कंपनियों के बड़े ऐलानों, पहली तिमाही के नतीजों और वैश्विक घटनाक्रम पर रहेगी. 

वैश्विक बाजार से मिल रहे हैं कमजोर संकेत

सोमवार सुबह एशियाई बाजारों में दबाव देखने को मिल रहा है. मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अनिश्चितता के कारण कच्चे तेल की कीमतों में 4% से ज्यादा की तेजी आई है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ी है. इसका असर जापान, दक्षिण कोरिया समेत कई एशियाई बाजारों पर भी दिखाई दे रहा है. वहीं GIFT Nifty भी कमजोर शुरुआत का संकेत दे रहा है, जिससे भारतीय बाजार की ओपनिंग दबाव में रह सकती है. 

शुक्रवार को बाजार का प्रदर्शन

शुक्रवार को बाजार में चौतरफा खरीदारी देखने को मिली थी. सेंसेक्स 827.57 अंक यानी 1.08% की बढ़त के साथ 77,569.39 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 1.02% चढ़कर 24,206.90 पर पहुंच गया. रिलायंस इंडस्ट्रीज, BEL, टेक महिंद्रा, एक्सिस बैंक, टाटा स्टील, इन्फोसिस, बजाज फाइनेंस और ICICI Bank जैसे दिग्गज शेयरों में शानदार तेजी रही. वहीं मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स ने भी बड़ी कंपनियों से बेहतर प्रदर्शन किया था.

आज इन शेयरों पर रहेगी खास नजर

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, सोमवार के कारोबार में कई शेयर निवेशकों के रडार पर रहेंगे. Lux Industries ने पश्चिम बंगाल में 600 करोड़ रुपये के निवेश से नया मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने का ऐलान किया है, जबकि Mankind Pharma अपनी सहायक कंपनी Broadway Hospitality Services में 100% हिस्सेदारी 49 करोड़ रुपये में बेचने जा रही है. SBI Funds Management ने प्री-आईपीओ प्लेसमेंट के बाद अपने IPO का आकार घटा दिया है, वहीं SBI ने भी IPO से पहले 30 निवेशकों को शेयर बेचकर 1,655 करोड़ रुपये जुटाए हैं. NTPC ने 20,456.70 करोड़ रुपये की लागत वाली लारा सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट स्टेज-III को मंजूरी दी है. Powerica को गुजरात में 50 मेगावाट का विंड पावर प्रोजेक्ट मिला है, जबकि NMDC ने लौह अयस्क की नई कीमतें घोषित की हैं. Reliance Infrastructure की सहायक कंपनी Mumbai Metro One ने NARCL के साथ कर्ज पुनर्गठन समझौता किया है, जिससे 1,100 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज घटने की उम्मीद है. Swiggy ने FSSAI से जुड़े लाइसेंस संबंधी मुद्दों का समाधान कर संशोधित लाइसेंस हासिल कर लिया है. Sterlite Technologies ने यूरोप में पेटेंट विवाद में जीत दर्ज की है और HUDCO ने ओडिशा सरकार के साथ 1 लाख करोड़ रुपये तक की संभावित ऋण सहायता के लिए समझौता किया है.

तिमाही नतीजों पर भी रहेगी नजर

आज HCL Technologies, Bajaj Consumer Care, Nuvoco Vistas, Plastiblends India, Simbhaoli Sugars, Vivo Bio Tech और अन्य कई कंपनियां अपने अप्रैल-जून तिमाही नतीजे जारी करेंगी. इन कंपनियों के प्रदर्शन और प्रबंधन की टिप्पणी का असर संबंधित शेयरों के साथ-साथ पूरे बाजार की धारणा पर भी पड़ सकता है.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)


अगले हफ्ते IPO की बहार, SBI Funds समेत 3 कंपनियां जुटाएंगी ₹11,980 करोड़, जानें निवेश की पूरी डिटेल

14 जुलाई से शेयर बाजार में देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनियों में शामिल SBI Funds Management के अलावा Alpine Texworld और Millworks Technologies के IPO खुल रहे हैं.

Last Modified:
Saturday, 11 July, 2026
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अगले सप्ताह IPO में निवेश करने वालों के लिए कई बड़े मौके आने वाले हैं. 14 जुलाई से शेयर बाजार में तीन नए IPO खुलेंगे. इनमें देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनियों में शामिल SBI Funds Management के अलावा Alpine Texworld और Millworks Technologies शामिल हैं. तीनों कंपनियां मिलकर करीब 11,980 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी में हैं.

SBI Funds Management का होगा सबसे बड़ा IPO

अगले हफ्ते का सबसे बड़ा IPO SBI Funds Management का होगा. यह इश्यू 14 जुलाई को खुलेगा और 16 जुलाई को बंद होगा. कंपनी ने प्रति शेयर 545 से 574 रुपये का प्राइस बैंड तय किया है. एक लॉट में 26 शेयर होंगे. ऊपरी प्राइस बैंड के हिसाब से रिटेल निवेशकों को एक लॉट खरीदने के लिए 14,924 रुपये का निवेश करना होगा.

यह पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) है. यानी कंपनी नए शेयर जारी नहीं करेगी, बल्कि मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे. ऐसे में IPO से जुटाई गई राशि कंपनी को नहीं मिलेगी. शेयरों की संभावित लिस्टिंग 21 जुलाई को BSE और NSE पर हो सकती है. SBI Funds Management की स्थापना 1992 में हुई थी और यह भारत की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMC) में शामिल है.

Alpine Texworld भी ला रही है IPO

Alpine Texworld का IPO भी 14 जुलाई से 16 जुलाई तक सब्सक्रिप्शन के लिए खुला रहेगा. कंपनी ने 100 से 105 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है. एक लॉट में 142 शेयर होंगे, जिसके लिए निवेशकों को अधिकतम 14,910 रुपये लगाने होंगे.

यह 126.25 करोड़ रुपये का फ्रेश इश्यू है. यानी कंपनी नए शेयर जारी कर पूंजी जुटाएगी. जुटाई गई राशि का इस्तेमाल कारोबार विस्तार के लिए किया जाएगा. कंपनी टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए फैब्रिक डाइंग और प्रोसेसिंग का कारोबार करती है और अहमदाबाद में अपनी तीसरी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करने की योजना बना रही है.

Millworks Technologies के IPO पर भी नजर

SME सेगमेंट की Millworks Technologies भी 14 जुलाई को अपना IPO खोलेगी, जो 16 जुलाई तक खुला रहेगा. कंपनी ने 315 से 331 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है और इस इश्यू के जरिए 160.34 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है.

ग्रे मार्केट में इस IPO को लेकर अच्छी मांग देखने को मिल रही है. कंपनी के शेयर इश्यू प्राइस के मुकाबले 100% से अधिक प्रीमियम (GMP) पर कारोबार कर रहे हैं. हालांकि, निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि ग्रे मार्केट प्रीमियम केवल बाजार का संकेत होता है और इससे लिस्टिंग पर मुनाफे की कोई गारंटी नहीं मिलती.

निवेश से पहले रखें इन बातों का ध्यान

IPO में निवेश करने से पहले कंपनी के कारोबार, वित्तीय स्थिति, जोखिम और वैल्यूएशन का अच्छी तरह आकलन करना जरूरी है. केवल GMP या बाजार की चर्चा के आधार पर निवेश का फैसला नहीं करना चाहिए. किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय लेना बेहतर माना जाता है.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)

 


हाई BP से HIV तक, 39 जरूरी दवाओं के रेट फिक्स, ज्यादा वसूली पर होगी कार्रवाई

सरकार के इस फैसले के बाद कोई भी दवा कंपनी या मेडिकल स्टोर निर्धारित कीमत से अधिक राशि नहीं वसूल सकेगा. नियमों का उल्लंघन करने पर अतिरिक्त वसूली गई रकम ब्याज सहित लौटानी होगी.

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Saturday, 11 July, 2026
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महंगी दवाओं से परेशान मरीजों के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हृदय रोग, HIV और आंखों के संक्रमण समेत 39 जरूरी दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमत (Retail Price) तय कर दी है. अब कोई भी दवा कंपनी या मेडिकल स्टोर निर्धारित कीमत से अधिक राशि नहीं वसूल सकेगा. नियमों का उल्लंघन करने पर अतिरिक्त वसूली गई रकम ब्याज सहित लौटानी होगी.

39 जरूरी दवाओं की कीमत हुई तय

रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय की ओर से 8 जुलाई को जारी अधिसूचना के अनुसार, ड्रग्स (प्राइस कंट्रोल) ऑर्डर (DPCO), 2013 के तहत 39 नई दवा फॉर्मूलेशन की अधिकतम खुदरा कीमत निर्धारित की गई है. इन दवाओं का उपयोग हाई BP, डायबिटीज, हृदय रोग, HIV और आंखों के संक्रमण जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज में किया जाता है. सरकार का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य जरूरी दवाओं को आम लोगों के लिए किफायती बनाना और इलाज का खर्च कम करना है.

तय कीमत से ज्यादा वसूली पर होगी सख्त कार्रवाई

NPPA ने स्पष्ट किया है कि कोई भी दवा निर्माता, मार्केटिंग कंपनी या विक्रेता निर्धारित खुदरा कीमत से अधिक राशि नहीं वसूल सकता. यदि कोई कंपनी या विक्रेता नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसे अतिरिक्त वसूली गई पूरी राशि ब्याज सहित जमा करनी होगी. यह कार्रवाई ड्रग्स (प्राइस कंट्रोल) ऑर्डर, 2013 और आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के प्रावधानों के तहत की जाएगी.

मेडिकल स्टोर पर प्राइस लिस्ट लगाना होगा अनिवार्य

सरकार ने सभी मेडिकल स्टोर और दवा विक्रेताओं को निर्देश दिया है कि वे दवा कंपनियों द्वारा जारी नवीनतम प्राइस लिस्ट दुकान में ऐसी जगह प्रदर्शित करें, जहां ग्राहक उसे आसानी से देख सकें. इस व्यवस्था का उद्देश्य दवाओं की कीमतों में पारदर्शिता बढ़ाना और मरीजों को अधिक कीमत वसूले जाने से बचाना है.

मरीजों को कैसे मिलेगा फायदा?

नई व्यवस्था लागू होने के बाद मरीजों को जरूरी दवाएं निर्धारित कीमत पर उपलब्ध होंगी. इससे इलाज की लागत कम होगी, दवा कंपनियों और विक्रेताओं की मनमानी पर रोक लगेगी और उपभोक्ताओं के हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित होगी. सरकार का मानना है कि यह कदम आम लोगों तक सस्ती और जरूरी दवाओं की पहुंच बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.
 


त्रिपुरा बना टेक्नोलॉजी निवेश का नया हब, बिजनेस कॉन्क्लेव में ₹10,000 करोड़ से ज्यादा के 43 MoU पर हस्ताक्षर

त्रिपुरा ने टेक्नोलॉजी और डिजिटल निवेश के क्षेत्र में बड़ा कदम बढ़ाते हुए 'डेस्टिनेशन त्रिपुरा बिजनेस कॉन्क्लेव 2026' के दौरान ₹10,000 करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव हासिल किए हैं.

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Saturday, 11 July, 2026
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त्रिपुरा ने टेक्नोलॉजी और डिजिटल निवेश के क्षेत्र में बड़ा कदम बढ़ाते हुए 'डेस्टिनेशन त्रिपुरा बिजनेस कॉन्क्लेव 2026' के दौरान ₹10,000 करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव हासिल किए हैं. दो दिवसीय कॉन्क्लेव में सूचना प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), हेल्थकेयर, क्लाउड, ग्रीन एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर समेत कई क्षेत्रों में 43 समझौता ज्ञापनों (MoU) और 11 एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) पर हस्ताक्षर हुए. इस दौरान गूगल और सेल्सफोर्स जैसी वैश्विक टेक कंपनियों के साथ भी अहम साझेदारियां की गईं.

दो दिन तक चला बिजनेस कॉन्क्लेव

अगरतला के इंटरनेशनल फेयर ग्राउंड, हापानिया में आयोजित इस दो दिवसीय (9 और 10 जुलाई 2026) कॉन्क्लेव में देशभर के निवेशकों, उद्योगपतियों, स्टार्टअप्स, टेक कंपनियों और नीति निर्माताओं ने हिस्सा लिया. कार्यक्रम का उद्देश्य त्रिपुरा को टेक्नोलॉजी आधारित और सतत निवेश के उभरते केंद्र के रूप में स्थापित करना था.

मुख्यमंत्री बोले- निवेशकों का भरोसा बढ़ा

कार्यक्रम का उद्घाटन त्रिपुरा के मुख्यमंत्री प्रो. (डॉ.) माणिक साहा ने किया. इस दौरान सूचना प्रौद्योगिकी, वित्त एवं योजना मंत्री प्रणजीत सिंघा रॉय समेत राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. वहीं केंद्रीय पूर्वोत्तर विकास एवं संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया और केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने वर्चुअली कार्यक्रम को संबोधित किया.

मुख्यमंत्री माणिक साहा ने कहा कि पिछले छह वर्षों में राज्य की सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) दोगुनी हुई है. उन्होंने बताया कि कॉन्क्लेव में 500 प्रतिभागियों के आने की उम्मीद थी, लेकिन 1,000 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया, जो त्रिपुरा में निवेशकों के बढ़ते भरोसे का संकेत है.

गूगल और सेल्सफोर्स के साथ रणनीतिक साझेदारी

कॉन्क्लेव के दौरान सूचना प्रौद्योगिकी निदेशालय (DIT) ने गूगल इंडिया के साथ डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम के विकास के लिए समझौता किया. इसके अलावा सेल्सफोर्स के साथ AI आधारित नागरिक सेवाओं, CRM समाधान और डिजिटल गवर्नेंस प्लेटफॉर्म विकसित करने पर साझेदारी हुई. टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के साथ भी शुरुआती स्तर पर चर्चा की गई.

इसके अलावा Da'Spatio Rhobotique Laboratory, Bodhi Tree Multimedia, Elvania Energies 369, Indigi Consulting and Solutions समेत कई कंपनियों के साथ भी MoU पर हस्ताक्षर किए गए.

आईटी सेक्टर में बढ़ रहा निवेश

सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के निदेशक जेया रागुल गेशन बी ने बताया कि राज्य की आईटी नीतियों का सकारात्मक असर दिखने लगा है. उन्होंने कहा कि एयरटेल ने अगरतला में डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए ₹200 करोड़ के निवेश का फैसला किया है.

उन्होंने बताया कि राज्य में फिलहाल 134 स्टार्टअप पंजीकृत हैं, 59 कंपनियों को मान्यता मिल चुकी है और स्टार्टअप्स को ₹2.7 करोड़ से अधिक की वित्तीय सहायता दी जा चुकी है.

निवेशकों के लिए आसान होगी प्रक्रिया

उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के सचिव किरण गिट्टे ने कहा कि राज्य सरकार ने कारोबार शुरू करने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम लागू किया है. बेहतर सड़क, रेल, इंटरनेट, बैंकिंग और कुशल मानव संसाधन के दम पर त्रिपुरा निवेश के लिए आकर्षक गंतव्य बन रहा है.

IT Pavilion बना आकर्षण का केंद्र

कॉन्क्लेव में सूचना प्रौद्योगिकी निदेशालय का IT Pavilion सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र रहा. यहां निवेशकों, स्टार्टअप संस्थापकों, छात्रों और उद्योग प्रतिनिधियों को त्रिपुरा की IT/ITeS नीति, स्टार्टअप नीति और डेटा सेंटर नीति की जानकारी दी गई. साथ ही प्रस्तावित AI Policy, AVGC-XR Policy और Global Capability Centre (GCC) Policy की भी झलक दिखाई गई.

डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा फोकस

राज्य सरकार ने प्रस्तावित IT Park, Tripura IT & Data Ecosystem Zone (TIDEZ), Airtel Nxtra Data Centre और T-NEST इनक्यूबेशन सेंटर जैसी परियोजनाओं को भी प्रदर्शित किया. इन परियोजनाओं का उद्देश्य आईटी, डेटा सेंटर, साइबर सिक्योरिटी, BPO, ESDM और AI आधारित उद्योगों को बढ़ावा देना है.

टेक्नोलॉजी आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ता त्रिपुरा

सरकार का कहना है कि 'डेस्टिनेशन त्रिपुरा बिजनेस कॉन्क्लेव 2026' राज्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होगा. वैश्विक टेक कंपनियों के निवेश और नई साझेदारियों से त्रिपुरा को आने वाले वर्षों में पूर्वोत्तर भारत के प्रमुख टेक्नोलॉजी निवेश केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी.
 


JSW Energy की सब्सिडियरी को ₹444 करोड़ का बड़ा ऑर्डर, सोमवार को फोकस में रहेगा शेयर

यह ऑर्डर बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) और पावर कन्वर्जन सिस्टम (PCS) की आपूर्ति से जुड़ा है, जिससे कंपनी के ऊर्जा भंडारण कारोबार को और मजबूती मिलने की उम्मीद

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Saturday, 11 July, 2026
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जेएसडब्ल्यू एनर्जी (JSW Energy) के शेयर अगले कारोबारी सत्र में निवेशकों के रडार पर रह सकते हैं. कंपनी की स्टेप-डाउन सब्सिडियरी JSW Energy PSP Eleven Ltd (JEPEL) को ₹443.74 करोड़ का बड़ा ऑर्डर मिला है. यह ऑर्डर बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) और पावर कन्वर्जन सिस्टम (PCS) की आपूर्ति से जुड़ा है, जिससे कंपनी के ऊर्जा भंडारण कारोबार को और मजबूती मिलने की उम्मीद है.

सब्सिडियरी को मिला ₹443.74 करोड़ का ऑर्डर

JSW Energy ने शेयर बाजार को दी सूचना में बताया कि उसकी 100% स्वामित्व वाली स्टेप-डाउन सब्सिडियरी JSW Energy PSP Eleven Ltd (JEPEL) को Bondada Renewable Energy Pvt Ltd से ₹443.74 करोड़ का ऑर्डर मिला है.

Bondada Renewable Energy, Bondada Engineering Ltd की सहायक कंपनी है. यह ऑर्डर 200 मेगावाट/400 मेगावाट-घंटा (MWh) क्षमता वाले बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) और पावर कन्वर्जन सिस्टम (PCS) की आपूर्ति के लिए है.

पुणे में है 5 GWh क्षमता का बैटरी प्लांट

JEPEL पुणे में 5 GWh वार्षिक क्षमता वाला बैटरी असेंबली प्लांट संचालित करती है. कंपनी का कहना है कि यह ऑर्डर उसके एनर्जी स्टोरेज कारोबार को और मजबूत करेगा तथा भारत में बढ़ती BESS मांग का लाभ उठाने में मदद करेगा.

2030 तक 30 GW क्षमता का लक्ष्य

JSW Energy की कुल लॉक्ड-इन जनरेशन क्षमता 32.1 गीगावाट (GW) है. इसमें 14.53 GW परिचालन में है, 13 GW निर्माणाधीन है और 4.6 GW परियोजनाएं पाइपलाइन में हैं. वहीं, कंपनी की लॉक्ड-इन एनर्जी स्टोरेज क्षमता 29.6 GWh है, जिसमें 26.4 GWh पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज और 3.2 GWh बैटरी एनर्जी स्टोरेज शामिल है. कंपनी ने 2030 तक 30 GW बिजली उत्पादन क्षमता और 40 GWh ऊर्जा भंडारण क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है.

रिन्यूएबल एनर्जी पोर्टफोलियो लगातार बढ़ रहा

JSW Energy ने अप्रैल 2026 से अब तक 1,081 मेगावाट नई रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता शुरू की है, जिसके बाद उसकी कुल स्थापित क्षमता बढ़कर 14,535 मेगावाट हो गई है. नई क्षमता में 442 मेगावाट सोलर, 108 मेगावाट विंड, 381 मेगावाट हाइब्रिड और 150 मेगावाट हाइड्रो प्रोजेक्ट शामिल हैं. इसके साथ कंपनी की कुल स्थापित क्षमता में रिन्यूएबल एनर्जी की हिस्सेदारी बढ़कर 61% हो गई है.

तीन महीने में 13% चढ़ा शेयर

JSW Energy का शेयर शुक्रवार को बीएसई पर ₹553.30 पर बंद हुआ. कंपनी का बाजार पूंजीकरण 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक है और यह BSE 200 इंडेक्स का हिस्सा है. पिछले तीन महीनों में कंपनी का शेयर करीब 13% की तेजी दर्ज कर चुका है. नए ऑर्डर के बाद सोमवार के कारोबारी सत्र में इस शेयर पर निवेशकों की खास नजर रहने की संभावना है.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)