ईरान के सर्वोच्च नेता (Supreme Leader) आयतुल्ला मोजतबा खामेनेई ने अपने पिता और पूर्व सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई की हत्या का बदला लेने की कसम खाई है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
ईरान के सर्वोच्च नेता (Supreme Leader) आयतुल्ला मोजतबा खामेनेई ने अपने पिता और पूर्व सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई की हत्या का बदला लेने की कसम खाई है. उन्होंने कहा कि उनके पिता की मौत का प्रतिशोध लेना पूरे देश की मांग है और दोषियों को इसकी कीमत चुकानी होगी. इस बयान के साथ ही ईरान और अमेरिका के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ने की आशंका गहरा गई है.
अंतिम संस्कार के बाद पहली बार सामने आया बयान
अपने पिता के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू होने के करीब एक सप्ताह बाद जारी किए गए पहले सार्वजनिक संदेश में मोजतबा खामेनेई ने कहा कि उनके पिता की हत्या के जिम्मेदार लोगों की पहचान कर ली गई है और उनके खिलाफ जवाबी कार्रवाई जरूर की जाएगी. उन्होंने कहा कि यह केवल एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरे ईरान का मामला है और देश इस घटना का बदला लेकर रहेगा.
अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच बढ़ी चिंता
मोजतबा खामेनेई का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी और ईरानी बलों के बीच हालिया हमलों के बाद दोनों देशों के बीच हुए युद्धविराम (सीजफायर) पर सवाल उठने लगे हैं. वॉशिंगटन और तेहरान के बीच चार महीने तक चले संघर्ष को समाप्त करने के उद्देश्य से यह समझौता किया गया था. ईरान का कहना है कि यह समझौता लंबे समय में देश की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण लाभ लेकर आएगा, लेकिन हालिया घटनाक्रम ने इसकी स्थिरता पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं.
ट्रंप बोले- युद्धविराम खत्म, लेकिन बातचीत जारी रहेगी
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हालिया घटनाओं के बाद कहा कि युद्धविराम अब समाप्त हो चुका है. हालांकि उन्होंने शुक्रवार को यह भी कहा कि दोनों देशों ने बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई है, जिससे कूटनीतिक समाधान की संभावना अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है.
सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए मोजतबा खामेनेई
हवाई हमले के बाद से मोजतबा खामेनेई सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं. अब तक उनकी कोई तस्वीर, वीडियो या ऑडियो रिकॉर्डिंग भी सामने नहीं आई है. उनकी गैरमौजूदगी को लेकर ईरान में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं.
कुछ ईरानी नागरिकों ने उनसे सार्वजनिक रूप से सामने आने की अपील की है. उनका कहना है कि यदि वह घायल भी हैं, तब भी देश को संबोधित कर लोगों की चिंताओं को दूर करना चाहिए.
रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के समर्थन से संभाली कमान
मोजतबा खामेनेई ने शक्तिशाली इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के समर्थन से ईरान के सर्वोच्च नेता का पद संभाला है. उनके पिता आयतुल्ला अली खामेनेई ने 37 वर्षों तक ईरान का नेतृत्व किया था. उनके निधन के बाद देशभर से बड़ी संख्या में लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे और उन्हें ईरान के सबसे पवित्र धार्मिक स्थल पर सुपुर्द-ए-खाक किया गया.
31 मार्च 2026 तक दिल्ली में 3.69 लाख लोगों को बीमा सुरक्षा, बीमित राशि ₹1.30 लाख करोड़; कंपनी ने पिछले सात साल में ग्राहकों को ₹6,087 करोड़ के लाभ दिए.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
आईसीआईसीआई (ICICI) प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस ने वित्त वर्ष 2026 के दौरान दिल्ली में 100% दावा निपटान अनुपात दर्ज किया है. कंपनी के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में दिल्ली में टर्म प्लान यानी खुदरा सुरक्षा कारोबार में साल-दर-साल 53.89% की वृद्धि हुई. 31 मार्च 2026 तक कंपनी ने दिल्ली में 3,69,550 लोगों को बीमा सुरक्षा प्रदान की थी.
कंपनी के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक दिल्ली में उसकी प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियां (AUM) ₹18,427 करोड़ थीं, जबकि कुल बीमित राशि ₹1,30,274 करोड़ रही. पिछले सात वर्षों में कंपनी ने दिल्ली के ग्राहकों को विभिन्न श्रेणियों में कुल ₹6,087 करोड़ के लाभ का भुगतान किया. इनमें ₹1,832 करोड़ बीमाधारकों की मृत्यु से जुड़े दावों के रूप में दिए गए.
बचत और सेवानिवृत्ति उत्पादों की मांग
कंपनी ने कहा कि दिल्ली में लिंक्ड, गैर-लिंक्ड और वार्षिकी सहित उसके बचत कारोबार के उत्पादों की भी मांग बनी हुई है. कंपनी के अनुसार, ग्राहक वित्तीय सुरक्षा के साथ दीर्घकालिक बचत और सेवानिवृत्ति योजना को भी अपने वित्तीय लक्ष्यों में प्राथमिकता दे रहे हैं. 31 मार्च 2026 तक दिल्ली में कंपनी की 9 शाखाएं थीं. इसके अलावा 7,252 सलाहकार, 2,963 साझेदार शाखाएं और 5,049 निर्दिष्ट व्यक्तियों का नेटवर्क था.
एआई और डिजिटल तकनीक पर जोर
ICICI प्रूडेंशियल लाइफ के मुख्य वितरण अधिकारी अमीश बैंकर ने कहा कि दिल्ली कंपनी के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बाजार है. उन्होंने कहा कि वितरण, डिजिटल क्षमताओं, विभिन्न उत्पादों और ग्राहकों के साथ जुड़ाव में निवेश के जरिए कंपनी क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है.
कंपनी के अनुसार, वह ग्राहकों के पूरे बीमा चक्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, डेटा एनालिटिक्स और डिजिटलीकरण का इस्तेमाल कर रही है. वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में पूरी कंपनी के स्तर पर करीब 54% बचत पॉलिसियां आवेदन वाले दिन जारी की गईं, जबकि करीब 58% बीमा पॉलिसियां डिजिटल केवाईसी के जरिए जारी हुईं. कंपनी की करीब 97% सेवाएं स्वयं-सेवा या डिजिटल माध्यमों से उपलब्ध कराई गईं.
कंपनी ने डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘ICICI Pru Partner Stack’ भी शुरू किया है, जिसमें डिजिटल टूल और डेटा एनालिटिक्स शामिल हैं. वहीं, ‘Advisor Stack - IPRU Edge’ के जरिए देशभर में 2.44 लाख से अधिक एजेंटों को कारोबार बढ़ाने, कामकाज प्रबंधित करने और आवेदन वाले दिन पॉलिसी जारी करने में मदद मिलने का कंपनी ने दावा किया है.
पहली तिमाही में दावा निपटान अनुपात 99.3%
पूरी कंपनी के स्तर पर वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में दावा निपटान अनुपात 99.3% रहा. कंपनी के अनुसार, बिना जांच वाले व्यक्तिगत दावों के लिए औसत निपटान समय एक दिन था. दावा अनुरोध वेबसाइट, ईमेल, एसएमएस, व्हाट्सऐप, शाखा या 24 घंटे उपलब्ध ग्राहक सेवा के माध्यम से किया जा सकता है. कंपनी ने बताया कि उसका शुरुआती दावा अनुपात 22% रहा. कंपनी के मुताबिक, यह उसके कारोबार की गुणवत्ता पर ध्यान देने को दर्शाता है.
कंपनी का नाम बदलने को मंजूरी
कंपनी के निदेशक मंडल ने आवश्यक स्वीकृतियों के अधीन कंपनी का नाम बदलकर ‘ICICI Life Insurance Limited’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है. ICICI प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस ने वित्त वर्ष 2001 में अपना परिचालन शुरू किया था. कंपनी सुरक्षा और बचत श्रेणी में विभिन्न जीवन चरणों की जरूरतों के अनुरूप उत्पाद उपलब्ध कराती है. इसके डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पेपरलेस खरीद, डिजिटल भुगतान, स्वयं-सेवा लेनदेन और दावा निपटान की सुविधा उपलब्ध है.
30 जून 2026 तक कंपनी की प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियां ₹3.34 लाख करोड़ और कुल प्रभावी बीमित राशि ₹48.06 लाख करोड़ थी. कंपनी के अनुसार, वह भारत की पहली बीमा कंपनी है जो नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) दोनों पर सूचीबद्ध है.
दिल्ली में विस्तार की योजना
कंपनी ने कहा कि वह दिल्ली में अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए शाखाओं के विस्तार, सलाहकारों की नियुक्ति और लक्षित ग्राहक संपर्क पर काम करेगी. कंपनी के मुताबिक, इसका उद्देश्य बीमा की पहुंच बढ़ाने और ग्राहकों की बदलती जरूरतों के अनुरूप सेवाएं उपलब्ध कराना है.
17 सितंबर को हुई टाटा संस के निदेशक मंडल की बैठक में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल एन. टाटा ने समूह की एक सदी से अधिक पुरानी संरचना को बनाए रखने के पक्ष में ट्रस्ट्स का रुख दोहराया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
टाटा संस की संभावित सार्वजनिक सूचीबद्धता को लेकर टाटा ट्रस्ट्स और कंपनी के निदेशक मंडल के बीच चर्चा तेज हो गई है. टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा संस की सूचीबद्धता पर सहमति नहीं दी है और कंपनी से सूचीबद्धता के अलावा सभी उपलब्ध विकल्पों का तत्काल आधार पर विस्तृत आकलन करने को कहा है. 17 सितंबर को हुई टाटा संस के निदेशक मंडल की बैठक में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल एन. टाटा ने समूह की एक सदी से अधिक पुरानी संरचना को बनाए रखने के पक्ष में ट्रस्ट्स का रुख दोहराया.
आरबीआई के पत्र पर निदेशक मंडल की बैठक में चर्चा
टाटा संस के निदेशक मंडल की बैठक में 11 सितंबर 2026 को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से मिले पत्र पर चर्चा की गई. बैठक में तय किया गया कि केवल सूचीबद्धता के विकल्प पर निर्भर रहने के बजाय सभी उपलब्ध विकल्पों की व्यापक समीक्षा और उनका आकलन किया जाए. इस समीक्षा के निष्कर्ष और सिफारिशें टाटा संस के निदेशक मंडल के सामने रखी जाएंगी. इसके बाद इस मुद्दे पर अलग से निदेशक मंडल की बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें समीक्षा के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी.
2024 में सूचीबद्धता के खिलाफ लिया गया था फैसला
टाटा ट्रस्ट्स ने अपने बयान में कहा कि टाटा संस की सार्वजनिक सूचीबद्धता के मुद्दे पर निदेशक मंडल पहले ही मार्च 2024 में विचार कर चुका है. उस समय दिवंगत रतन टाटा के मार्गदर्शन में निदेशक मंडल ने सर्वसम्मति से कंपनी को गैर-सूचीबद्ध रखने का फैसला किया था.
इसके बाद जुलाई 2025 में सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने भी सर्वसम्मति से टाटा संस को गैर-सूचीबद्ध रखने के पक्ष में प्रस्ताव पारित किए थे. इन प्रस्तावों की जानकारी आवश्यक कार्रवाई के लिए टाटा संस को दी गई थी. टाटा ट्रस्ट्स के मुताबिक, इस मुद्दे पर उसका रुख लगातार एक जैसा रहा है और इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है.
टाटा मॉडल को लेकर नोएल टाटा ने क्या कहा
टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल एन. टाटा ने टाटा समूह की मौजूदा संरचना को समूह के कामकाज का महत्वपूर्ण आधार बताया. उन्होंने कहा कि टाटा समूह की परिकल्पना कारोबार के माध्यम से राष्ट्रीय सेवा के उद्देश्य से की गई थी और एक सदी से अधिक समय से समूह इसी सोच के साथ काम करता आया है. उन्होंने कहा कि समूह की स्वामित्व संरचना ने टाटा संस को ऐसे फैसले लेने में सक्षम बनाया है, जिन्हें केवल व्यावसायिक लाभ-हानि के आधार पर लेना संभव नहीं होता.
टाटा ट्रस्ट्स की हिस्सेदारी को बताया अहम
नोएल टाटा के मुताबिक, टाटा समूह की मौजूदा परिचालन संरचना की खासियत यह है कि यह ट्रस्ट पर आधारित है और इसका बहुमत हिस्सेदार एक परोपकारी संस्था है. इन ट्रस्ट्स को मिलने वाले लाभांश का इस्तेमाल अस्पतालों, विश्वविद्यालयों और अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में किया जाता है.
उन्होंने कहा कि यह संरचना सार्वजनिक उद्देश्य और राष्ट्र निर्माण से जुड़ी गतिविधियों को समर्थन देती है. उनके मुताबिक, टाटा ट्रस्ट्स का मानना है कि सूचीबद्धता से इस मौजूदा मॉडल और उसकी प्रकृति पर असर पड़ सकता है.
सभी वैध विकल्पों की समीक्षा पर जोर
टाटा ट्रस्ट्स ने कहा है कि वह ऐसी रचनात्मक, सूचित और कानूनी प्रक्रिया का समर्थन करता है, जिसमें सभी अनुमत विकल्पों की व्यापक समीक्षा की जा सके. ट्रस्ट्स के मुताबिक, इस पूरी प्रक्रिया में दीर्घकालिक सार्वजनिक हित को ध्यान में रखा जाना चाहिए.
ट्रस्ट्स ने कहा कि वह टाटा संस और संबंधित अधिकारियों के साथ आगे भी बातचीत जारी रखेगा, ताकि प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप आगे बढ़ सके.
NCLT के जरिए चुनिंदा कैपिटल रिडक्शन की योजना, टाटा संस के शेयरों की इनकम टैक्स फेयर वैल्यू के आधार पर होगी गणना
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल एन टाटा ने शापूरजी पालोनजी (SP) ग्रुप की ओर से मिले उस प्रस्ताव को टाटा संस के बोर्ड के सामने रखा है, जिसमें स्टर्लिंग इन्वेस्टमेंट्स कॉरपोरेशन (SICPL) और साइरस इन्वेस्टमेंट्स (CIPL) के पास मौजूद टाटा संस की हिस्सेदारी के एक हिस्से को बेचकर नकदी जुटाने की योजना है. प्रस्ताव के तहत इस हिस्सेदारी की बिक्री से कम से कम ₹25,000 करोड़ की सकल राशि जुटाने का अनुमान है.
यह प्रस्ताव 17 सितंबर को हुई टाटा संस की बोर्ड बैठक में रखा गया. इससे पहले नोएल टाटा, टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन और SP ग्रुप के चेयरमैन शापूर मिस्त्री के बीच इस मुद्दे पर चर्चा हो चुकी थी.
18 महीने में दो चरणों में होगा प्रस्तावित सौदा
प्रस्ताव के मुताबिक, टाटा संस के शेयरों की खरीद-बिक्री दो चरणों में पूरी की जाएगी और इसके लिए करीब 18 महीने की अवधि रखी गई है. साथ ही, टाटा संस नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के जरिए चुनिंदा कैपिटल रिडक्शन की प्रक्रिया शुरू कर सकता है.
टाटा संस के शेयरों का मूल्यांकन इनकम टैक्स रूल्स के तहत निर्धारित फेयर वैल्यू के आधार पर किया जाएगा. प्रस्ताव में कहा गया है कि Rule 11UA के तहत तय न्यूनतम वैल्यूएशन के आधार पर SICPL और CIPL के शेयरों की बिक्री से कम से कम ₹25,000 करोड़ की सकल राशि हासिल हो सकती है.
रकम जुटाने के लिए कई विकल्पों पर विचार
इस सौदे के लिए जरूरी रकम जुटाने के लिए कई विकल्पों पर विचार किया जा सकता है. इनमें टाटा संस के आंतरिक कैश फ्लो का इस्तेमाल, लिस्टेड कंपनियों के शेयरों की बिक्री, टाटा संस के नए कारोबारों में किसी निवेशक को हिस्सेदारी देना और कुछ कारोबारों को ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए लिस्ट करना शामिल है.
नोएल टाटा ने टाटा संस के बोर्ड से NCLT प्रक्रिया शुरू करने के लिए जरूरी कदम उठाने का अनुरोध किया है. इसके अलावा उन्होंने टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स की ऑपरेटिंग टीमों को SP ग्रुप और बैंकरों के साथ बातचीत जारी रखने तथा आगे की जानकारी बोर्ड के सामने रखने की मंजूरी देने का भी अनुरोध किया.
SP ग्रुप के साथ समाधान की दिशा में कदम
टाटा ट्रस्ट्स के मुताबिक, यह प्रस्ताव SP ग्रुप की टाटा संस में हिस्सेदारी से जुड़े मामले में उसके लिए एक निष्पक्ष और समान समाधान तलाशने की पहले से व्यक्त इच्छा को आगे बढ़ाता है.
टाटा संस में SP ग्रुप की हिस्सेदारी लंबे समय से टाटा समूह के लिए एक महत्वपूर्ण कॉरपोरेट मामला रही है. नए प्रस्ताव के तहत हिस्सेदारी के एक हिस्से के मौद्रीकरण के जरिए SP ग्रुप को तरलता उपलब्ध कराने की योजना पर विचार किया जा रहा है.
Moody’s के मुताबिक मजबूत घरेलू मांग, सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च और निजी क्षेत्र के निवेश में सुधार से भारतीय अर्थव्यवस्था को गति मिल रही है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
वैश्विक अर्थव्यवस्था में जारी अनिश्चितताओं के बीच भारत की आर्थिक विकास दर को लेकर ग्लोबल रेटिंग एजेंसी मूडीज रेटिंग्स (Moody’s Ratings) ने अपना अनुमान बढ़ा दिया है. एजेंसी ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए भारत की रियल GDP ग्रोथ का अनुमान 6 फीसदी से बढ़ाकर 7 फीसदी कर दिया है. मूडीज के मुताबिक मजबूत घरेलू मांग, सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च और निजी क्षेत्र के निवेश में सुधार से भारतीय अर्थव्यवस्था को गति मिल रही है.
घरेलू मांग और सरकारी खर्च से मिल रही मजबूती
मूडीज के मुताबिक भारत की अर्थव्यवस्था ने वैश्विक स्तर पर जारी चुनौतियों के बीच अपनी मजबूती दिखाई है. एजेंसी ने कहा कि देश में निजी खपत यानी प्राइवेट कंजम्पशन मजबूत बनी हुई है. इसके साथ ही सरकार की ओर से इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगातार किए जा रहे खर्च से आर्थिक गतिविधियों को सहारा मिल रहा है.
निजी क्षेत्र का निवेश भी धीरे-धीरे गति पकड़ रहा है. वहीं सर्विस सेक्टर की गतिविधियां भी मजबूत बनी हुई हैं. इन कारकों को देखते हुए मूडीज ने भारत की आर्थिक वृद्धि के अपने अनुमान में बदलाव किया है.
2026 की पहली छमाही में 8.2% रही ग्रोथ
रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 के पहले छह महीनों में भारत की रियल GDP ग्रोथ 8.2 फीसदी रही. 2025 में पूरे साल की ग्रोथ 7.3 फीसदी दर्ज की गई थी. इससे पहले वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की अर्थव्यवस्था 7.7 फीसदी की दर से बढ़ी थी, जबकि इससे पिछले वित्त वर्ष में ग्रोथ 7.1 फीसदी रही थी.
IMF, RBI और S&P के अनुमान से ज्यादा
मूडीज का नया 7 फीसदी का अनुमान कई अन्य प्रमुख संस्थाओं के मौजूदा अनुमानों से अधिक है. IMF ने जुलाई में जारी वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक अपडेट (World Economic Outlook Update) में FY27 के लिए भारत की ग्रोथ का अनुमान 6.4 फीसदी रखा था. वहीं S&P Global Ratings ने जून में 6.6 फीसदी ग्रोथ का अनुमान जताया था.
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी जून में FY27 के लिए अपने GDP ग्रोथ अनुमान को 6.9 फीसदी से घटाकर 6.6 फीसदी कर दिया था. ऐसे में मूडीज का 7 फीसदी का अनुमान इन अनुमानों से ऊपर है.
सरकारी निवेश और नीतियों पर जोर
मूडीज ने भारत की आर्थिक मजबूती के पीछे सरकारी निवेश और घरेलू मांग को अहम कारकों में शामिल किया है. सरकार की ओर से इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स से जुड़े क्षेत्रों में निवेश पर जोर दिया जा रहा है.
उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) जैसी योजनाओं के जरिए मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और पीएम गति शक्ति के जरिए लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है.
बाहरी जोखिमों के बीच भारत की स्थिति
वैश्विक स्तर पर ऊर्जा कीमतों, भू-राजनीतिक तनाव और महंगाई से जुड़े जोखिम बने हुए हैं. इसके बावजूद मूडीज के आकलन में भारत की बड़ी घरेलू अर्थव्यवस्था और घरेलू मांग को एक महत्वपूर्ण सहारा माना गया है.
एजेंसी ने भारत की Baa3 लॉन्ग-टर्म रेटिंग को स्टेबल आउटलुक के साथ बरकरार रखा है. मूडीज के आकलन के मुताबिक भारत की बाहरी वित्तीय स्थिति और घरेलू फाइनेंसिंग बेस अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों के खिलाफ कुछ मजबूती प्रदान करते हैं.
राजकोषीय स्थिति पर भी नजर
मूडीज ने सरकार की राजकोषीय स्थिति और कर्ज को लेकर भी अपना आकलन दिया है. एजेंसी के मुताबिक सरकार राजकोषीय मजबूती की दिशा में आगे बढ़ रही है और टैक्स कलेक्शन में सुधार से सरकारी वित्त को समर्थन मिल रहा है. हालांकि, भारत की ग्रोथ पर वैश्विक ऊर्जा कीमतों, भू-राजनीतिक तनाव और बाहरी मांग से जुड़े जोखिम बने रह सकते हैं. ऐसे में आने वाले महीनों में इन कारकों का आर्थिक गतिविधियों पर असर महत्वपूर्ण रहेगा.
गुरुवार को बम्बे स्टक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 21.86 अंक गिरकर 74,314.59 पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 53 अंक की बढ़त के साथ 23,270.60 पर पहुंच गया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को कारोबार की शुरुआत सपाट से हल्की बढ़त के साथ होने के संकेत मिल रहे हैं. गिफ्ट निफ्टी 23,345 के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जो गुरुवार के निफ्टी बंद स्तर से करीब 13 अंक ऊपर है. अमेरिकी बाजारों में तेजी, एशियाई बाजारों के सकारात्मक रुख और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से घरेलू बाजार को सपोर्ट मिल सकता है. हालांकि, निवेशकों की नजर पश्चिम एशिया के घटनाक्रम, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और वैश्विक बाजारों के रुझान पर रहेगी.
इससे पहले गुरुवार को घरेलू शेयर बाजार में मिला-जुला कारोबार हुआ. 30 शेयरों वाला बम्बे स्टक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 21.86 अंक यानी 0.03 फीसदी गिरकर 74,314.59 पर बंद हुआ, जबकि 50 शेयरों वाला नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 53 अंक यानी 0.23 फीसदी की बढ़त के साथ 23,270.60 पर पहुंच गया. यानी सेंसेक्स में मामूली कमजोरी रही, जबकि निफ्टी ने लगातार दूसरे सत्र में बढ़त दर्ज की.
एशियाई बाजारों में तेजी
शुक्रवार सुबह एशिया-प्रशांत क्षेत्र के प्रमुख बाजारों में खरीदारी देखने को मिली. निवेशकों ने अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख से जुड़ी चिंताओं को फिलहाल पीछे रखते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से जुड़ी कंपनियों में निवेश जारी रखा. जापान का Nikkei 225 करीब 0.56 फीसदी और दक्षिण कोरिया का Kospi करीब 2.06 फीसदी की बढ़त में कारोबार कर रहा था. एशियाई बाजारों की यह तेजी भारतीय बाजार के शुरुआती सेंटीमेंट के लिए अहम संकेत है.
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी
कच्चे तेल की कीमतों में शुक्रवार को नरमी देखने को मिली. पश्चिम एशिया से तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं कुछ कम होने और वैकल्पिक आपूर्ति मार्ग मिलने की उम्मीद के बीच कच्चे तेल पर दबाव रहा. एशियाई कारोबार के दौरान Intercontinental Exchange पर सितंबर Brent Futures करीब 104.02 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था.
इस बीच Gold Futures में 0.32 फीसदी की गिरावट रही, जबकि Silver Futures 0.21 फीसदी की बढ़त में रहा. कच्चे तेल की कीमतें भारतीय बाजार के लिए खास तौर पर अहम हैं, क्योंकि भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है.
गुरुवार को सेंसेक्स के 21 शेयरों में तेजी
गुरुवार के कारोबार में सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 21 बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि 9 शेयरों में गिरावट रही. टाटा स्टील 2.82 फीसदी की तेजी के साथ टॉप गेनर रहा. भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड 2.38 फीसदी, इंडिगो 2.32 फीसदी, इटरनल 2.24 फीसदी, मारुति 1.64 फीसदी और एशियन पेंट्स 1.45 फीसदी चढ़े.
दूसरी ओर, एचडीएफसी बैंक 1.30 फीसदी की गिरावट के साथ प्रमुख लूजर रहा. टाइटन 1.14 फीसदी, आईसीआईसीआई बैंक 1.03 फीसदी, एसबीआई 0.67 फीसदी, भारती एयरटेल 0.52 फीसदी और एक्सिस बैंक 0.47 फीसदी फिसले.
बैंकिंग शेयरों में दबाव
गुरुवार को बैंकिंग शेयरों में दबाव देखने को मिला. बीएसई बैंक इंडेक्स 318.11 अंक गिरकर 63,330.49 पर बंद हुआ. एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एसबीआई और एक्सिस बैंक जैसे प्रमुख बैंकिंग शेयरों में गिरावट रही. निफ्टी में HDFC Life 5.05 फीसदी की तेजी के साथ टॉप गेनर रहा, जबकि ONGC 1.85 फीसदी की गिरावट के साथ प्रमुख लूजर रहा.
आज इन शेयरों पर रहेगी नजर
आज कई कंपनियों से जुड़ी अहम कारोबारी घोषणाओं का असर उनके शेयरों पर देखने को मिल सकता है. Bharat Forge ने QIP के जरिए फंड जुटाने की प्रक्रिया शुरू की है और इसका फ्लोर प्राइस 1,947.70 रुपये प्रति शेयर तय किया है. Coforge को अलग-अलग बिजनेस वर्टिकल और भौगोलिक क्षेत्रों से रेवेन्यू ग्रोथ की उम्मीद है, जबकि कंपनी की बड़ी डील्स की पाइपलाइन मजबूत बनी हुई है. Tata Trusts ने Tata Sons की संभावित लिस्टिंग को लेकर कहा है कि उन्होंने होल्डिंग कंपनी को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने पर सहमति नहीं दी है और बोर्ड सभी विकल्पों पर विचार करेगा. Zee Entertainment के शेयरधारकों ने AGM में पांच निदेशकों की दोबारा नियुक्ति को मंजूरी दी है.
Bharat Electronics (BEL) को 26 अगस्त के बाद से 648 करोड़ रुपये के अतिरिक्त ऑर्डर मिले हैं, जिनमें लेजर आधारित IR जैमर, कम्युनिकेशन इक्विपमेंट, साइबर सिक्योरिटी सॉल्यूशंस और AI आधारित सॉफ्टवेयर सॉल्यूशंस शामिल हैं. InterGlobe Aviation (IndiGo) ने अतिरिक्त सामान, शिशु टिकट, बिना अभिभावक यात्रा करने वाले बच्चों और Fast Forward सुविधा से जुड़े शुल्क में बदलाव किया है. Gland Pharma में BofA Securities Europe SA ने करीब 42.4 करोड़ रुपये में 1.5 लाख शेयर खरीदे हैं.
Petronet LNG ने Gruner Renewable Energy के साथ 50:50 ज्वाइंट वेंचर बनाने को मंजूरी दी है. इसके तहत देशभर में 10 CBG प्लांट लगाने की योजना है और कुल अनुमानित पूंजीगत खर्च करीब 1,200 करोड़ रुपये बताया गया है. Wipro ने Aramco और SAP के साथ मिलकर एसेट-इंटेंसिव कंपनियों के लिए Wipro STO360 सॉल्यूशन लॉन्च किया है. GPT Infraprojects को RVNL से रेलवे ब्रिज के निर्माण के लिए 483.72 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला है. Federal Bank के बोर्ड ने 500 मिलियन डॉलर तक के Medium-Term Note Programme को मंजूरी दी है. वहीं PTC India ने NLC India Renewables के साथ मिलकर NIRL PTC Renewables नाम से ज्वाइंट वेंचर बनाया है, जिसमें PTC India की 26 फीसदी और NLC India Renewables की 74 फीसदी हिस्सेदारी होगी.
आगे बाजार की दिशा किन संकेतों पर निर्भर करेगी?
शुक्रवार को घरेलू बाजार के लिए शुरुआती संकेत सकारात्मक से सपाट हैं. GIFT Nifty में मामूली बढ़त, एशियाई बाजारों में तेजी और अमेरिकी बाजारों की मजबूत क्लोजिंग बाजार को सपोर्ट दे सकती है. दूसरी ओर, कच्चे तेल, पश्चिम एशिया के घटनाक्रम, विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री और वैश्विक ब्याज दरों से जुड़े संकेत कारोबार के दौरान बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं. इसलिए शुक्रवार के सत्र में निवेशकों की नजर शुरुआती कारोबार के साथ-साथ सेक्टर और शेयर आधारित गतिविधियों पर भी रहेगी.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
रूस और अमेरिका से आए जन्मदिन संदेश ऐसे समय में आए हैं, जब बदलते वैश्विक आर्थिक संबंधों के बीच भारत रणनीतिक रिश्तों, व्यापार हितों और ऊर्जा सुरक्षा के बीच संतुलन साध रहा है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके 76वें जन्मदिन पर गुरुवार को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुभकामनाएं दीं. दोनों नेताओं के संदेशों में अंतरराष्ट्रीय मामलों में मोदी की भूमिका और भारत के साथ रूस तथा अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों के महत्व को रेखांकित किया गया. प्रधानमंत्री मोदी का जन्मदिन 17 सितंबर, 2026 को है.
पुतिन ने अपने संदेश में कहा कि मोदी अपने देशवासियों के बीच “सही मायने में गहरे सम्मान” का आनंद लेते हैं और “वैश्विक मंच पर उनका काफी प्रभाव” है. रूसी राष्ट्रपति ने भारत और रूस के बीच मॉस्को द्वारा “विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी” के रूप में वर्णित संबंधों को मजबूत करने में प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका का भी उल्लेख किया. पुतिन का यह संदेश 11 सितंबर को नई दिल्ली में मोदी के साथ हुई उनकी बैठक के कुछ दिनों बाद आया है. इस बैठक में दोनों देशों ने द्विपक्षीय आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा की थी.
भारत और रूस ने 2030 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को करीब 70 अरब डॉलर से बढ़ाकर 100 अरब डॉलर करने का लक्ष्य रखा है.
अमेरिका के साथ रिश्तों पर नजर
ट्रंप की ओर से प्रधानमंत्री मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाएं अमेरिकी दूतावास के माध्यम से दी गईं. दूतावास ने संदेश में कहा, “राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की बहुत-बहुत शुभकामनाएं देते हैं.” संदेश में आने वाले वर्ष के लिए मोदी के अच्छे स्वास्थ्य और खुशियों की भी कामना की गई.
यह संदेश ऐसे समय आया है, जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार को लेकर बातचीत जारी है और वॉशिंगटन रूस से भारत की ऊर्जा खरीद को लेकर दबाव बना रहा है. हालिया अमेरिकी विधायी कार्रवाई के बाद रूस से पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने वाले देशों से जुड़े अतिरिक्त टैरिफ की संभावना भी सामने आई है.
आर्थिक रिश्तों पर बढ़ा फोकस
कारोबारी क्षेत्र के लिए इन घटनाक्रमों का व्यापक महत्व इस बात में है कि भारत अपनी ऊर्जा और व्यापारिक प्राथमिकताओं को सुरक्षित रखते हुए दोनों प्रमुख शक्तियों के साथ आर्थिक संबंध बनाए रखने की कोशिश कर रहा है.
उद्योग जगत के विशेषज्ञों का कहना है कि आपूर्ति श्रृंखलाओं, ऊर्जा बाजारों और टैरिफ नीतियों में लगातार बदलाव के बीच भारत की विभिन्न देशों के साथ विविध साझेदारियां बनाए रखने की क्षमता महत्वपूर्ण बनी रहेगी.
भारत-रूस संबंधों में ऊर्जा क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है, जबकि अमेरिका भारत के लिए एक अहम बाजार और निवेश साझेदार बना हुआ है. ऐसे में कारोबारी जगत राजनयिक घटनाक्रमों के साथ-साथ टैरिफ में बदलाव, ऊर्जा के प्रवाह और सीमा-पार निवेश से जुड़े घटनाक्रमों पर भी नजर रख रहा है.
टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन ने कहा- चंद्रशेखरन का दूसरा कार्यकाल नहीं लेने का फैसला पहले ही स्वीकार किया जा चुका था.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने गुरुवार को कंपनी की बोर्ड बैठक में टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति का विरोध किया. उन्होंने तर्क दिया कि चंद्रशेखरन का पहले दूसरा कार्यकाल नहीं लेने का फैसला बहुमत शेयरधारक द्वारा पहले ही स्वीकार किया जा चुका था और अब उत्तराधिकार की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाना चाहिए.
बोर्ड के समक्ष पेश किए गए एक बयान में नोएल टाटा ने कहा कि चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त को बोर्ड को सूचित किया था कि 20 फरवरी, 2027 को उनका मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने के बाद वह दोबारा नियुक्ति के लिए अपना नाम पेश नहीं करेंगे.
नोएल टाटा ने कहा, “यह उनका अपना फैसला था. यह स्वतंत्र रूप से लिया गया था और स्पष्ट रूप से व्यक्त किया गया था.” उन्होंने कहा कि “यह फैसला इस बोर्ड ने उनसे नहीं मांगा था, न ही यह इस बोर्ड के किसी प्रस्ताव का विषय था और न ही यह किसी समीक्षा प्रक्रिया का परिणाम था.”
इसके बाद टाटा ट्रस्ट्स ने चंद्रशेखरन के फैसले को स्वीकार कर लिया और टाटा संस से कंपनी के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के अनुसार उत्तराधिकारी नियुक्त करने के लिए एक चयन समिति गठित करने को कहा.
नोएल टाटा ने कहा कि इस फैसले को सार्वजनिक भी किया गया था और “ग्रुप के कर्मचारियों, उसके ऋणदाताओं, उसके कारोबारी साझेदारों और बाजार ने इसी आधार पर आगे कदम बढ़ाया है. बहुमत शेयरधारक ने भी ऐसा ही किया है. अब पिछला पन्ना पलट चुका है.”
नोएल टाटा ने दोबारा नियुक्ति पर उठाई आपत्ति
नोएल टाटा ने कहा, “इस बैठक में दोबारा नियुक्ति के लिए अब कोई प्रस्ताव लाना इस बोर्ड से एक साथ तीन चीजों को दरकिनार करने के लिए कहेगा: चेयरमैन का खुद का स्पष्ट रूप से बताया गया फैसला, बहुमत शेयरधारक द्वारा उस फैसले की स्वीकृति और वह आगे की प्रक्रिया जिसे उस शेयरधारक ने इस कंपनी को शुरू करने के लिए कहा है.”
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या बोर्ड चेयरमैन पद पर विचार कर सकता है, जबकि टाटा संस के निदेशक के रूप में चंद्रशेखरन की स्थिति का समाधान अभी नहीं हुआ है. उनके बयान के अनुसार, जिस आम बैठक में इस सवाल का फैसला होना था, वह कोरम पूरा नहीं होने के कारण आगे नहीं बढ़ सकी.
नोएल टाटा ने यह भी कहा कि अगर बाद में यह पाया गया कि चंद्रशेखरन के निदेशक पद की स्थिति अनसुलझी रहने के दौरान चेयरमैन पद पर फैसला लिया गया था, तो यह फैसला “गंभीर कानूनी चुनौती के दायरे में आ सकता है.”
बाद में टाटा ट्रस्ट्स ने कहा कि चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति के लिए लाया गया बोर्ड प्रस्ताव “कानूनी रूप से शून्य” था. ट्रस्ट्स ने कहा कि चार निदेशकों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया, जबकि नोएल टाटा ने इसके खिलाफ वोट दिया. ट्रस्ट्स ने तर्क दिया कि आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के अनुसार चेयरमैन की नियुक्ति या दोबारा नियुक्ति के लिए ट्रस्ट्स के नामित निदेशकों के बहुमत का समर्थन जरूरी है.
ट्रस्ट्स ने आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन का दिया हवाला
ट्रस्ट्स के बयान के अनुसार, संबंधित प्रक्रिया चेयरमैन की पहली नियुक्ति और मौजूदा चेयरमैन की दोबारा नियुक्ति, दोनों पर लागू होती है. इसमें आगे कहा गया कि बोर्ड द्वारा ऐसे प्रस्ताव पर विचार किए जाने के समय दोनों ट्रस्ट नामित निदेशकों का मौजूद रहना जरूरी है और प्रस्ताव को वैध होने के लिए दोनों का पक्ष में मतदान करना आवश्यक है.
नोएल टाटा ने भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ से प्राप्त एक कानूनी राय भी बोर्ड के समक्ष पेश की, जिसमें ट्रस्ट्स के रुख की शुद्धता से संबंधित राय दी गई थी. टाटा ट्रस्ट्स ने कहा कि बोर्ड ने इस राय पर ध्यान नहीं दिया.
अपने बयान में नोएल टाटा ने कहा कि चंद्रशेखरन के फैसले को ट्रस्ट्स की स्वीकृति औपचारिक रूप से कंपनी को बता दी गई थी और अब कंपनी को उत्तराधिकार की प्रक्रिया आगे बढ़ानी चाहिए. उन्होंने कहा, “पन्ना पलट चुका है. अब आगे बढ़ने का समय है.”
टाटा ट्रस्ट्स ने कहा कि वह व्यवस्थित नेतृत्व परिवर्तन और आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के अनुसार उत्तराधिकारी की नियुक्ति के लिए प्रतिबद्ध हैं.
कृषि, रक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर सर्वे और आपदा प्रबंधन तक बढ़ रहा ड्रोन का इस्तेमाल, नीति सुधार, मैन्युफैक्चरिंग, स्किलिंग और उद्यमिता से सेक्टर को मिल रही रफ्तार
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर भारत की विकास यात्रा के उन क्षेत्रों पर नजर डालना महत्वपूर्ण है, जहां तकनीक और उद्यमिता मिलकर नए अवसर पैदा कर रहे हैं. ड्रोन सेक्टर इसका एक प्रमुख उदाहरण है. पिछले एक दशक में भारत में ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल केवल उभरती टेक्नोलॉजी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कृषि, इंफ्रास्ट्रक्चर, भूमि सर्वेक्षण, रक्षा, आपदा प्रबंधन और सार्वजनिक सेवाओं तक इसका दायरा बढ़ा है.
भारत की आर्थिक प्रगति अब केवल अर्थव्यवस्था के आकार से नहीं, बल्कि इनोवेशन, मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में घरेलू कंपनियों और उद्यमियों की बढ़ती भूमिका से भी जुड़ी है. स्टार्टअप, डिजिटल तकनीक, स्वदेशी मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी आधारित विकास को बढ़ावा देने वाली पहलों ने ऐसी कंपनियों के लिए अवसर तैयार किए हैं, जो देश की बड़ी चुनौतियों के समाधान विकसित करने के साथ वैश्विक बाजारों में भी जगह बनाने की कोशिश कर रही हैं.
कृषि से लेकर रक्षा तक ड्रोन का बढ़ता इस्तेमाल
ड्रोन तकनीक ने भारत में कृषि क्षेत्र में विशेष रूप से अपनी उपयोगिता साबित की है. फसलों पर निगरानी, कीटनाशकों और उर्वरकों के छिड़काव तथा कृषि सर्वेक्षण जैसे कामों में ड्रोन के इस्तेमाल से खेती में तकनीक का दायरा बढ़ा है.
सरकार की ‘नमो ड्रोन दीदी’ पहल के जरिए भी ग्रामीण क्षेत्रों में ड्रोन तकनीक को पहुंचाने और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के लिए नए आजीविका अवसर पैदा करने पर जोर दिया गया है. वहीं, ‘स्वामित्व’ (SVAMITVA) जैसी योजनाओं में ड्रोन के जरिए बड़े पैमाने पर भूमि और संपत्ति का सर्वेक्षण किया गया है. इससे ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन से जुड़े रिकॉर्ड तैयार करने और संपत्ति के अधिकारों को दर्ज करने में तकनीक के इस्तेमाल का उदाहरण सामने आया है.
‘किसान ड्रोन यात्रा’ से बढ़ा भरोसा
ड्रोन क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों के लिए सरकार की नीतियों और विभिन्न कार्यक्रमों ने बाजार तैयार करने में भूमिका निभाई है. गरुड़ एयरोस्पेस के संस्थापक और सीईओ अग्निश्वर जयप्रकाश के मुताबिक, कंपनी की सरकार के ड्रोन विजन के साथ यात्रा ‘किसान ड्रोन यात्रा’ से शुरू हुई, जब प्रधानमंत्री मोदी ने देशभर में 100 किसान ड्रोन की तैनाती की शुरुआत की थी.
इसके बाद कंपनी ने ‘नमो ड्रोन दीदी’ कार्यक्रम में भी भागीदारी की. कंपनी के अनुसार, उसके द्वारा निर्मित किसान ड्रोन महिलाओं के नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूहों को वितरित किए गए ड्रोन में शामिल रहे हैं.
ड्रोन के इस्तेमाल को बढ़ाने के साथ-साथ इस क्षेत्र में कुशल मानव संसाधन तैयार करने पर भी जोर दिया जा रहा है. ड्रोन दीदियों, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और ट्रेन-द-ट्रेनर जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से स्किलिंग और क्षमता निर्माण की पहल की जा रही है.
तकनीक से आगे रोजगार और उद्यमिता का अवसर
ड्रोन सेक्टर का विस्तार केवल नई तकनीक के इस्तेमाल तक सीमित नहीं है. इसके साथ मैन्युफैक्चरिंग, ऑपरेशन, ट्रेनिंग, मेंटेनेंस और ड्रोन आधारित सेवाओं में रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर भी बन रहे हैं.
कृषि के अलावा रक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर, आपदा प्रबंधन, लॉजिस्टिक्स और हेल्थकेयर जैसे क्षेत्रों में ड्रोन के संभावित इस्तेमाल का दायरा बढ़ रहा है. ऐसे में आने वाले वर्षों में ड्रोन टेक्नोलॉजी से जुड़े कारोबार और सेवाओं के लिए नए बाजार विकसित होने की संभावना है.
‘Made in India’ से वैश्विक तकनीक तक
भारत के ड्रोन उद्योग के सामने अगला लक्ष्य केवल देश में ड्रोन का निर्माण करना नहीं, बल्कि ऐसी तकनीक विकसित करना है जिसे वैश्विक बाजारों में भी इस्तेमाल किया जा सके. इसे ‘Made in India’ से आगे बढ़कर ‘Designed, Developed and Deployed from India for the World’ की दिशा में कदम के तौर पर देखा जा रहा है.
भारत के 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य के संदर्भ में टेक्नोलॉजी आधारित उद्योगों की भूमिका अहम हो सकती है. ड्रोन सेक्टर का अनुभव दिखाता है कि नीतिगत समर्थन, उद्यमिता और तकनीकी विकास साथ मिलकर किस तरह किसी उभरते क्षेत्र को व्यापक आर्थिक और सामाजिक इस्तेमाल की दिशा में ले जा सकते हैं.
डिस्क्लेमर: इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी विचार हैं और जरूरी नहीं कि वे प्रकाशन के विचारों को प्रतिबिंबित करते हों.
अतिथि लेखक: अग्निश्वर जयप्रकाश, फाउंडर और सीईओ, गरुड़ एयरोस्पेस
टाटा संस के बोर्ड की गुरुवार को करीब तीन घंटे तक बैठक हुई. बैठक में कंपनी की लिस्टिंग और चेयरमैन के कार्यकाल से जुड़े अहम प्रस्तावों पर चर्चा हुई. बोर्ड की मंजूरी के बाद टाटा संस के शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की दिशा में आगे की प्रक्रिया शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के भविष्य को लेकर गुरुवार को बोर्ड बैठक में दो अहम फैसले किए गए. बोर्ड ने कंपनी को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने की दिशा में आगे बढ़ने को मंजूरी दे दी है. साथ ही एन चंद्रशेखरन को अगले पांच साल के लिए चेयरमैन बनाए रखने के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिल गई है. उनका मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में खत्म होने वाला है.
लिस्टिंग की दिशा में आगे बढ़ेगी टाटा संस
टाटा संस के बोर्ड की गुरुवार को करीब तीन घंटे तक बैठक हुई. बैठक में कंपनी की लिस्टिंग और चेयरमैन के कार्यकाल से जुड़े अहम प्रस्तावों पर चर्चा हुई. बोर्ड की मंजूरी के बाद टाटा संस के शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की दिशा में आगे की प्रक्रिया शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है.
टाटा संस लंबे समय से लिस्टिंग को लेकर चर्चा में रही है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के चलते भी कंपनी की लिस्टिंग का मुद्दा महत्वपूर्ण हो गया है. टाटा संस टाटा समूह की प्रमुख होल्डिंग कंपनी है और समूह की कई बड़ी कंपनियों में इसकी हिस्सेदारी है.
नोएल टाटा की राय से अलग रहा बोर्ड का फैसला
सूत्रों के मुताबिक, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा दोनों मुद्दों पर बोर्ड के अन्य सदस्यों से अलग राय रखते थे. वह टाटा संस को निजी कंपनी के तौर पर बनाए रखने के पक्ष में थे. इसके अलावा वह एन चंद्रशेखरन को पांच साल का एक और कार्यकाल दिए जाने के पक्ष में भी नहीं थे. हालांकि, बोर्ड के अन्य सदस्यों के समर्थन के चलते लिस्टिंग और चंद्रशेखरन के कार्यकाल से जुड़े प्रस्तावों को मंजूरी मिल गई.
RBI के नियमों से बढ़ा लिस्टिंग का दबाव
टाटा संस की लिस्टिंग का मुद्दा भारतीय रिजर्व बैंक के नियामकीय ढांचे से भी जुड़ा है. कंपनी ने कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी के तौर पर अपना रजिस्ट्रेशन खत्म करने की मांग की थी, जिसे RBI ने स्वीकार नहीं किया. इसके बाद कंपनी की संभावित शेयर बाजार लिस्टिंग को लेकर चर्चा तेज हुई.
टाटा संस की बाजार में लिस्टिंग इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि यह टाटा समूह की मुख्य होल्डिंग कंपनी है. कंपनी के पास समूह की कई प्रमुख कंपनियों में हिस्सेदारी है. ऐसे में लिस्टिंग होने पर यह भारतीय शेयर बाजार की बड़ी लिस्टिंग में शामिल हो सकती है.
चंद्रशेखरन को मिलेगा पांच साल का नया कार्यकाल
बोर्ड ने एन चंद्रशेखरन को पांच साल का नया कार्यकाल देने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है. उनका मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को समाप्त होना है. इससे पहले चंद्रशेखरन ने अगले कार्यकाल के लिए पद पर बने रहने की इच्छा नहीं जताई थी. हालांकि, कंपनी की नॉमिनेशन एंड रिम्यूनरेशन कमेटी ने उनसे अपने फैसले पर दोबारा विचार करने का अनुरोध किया था.
अब बोर्ड की मंजूरी के बाद चंद्रशेखरन के अगले कार्यकाल और टाटा संस की प्रस्तावित लिस्टिंग से जुड़े आगे के कदम महत्वपूर्ण होंगे.
टाटा संस की लिस्टिंग क्यों है अहम?
टाटा संस की लिस्टिंग से निवेशकों को टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी में सीधे निवेश का अवसर मिल सकता है. कंपनी की विभिन्न टाटा समूह कंपनियों में हिस्सेदारी को देखते हुए इसकी संभावित लिस्टिंग को बाजार में लंबे समय से करीब से देखा जा रहा है. हालांकि, लिस्टिंग की मंजूरी के बाद भी वास्तविक सूचीबद्धता तक नियामकीय मंजूरियों, प्रक्रिया और अन्य आवश्यक कदमों को पूरा करना होगा.
15 अक्टूबर से लागू होने वाले नए MDR ढांचे में 2,000 रुपये से अधिक के पात्र UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4 फीसदी शुल्क लगेगा. GTRI का कहना है कि कम मार्जिन पर काम करने वाले छोटे कारोबारियों के भुगतान व्यवहार पर इसका असर पड़ सकता है.*
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होने से छोटे कारोबारी और कीमत को लेकर संवेदनशील ग्राहक एक बार फिर नकद भुगतान की ओर रुख कर सकते हैं. ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) ने यह चिंता जताई है. नया MDR ढांचा 15 अक्टूबर से लागू होने वाला है.
नए ढांचे के तहत 2,000 रुपये से अधिक के पात्र पर्सन-टू-मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4 फीसदी शुल्क लगेगा. इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है. इस शुल्क का भुगतान मर्चेंट को करना होगा. वहीं, पर्सन-टू-पर्सन ट्रांजैक्शन और 2,000 रुपये तक के UPI भुगतान इस शुल्क के दायरे से बाहर रहेंगे.
कुछ क्षेत्रों में 5 रुपये का रियायती MDR
रेलवे, टेलीकॉम सेवाओं, बीमा और ईंधन जैसे कुछ निर्धारित क्षेत्रों में 2,000 रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन पर 5 रुपये का रियायती MDR लागू होगा. GTRI के संस्थापक अजय श्रीवास्तव के मुताबिक, कम मार्जिन पर काम करने वाले कारोबारियों के लिए छोटी सी अतिरिक्त लागत भी भुगतान के तरीके को प्रभावित कर सकती है.
उनका कहना है कि अगर UPI स्वीकार करने पर सीधे तौर पर लागत आने लगती है तो कीमत के प्रति संवेदनशील कारोबारी नकद भुगतान को प्राथमिकता देने पर विचार कर सकते हैं.
UPI को मुफ्त रखने की लागत पर भी सवाल
GTRI ने UPI के रखरखाव की लागत को मर्चेंट से वसूलने के औचित्य पर भी सवाल उठाया है. रिसर्च समूह का अनुमान है कि UPI को मुफ्त रखने पर सरकार को हर साल करीब 2,000-2,500 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते हैं.
GTRI के अनुसार, इस खर्च को डिजिटल पेमेंट से होने वाले व्यापक आर्थिक लाभों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए. UPI से नकदी पर निर्भरता कम करने, अर्थव्यवस्था के औपचारिकीकरण और कारोबार के लिए ट्रेस करने योग्य ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड तैयार करने में मदद मिलती है.
वहीं, सरकार का कहना है कि संशोधित ढांचे का उद्देश्य UPI इकोसिस्टम के लिए टिकाऊ राजस्व मॉडल तैयार करना है, जबकि कम मूल्य वाले ट्रांजैक्शन को सुरक्षित रखा गया है. नए ढांचे में पर्सन-टू-पर्सन भुगतान भी मुफ्त रहेगा.
पेमेंट कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा पर भी चिंता
GTRI ने MDR से मिलने वाले राजस्व के पेमेंट प्लेटफॉर्म के बीच वितरण और इससे प्रतिस्पर्धा पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर भी चिंता जताई है. समूह का कहना है कि मर्चेंट ट्रांजैक्शन से बनने वाला राजस्व बड़े पेमेंट ऐप्स को फायदा पहुंचा सकता है, इसलिए MDR आय के वितरण और बाजार में एकाग्रता पर स्पष्टता जरूरी है.
यह मुद्दा थर्ड-पार्टी UPI ऐप्स के लिए प्रस्तावित 30 फीसदी बाजार हिस्सेदारी की सीमा को लेकर चल रही बहस के बीच सामने आया है. PhonePe और Google Pay की UPI ट्रांजैक्शन में बड़ी हिस्सेदारी है, जबकि बाजार हिस्सेदारी की सीमा लागू करने को टाल दिया गया है.
GTRI ने UPI और RuPay को मुफ्त रखने की मांग की
GTRI ने UPI और RuPay भुगतान को मुफ्त रखने और डिजिटल पेमेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर की लागत को पूरा करने के लिए वैकल्पिक तरीकों पर विचार करने की मांग की है.
रिसर्च समूह ने कहा है कि भुगतान व्यवस्था में किसी भी तरह के शुल्क संबंधी बदलाव का आकलन छोटे कारोबारियों और डिजिटल भुगतान को अपनाने पर पड़ने वाले संभावित असर को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए.