कंपनी के मुताबिक, डॉलर के आधार पर तिमाही राजस्व 6.1 फीसदी बढ़कर 1.22 अरब डॉलर (1.22 बिलियन डॉलर) रहा. वहीं, स्थिर मुद्रा (Constant Currency) के आधार पर राजस्व वृद्धि 6.4 फीसदी दर्ज की गई.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
आईटी सेवा क्षेत्र की कंपनी LTMindtree ने वित्त वर्ष 2026-27 (Q1FY27) की पहली तिमाही में मजबूत वित्तीय नतीजे दर्ज किए हैं. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सेवाओं की बढ़ती मांग और विभिन्न कारोबार क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन के दम पर कंपनी का शुद्ध लाभ (Net Profit) सालाना आधार पर 17 फीसदी बढ़कर 1,468 करोड़ रुपये हो गया.
30 जून 2026 को समाप्त तिमाही में कंपनी का राजस्व भी 18 फीसदी बढ़कर 11,608 करोड़ रुपये पहुंच गया. कंपनी का कहना है कि उसकी AI-केंद्रित रणनीति अब बड़े ग्राहकों और नए सौदों के रूप में स्पष्ट परिणाम देने लगी है.
डॉलर के लिहाज से भी मजबूत रही ग्रोथ
कंपनी के मुताबिक, डॉलर के आधार पर तिमाही राजस्व 6.1 फीसदी बढ़कर 1.22 अरब डॉलर (1.22 बिलियन डॉलर) रहा. वहीं, स्थिर मुद्रा (Constant Currency) के आधार पर राजस्व वृद्धि 6.4 फीसदी दर्ज की गई.
LTMindtree के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और प्रबंध निदेशक (MD) वेणु लांबू ने कहा कि पहली तिमाही के नतीजे कंपनी की AI-केंद्रित रणनीति के सफल क्रियान्वयन और लाभदायक विकास यात्रा को दर्शाते हैं.
उन्होंने कहा, "हमारी AI रणनीति अब ग्राहकों के लिए ठोस परिणाम दे रही है. यह हमें मिलने वाले नए प्रोजेक्ट्स के आकार और गुणवत्ता में भी साफ दिखाई दे रहा है. कंपनी के पास मजबूत ऑर्डर बुक और विभिन्न उद्योग क्षेत्रों में स्वस्थ बिजनेस पाइपलाइन मौजूद है."
हर तिमाही AI कारोबार से 150 मिलियन डॉलर की कमाई
वेणु लांबू ने बताया कि क्रिएटिव, बिजनेस और इंडस्ट्रियल सेगमेंट में कंपनी की AI सेवाओं से हर तिमाही लगभग 15 करोड़ डॉलर (150 मिलियन डॉलर) का राजस्व प्राप्त हो रहा है. उनका कहना है कि आने वाले समय में AI आधारित सेवाएं कंपनी की वृद्धि का प्रमुख आधार बनेंगी.
परिचालन मार्जिन में भी हुआ सुधार
कंपनी की परिचालन लाभप्रदता (Operating Profitability) में भी सुधार देखने को मिला. ब्याज और कर (EBIT) से पहले का मार्जिन एक साल पहले की तुलना में 120 बेसिस प्वाइंट बढ़कर 15.5 फीसदी हो गया. यह संकेत देता है कि कंपनी केवल राजस्व ही नहीं बढ़ा रही, बल्कि लागत प्रबंधन के जरिए अपनी लाभप्रदता भी मजबूत कर रही है.
कंज्यूमर कारोबार सबसे तेज बढ़ा
कारोबारी क्षेत्रों की बात करें तो अधिकांश सेगमेंट में अच्छी वृद्धि दर्ज की गई.
1. कंज्यूमर (Consumer) वर्टिकल सबसे तेज बढ़ा और इसमें स्थिर मुद्रा के आधार पर 18.2 फीसदी की वृद्धि दर्ज हुई.
2. टेक्नोलॉजी (Technology) कारोबार में 10 फीसदी की बढ़ोतरी हुई.
3. प्रोडक्शन (Production) सेगमेंट में 5.3 फीसदी की वृद्धि रही. हालांकि, फाइनेंशियल सर्विसेज (Financial Services) एकमात्र ऐसा क्षेत्र रहा, जहां स्थिर मुद्रा के आधार पर राजस्व में 2.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई.
कुल मिलाकर, पहली तिमाही के नतीजे बताते हैं कि AI सेवाओं पर कंपनी का बढ़ता फोकस कारोबार को नई गति दे रहा है और आने वाले समय में बड़े सौदों के जरिए विकास की संभावनाएं मजबूत बनी हुई हैं.
ईरान के सर्वोच्च नेता (Supreme Leader) आयतुल्ला मोजतबा खामेनेई ने अपने पिता और पूर्व सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई की हत्या का बदला लेने की कसम खाई है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
ईरान के सर्वोच्च नेता (Supreme Leader) आयतुल्ला मोजतबा खामेनेई ने अपने पिता और पूर्व सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई की हत्या का बदला लेने की कसम खाई है. उन्होंने कहा कि उनके पिता की मौत का प्रतिशोध लेना पूरे देश की मांग है और दोषियों को इसकी कीमत चुकानी होगी. इस बयान के साथ ही ईरान और अमेरिका के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ने की आशंका गहरा गई है.
अंतिम संस्कार के बाद पहली बार सामने आया बयान
अपने पिता के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू होने के करीब एक सप्ताह बाद जारी किए गए पहले सार्वजनिक संदेश में मोजतबा खामेनेई ने कहा कि उनके पिता की हत्या के जिम्मेदार लोगों की पहचान कर ली गई है और उनके खिलाफ जवाबी कार्रवाई जरूर की जाएगी. उन्होंने कहा कि यह केवल एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरे ईरान का मामला है और देश इस घटना का बदला लेकर रहेगा.
अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच बढ़ी चिंता
मोजतबा खामेनेई का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी और ईरानी बलों के बीच हालिया हमलों के बाद दोनों देशों के बीच हुए युद्धविराम (सीजफायर) पर सवाल उठने लगे हैं. वॉशिंगटन और तेहरान के बीच चार महीने तक चले संघर्ष को समाप्त करने के उद्देश्य से यह समझौता किया गया था. ईरान का कहना है कि यह समझौता लंबे समय में देश की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण लाभ लेकर आएगा, लेकिन हालिया घटनाक्रम ने इसकी स्थिरता पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं.
ट्रंप बोले- युद्धविराम खत्म, लेकिन बातचीत जारी रहेगी
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हालिया घटनाओं के बाद कहा कि युद्धविराम अब समाप्त हो चुका है. हालांकि उन्होंने शुक्रवार को यह भी कहा कि दोनों देशों ने बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई है, जिससे कूटनीतिक समाधान की संभावना अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है.
सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए मोजतबा खामेनेई
हवाई हमले के बाद से मोजतबा खामेनेई सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं. अब तक उनकी कोई तस्वीर, वीडियो या ऑडियो रिकॉर्डिंग भी सामने नहीं आई है. उनकी गैरमौजूदगी को लेकर ईरान में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं.
कुछ ईरानी नागरिकों ने उनसे सार्वजनिक रूप से सामने आने की अपील की है. उनका कहना है कि यदि वह घायल भी हैं, तब भी देश को संबोधित कर लोगों की चिंताओं को दूर करना चाहिए.
रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के समर्थन से संभाली कमान
मोजतबा खामेनेई ने शक्तिशाली इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के समर्थन से ईरान के सर्वोच्च नेता का पद संभाला है. उनके पिता आयतुल्ला अली खामेनेई ने 37 वर्षों तक ईरान का नेतृत्व किया था. उनके निधन के बाद देशभर से बड़ी संख्या में लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे और उन्हें ईरान के सबसे पवित्र धार्मिक स्थल पर सुपुर्द-ए-खाक किया गया.
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के कैश मार्केट में NSE की हिस्सेदारी 93 फीसदी, इक्विटी ऑप्शंस में 75 फीसदी और इक्विटी फ्यूचर्स में 100 फीसदी है. यही वजह है कि भारतीय शेयर बाजार में इसका दबदबा लगातार बना हुआ है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की प्रस्तावित लिस्टिंग भारतीय पूंजी बाजार के लिए एक बड़ा बदलाव साबित हो सकती है. ब्रोकरेज फर्म जेफरीज (Jefferies) की इक्विटी रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, NSE के शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने के बाद भारत के तीनों प्रमुख एक्सचेंज, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE), बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX)लिस्टेड कंपनियां बन जाएंगे. इससे निवेशकों को राजस्व के लिहाज से देश के सबसे बड़े एक्सचेंज में निवेश का अवसर मिलेगा.
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में भारत के एक्सचेंज उद्योग का कुल समेकित राजस्व 24,400 करोड़ रुपये रहा, जिसमें अकेले NSE की हिस्सेदारी करीब 70 फीसदी थी. कैश इक्विटी, इक्विटी डेरिवेटिव्स और क्लियरिंग जैसे प्रमुख कारोबारों में NSE की मजबूत पकड़ बनी हुई है और अधिकांश प्रमुख बाजार खंडों में उसकी हिस्सेदारी 90 फीसदी से अधिक है.
FY26 में NSE का राजस्व BSE और MCX से कई गुना अधिक
जेफरीज की रिपोर्ट के मुताबिक, FY26 में NSE का परिचालन राजस्व 16,600 करोड़ रुपये रहा. इसके मुकाबले BSE का परिचालन राजस्व 4,800 करोड़ रुपये और MCX का 2,300 करोड़ रुपये था. नियामकीय खर्चों को छोड़कर NSE का परिचालन EBITDA 11,100 करोड़ रुपये रहा, जबकि EBITDA मार्जिन 67 फीसदी दर्ज किया गया.
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के कैश मार्केट में NSE की हिस्सेदारी 93 फीसदी, इक्विटी ऑप्शंस में 75 फीसदी और इक्विटी फ्यूचर्स में 100 फीसदी है. यही वजह है कि भारतीय शेयर बाजार में इसका दबदबा लगातार बना हुआ है.
इक्विटी ऑप्शंस से आती है सबसे ज्यादा कमाई
NSE के ट्रांजैक्शन रेवेन्यू में सबसे बड़ा योगदान इक्विटी ऑप्शंस का है. रिपोर्ट के अनुसार, कुल ट्रांजैक्शन आय का 77 फीसदी हिस्सा इक्विटी ऑप्शंस से आता है. वहीं, कैश सेगमेंट का योगदान 10 फीसदी और इक्विटी फ्यूचर्स का योगदान 9 फीसदी है.
जेफरीज ने बताया कि FY20 से FY26 के बीच भारत के इक्विटी ऑप्शंस बाजार का औसत दैनिक प्रीमियम कारोबार (Average Daily Premium Turnover) 56 फीसदी की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़कर 77,200 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. हालांकि, अत्यधिक सट्टेबाजी पर अंकुश लगाने के लिए नियामकीय बदलावों के बाद FY26 में इंडेक्स ऑप्शंस के औसत दैनिक कारोबार की वृद्धि दर घटकर 8 फीसदी रह गई.
अमेरिका के मुकाबले अभी भी काफी छोटा है भारतीय ऑप्शंस बाजार
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में डेरिवेटिव बाजार के आकार को लेकर चिंताओं के बावजूद ऑप्शन प्रीमियम कारोबार के लिहाज से भारतीय बाजार अभी भी अमेरिका से काफी छोटा है. ऑप्शन प्रीमियम के आधार पर भारत का कारोबार अमेरिकी बाजार का केवल लगभग पांचवां हिस्सा है, हालांकि छोटे कॉन्ट्रैक्ट आकार के कारण भारत में ट्रेड होने वाले ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट्स की संख्या कहीं अधिक है.
कमोडिटी और टेक्नोलॉजी कारोबार पर भी बढ़ रहा फोकस
जेफरीज ने कहा कि NSE अब केवल इक्विटी और डेरिवेटिव्स तक सीमित नहीं है, बल्कि कमोडिटी कारोबार और टेक्नोलॉजी सेवाओं का भी विस्तार कर रहा है. एक्सचेंज के कुल राजस्व में डेटा और टेक्नोलॉजी सेवाओं की हिस्सेदारी करीब 13 फीसदी है. इसके अलावा, बिजली (Electricity) फ्यूचर्स सेगमेंट में भी NSE ने कारोबार के आधार पर लगभग 70 फीसदी बाजार हिस्सेदारी हासिल कर ली है.
मजबूत बैलेंस शीट से लिस्टिंग को मिलेगा सहारा
रिपोर्ट के मुताबिक, NSE की मजबूत बैलेंस शीट, कम पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) की आवश्यकता और निवेशकों को उच्च लाभांश (Dividend) देने का रिकॉर्ड उसकी वित्तीय स्थिति को और मजबूत बनाता है. जेफरीज का मानना है कि प्रस्तावित लिस्टिंग से पहले ये सभी कारक NSE को निवेशकों के लिए एक आकर्षक विकल्प बना सकते हैं.
शुक्रवार को बीएसई सेंसेक्स 827.57 अंक उछलकर 77,569.39 और निफ्टी 244.10 अंक चढ़कर 24,206.90 पर बंद हुआ था.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
घरेलू शेयर बाजार ने शुक्रवार को लगातार दूसरे कारोारी सत्र में मजबूत बढ़त दर्ज की थी. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 827.57 अंक उछलकर 77,569.39 और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 244.10 अंक चढ़कर 24,206.90 पर बंद हुआ था. रिलायंस इंडस्ट्रीज, आईटी और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी से बाजार को मजबूती मिली थी. हालांकि, आज बाजार की शुरुआत उतार-चढ़ाव भरी रह सकती है. मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच निवेशकों की नजर कंपनियों के बड़े ऐलानों, पहली तिमाही के नतीजों और वैश्विक घटनाक्रम पर रहेगी.
वैश्विक बाजार से मिल रहे हैं कमजोर संकेत
सोमवार सुबह एशियाई बाजारों में दबाव देखने को मिल रहा है. मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अनिश्चितता के कारण कच्चे तेल की कीमतों में 4% से ज्यादा की तेजी आई है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ी है. इसका असर जापान, दक्षिण कोरिया समेत कई एशियाई बाजारों पर भी दिखाई दे रहा है. वहीं GIFT Nifty भी कमजोर शुरुआत का संकेत दे रहा है, जिससे भारतीय बाजार की ओपनिंग दबाव में रह सकती है.
शुक्रवार को बाजार का प्रदर्शन
शुक्रवार को बाजार में चौतरफा खरीदारी देखने को मिली थी. सेंसेक्स 827.57 अंक यानी 1.08% की बढ़त के साथ 77,569.39 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 1.02% चढ़कर 24,206.90 पर पहुंच गया. रिलायंस इंडस्ट्रीज, BEL, टेक महिंद्रा, एक्सिस बैंक, टाटा स्टील, इन्फोसिस, बजाज फाइनेंस और ICICI Bank जैसे दिग्गज शेयरों में शानदार तेजी रही. वहीं मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स ने भी बड़ी कंपनियों से बेहतर प्रदर्शन किया था.
आज इन शेयरों पर रहेगी खास नजर
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, सोमवार के कारोबार में कई शेयर निवेशकों के रडार पर रहेंगे. Lux Industries ने पश्चिम बंगाल में 600 करोड़ रुपये के निवेश से नया मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने का ऐलान किया है, जबकि Mankind Pharma अपनी सहायक कंपनी Broadway Hospitality Services में 100% हिस्सेदारी 49 करोड़ रुपये में बेचने जा रही है. SBI Funds Management ने प्री-आईपीओ प्लेसमेंट के बाद अपने IPO का आकार घटा दिया है, वहीं SBI ने भी IPO से पहले 30 निवेशकों को शेयर बेचकर 1,655 करोड़ रुपये जुटाए हैं. NTPC ने 20,456.70 करोड़ रुपये की लागत वाली लारा सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट स्टेज-III को मंजूरी दी है. Powerica को गुजरात में 50 मेगावाट का विंड पावर प्रोजेक्ट मिला है, जबकि NMDC ने लौह अयस्क की नई कीमतें घोषित की हैं. Reliance Infrastructure की सहायक कंपनी Mumbai Metro One ने NARCL के साथ कर्ज पुनर्गठन समझौता किया है, जिससे 1,100 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज घटने की उम्मीद है. Swiggy ने FSSAI से जुड़े लाइसेंस संबंधी मुद्दों का समाधान कर संशोधित लाइसेंस हासिल कर लिया है. Sterlite Technologies ने यूरोप में पेटेंट विवाद में जीत दर्ज की है और HUDCO ने ओडिशा सरकार के साथ 1 लाख करोड़ रुपये तक की संभावित ऋण सहायता के लिए समझौता किया है.
तिमाही नतीजों पर भी रहेगी नजर
आज HCL Technologies, Bajaj Consumer Care, Nuvoco Vistas, Plastiblends India, Simbhaoli Sugars, Vivo Bio Tech और अन्य कई कंपनियां अपने अप्रैल-जून तिमाही नतीजे जारी करेंगी. इन कंपनियों के प्रदर्शन और प्रबंधन की टिप्पणी का असर संबंधित शेयरों के साथ-साथ पूरे बाजार की धारणा पर भी पड़ सकता है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
14 जुलाई से शेयर बाजार में देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनियों में शामिल SBI Funds Management के अलावा Alpine Texworld और Millworks Technologies के IPO खुल रहे हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
अगले सप्ताह IPO में निवेश करने वालों के लिए कई बड़े मौके आने वाले हैं. 14 जुलाई से शेयर बाजार में तीन नए IPO खुलेंगे. इनमें देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनियों में शामिल SBI Funds Management के अलावा Alpine Texworld और Millworks Technologies शामिल हैं. तीनों कंपनियां मिलकर करीब 11,980 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी में हैं.
SBI Funds Management का होगा सबसे बड़ा IPO
अगले हफ्ते का सबसे बड़ा IPO SBI Funds Management का होगा. यह इश्यू 14 जुलाई को खुलेगा और 16 जुलाई को बंद होगा. कंपनी ने प्रति शेयर 545 से 574 रुपये का प्राइस बैंड तय किया है. एक लॉट में 26 शेयर होंगे. ऊपरी प्राइस बैंड के हिसाब से रिटेल निवेशकों को एक लॉट खरीदने के लिए 14,924 रुपये का निवेश करना होगा.
यह पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) है. यानी कंपनी नए शेयर जारी नहीं करेगी, बल्कि मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे. ऐसे में IPO से जुटाई गई राशि कंपनी को नहीं मिलेगी. शेयरों की संभावित लिस्टिंग 21 जुलाई को BSE और NSE पर हो सकती है. SBI Funds Management की स्थापना 1992 में हुई थी और यह भारत की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMC) में शामिल है.
Alpine Texworld भी ला रही है IPO
Alpine Texworld का IPO भी 14 जुलाई से 16 जुलाई तक सब्सक्रिप्शन के लिए खुला रहेगा. कंपनी ने 100 से 105 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है. एक लॉट में 142 शेयर होंगे, जिसके लिए निवेशकों को अधिकतम 14,910 रुपये लगाने होंगे.
यह 126.25 करोड़ रुपये का फ्रेश इश्यू है. यानी कंपनी नए शेयर जारी कर पूंजी जुटाएगी. जुटाई गई राशि का इस्तेमाल कारोबार विस्तार के लिए किया जाएगा. कंपनी टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए फैब्रिक डाइंग और प्रोसेसिंग का कारोबार करती है और अहमदाबाद में अपनी तीसरी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करने की योजना बना रही है.
Millworks Technologies के IPO पर भी नजर
SME सेगमेंट की Millworks Technologies भी 14 जुलाई को अपना IPO खोलेगी, जो 16 जुलाई तक खुला रहेगा. कंपनी ने 315 से 331 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है और इस इश्यू के जरिए 160.34 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है.
ग्रे मार्केट में इस IPO को लेकर अच्छी मांग देखने को मिल रही है. कंपनी के शेयर इश्यू प्राइस के मुकाबले 100% से अधिक प्रीमियम (GMP) पर कारोबार कर रहे हैं. हालांकि, निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि ग्रे मार्केट प्रीमियम केवल बाजार का संकेत होता है और इससे लिस्टिंग पर मुनाफे की कोई गारंटी नहीं मिलती.
निवेश से पहले रखें इन बातों का ध्यान
IPO में निवेश करने से पहले कंपनी के कारोबार, वित्तीय स्थिति, जोखिम और वैल्यूएशन का अच्छी तरह आकलन करना जरूरी है. केवल GMP या बाजार की चर्चा के आधार पर निवेश का फैसला नहीं करना चाहिए. किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय लेना बेहतर माना जाता है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
सरकार के इस फैसले के बाद कोई भी दवा कंपनी या मेडिकल स्टोर निर्धारित कीमत से अधिक राशि नहीं वसूल सकेगा. नियमों का उल्लंघन करने पर अतिरिक्त वसूली गई रकम ब्याज सहित लौटानी होगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
महंगी दवाओं से परेशान मरीजों के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हृदय रोग, HIV और आंखों के संक्रमण समेत 39 जरूरी दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमत (Retail Price) तय कर दी है. अब कोई भी दवा कंपनी या मेडिकल स्टोर निर्धारित कीमत से अधिक राशि नहीं वसूल सकेगा. नियमों का उल्लंघन करने पर अतिरिक्त वसूली गई रकम ब्याज सहित लौटानी होगी.
39 जरूरी दवाओं की कीमत हुई तय
रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय की ओर से 8 जुलाई को जारी अधिसूचना के अनुसार, ड्रग्स (प्राइस कंट्रोल) ऑर्डर (DPCO), 2013 के तहत 39 नई दवा फॉर्मूलेशन की अधिकतम खुदरा कीमत निर्धारित की गई है. इन दवाओं का उपयोग हाई BP, डायबिटीज, हृदय रोग, HIV और आंखों के संक्रमण जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज में किया जाता है. सरकार का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य जरूरी दवाओं को आम लोगों के लिए किफायती बनाना और इलाज का खर्च कम करना है.
तय कीमत से ज्यादा वसूली पर होगी सख्त कार्रवाई
NPPA ने स्पष्ट किया है कि कोई भी दवा निर्माता, मार्केटिंग कंपनी या विक्रेता निर्धारित खुदरा कीमत से अधिक राशि नहीं वसूल सकता. यदि कोई कंपनी या विक्रेता नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसे अतिरिक्त वसूली गई पूरी राशि ब्याज सहित जमा करनी होगी. यह कार्रवाई ड्रग्स (प्राइस कंट्रोल) ऑर्डर, 2013 और आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के प्रावधानों के तहत की जाएगी.
मेडिकल स्टोर पर प्राइस लिस्ट लगाना होगा अनिवार्य
सरकार ने सभी मेडिकल स्टोर और दवा विक्रेताओं को निर्देश दिया है कि वे दवा कंपनियों द्वारा जारी नवीनतम प्राइस लिस्ट दुकान में ऐसी जगह प्रदर्शित करें, जहां ग्राहक उसे आसानी से देख सकें. इस व्यवस्था का उद्देश्य दवाओं की कीमतों में पारदर्शिता बढ़ाना और मरीजों को अधिक कीमत वसूले जाने से बचाना है.
मरीजों को कैसे मिलेगा फायदा?
नई व्यवस्था लागू होने के बाद मरीजों को जरूरी दवाएं निर्धारित कीमत पर उपलब्ध होंगी. इससे इलाज की लागत कम होगी, दवा कंपनियों और विक्रेताओं की मनमानी पर रोक लगेगी और उपभोक्ताओं के हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित होगी. सरकार का मानना है कि यह कदम आम लोगों तक सस्ती और जरूरी दवाओं की पहुंच बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.
त्रिपुरा ने टेक्नोलॉजी और डिजिटल निवेश के क्षेत्र में बड़ा कदम बढ़ाते हुए 'डेस्टिनेशन त्रिपुरा बिजनेस कॉन्क्लेव 2026' के दौरान ₹10,000 करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव हासिल किए हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
त्रिपुरा ने टेक्नोलॉजी और डिजिटल निवेश के क्षेत्र में बड़ा कदम बढ़ाते हुए 'डेस्टिनेशन त्रिपुरा बिजनेस कॉन्क्लेव 2026' के दौरान ₹10,000 करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव हासिल किए हैं. दो दिवसीय कॉन्क्लेव में सूचना प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), हेल्थकेयर, क्लाउड, ग्रीन एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर समेत कई क्षेत्रों में 43 समझौता ज्ञापनों (MoU) और 11 एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) पर हस्ताक्षर हुए. इस दौरान गूगल और सेल्सफोर्स जैसी वैश्विक टेक कंपनियों के साथ भी अहम साझेदारियां की गईं.
दो दिन तक चला बिजनेस कॉन्क्लेव
अगरतला के इंटरनेशनल फेयर ग्राउंड, हापानिया में आयोजित इस दो दिवसीय (9 और 10 जुलाई 2026) कॉन्क्लेव में देशभर के निवेशकों, उद्योगपतियों, स्टार्टअप्स, टेक कंपनियों और नीति निर्माताओं ने हिस्सा लिया. कार्यक्रम का उद्देश्य त्रिपुरा को टेक्नोलॉजी आधारित और सतत निवेश के उभरते केंद्र के रूप में स्थापित करना था.
मुख्यमंत्री बोले- निवेशकों का भरोसा बढ़ा
कार्यक्रम का उद्घाटन त्रिपुरा के मुख्यमंत्री प्रो. (डॉ.) माणिक साहा ने किया. इस दौरान सूचना प्रौद्योगिकी, वित्त एवं योजना मंत्री प्रणजीत सिंघा रॉय समेत राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. वहीं केंद्रीय पूर्वोत्तर विकास एवं संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया और केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने वर्चुअली कार्यक्रम को संबोधित किया.
मुख्यमंत्री माणिक साहा ने कहा कि पिछले छह वर्षों में राज्य की सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) दोगुनी हुई है. उन्होंने बताया कि कॉन्क्लेव में 500 प्रतिभागियों के आने की उम्मीद थी, लेकिन 1,000 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया, जो त्रिपुरा में निवेशकों के बढ़ते भरोसे का संकेत है.
गूगल और सेल्सफोर्स के साथ रणनीतिक साझेदारी
कॉन्क्लेव के दौरान सूचना प्रौद्योगिकी निदेशालय (DIT) ने गूगल इंडिया के साथ डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम के विकास के लिए समझौता किया. इसके अलावा सेल्सफोर्स के साथ AI आधारित नागरिक सेवाओं, CRM समाधान और डिजिटल गवर्नेंस प्लेटफॉर्म विकसित करने पर साझेदारी हुई. टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के साथ भी शुरुआती स्तर पर चर्चा की गई.
इसके अलावा Da'Spatio Rhobotique Laboratory, Bodhi Tree Multimedia, Elvania Energies 369, Indigi Consulting and Solutions समेत कई कंपनियों के साथ भी MoU पर हस्ताक्षर किए गए.
आईटी सेक्टर में बढ़ रहा निवेश
सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के निदेशक जेया रागुल गेशन बी ने बताया कि राज्य की आईटी नीतियों का सकारात्मक असर दिखने लगा है. उन्होंने कहा कि एयरटेल ने अगरतला में डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए ₹200 करोड़ के निवेश का फैसला किया है.
उन्होंने बताया कि राज्य में फिलहाल 134 स्टार्टअप पंजीकृत हैं, 59 कंपनियों को मान्यता मिल चुकी है और स्टार्टअप्स को ₹2.7 करोड़ से अधिक की वित्तीय सहायता दी जा चुकी है.
निवेशकों के लिए आसान होगी प्रक्रिया
उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के सचिव किरण गिट्टे ने कहा कि राज्य सरकार ने कारोबार शुरू करने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम लागू किया है. बेहतर सड़क, रेल, इंटरनेट, बैंकिंग और कुशल मानव संसाधन के दम पर त्रिपुरा निवेश के लिए आकर्षक गंतव्य बन रहा है.
IT Pavilion बना आकर्षण का केंद्र
कॉन्क्लेव में सूचना प्रौद्योगिकी निदेशालय का IT Pavilion सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र रहा. यहां निवेशकों, स्टार्टअप संस्थापकों, छात्रों और उद्योग प्रतिनिधियों को त्रिपुरा की IT/ITeS नीति, स्टार्टअप नीति और डेटा सेंटर नीति की जानकारी दी गई. साथ ही प्रस्तावित AI Policy, AVGC-XR Policy और Global Capability Centre (GCC) Policy की भी झलक दिखाई गई.
डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा फोकस
राज्य सरकार ने प्रस्तावित IT Park, Tripura IT & Data Ecosystem Zone (TIDEZ), Airtel Nxtra Data Centre और T-NEST इनक्यूबेशन सेंटर जैसी परियोजनाओं को भी प्रदर्शित किया. इन परियोजनाओं का उद्देश्य आईटी, डेटा सेंटर, साइबर सिक्योरिटी, BPO, ESDM और AI आधारित उद्योगों को बढ़ावा देना है.
टेक्नोलॉजी आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ता त्रिपुरा
सरकार का कहना है कि 'डेस्टिनेशन त्रिपुरा बिजनेस कॉन्क्लेव 2026' राज्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होगा. वैश्विक टेक कंपनियों के निवेश और नई साझेदारियों से त्रिपुरा को आने वाले वर्षों में पूर्वोत्तर भारत के प्रमुख टेक्नोलॉजी निवेश केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी.
यह ऑर्डर बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) और पावर कन्वर्जन सिस्टम (PCS) की आपूर्ति से जुड़ा है, जिससे कंपनी के ऊर्जा भंडारण कारोबार को और मजबूती मिलने की उम्मीद
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
जेएसडब्ल्यू एनर्जी (JSW Energy) के शेयर अगले कारोबारी सत्र में निवेशकों के रडार पर रह सकते हैं. कंपनी की स्टेप-डाउन सब्सिडियरी JSW Energy PSP Eleven Ltd (JEPEL) को ₹443.74 करोड़ का बड़ा ऑर्डर मिला है. यह ऑर्डर बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) और पावर कन्वर्जन सिस्टम (PCS) की आपूर्ति से जुड़ा है, जिससे कंपनी के ऊर्जा भंडारण कारोबार को और मजबूती मिलने की उम्मीद है.
सब्सिडियरी को मिला ₹443.74 करोड़ का ऑर्डर
JSW Energy ने शेयर बाजार को दी सूचना में बताया कि उसकी 100% स्वामित्व वाली स्टेप-डाउन सब्सिडियरी JSW Energy PSP Eleven Ltd (JEPEL) को Bondada Renewable Energy Pvt Ltd से ₹443.74 करोड़ का ऑर्डर मिला है.
Bondada Renewable Energy, Bondada Engineering Ltd की सहायक कंपनी है. यह ऑर्डर 200 मेगावाट/400 मेगावाट-घंटा (MWh) क्षमता वाले बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) और पावर कन्वर्जन सिस्टम (PCS) की आपूर्ति के लिए है.
पुणे में है 5 GWh क्षमता का बैटरी प्लांट
JEPEL पुणे में 5 GWh वार्षिक क्षमता वाला बैटरी असेंबली प्लांट संचालित करती है. कंपनी का कहना है कि यह ऑर्डर उसके एनर्जी स्टोरेज कारोबार को और मजबूत करेगा तथा भारत में बढ़ती BESS मांग का लाभ उठाने में मदद करेगा.
2030 तक 30 GW क्षमता का लक्ष्य
JSW Energy की कुल लॉक्ड-इन जनरेशन क्षमता 32.1 गीगावाट (GW) है. इसमें 14.53 GW परिचालन में है, 13 GW निर्माणाधीन है और 4.6 GW परियोजनाएं पाइपलाइन में हैं. वहीं, कंपनी की लॉक्ड-इन एनर्जी स्टोरेज क्षमता 29.6 GWh है, जिसमें 26.4 GWh पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज और 3.2 GWh बैटरी एनर्जी स्टोरेज शामिल है. कंपनी ने 2030 तक 30 GW बिजली उत्पादन क्षमता और 40 GWh ऊर्जा भंडारण क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है.
रिन्यूएबल एनर्जी पोर्टफोलियो लगातार बढ़ रहा
JSW Energy ने अप्रैल 2026 से अब तक 1,081 मेगावाट नई रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता शुरू की है, जिसके बाद उसकी कुल स्थापित क्षमता बढ़कर 14,535 मेगावाट हो गई है. नई क्षमता में 442 मेगावाट सोलर, 108 मेगावाट विंड, 381 मेगावाट हाइब्रिड और 150 मेगावाट हाइड्रो प्रोजेक्ट शामिल हैं. इसके साथ कंपनी की कुल स्थापित क्षमता में रिन्यूएबल एनर्जी की हिस्सेदारी बढ़कर 61% हो गई है.
तीन महीने में 13% चढ़ा शेयर
JSW Energy का शेयर शुक्रवार को बीएसई पर ₹553.30 पर बंद हुआ. कंपनी का बाजार पूंजीकरण 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक है और यह BSE 200 इंडेक्स का हिस्सा है. पिछले तीन महीनों में कंपनी का शेयर करीब 13% की तेजी दर्ज कर चुका है. नए ऑर्डर के बाद सोमवार के कारोबारी सत्र में इस शेयर पर निवेशकों की खास नजर रहने की संभावना है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
रिपोर्ट के अनुसार, AI फिलहाल हर साल लगभग 2.7 ट्रिलियन डॉलर के बराबर उत्पादकता बढ़ा रहा है. यह अध्ययन में शामिल 86 देशों की कुल GDP का करीब 3.4% है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) वैश्विक अर्थव्यवस्था में हर साल करीब 2.7 ट्रिलियन डॉलर की उत्पादकता बढ़ा रहा है, लेकिन इसका सबसे बड़ा लाभ अब भी अमीर देशों और अधिक वेतन पाने वाले पेशेवरों को मिल रहा है. एक नई अंतरराष्ट्रीय स्टडी के मुताबिक, यदि विकासशील देश AI से जुड़े नियमों, बुनियादी ढांचे और स्थानीय AI इकोसिस्टम को मजबूत नहीं करते हैं, तो वे AI क्रांति में और पीछे छूट सकते हैं.
100 से ज्यादा देशों के डेटा पर आधारित है अध्ययन
यह अध्ययन जनवरी 2025 से फरवरी 2026 के बीच 100 से अधिक देशों में लगभग 10 लाख AI बातचीत (AI Conversations) के विश्लेषण पर आधारित है. इसमें Anthropic Economic Index के पांच संस्करणों के डेटा का इस्तेमाल किया गया.
शोधकर्ताओं ने AI के आर्थिक प्रभाव को मापने के लिए दो नए पैमाने विकसित किए हैं. पहला 'लेबर कॉस्ट इक्विवेलेंट' (LCE), जो AI से होने वाले उत्पादकता लाभ का अनुमान लगाता है. दूसरा 'AI कंसंट्रेशन इंडेक्स' (ACI), जो यह बताता है कि AI से होने वाले लाभ विभिन्न पेशों में कितनी समानता से बंट रहे हैं.
2.7 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचा AI का आर्थिक योगदान
रिपोर्ट के अनुसार, AI फिलहाल हर साल लगभग 2.7 ट्रिलियन डॉलर के बराबर उत्पादकता बढ़ा रहा है. यह अध्ययन में शामिल 86 देशों की कुल GDP का करीब 3.4% है. यह आंकड़ा 2025 के मध्य में अनुमानित 1.2 ट्रिलियन डॉलर से दोगुने से भी अधिक है. इसकी मुख्य वजह यह है कि AI का उपयोग अब केवल सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शिक्षा, सेल्स, ऑफिस एडमिनिस्ट्रेशन और अन्य बड़े रोजगार वाले क्षेत्रों तक फैल गया है.
AI का उपयोग बढ़ा, लेकिन प्रति बातचीत आर्थिक मूल्य घटा
रिपोर्ट में दिलचस्प तथ्य सामने आया कि प्रत्येक AI बातचीत से मिलने वाला औसत आर्थिक मूल्य कुछ कम हुआ है. जनवरी 2025 से फरवरी 2026 के बीच AI वार्तालाप का वेतन सूचकांक (Wage Index) 5.5% घटा. हालांकि, AI के इस्तेमाल में तेज बढ़ोतरी ने इस गिरावट की भरपाई कर दी. कुल उत्पादकता लाभ में हुई वृद्धि का 80% से अधिक हिस्सा AI उपयोग की बढ़ती मात्रा से आया.
अमीर देशों को मिल रहा सबसे ज्यादा फायदा
स्टडी के अनुसार, AI से होने वाले आर्थिक लाभ का बड़ा हिस्सा अभी भी उच्च आय वाले देशों के पास केंद्रित है. हाई-इनकम देशों में AI से मिलने वाला उत्पादकता लाभ उनकी GDP के लगभग 4.2% के बराबर है. वहीं, मध्यम आय वाले देशों में यह आंकड़ा केवल 0.6% और निम्न आय वाले देशों में महज 0.1% है.
रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक कार्यबल में अपेक्षाकृत कम हिस्सेदारी होने के बावजूद अमीर देशों को AI से होने वाले कुल उत्पादकता लाभ का लगभग 96% हिस्सा मिल रहा है.
भारत में सीमित वर्ग तक पहुंचा AI का लाभ
अध्ययन के मुताबिक, भारत में भी AI से होने वाले लाभ मुख्य रूप से उच्च कौशल और अधिक वेतन पाने वाले पेशेवरों तक सीमित हैं. भारत का AI कंसंट्रेशन इंडेक्स (ACI) 0.84 दर्ज किया गया, जो बताता है कि AI से होने वाली अधिकांश उत्पादकता वृद्धि सीमित संख्या में कुशल कर्मचारियों को मिल रही है.
इसके मुकाबले अमेरिका का ACI 0.49 है, जो दर्शाता है कि वहां AI का उपयोग ऑफिस प्रशासन, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और बिजनेस सर्विसेज जैसे कई क्षेत्रों में व्यापक रूप से हो रहा है.
कई नए क्षेत्रों में बढ़ रहा AI का इस्तेमाल
रिपोर्ट के अनुसार, AI का उपयोग अब केवल सॉफ्टवेयर और STEM (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स) क्षेत्रों तक सीमित नहीं है. अध्ययन में शामिल आधे से अधिक देशों में 2025 के अंत से 2026 की शुरुआत के बीच AI कंसंट्रेशन इंडेक्स में गिरावट दर्ज की गई. इसका मतलब है कि AI का इस्तेमाल अब अधिक विविध पेशों में होने लगा है, खासकर मध्यम आय वाले देशों में, हालांकि, कई निम्न आय वाले देशों में AI का उपयोग अब भी सीमित पेशेवर वर्ग तक ही केंद्रित है.
AI से अधिक फायदा दिलाने में नियमों की अहम भूमिका
स्टडी के मुताबिक, किसी देश का AI नियामकीय ढांचा (Regulatory Framework) यह तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है कि उसे AI से कितना आर्थिक लाभ मिलेगा. जिन देशों में AI से जुड़े नियम अधिक मजबूत हैं, वहां उत्पादकता लाभ भी ज्यादा है और उसका वितरण विभिन्न पेशों में अपेक्षाकृत संतुलित है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि जिन देशों में अंग्रेजी आधिकारिक भाषा है, वहां AI के फायदे अधिक तेजी से अलग-अलग पेशों तक पहुंचे हैं. इसकी वजह यह है कि मौजूदा बड़े भाषा मॉडल (Large Language Models) मुख्य रूप से अंग्रेजी डेटा पर प्रशिक्षित हैं.
चुनौतियां अभी भी बरकरार
शोधकर्ताओं ने कहा कि यह अनुमान केवल AI से बचने वाले समय और उत्पादकता लाभ पर आधारित है. इसमें AI इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा खपत, सब्सक्रिप्शन शुल्क, निवेश लागत और संभावित रोजगार प्रभाव जैसे खर्च शामिल नहीं हैं.
इसके अलावा, अध्ययन में एंटरप्राइज API और अन्य प्रमुख AI प्लेटफॉर्म के उपयोग को भी शामिल नहीं किया गया है. ऐसे में वास्तविक आर्थिक प्रभाव वर्तमान अनुमान से अलग हो सकता है.
विकासशील देशों के लिए बड़ा संदेश
रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि AI का दीर्घकालिक आर्थिक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि इसके लाभ उच्च आय वाले देशों और विशेषज्ञ पेशों से आगे कितनी तेजी से बाकी दुनिया तक पहुंचते हैं.
हालांकि AI अब शिक्षा, बिक्री और प्रशासनिक कार्यों जैसे क्षेत्रों में तेजी से फैल रहा है, लेकिन विकासशील देशों के बड़े हिस्से को अभी भी वह व्यापक उत्पादकता लाभ नहीं मिल पाया है, जो विकसित अर्थव्यवस्थाओं में पहले से देखने को मिल रहा है.
GP Petroleums ने शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि उसकी संयुक्त उद्यम कंपनी Amron Oil Resources Pvt Ltd को IOCL के गुजरात स्थित पिपावाव बिटुमेन सेल के संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
जीपी पेट्रोलियम (GP Petroleums Ltd) की संयुक्त उद्यम (JV) कंपनी एमरॉन ऑयल रिसोर्सिस (Amron Oil Resources Pvt Ltd) को इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) ने गुजरात के पिपावाव स्थित अपने बिटुमेन सेल के लिए ऑपरेटिंग पार्टनर चुना है. इस साझेदारी से गुजरात और आसपास के क्षेत्रों में स्पेशलिटी बिटुमेन उत्पादों की आपूर्ति मजबूत होने के साथ सड़क और परिवहन अवसंरचना परियोजनाओं को भी गति मिलने की उम्मीद है.
IOCL ने Amron Oil Resources को चुना
GP Petroleums ने शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि उसकी संयुक्त उद्यम कंपनी Amron Oil Resources Pvt Ltd को IOCL के गुजरात स्थित पिपावाव बिटुमेन सेल के संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई है. Amron Oil Resources, GP Petroleums और West Coast Oils LLP के बीच 50:50 हिस्सेदारी वाला संयुक्त उद्यम है.
सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाले उत्पाद बनाती है कंपनी
Amron Oil Resources स्पेशलिटी बिटुमेन उत्पादों का निर्माण करती है. इनमें बिटुमेन इमल्शन, पॉलिमर मॉडिफाइड बिटुमेन (PMB) और क्रम्ब रबर मॉडिफाइड बिटुमेन (CRMB) शामिल हैं. इन उत्पादों का व्यापक उपयोग सड़क निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में किया जाता है.
जून से शुरू हो चुकी है सप्लाई
कंपनी के मुताबिक, पिपावाव सुविधा से बल्क बिटुमेन की आपूर्ति 4 जून 2026 से शुरू हो चुकी है. इस सुविधा का उद्घाटन इंडियन ऑयल के 'SPRING 2026 Mission Excellence' (यदि मूल नाम 'SPRINT 2026 Mission Excellence' है तो वही रखें) पहल के तहत किया गया था.
गुजरात और आसपास के राज्यों को मिलेगा फायदा
GP Petroleums का कहना है कि पिपावाव बिटुमेन सेल के संचालन से गुजरात और आसपास के क्षेत्रों में स्पेशलिटी बिटुमेन उत्पादों की उपलब्धता बेहतर होगी. पिपावाव बंदरगाह के निकट स्थित होने के कारण यह सुविधा लॉजिस्टिक्स को अधिक कुशल बनाएगी, जिससे सड़क और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को समय पर सामग्री की आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी.
सड़क अवसंरचना कारोबार में बढ़ेगी हिस्सेदारी
कंपनी का मानना है कि IOCL के ऑपरेटिंग पार्टनर के रूप में चयन होने से स्पेशलिटी बिटुमेन सेगमेंट में GP Petroleums की मौजूदगी और मजबूत होगी. साथ ही भारत के सड़क और परिवहन अवसंरचना क्षेत्र में कंपनी की भागीदारी का दायरा भी बढ़ेगा.
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा कि देशभर में लागू किए जाने से पहले E20 पेट्रोल का इंजन की मजबूती, उत्सर्जन, जंग-प्रतिरोध और वाहनों के साथ अनुकूलता जैसे कई मानकों पर व्यापक परीक्षण किया गया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
केंद्र सरकार ने पहली बार स्वीकार किया है कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से कुछ वाहनों का माइलेज 3% से 5% तक कम हो सकता है. हालांकि, सरकार का कहना है कि बेहतर इंजन परफॉर्मेंस, कम प्रदूषण और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने जैसे फायदे इस मामूली कमी से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं. पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने E20 पेट्रोल को लेकर जारी विस्तृत FAQ में इसकी जानकारी दी है.
E20 पेट्रोल पर सरकार का बड़ा बयान
केंद्र सरकार ने शुक्रवार को कहा कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से कुछ वाहनों की ईंधन दक्षता (फ्यूल इकोनॉमी) में 3% से 5% तक कमी आ सकती है. हालांकि, सरकार का कहना है कि E20 एक स्वच्छ और हाई-ऑक्टेन ईंधन है, जो इंजन की बेहतर कार्यक्षमता, कम उत्सर्जन और ऊर्जा सुरक्षा जैसे कई फायदे देता है.
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा कि देशभर में लागू किए जाने से पहले E20 पेट्रोल का इंजन की मजबूती, उत्सर्जन, जंग-प्रतिरोध (Corrosion Resistance) और वाहनों के साथ अनुकूलता जैसे कई मानकों पर व्यापक परीक्षण किया गया है.
E20 को जल्दबाजी में लागू करने के दावों को किया खारिज
सरकार ने E20 पेट्रोल को जल्दबाजी में लागू किए जाने के आरोपों को भी खारिज किया है. मंत्रालय के मुताबिक, भारत का एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (Ethanol Blended Petrol-EBP) कार्यक्रम वर्ष 2001 में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू हुआ था. इसके बाद 2018 में राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति (National Policy on Biofuels) लागू होने के बाद इस कार्यक्रम का धीरे-धीरे विस्तार किया गया.
सरकार ने 2022 में तय समय से पहले 10% एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल कर लिया था. वहीं, 2025-26 एथेनॉल आपूर्ति वर्ष के दौरान 20% एथेनॉल मिश्रण (E20) का लक्ष्य भी पूरा कर लिया गया.
ऑटो कंपनियों ने नहीं जताई कोई चिंता
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, Maruti Suzuki और Hero MotoCorp सहित प्रमुख वाहन निर्माताओं ने वास्तविक परिचालन परिस्थितियों में E20 पेट्रोल के कारण इंजन में जंग लगने या पुर्जों के असामान्य घिसाव जैसी किसी समस्या की रिपोर्ट नहीं दी है.
तेल आयात घटाना है सरकार का मुख्य उद्देश्य
सरकार ने स्पष्ट किया कि एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम का उद्देश्य पेट्रोल की कीमतें कम करना नहीं, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना और आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना है.
मंत्रालय के अनुसार, इस कार्यक्रम के जरिए वर्ष 2014-15 से अब तक 1.97 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है. इसके अलावा करीब 316 लाख टन कच्चे तेल के आयात की आवश्यकता कम हुई है.
किसानों और पर्यावरण को भी हुआ फायदा
सरकार का दावा है कि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम से लगभग 952 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन में कमी आई है. साथ ही इस कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को 1.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है, जिससे उनकी आय बढ़ाने और जैव ईंधन उत्पादन को प्रोत्साहन देने में मदद मिली है.