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2035 तक 2 ट्रिलियन डॉलर की वैश्विक अर्थव्यवस्था को आकार देंगे टेक- आधारित मेगाट्रेंड्स
दुबई फ्यूचर फाउंडेशन (DFF) ने 2025 और उसके बाद दुनिया को आकार देने वाले दस मेगाट्रेंड में 2 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक के अवसरों की पहचान की.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
दुबई फ्यूचर फाउंडेशन (DFF) की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, क्वांटम कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और उन्नत सामग्री जैसे उभरते तकनीकी क्षेत्रों के जरिए वर्ष 2035 तक वैश्विक अर्थव्यवस्था में 2 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का योगदान होने की संभावना है. रिपोर्ट में 2025 और उससे आगे की दुनिया को आकार देने वाले दस प्रमुख मेगाट्रेंड्स की पहचान की गई है, जो उद्योगों, निवेश रणनीतियों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को नया आकार देंगे, साथ ही सरकारों और व्यवसायों के लिए रणनीतिक अवसर भी प्रदान करेंगे.
क्रांतिकारी तकनीकों से बदलेगी दुनिया
रिपोर्ट के अनुसार, पारदर्शी लकड़ी जो कांच से भी मजबूत है, दुर्लभ-पृथ्वी तत्वों से मुक्त मैग्नेट और जैव-अनुकृति (बायोमिमिक) डिज़ाइनों जैसी खोजों से सामग्री विज्ञान में बड़ा बदलाव आ रहा है. क्वांटम सामग्री और एआई-डिज़ाइन किए गए सुपरकंडक्टर्स, स्वच्छ ऊर्जा, स्वास्थ्य सेवा और इलेक्ट्रॉनिक्स में क्रांति ला सकते हैं. विशेष रूप से, केवल क्वांटम तकनीकों से ही 2035 तक 2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की वैश्विक आर्थिक कीमत पैदा होने की उम्मीद है.
तेजी से बढ़ती कनेक्टिविटी और AI का प्रभाव
2024 तक, दुनिया की 66% आबादी यानी लगभग 5.35 बिलियन लोग इंटरनेट से जुड़े हुए हैं. 5G के विस्तार और 6G की तैयारी के बीच, डेटा ट्रैफिक अब बहुआयामी होता जा रहा है, जिसमें रीयल-टाइम एनालिटिक्स और मल्टीमॉडल एआई का मिश्रण शामिल है. अनुमान है कि 2027 तक एआई उपयोग का 40% हिस्सा मल्टीमॉडल होगा, जो 2023 में सिर्फ 1% था.
जैसे-जैसे तकनीक आगे बढ़ रही है, साइबर अपराध, गलत सूचना, और जैव-सुरक्षा में सेंध जैसे खतरे भी बढ़ रहे हैं. रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि साइबर सुरक्षा में मनोविज्ञान का समावेश और साइबर बायो-सुरक्षा के प्रति वैश्विक जागरूकता आवश्यक है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जो इसके लिए तैयार नहीं हैं.
ऊर्जा परिवर्तन और स्वच्छ ऊर्जा की ओर कदम
रिपोर्ट के अनुसार, 2050 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन तक पहुंचने के लिए 275 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के पूंजी निवेश की आवश्यकता होगी. छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर, प्लेटिनम-रहित इलेक्ट्रोलाइजर्स और हाइड्रोजन ईंधन जैसी तकनीकें इसमें अहम भूमिका निभाएंगी. अनुमान है कि स्वच्छ ऊर्जा का वैश्विक बाजार 2030 तक तीन गुना बढ़कर 650 बिलियन डॉलर हो जाएगा.
सस्टेनेबिलिटी से आगे बढ़ते हुए, अब दुनिया रीजनरेटिव एग्रीकल्चर, समुद्री जीवन निगरानी के लिए ध्वनिक एआई, और इंटरनेट ऑफ अंडरवाटर थिंग्स (IoUT) की ओर बढ़ रही है. अफ्रीका में उभरते क्लाइमेट टेक स्टार्टअप्स को पर्यावरणीय बदलाव में अहम भूमिका निभाने वाला बताया गया है.
डिजिटल संपत्ति और नियामक ढांचे में बदलाव
डिजिटल एसेट्स, एआई पर्सनहुड और सीमा पार डिजिटल इंटरैक्शन पारंपरिक नियामक सीमाओं को धुंधला कर रहे हैं. टोकनाइज्ड एसेट मार्केट 2030 तक 2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है. साथ ही, पार-अनुशासनिक शिक्षा मॉडल और वैश्विक सहयोग आवश्यक होते जा रहे हैं, खासकर जल, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा जैसे मुद्दों के समाधान के लिए.
रिपोर्ट के अनुसारएआर और वीआर अब अधिक इमर्सिव बनते जा रहे हैं, जहां एआई की मदद से रीयल-टाइम निर्णय क्षमता और सीखने की गुणवत्ता बढ़ रही है. भले ही 2022 से वीआर हेडसेट की बिक्री में 40% गिरावट आई है, 2025 तक इसमें सुधार की उम्मीद है, खासकर स्पेशियल कंप्यूटिंग और डिजिटल थिएटर में नवाचारों के चलते.
रोबोटिक्स और एआई की क्रांति
ह्यूमनॉइड रोबोट, कोबॉट्स और एआई संचालित ड्रोन अब भविष्य की कल्पना नहीं रह गए हैं, ये तेजी से व्यावसायिक वास्तविकता बन रहे हैं. ह्यूमनॉइड रोबोट बाज़ार के 2032 तक 66 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है. ये रोबोट अब स्वास्थ्य सेवा, लॉजिस्टिक्स और यहां तक कि अंतरिक्ष मिशनों में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. रिपोर्ट के अनुसार, 2025 तक Gen Z वैश्विक कार्यबल का 27% हिस्सा होंगे, और वे अपने संगठनों से अधिक मूल्य-संगति की अपेक्षा रखते हैं. एआई-आधारित विवाद समाधान, और रचनात्मक अर्थव्यवस्था जो पहले से ही वैश्विक GDP में 3.1% का योगदान देती है, न्याय और संस्कृति के नए प्रारूप बना रहे हैं.
भविष्य की स्वास्थ्य प्रणाली: जलवायु और जीनोमिक विविधता पर फोकस
प्रिसिजन मेडिसिन, जीनोमिक विविधता, और जलवायु-संचालित स्वास्थ्य संकटों से लड़ाई भविष्य की स्वास्थ्य देखभाल का आधार बनेंगे. एपिजेनेटिक्स मार्केट, जिसकी 2023 में कीमत 14.6 बिलियन डॉलर थी, तेजी से बढ़ रही है. बायोचार, और एआई-सशक्त डायग्नोस्टिक्स जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने और सतत पोषण सुनिश्चित करने में प्रमुख भूमिका निभाएंगे.
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