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TCS ने शेयर बायबैक के लिए तय की रिकॉर्ड डेट, जानें इसके बारे में सबकुछ

टाटा समूह की आईटी कंपनी TCS अपने शेयर वापस खरीदने जा रही है. कंपनी ने इसके लिए 25 नवंबर की तिथि निर्धारित की है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

भारतीय IT कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने शेयर बायबैक की डेट का ऐलान कर दिया है. कंपनी 25 नवंबर को अपने शेयर होल्डर्स से शेयर खरीदने जा रही है. TCS की योजना 17,000 करोड़ के वापस खरीदने की है. टाटा ग्रुप की इस IT कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में बताया है कि उसने शेयर बायबैक के लिए रिकॉर्ड डेट तय कर ली है. बता दें कि जब कंपनी अपना खुद का शेयर ओपन मार्केट के जरिए शेयरधारकों से खरीदती है तो उसे शेयर बायबैक कहा जाता है.

बेहतर होगा स्टॉक का प्रदर्शन?
मार्केट एक्सपर्ट मानते हैं कि टीसीएस बायबैक भारतीय आईटी सेक्टर के लिए एक रणनीतिक कदम साबित हो सकता है. कंपनी की इस घोषणा से निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा और TCS स्टॉक के प्रदर्शन में सुधार होगा. वैसे, ये बात अलग है कि पिछले एक महीने में कंपनी के शेयर मूल्य में लगभग 3.28% की गिरावट आई है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, TCS ने 11 अक्टूबर को 1 रुपए फेस वैल्यू के 4,09,63,855 पूर्ण भुगतान वाले इक्विटी शेयरों को 4,150 प्रति शेयर के हिसाब से बायबैक करने की घोषणा की थी. बुधवार यानी कल कंपनी के शेयरों में तेजी का माहौल रहा. TCS स्टॉक 2.31% की उछाल के साथ 3,408.60 रुपए पर बंद हुआ. 

क्या होता है शेयर बायबैक?
अब जानते हैं कि आखिर शेयर बायबैक होता क्या है? आमतौर पर शेयर बाजार में हमें जब कोई कंपनी पसंद आती है तो हम उसके शेयर खरीद लेते हैं, तो उसे SHARE BUY करना कहते हैं. लेकिन जब यही प्रक्रिया रिवर्स हो जाए, यानी जब कोई कंपनी अपने ही शेयर वापस खरीदना शुरू कर दे तो इसे SHARE BUYBACK कहते हैं. बायबैक दो प्रकार के होते हैं. टेंडर ऑफर बायबैक और ओपन ऑफर बायबैक. टेंडर ऑफर बायबैक के तहत कंपनी जब ये तय करती है कि वो शेयरों का बायबैक करेगी, तो एक रिकॉर्ड डेट का ऐलान किया जाता है. इस तारीख तक जिन निवेशकों के डीमैट खाते में कंपनी के शेयर मौजूद रहते हैं वो ही निवेशक कंपनी के टेंडर ऑफर बायबैक में हिस्सा ले सकते हैं. कंपनियां आमतौर पर निवेशकों को बायबैक का ऑफर मार्केट प्राइज से ज्यादा पर करती हैं, ताकि निवेशक अपना फायदा देखकर इस ऑफर में हिस्सा लें. कंपनियों की ओर से टेंडर ऑफर बायबैक के लिए 10 दिनों का समय दिया जाता है. इस दौरान शेयरहोल्डर्स को अपने शेयर कंपनी को ऑफर करने होते हैं. 10 दिनों के बाद शेयरहोल्डर्स के पास ई-मेल के जरिए ये जानकारी मिलती है कि उनके कितने शेयर बायबैक हुए हैं. क्योंकि कंपनियां अक्सर पूरे शेयरों का बायबैक नहीं करती है.  

कैसे होता है फायदा?
इसी तरह, जब कंपनी अपने शेयरों को एक्सचेंज से खरीदती है तो उसे ओपन ऑफर बायबैक कहते हैं, जैसा कि एक आम निवेशक करता है. हालांकि कंपनी पहले से ये तय कर लेती है कि उसे कितने शेयर खरीदने हैं और किस भाव पर खरीदने हैं. कंपनी ये शेयर बायबैक की प्रक्रिया 6 महीने के दौरान पूरा करती है. इस ऑफर में आम शेयरहोल्डर्स का कोई लेना देना नहीं होता है, क्योंकि कंपनी ओपन मार्केट से शेयर खरीद रही है, ठीक वैसे ही जैसे हम और आप खरीदते हैं. अब बात करते हैं इससे निवेशकों को होने वाले फायदे की. जब कोई कंपनी शेयर बायबैक लेकर आती है, तो अक्सर उसका मकसद अपने शेयरों की कीमतों को बढ़ाने का होता है. ऐसे में जो निवेशक इस शेयर बायबैक ऑफर में हिस्सा नहीं लेते हैं, उन्हें भी फायदा मिलता है, क्योंकि आमतौर पर शेयरों का प्राइज आगे चलकर बढ़ जाता है. दूसरी तरफ जो निवेशक शेयर बायबैक में हिस्सा लेते हैं उन्हें शेयर की बढ़ी हुई कीमत उसी समय मिल जाती है यानी वो भी फायदे में रहते हैं.
 


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