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बजट से पहले टैक्सपेयर्स ने भर दी सरकार की झोली, खजाने में आए ₹16.89 लाख करोड़

चालू वित्त वर्ष 2024-25 में 12 जनवरी तक नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 18.3 फीसदी बढ़कर लगभग 16.89 लाख करोड़ रुपये रहा.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

मोदी सरकार के लिए अच्छी खबर आई है. चालू वित्त वर्ष सरकारी खजाने के लिए बेहतर साबित हो रहा है. सरकार की टैक्स से आय लगातार बढ़ रही है. चालू वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में 12 जननरी तक नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में लगभग 16 फीसदी ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज हुई है. हाल ही जारी हुए सरकारी डेटा के मुताबिक, 1 अप्रैल 2024 से 12 जनवरी 2025 तक में नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 15.88 फीसदी बढ़कर 16.89 लाख करोड़ रुपये हो गया.

सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स (CBDT) की ओर से जारी डेटा के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष 12 जनवरी तक 16.89 लाख करोड़ रुपये का नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन हुआ है. इसमें 7.68 लाख करोड़ रुपये का कॉर्पोरेट टैक्स (नेट ऑफ रिफंड), 8.74 लाख करोड़ रुपये का नॉन-कॉर्पोरेट टैक्स और 44,538 करोड़ रुपये का सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (नेट ऑफ रिफंड) शामिल है.

3.74 लाख करोड़ रुपये का रिफंड जारी

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने एक साल पहले इसी अवधि के दौरान 14.58 लाख करोड़ रुपये का डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन जुटाया था. सालाना आधार पर यह 2.31 लाख करोड़ की बढ़ोतरी को दर्शाता है. 1 अप्रैल से 12 जनवरी के बीच 3.74 लाख करोड़ रुपये का रिफंड जारी किया गया, जो 42.49 फीसदी की बढ़ोतरी को दिखाता है.

एसटीटी कलेक्‍शन 44538 करोड़ रुपये रहा

इसमें मुख्य रूप से पर्सनल इनकम टैक्‍स शाम‍िल है. चालू वित्त वर्ष में अबतक (12 जनवरी, 2025 तक) नेट डायरेक्‍ट टैक्‍स कलेक्‍शन करीब 7.68 लाख करोड़ रुपये रहा है. वहीं शुद्ध रूप से प्रतिभूति लेनदेन कर (STT) कलेक्‍शन 44,538 करोड़ रुपये रहा है. इस दौरान 3.74 लाख करोड़ रुपये से अधिक के ‘रिफंड’ जारी किए गए. यह एक साल पहले इसी अवधि की तुलना में 42.49 प्रतिशत ज्‍यादा है. 1 अप्रैल से 12 जनवरी के बीच कुल टैक्‍स कलेक्‍शन 20 प्रतिशत बढ़कर 20.64 लाख करोड़ रुपये से ज्‍यादा रहा है.

क्या होते हैं डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्स?

मोटे अर्थों में टैक्स 2 कैटेगरी में बांटा जाता है. डायरेक्ट टैक्स और इनडायरेक्ट टैक्स. डायरेक्ट टैक्स वो है, जो सीधे लिया जाता है. इनकम टैक्स, शेयर या दूसरी प्रॉपर्टी की आय पर लगने वाले टैक्स, कॉर्पोरेट टैक्स, विरासत में मिली संपत्ति पर टैक्स इसी कैटेगरी में आते हैं. इनडायरेक्ट टैक्स सीधे-सीधे तो आम आदमी से नहीं लिया जाता लेकिन किसी न किसी तरह से ये आम आदमी को ही देना होता है. मिसाल के तौर पर एक्साइज टैक्स, जीएसटी, कस्टम टैक्स. ये टैक्स सीधे तो नहीं जाता है लेकिन किसी तरह की सर्विस या खरीदी पर ये टैक्स देना होता है.
 


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