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रत्न एवं आभूषण निर्यात को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य, 2040 के लिए तैयार हुआ बड़ा रोडमैप

पीयूष गोयल की देखरेख में बना थिंक टैंक, उत्पादन दोगुना कर सेक्टर की इकोनॉमिक वैल्यू ₹60 लाख करोड़ तक ले जाने की तैयारी

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago

भारत के रत्न एवं आभूषण उद्योग को वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाई देने की तैयारी शुरू हो गई है. सरकार ने 2040 तक इस सेक्टर का निर्यात बढ़ाकर 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है. इसके लिए वाणिज्य विभाग और जेम्स एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (GJEPC) की उच्च स्तरीय बैठक में एक विशेष थिंक टैंक गठित करने का फैसला किया गया है, जो उत्पादन क्षमता बढ़ाने, नए बाजारों तक पहुंच बनाने और भारतीय ज्वेलरी को ग्लोबल ब्रांड के रूप में स्थापित करने की रणनीति तैयार करेगा.

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की देखरेख में तैयार इस रोडमैप के तहत अगले कुछ वर्षों में उत्पादन को दोगुना कर करीब ₹15 लाख करोड़ तक पहुंचाने और पूरे सेक्टर की आर्थिक वैल्यू को करीब ₹60 लाख करोड़ तक ले जाने की योजना है.

28 अरब डॉलर से 100 अरब डॉलर तक पहुंचने का लक्ष्य

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रत्न एवं आभूषण निर्यात करीब 28 अरब डॉलर रहा. अब सरकार और उद्योग मिलकर इसे 2040 तक 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने की दिशा में काम करेंगे. अनुमान है कि तब तक यह सेक्टर भारत की GDP में करीब 1.2 फीसदी और देश के कुल व्यापारिक निर्यात में 14 फीसदी का योगदान दे सकता है. बैठक में भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता मजबूत करने, वैश्विक बाजारों तक पहुंच बढ़ाने और 'Crafted in India' ज्वेलरी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने पर विशेष जोर दिया गया.

कारीगरों की ताकत पर टिका है भारत का ज्वेलरी सेक्टर

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत सोने, चांदी या हीरे की खदानें नहीं, बल्कि देश के कुशल कारीगर हैं. उन्होंने कहा कि अब उद्योग को केवल बेसिक मैन्युफैक्चरिंग तक सीमित रहने के बजाय डिजाइन, इनोवेशन और ग्लोबल ब्रांडिंग के जरिए ज्यादा वैल्यू-एडेड उत्पादों पर ध्यान देना होगा.

सरकार का जोर कम मार्जिन वाले पारंपरिक कारोबार से आगे बढ़कर डिजाइन और तकनीक आधारित ज्वेलरी मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने पर है. इसके लिए शैक्षणिक संस्थानों और उद्योग के बीच सहयोग बढ़ाने तथा एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट सेंटर्स के माध्यम से नए टैलेंट को तैयार करने की भी योजना है.

AI और 3D प्रिंटिंग से मजबूत होगी सप्लाई चेन

'विकसित भारत 2047' के विजन के तहत रत्न एवं आभूषण उद्योग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और 3D प्रिंटिंग जैसी आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाएगा. इन तकनीकों के जरिए डिजाइन, उत्पादन और सप्लाई चेन को अधिक मजबूत और प्रतिस्पर्धी बनाने की तैयारी है.

डीजीएफटी महानिदेशक लव अग्रवाल ने कहा कि भारत पहले ही वैश्विक जेम्स और ज्वेलरी कारोबार में मजबूत स्थिति बना चुका है. अब देश को वैल्यू चेन में आगे बढ़ते हुए उच्च मूल्य वाले उत्पादों और वैश्विक ब्रांड निर्माण पर फोकस करना होगा.

FTA और नीतिगत समर्थन से मिलेगी रफ्तार

GJEPC के चेयरमैन किरीट भंसाली के मुताबिक, जेम्स और ज्वेलरी उद्योग इस समय एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है. नए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTA), स्पेशल नोटिफाइड जोन के जरिए रफ डायमंड की बिक्री पर 15 साल की टैक्स छूट और MSME सेक्टर को मिल रहे समर्थन ने उद्योग की वृद्धि के लिए मजबूत आधार तैयार किया है. सरकार और उद्योग जगत का मानना है कि इन नीतिगत पहलों से भारतीय ज्वेलरी की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और नए बाजारों में निर्यात का विस्तार करने में मदद मिलेगी.

अप्रैल-जुलाई में निर्यात में 2.44% की बढ़ोतरी

GJEPC के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-जुलाई की अवधि में भारत का रत्न एवं आभूषण निर्यात 2.44 फीसदी बढ़कर 9.17 अरब डॉलर हो गया. रुपये के लिहाज से निर्यात 13.58 फीसदी बढ़कर ₹87,078.01 करोड़ पहुंच गया.

इस दौरान जड़ाऊ आभूषणों की बिक्री में करीब 21 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई. किरीट भंसाली ने कहा कि चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद वैल्यू-एडेड सेगमेंट, खासकर जड़ाऊ आभूषण, सिल्वर ज्वेलरी और प्लेटिनम ज्वेलरी में भारतीय निर्यातकों का प्रदर्शन मजबूत रहा है.
 


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