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चाबहार पर अमेरिका से बातचीत तेज, प्रतिबंध छूट बनाए रखने की कोशिश में भारत

चाबहार न सिर्फ भारत की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी का अहम जरिया है, बल्कि मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक पहुंच के लिए भी रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 8 months ago

भारत ईरान के चाबहार बंदरगाह को अमेरिकी प्रतिबंधों से छूट दिलाने के मुद्दे पर अमेरिका के साथ लगातार बातचीत कर रहा है. विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इस रणनीतिक रूप से अहम बंदरगाह की दीर्घकालिक व्यवहार्यता को लेकर भारत अमेरिका के संपर्क में है. यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का ऐलान किया है.

अमेरिका की सशर्त छूट पर भारत की नजर

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि अमेरिका के वित्त मंत्रालय ने 28 अक्टूबर 2025 को एक पत्र जारी कर चाबहार बंदरगाह के लिए 26 अप्रैल 2026 तक वैध सशर्त प्रतिबंध छूट पर मार्गदर्शन दिया था. उन्होंने कहा कि भारत इस व्यवस्था को अंतिम रूप देने के लिए अमेरिकी पक्ष के साथ काम कर रहा है.

ट्रंप के टैरिफ ऐलान से बढ़ी चिंता

चाबहार को लेकर यह चर्चा ऐसे समय में तेज हुई है, जब राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर सख्त चेतावनी दी है. इस सप्ताह एक सोशल मीडिया पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ व्यापार करने वाले किसी भी देश को अमेरिका के साथ होने वाले सभी व्यापार पर 25 फीसदी टैरिफ देना होगा. इस बयान के बाद चाबहार बंदरगाह में भारत की भागीदारी को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है.

37 करोड़ डॉलर निवेश के साथ भारत की अहम मौजूदगी

साल 2024 में भारत ने चाबहार बंदरगाह के शहीद बेहेश्ती टर्मिनल के संचालन के लिए ईरान के साथ एक दीर्घकालिक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. इस समझौते के तहत भारत ने 37 करोड़ डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई थी. इस कदम को भारत की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और मध्य एशिया तक पहुंच की रणनीति के लिहाज से बेहद अहम माना गया था.

अमेरिकी कदमों से भारत को झटका

हालांकि, ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बढ़ते तनाव और व्यापार समझौते पर गतिरोध के बीच अमेरिका ने पिछले साल भारत की रणनीतिक योजनाओं को झटका दिया था. सितंबर 2025 में अमेरिका के विदेश मंत्री ने 2018 में दी गई उस छूट को रद्द कर दिया था, जो अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए ईरान फ्रीडम एंड काउंटर प्रोलिफरेशन एक्ट (IFCA) के तहत दी गई थी. इसके बाद चाबहार से जुड़ी गतिविधियों पर प्रतिबंध का खतरा बढ़ गया.

भारत के लिए क्यों अहम है चाबहार

भारत चाबहार बंदरगाह को रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानता है. यह बंदरगाह पाकिस्तान और चीन के निवेश वाले ग्वादर बंदरगाह के करीब स्थित है और भारत को पाकिस्तान को बायपास करते हुए अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक सीधी पहुंच देता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सितंबर 2025 में एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान चाबहार के महत्व पर जोर दे चुके हैं.

विशेषज्ञों की राय, सतर्क रुख जरूरी

विशेषज्ञों का मानना है कि चाबहार का भविष्य काफी हद तक ईरान में हो रहे घटनाक्रम और अमेरिका-ईरान संबंधों पर निर्भर करता है. ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के उपाध्यक्ष हर्ष पंत का कहना है कि मौजूदा हालात में भारत को सतर्क रहकर स्थिति पर नजर बनाए रखनी होगी. उन्होंने कहा कि फिलहाल भारत के लिए बहुत आक्रामक कदम उठाने की गुंजाइश सीमित है.

व्यापार से ज्यादा रणनीति अहम

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल चाबहार से व्यापार की मात्रा सीमित है, इसलिए तात्कालिक व्यावसायिक प्रभाव भारत की प्राथमिक चिंता नहीं है. हालांकि, मध्य एशियाई देशों के साथ निर्बाध कनेक्टिविटी और भविष्य की रणनीतिक संभावनाएं बंदरगाह के स्थिर संचालन पर निर्भर करती हैं. इसी वजह से भारत इस मुद्दे पर अमेरिका के साथ बातचीत को बेहद अहम मान रहा है.


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