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IDFC First Bank में 590 करोड़ की संदिग्ध गड़बड़ी, सरकारी खातों में हेरफेर से हलचल
मामले के सामने आने के बाद हरियाणा सरकार ने कड़ा कदम उठाते हुए IDFC First Bank और AU Small Finance Bank को सरकारी लेनदेन के पैनल से बाहर कर दिया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago
निजी क्षेत्र के प्रमुख बैंक IDFC First Bank की चंडीगढ़ शाखा में लगभग 590 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आने के बाद बैंकिंग जगत और सरकारी तंत्र में हलचल मच गई है. यह मामला हरियाणा सरकार से जुड़े खातों में अनधिकृत लेनदेन और कथित हेरफेर से जुड़ा है. बैंक ने तत्काल कार्रवाई करते हुए चार कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है और मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है.
खाता बंद करने के अनुरोध से खुली गड़बड़ी
पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब हरियाणा सरकार के एक विभाग ने बैंक में अपना खाता बंद कर शेष राशि दूसरे बैंक में ट्रांसफर करने का अनुरोध किया. विभाग द्वारा बताई गई राशि और बैंक खाते में उपलब्ध शेष धनराशि में बड़ा अंतर पाया गया. इसी विसंगति ने संभावित गड़बड़ी की ओर इशारा किया. इसके बाद 18 फरवरी से राज्य की अन्य सरकारी संस्थाओं ने भी अपने खातों का मिलान शुरू किया, जहां रिकॉर्ड में दर्ज रकम और वास्तविक दावों के बीच अंतर सामने आया.
शुरुआती जांच में कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध
बैंक ने एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि प्रारंभिक आंतरिक जांच में चंडीगढ़ की एक शाखा में कुछ कर्मचारियों द्वारा ‘अनधिकृत और धोखाधड़ी वाली गतिविधियों’ की पहचान हुई है. आशंका जताई गई है कि इसमें बाहरी व्यक्तियों या संस्थाओं की मिलीभगत भी हो सकती है. हालांकि बैंक ने स्पष्ट किया है कि अन्य ग्राहकों के खातों में किसी प्रकार की गड़बड़ी नहीं पाई गई है.
590 करोड़ रुपये दांव पर, फॉरेंसिक ऑडिट शुरू
बैंक के अनुसार, संबंधित खातों में समाधान के दायरे में कुल राशि लगभग 590 करोड़ रुपये है. अंतिम वित्तीय प्रभाव दावों की पुष्टि, संभावित रिकवरी और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा. बैंक ने एक स्वतंत्र बाहरी एजेंसी से फॉरेंसिक ऑडिट कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और नियामकों व वैधानिक लेखा परीक्षकों को मामले की सूचना दे दी गई है. साथ ही कुछ लाभार्थी बैंकों से धन वापसी का अनुरोध भी किया गया है.
चार कर्मचारी निलंबित, कानूनी कार्रवाई की तैयारी
जांच के दायरे में आए चार कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है. बैंक ने कहा है कि दोषी पाए जाने पर संबंधित कर्मचारियों और बाहरी व्यक्तियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक, सिविल और आपराधिक कार्रवाई की जाएगी.
मामले की निगरानी के लिए गठित विशेष समिति ने 20 फरवरी को बैठक की, जिसके बाद इसे ऑडिट समिति और 21 फरवरी को निदेशक मंडल के समक्ष प्रस्तुत किया गया. बैंक ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है और अन्य प्रवर्तन एजेंसियों से भी संपर्क की प्रक्रिया में है.
हरियाणा सरकार की सख्ती, पैनल से हटाए गए बैंक
मामले के सामने आने के बाद हरियाणा सरकार ने कड़ा कदम उठाते हुए IDFC First Bank और AU Small Finance Bank को सरकारी लेनदेन के पैनल से बाहर कर दिया है. 18 फरवरी की अधिसूचना के अनुसार, अब इन बैंकों के माध्यम से कोई सरकारी फंड, जमा, निवेश या लेनदेन नहीं किया जाएगा.
नई व्यवस्था के तहत प्रशासनिक सचिव केवल राष्ट्रीयकृत बैंकों में सरकारी खातों को मंजूरी दे सकेंगे. निजी बैंकों में खाता खोलने के लिए पूर्व अनुमति आवश्यक होगी.
वित्तीय असर और बाजार की प्रतिक्रिया
ध्यान देने वाली बात यह है कि कथित धोखाधड़ी की राशि बैंक के वित्त वर्ष 2025-26 की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के लगभग 503 करोड़ रुपये के शुद्ध लाभ से अधिक है. ऐसे में यह मामला बैंक की बैलेंस शीट पर दबाव डाल सकता है, हालांकि अंतिम प्रभाव जांच और रिकवरी पर निर्भर करेगा.
शुक्रवार को बैंक का शेयर 83.56 रुपये पर बंद हुआ, जो पिछले बंद स्तर से 0.72 प्रतिशत अधिक था. आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर जांच की प्रगति और संभावित वित्तीय प्रभाव पर रहेगी.
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