होम / बिजनेस / इस ब्रैंड ने रचा इतिहास, 1 बिलियन डॉलर सेल्स के आंकड़े को पार करने वाला इकलौता Brand बना
इस ब्रैंड ने रचा इतिहास, 1 बिलियन डॉलर सेल्स के आंकड़े को पार करने वाला इकलौता Brand बना
सर्फ एक्सल, 1 बिलियन डॉलर्स की सेल्स को पार करने वाला इकलौता भारतीय ब्रांड बन गया है साथ ही इसकी सेल्स में भी 32% की वृद्धि दर्ज की गयी है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
हिन्दुस्तान यूनिलीवर के प्रोडक्ट सर्फ एक्सल ने एक नया इतहास रच दिया है. सर्फ एक्सल, साल 2022 में 1 बिलियन डॉलर या कहें 8200 करोड़ रुपये की सेल्स क्रॉस करने वाला पहला भारतीय ब्रांड बन गया है. साथ ही ऐसा करने वाला यह हिंदुस्तान यूनिलीवर का भी इकलौता प्रोडक्ट है. हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड में होम केयर के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर दीपक सुब्रमण्यम ने कहा कि इस सेगमेंट में लिक्विड डिटर्जेंट और फैब्रिक कंडीशनर की लॉन्चिंग के द्वारा इस सेगमेंट को प्रीमियम बनाना ही इस उपलब्धि के पीछे की वजह है. ब्रांड के लिए एक और खुशखबरी यह है कि इन्फ्लेशन के बावजूद इसके 10 रुपये की कीमत वाले पैकेट की वजह से इसकी सेल्स में 32% की वृद्धि दर्ज की गयी है.
कुछ ऐसा रहा है इतिहास
1959 में भारत के अन्दर हिन्दुस्तान लीवर लिमिटेड के द्वारा इस ब्रांड को ‘सर्फ’ के नाम से लॉन्च किया गया था. इसे कपड़े धोने वाले साबुन के विकल्प के रूप में पेश किया गया था. सालों की यात्रा के दौरान ब्रांड ने खुदको एक पाउडर से धीरे धीरे वाशिंग लिक्विड के रूप में बदल लिया है. जल्द ही ‘सर्फ’ को भारत में अन्य डिटर्जेंट पाउडर्स के साथ जगह मिल गयी और 1969 में निरमा के आने से पहले तक इसने मार्केट पर राज भी किया. वैल्यू-फॉर-मनी ब्रांड निरमा से मिले जबरदस्त कॉम्पिटिशन की बराबरी करने के लिए सर्फ ने ‘ललिताजी’ कैंपेन चलाया जिसमें कीमत से ज्यादा क्वालिटी पर जोर दिया गया था. ललिताजी एक भारतीय हाउसवाइफ करैक्टर था जो लगातार सावधानी से भरे आर्थिक फैसले लेती है और सस्ती नहीं बल्कि अच्छी चीज़ को ही चुनती है.
कैसे सर्फ बना सर्फ एक्सल?
1992 में प्रोक्टर & गैम्बल (P&G) के प्रोडक्ट एरियल से टक्कर लेने के लिए सर्फ ने सर्फ एक्सेल का रूप धारण किया. ललिताजी धीरे धीरे मार्केट में बेकार होने लगीं और लोगों ने ठान लिया कि वह कपड़े से दागों को हटाने के लिए प्रीमियम कीमत भी दे सकते हैं. बाद में ब्रांड को सर्फ एक्सल ब्लू और सर्फ एक्सल एक्स्ल-मेटिक जैसे प्रोडक्ट्स में भी बांटा गया. साल 2004 में हिंदुस्तान लीवर लिमिटेड और P&G के बीच कीमतों के युद्ध से एरियल और टाइड की कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिली. साल 2006 में दाग अच्छे हैं कैंपेन चला जो एक समय का सबसे लाभकारी और जबरदस्त ब्रांड कैंपेन साबित हुआ.
यह भी पढ़ें: अंतर्राष्ट्रीय मीडिया कंपनी पर इनकम टैक्स की कार्रवाई से हुए बड़े खुलासे
टैग्स